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Budget Trip for Students: जेब में पैसे कम हैं? ये 7 जगह कॉलेज छात्रों के लिए बेस्ट हैं

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कॉलेज लाइफ में पढ़ाई, असाइनमेंट और करियर की टेंशन के बीच अगर किसी चीज़ से सच में सुकून मिलता है, तो वो है एक छोटा-सा ट्रिप प्लान। पर घूमने के लिए हमेशा महंगे होटल, फ्लाइट या बड़ा बजट होना ज़रूरी नहीं। Five Colors of Travel के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि कम पैसों में कैसे एक अच्छी सी ट्रिप प्लान की जा सकती है और घूमने का ज़्यादा मज़ा लिया जा सकता है, लोकल कल्चर को करीब से कैसे महसूस किया जा सकता है और ऐसी यादें कैसे बनाई जा सकती हैं जो लंबे समय तक साथ रहें। (Budget Trip for Students) अगर आप कॉलेज स्टूडेंट हैं और हॉस्टल की छुट्टियों या एग्ज़ाम के बाद ब्रेक में कहीं घूमने का मन बना रहे हैं, तो ये 7 बजट-फ्रेंडली जगहें आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं। यकीन मानिए, 5–6 हजार के बजट में भी एक यादगार सफर आसानी से किया जा सकता है। ऋषिकेश, उत्तराखंड जहां सुकून भी मिलता है और एडवेंचर का मज़ा भी गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए एकदम परफेक्ट जगह है। यहां वो लोग भी खुश रहेंगे जिन्हें शांति चाहिए और वो भी जिन्हें थोड़ा रोमांच पसंद है। सुबह गंगा के किनारे बैठकर सुकून महसूस किया जा सकता है और दिन में रिवर राफ्टिंग करके एडवेंचर का पूरा मज़ा लिया जा सकता है। ऋषिकेश में छोटे-छोटे कैफे हैं, जहां दोस्तों के साथ बैठकर टाइम पास करना अच्छा लगता है, और साथ ही कई आश्रम भी हैं जहां जाकर मन को शांति मिलती है। सबसे अच्छी बात ये है कि यहां घूमना ज्यादा महंगा नहीं पड़ता। अगर सही प्लानिंग की जाए तो ₹4,000 से ₹6,000 के बजट में आराम से एक यादगार ट्रिप की जा सकती है। मैकलॉडगंज, हिमाचल प्रदेश पहाड़, तिब्बती संस्कृति और सुकून का पूरा पैकेजअगर आपका मन पहाड़ों में कुछ दिन शांति से बिताने का है, तो मैकलॉडगंज आपके लिए एकदम सही जगह है। यहां की ठंडी हवा, हरियाली और पहाड़ों का नज़ारा अपने आप ही मन को हल्का कर देता है। मैकलॉडगंज तिब्बती संस्कृति के लिए जाना जाता है, जहां मठ, रंग-बिरंगे झंडे और लोकल फूड एक अलग ही एहसास देते हैं। यहां सस्ते होमस्टे और गेस्ट हाउस आसानी से मिल जाते हैं, जो स्टूडेंट्स के बजट में फिट बैठते हैं। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए भी यहां कई आसान और खूबसूरत ट्रेल्स हैं। सही प्लानिंग के साथ करीब ₹5,000 के बजट में आप यहां एक आरामदायक और यादगार ट्रिप कर सकते हैं। गोकर्ण, कर्नाटक अगर आप बीच, समंदर और कैफे लाइफ का मज़ा लेना चाहते हैं, लेकिन गोवा की भीड़ और खर्च से बचना चाहते हैं, तो गोकर्ण एक बढ़िया ऑप्शन है। ये जगह खास तौर पर उन स्टूडेंट्स के लिए है जो शांति पसंद करते हैं और आराम से घूमना चाहते हैं। यहां के समुद्र तट साफ-सुथरे और शांत हैं, जहां घंटों बैठकर बस लहरों की आवाज़ सुनी जा सकती है। छोटे-छोटे कैफे में सस्ता और स्वादिष्ट खाना मिल जाता है, जहां दोस्तों के साथ बैठकर अच्छा टाइम पास हो जाता है। गोकर्ण का स्लो ट्रैवल वाइब दिमाग को पूरी तरह रीफ्रेश कर देता है। सही प्लानिंग के साथ ₹6,000 से ₹7,000 के बजट में यहां एक शानदार और यादगार ट्रिप की जा सकती है। जयपुर, राजस्थान जयपुर, जिसे पिंक सिटी कहा जाता है, स्टूडेंट्स के लिए एक शानदार और बजट-फ्रेंडली ट्रैवल डेस्टिनेशन है। यहां ट्रेन से आसानी से पहुंचा जा सकता है, जिससे सफर का खर्च भी कम हो जाता है। जयपुर में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक किले और महल हैं, जहां जाकर राजस्थान के इतिहास और शाही अंदाज़ को करीब से देखा जा सकता है। इसके अलावा यहां के लोकल बाजार रंग-बिरंगे और काफी सस्ते हैं, जहां शॉपिंग करना भी मज़ेदार लगता है। जयपुर का स्ट्रीट फूड तो अलग ही लेवल का है—कचौरी, समोसा, लस्सी और मिठाइयों का स्वाद लंबे समय तक याद रहता है। सही प्लानिंग के साथ ₹4,000 से ₹5,000 के बजट में यहां आराम से घूमकर एक यादगार ट्रिप की जा सकती है। पंचगनी, महाराष्ट्र अगर दोस्तों के साथ भीड़-भाड़ से दूर जाकर कुछ दिन आराम से बिताने का मन है, तो पंचगनी एक बढ़िया ऑप्शन है। यहां चारों तरफ हरियाली, पहाड़ों का खूबसूरत नज़ारा और ठंडी-ठंडी हवा मिलती है, जो शहर की भागदौड़ से दूर ले जाकर मन को तरोताज़ा कर देती है। पंचगनी में घूमने की रफ्तार अपने आप धीमी हो जाती है—सुबह की सैर, व्यू पॉइंट्स पर बैठकर बातें करना और शाम को दोस्तों के साथ टाइम पास करना अपने आप में मज़ा देता है। यहां सस्ते होटल और होमस्टे भी मिल जाते हैं, जो स्टूडेंट्स के बजट में फिट बैठते हैं। थोड़ी सी सही प्लानिंग के साथ ₹5,000 से ₹6,000 के बजट में पंचगनी का एक शांत और यादगार ट्रिप आसानी से किया जा सकता है। वाराणसी, उत्तर प्रदेश वाराणसी सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं, बल्कि एक अलग ही एहसास है। यहां आते ही गंगा घाटों की शांति, आरती की आवाज़ और पुरानी गलियों की रौनक दिल को छू जाती है। सुबह-सुबह घाटों पर टहलना हो या शाम को गंगा आरती देखना, हर पल कुछ खास महसूस होता है। वाराणसी की तंग गलियों में घूमते हुए लोकल लाइफ को करीब से देखने का मौका मिलता है और यहां का सादा लेकिन स्वादिष्ट खाना भी खूब पसंद आता है। सबसे अच्छी बात ये है कि इतना गहरा और यादगार अनुभव होने के बावजूद यहां घूमना ज्यादा महंगा नहीं पड़ता। सही प्लानिंग के साथ ₹3,500 से ₹5,000 के बजट में वाराणसी की एक सुकून भरी और यादगार यात्रा आराम से की जा सकती है। पुष्कर, राजस्थान पुष्कर अपनी शांत झील, खूबसूरत रूफटॉप कैफे और खुले-खुले, बेफिक्र माहौल के लिए जाना जाता है। ये जगह खास तौर पर उन स्टूडेंट्स को पसंद आती है जिन्हें बैकपैकिंग और नए लोगों से मिलना अच्छा लगता है। सुबह झील के किनारे टहलना, दिन में गलियों में घूमना और शाम को किसी कैफे में बैठकर बातें करना-यहां सब कुछ बहुत सुकून भरा लगता है। पुष्कर का माहौल काफी फ्रेंडली और आरामदायक है, जहां बिना किसी जल्दबाज़ी के समय बिताया जा सकता है। यहां सस्ते गेस्टहाउस और होस्टल आसानी से मिल

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Digital Nomad – भारत क्यों है आपका अगला डिजिटल नोमैड केंद्र?

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रिमोट जॉब्स और ऑनलाइन वर्क के बढ़ते चलन की वजह से अब धरती पर कोई भी Wi-Fi वाला स्थान आपका ऑफिस बन सकता है। इसी सोच ने डिजिटल नोमैड की अवधारणा को जन्म दिया। यानी ऐसा व्यक्ति जो घूमते-फिरते अलग-अलग जगहों से काम करता है। भारत डिजिटल नोमैड्स के लिए तेज़ी से एक बड़ा केंद्र बन रहा है, क्योंकि भारत में इंटरनेट दुनिया के सबसे सस्ते इंटरनेट में से एक है। (Digital Nomad) लगभग 30 GB डेटा सिर्फ ₹167 में और 300 GB ब्रॉडबैंड भी ₹800–₹900 में मिल जाता है। और साथ ही भारत में और कंट्री की अपेक्षा यहां रहने खाने और ट्रैवल का खर्च भी कम आता है। भारत की सबसे खास बात इसकी विविधता है आप काम करते हुए हिमालय की चोटियाँ, खूबसूरत समुद्र तट, ऐतिहासिक किले, नदियाँ और अनगिनत सांस्कृतिक अनुभव देख सकते हैं। व्यक्तिगत अनुभव बताता है कि भारत में डिजिटल नोमैड्स के लिए एक मजबूत और मददगार समुदाय भी मिलता है, खासकर ऋषिकेश और धर्मकोट जैसे स्थानों पर। ऋषिकेश, उत्तराखंड क्या आपको पता है ऋषिकेश को दुनिया की योग राजधानी कहा जाता है। वो इस लिए क्योंकि यह जगह हिमालय की गोद में, गंगा नदी के किनारे स्थित है। और यहाँ का माहौल आध्यात्मिक और बेहद पॉज़िटिव ऊर्जा से भरा होता है। साथ ही ऋषिकेश में आपको सबसे ज़्यादा योग स्कूल, मेडिटेशन सेंटर और इससे जुड़ी गतिविधियाँ मिलेंगी। यहाँ कई खूबसूरत कैफ़े भी हैं जहाँ बैठकर काम करना आसान है गंगा का नज़ारा हो या पहाड़ों का, दोनों ही माहौल बहुत शांत और प्रेरणा देने वाला होता है। यहाँ शॉर्ट-टर्म रहने के लिए अच्छे और किफायती ऑप्शन मिल जाते हैं। एक सामान्य स्टूडियो का मासिक किराया लगभग $150 से $200 (लगभग ₹12,500 से ₹16,600) तक हो सकता है। साथ ही इंटरनेट की स्पीड अच्छी मिलती है और ज़्यादातर जगह पैदल दूरी पर होती हैं, इसलिए घूमना भी आसान है। और सबसे अच्छी बात की देहरादून एयरपोर्ट सिर्फ लगभग 1 घंटे की ड्राइव पर है। आसपास कई ट्रैकिंग स्पॉट भी हैं। ऋषिकेश में शाकाहारी भोजन आसानी से मिल जाता है और यहाँ का माहौल शराब-मुक्त और शांतिपूर्ण होता है काम और मन को संतुलित रखने के लिए एकदम सही। धर्मकोट/भग्गु, हिमाचल प्रदेश धर्मशाला और मैकलियोडगंज के ऊपर स्थित यह छोटा सा पहाड़ी गाँव आजकल डिजिटल नोमैड्स, इज़राइली यात्रियों और तिब्बती संस्कृति का मेलजोल बन चुका है। यहाँ का माहौल काफी कूल और ओपन है। यहां कैफ़े, योग स्टूडियो और क्राफ्ट एंड स्किल्ड बेस्ड वर्कशॉप आसानी से मिल जाते हैं, जो खासकर सिल्वर ज्वेलरी बनाने के लिए प्रसिद्ध है, साथी लोग इन वर्कशॉप्स में संगीत और आर्ट जैसी गतिविधियाँ सीखते हैं। यहाँ रहने के लिए स्टूडियो अपार्टमेंट मिल जाते हैं, जिनका मासिक किराया लगभग $200–$300 (लगभग ₹16,600–₹25,000) तक होता है। यहां का इंटरनेट अच्छा है साथ ही ये जगह काम करने के लिए शानदार हैं। हालाँकि, एक चुनौती यह है कि धर्मकोट पहाड़ी ढलानों में बसा है, इसलिए यहाँ पैदल चलना पड़ता है तो उन लोगों के लिए मुश्किल हो सकती है जिन्हें ज़्यादा चलने की आदत नहीं है। मौसम भी थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर मॉनसून और सर्दियों में, लेकिन अगर आपको प्रकृति, पहाड़ों और शांत वातावरण में काम करना पसंद है, तो धर्मकोट आपके लिए एक शानदार जगह है। गोवा गोवा भारत में डिजिटल नोमैड और रिमोट वर्क कल्चर का बड़ा हब बन चुका है। यहाँ शराब और नॉन-वेज खुलेआम बिकता है, और समुद्र के किनारे बैठकर काम करना और बीच लाइफ का आनंद लेना लोगों को बहुत पसंद आता है। गोवा में तीन मुख्य एरिया डिजिटल नोमैड्स और यात्रियों में काफी फेमस हैं आरम्बोल, सियोलिम और पालोलेम यह यहां के तीन बेस्ट डेस्टिनेशन में से एक है जहां आप बीच के किनारे बैठकर समुद्र की लहरों का मजा ले सकते हैं और यहां आपको शांत और आराम भी माहौल मिलेगा। यहाँ फाइबर इंटरनेट अच्छी स्पीड के साथ उपलब्ध है और बहुत से कोवर्किंग स्पेस भी हैं, जैसे अंजुना, पणजी और कई कैफ़े जहाँ आराम से काम किया जा सकता है। चुनौतियों की बात करें, तो मानसून के दौरान बिजली कटौती आम है, लेकिन ज़्यादातर कोवर्किंग स्पेस में बैकअप होता है। कभी-कभी इंटरनेट 10–15 मिनट के लिए स्लो भी हो सकता है। समुद्र के पास एक रूम का घर अक्टूबर से मार्च में लगभग ₹41,500 प्रति माह तक पड़ सकता है, जबकि अंदर की ओर सस्ते विकल्प ₹25,000–₹30,000 प्रति माह से मिल जाते हैं। गोवा में अंग्रेज़ी काफी बोली जाती है, इसलिए कोई नई भाषा सीखने की ज़रूरत नहीं पड़ती। घूमने के लिए मोटरसाइकिल या स्कूटर किराए पर लेना सबसे अच्छा है, जिसकी लागत लगभग ₹250–₹350 प्रति दिन होती है। अगर आपको काम और छुट्टियों का मिश्रण पसंद है, तो गोवा डिजिटल नोमैड लाइफस्टाइल के लिए एक बेहतरीन जगह है। भारत में डिजिटल नोमैड वीज़ा की स्थिति (ग्रे एरिया)- Digital Nomad फिलहाल भारत में डिजिटल नोमैड्स के लिए कोई स्पेशल डिजिटल नोमैड वीज़ा उपलब्ध नहीं है। इसलिए यहाँ आने वाले डिजिटल नोमैड्स ज़्यादातर मल्टीपल-एंट्री टूरिस्ट इ-वीज़ा लेते हैं। यह वीज़ा लगभग $43 (1 साल के लिए) और $83 (5 साल के लिए) में मिल सकता है फ़ीस देश के अनुसार बदल सकती है। इस वीज़ा पर एक बार में आप 90 दिन तक भारत में रह सकते हैं। 90 दिन पूरे होने पर आपको देश से बाहर जाना होगा, और फिर दोबारा एंट्री लेनी होगी। एक कैलेंडर वर्ष में कुल मिलाकर 180 दिन तक भारत में रहने की अनुमति है। ध्यान देने योग्य बातें टूरिस्ट वीज़ा पर भारत में काम करना नियमों के खिलाफ माना जाता है। अगर आप किसी विदेशी कंपनी या विदेशी क्लाइंट के लिए ऑनलाइन काम करते हैं, और आपकी कमाई भारत के बाहर आती है, तो आम तौर पर यह स्वीकार्य माना जाता है। लेकिन अगर आप टूरिस्ट वीज़ा पर भारत में स्थानीय नौकरी करते हैं, भारत में रजिस्टर्ड किसी कंपनी के लिए काम करते हैं, या यहाँ कोई बिज़नेस सेटअप करते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। इसलिए, भारत में डिजिटल नोमैड लाइफ़ का अनुभव लेना संभव है बस ध्यान रहे कि टूरिस्ट वीज़ा केवल घूमने और विदेश से रिमोट वर्क के लिए है, न कि भारत में नौकरी या बिज़नेस करने के

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Eco Tourism क्या है इको-टूरिज़्म? होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन!

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अगर आप शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और शोर से परेशान हो चुके हैं और आपका मन शहर से दूर कहीं शांत, हरी-भरी जगह पर जाने का करता है जहां आपको शहर के अशांत माहौल के मुकाबले थोड़ा सुकून मिल सके। तो इको-टूरिज़्म आपके लिए बिल्कुल सही चीज़ है। इको-टूरिज़्म का मतलब सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि उन जगहों पर जाना है जहाँ आप एनवायरनमेंट को बिना नुकसान पहुँचाए मज़ा लेते हैं और साथ ही गाँव के लोगों की रोज़ी-रोटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। यह ऐसा तरीका है जिससे नेचर भी बची रहती है और गाँव वाले भी कमाई कर लेते हैं जिससे दोनों का फायदा होता है। Eco Tourism गाँव की संस्कृति- Eco Tourism इको-टूरिज़्म का सीधा सा मतलब है नेचर के बीच घूमना, पर इस यात्रा के दौरान कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है जैसे जंगल, पहाड़, झरने या किसी भी गाँव में जाएँ तो वहाँ गंदगी न करें, कचरा इधर-उधर न फेंकें, पानी-बिजली बेवजह खराब न करें और जो भी स्थानीय नियम हों, उन्हें मानें। इसके साथ गाँव वालों की संस्कृति, उनका खाना-पीना, पहनावा और रीति-रिवाज़ को भी सम्मान दें। ऐसी यात्राओं में न केवल आपको शहर के अशांत माहौल से छुटकारा मिलेगा बल्कि गांव वालों को भी रोजगार मिलेगा। साफ हवा, शांति, नेचर का मजा यही तो इन गांवों की खासियत होती है। गांव वालों होमस्टे चला कर, गाइड बनकर, लोकल खाना खिलाकर या अपने हाथ के बनाए सामान को बेचकर ये लोग अपनी कमाई करते है। इसलिए इको-टूरिज़्म नेचर को भी बचाता है और गाँव वालों की जेब भी मजबूत करता है। मतलब मज़ा भी पूरा और भलाई भी पूरी। उत्तराखंड का होमस्टे मॉडल: महिलाएँ बदल रहीं अपनी दुनिया उत्तराखंड का होमस्टे मॉडल सच में एक ऐसी कहानी है जहाँ गाँव की महिलाएँ अपनी ज़िंदगी खुद बदल रही हैं। मुनस्यारी के पास सरमोली गाँव में 2004 में मल्लिका विर्दी ने हिमालयन आर्क होमस्टे कार्यक्रम शुरू किया, और खास बात ये है कि पूरा होमस्टे सिस्टम गाँव की महिलाएँ ही संभालती हैं। यहाँ आने वाले मेहमान मडुआ की रोटी, पहाड़ी राजमा जैसे बिल्कुल देसी और स्वादिष्ट खाने का मज़ा लेते हैं, खेतों में मदद करते हैं और गाँव की असली ज़िंदगी को करीब से महसूस करते हैं। इस मॉडल से सरमोली की महिलाएँ साल में करीब 1.5 लाख रुपये तक कमा लेती हैं, जो उनके लिए बहुत बड़ी बात है और इससे उनकी पहचान और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी ‘दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना’ के ज़रिए पुराने पहाड़ी घरों को लकड़ी और पत्थर से बने सुंदर, पारंपरिक होमस्टे में बदलने में मदद की है। सरकार ट्रेनिंग, लोन और मार्केटिंग का पूरा सपोर्ट देती है, और आज लगभग 5,000 घर इस योजना से जुड़ चुके हैं। इससे गाँव में रोजगार बढ़ा है और लोग शहरों की ओर कम जा रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें अपने ही गाँव में अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है। इको-स्टे: नेचर के बीच एक ‘ग्रीन’ ठहराव Eco Tourism इको-स्टे असल में ऐसे ठहरने की जगह होती हैं, जहाँ आप नेचर के बीच आराम से रहते हैं और साथ ही पर्यावरण का ख्याल भी रखते है। यहाँ ज़्यादातर बिजली सोलर से आती है, बारिश का पानी इकट्ठा करके इस्तेमाल किया जाता है, और घर भी मिट्टी, लकड़ी या दूसरे इको-फ्रेंडली तरीक़े से बनाए जाते हैं। कचरा अलग करके कम्पोस्ट बनाया जाता है, पानी दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है मतलब हर काम सोच-समझकर किया जाता है। जैसे जिम कॉर्बेट के पास क्यारी गाँव में बने इको-स्टे बिल्कुल पुराने पहाड़ी घरों की तरह दिखते हैं। यहाँ रहने पर आप शांत माहौल का मज़ा लेते हैं, जंगल सफारी और एडवेंचर एक्टिविटी भी कर सकते हैं। कुल मिलाकर, ऐसा लगता है जैसे आप नेचर की गोद में आराम कर रहे हों। क्यारी गाँव की चुनौती: इको-टूरिज़्म और बाघों का संघर्ष क्यारी गाँव का इलाका अपनी खूबसूरती की वजह से और भी खास बन जाता है। क्योंकि जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व बिलकुल पास में होने से यहाँ का जंगल घना है, हवा बिल्कुल ताज़ा लगती है और वाइल्डलाइफ़ का असली मज़ा मिलता है। यहाँ बाघों की अच्छी-खासी संख्या मिलती है, जो ये दिखाता है कि जंगल कितना हेल्दी और समृद्ध है। इसी वजह से क्यारी और उसके आस-पास का इलाका नेचर और वाइल्डलाइफ़ पसंद करने वालों के लिए एकदम परफेक्ट जगह है। यहाँ कई बढ़िया इको-स्टे और रिसॉर्ट भी बने हुए हैं, जो जिम कॉर्बेट के नेचर वाइब से मैच करते हैं लकड़ी और पत्थर के कमरे, चारों तरफ हरियाली, पंछियों की आवाज़ें और पूरा शांत माहौल सब मिलकर स्टे का अनुभव और भी खास बना देते हैं। गाँव वाले इको-टूरिज़्म को पूरी तरह सपोर्ट करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें होमस्टे, लोकल गाइड, खेती और कारीगरी जैसे कामों में अच्छी कमाई मिलती है। लोग चाहते हैं कि इको-टूरिज़्म बढ़े, लेकिन ऐसे कि जंगल भी सुरक्षित रहे और गाँव वालों की खुशी और रोज़गार भी बना रहें। राष्ट्रीय रणनीति: ग्रामीण होमस्टे को बढ़ावा भारत सरकार भी अब ग्रामीण इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने में लगी है। कोशिश ये है कि गाँवों में बने होमस्टे भी पर्यटन का बड़ा हिस्सा बनें और वहाँ के लोगों को अच्छा रोज़गार मिले। सरकार चाहती है कि होमस्टे चलाने वालों को बिजली-पानी की वही दरें मिलें जो सामान्य घरों को मिलती हैं, ताकि उनका खर्च कम हो सके। NIDHI पोर्टल के ज़रिए हर होमस्टे की एक डिजिटल पहचान बनाई जा रही है, जिससे ऑनलाइन बुकिंग भी आसान हो जाएगी। आखिर में बात यही है कि इको-टूरिज़्म तभी सफल है जब तीनों चीज़ें एक साथ खुश रहें प्रकृति सुरक्षित रहे, गाँव वालों की कमाई और रोजगार बढ़े और पर्यटकों को अच्छा अनुभव मिले। क्यारी गाँव जैसी जगहें यही दिखाती हैं कि इको-टूरिज़्म सिर्फ कमाई का ज़रिया नहीं, बल्कि एक संतुलन है जहाँ नेचर, लोग और टूरिज़्म तीनों को बराबर महत्व दिया जाता है। अगर ये बैलेंस बना रहे, तो ग्रामीण भारत में इको-टूरिज़्म सच में कमाल कर सकता है।

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आगरा किले का दीवान-ए-आम: यहाँ ही सुनी जाती थी जनता की फरियाद

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आगरा किला मुगल शासनकाल का एक ऐसा किला है जिसे मुगलों की शान माना जाता है। यह मुगल काल का सबसे बड़ा किला कहा जाता है और यही एकमात्र किला था जिसे मुगल बादशाहों ने अपने रहने के लिए बनवाया था। मुगल काल में बादशाह अकबर ने आगरा को अपनी राजधानी बनाया था, इसी कारण आगरा का किला उस समय का सबसे महत्वपूर्ण और विशाल किला माना जाता है। इस किले के भीतर कई महल और कुछ अनोखी बनावटें हैं, जिनमें सबसे खास दीवान-ए-आम है। फाइव क्लास ऑफ ट्रैवल ब्लॉग में आपने आमेर किले का दीवान-ए-आम तो देखा होगा, लेकिन आज हम आपको आगरा किले के दीवान-ए-आम के बारे में बताएँगे, जो आमेर किले से कई गुना बड़ा और अधिक भव्य है। दीवान-ए-आम की बनावट और खूबसूरती दीवान-ए-आम एक बहुत बड़ा और खुला सा हॉल होता है जो चारों तरफ बड़े-बड़े खभों से गिरा होता है। जैसे ही आप इसके अंदर कदम रखते हैं, सबसे पहले आपकी नज़र इसकी ऊँची-ऊँची खूबसूरत खंभों और मेहराबों पर जाती है, जो इसे बेहद शाही लुक देती हैं। हॉल के ठीक बीच में संगमरमर से बना एक ऊँचा सा झरोखा है, जिसे तख्त-ए-मुरस्सा कहा जाता है। इसी जगह पर बैठकर मुगल बादशाह दरबार लगाते थे और लोगों की बातें सुनते थे। बादशाह की सीट से थोड़ा नीचे एक छोटी सी संगमरमर की बैठक बनी हुई है, जहाँ वज़ीर बैठता था। आम लोग अपनी शिकायतें और अर्ज़ियाँ वज़ीर को बताते थे और वज़ीर वही बातें आगे बादशाह तक पहुँचाता था। आज भी दीवाने आम का पूरा माहौल ऐसा लगता है जैसे आज भी वहाँ बादशाह आम जनता के फैसले सुना रहे हो। दीवाने आम में कैसे होता था इंसाफ? इस जगह का सबसे बड़ा और खास काम था लोगों को इंसाफ दिलाना। दूर-दूर के इलाकों से लोग अपनी परेशानी और शिकायतें लेकर यहाँ आते थे। बादशाह खुद सबकी बातें ध्यान से सुनते थे और फिर जो सही लगता था, उसका फैसला सुनाते थे। अगर कोई बहुत वफादार होता या किसी ने अच्छा काम किया, तो उसे यहीं सबके सामने इनाम दे के सम्मानित किया जाता था। दरबार के काफ़ी सख्त नियम होते थे हर अधिकारी अपनी हैसियत और ओहदे के हिसाब से तय जगह पर ही खड़ा होता था। बादशाह के पास कोई भी यूँ ही नहीं जा सकता था, इसलिए उनके और दरबारियों के बीच सोने की परत वाली एक रेलिंग लगी होती थी। पूरा माहौल बहुत अनुशासित और रुतबे वाला लगता होगा, जिससे साफ़ पता चलता था कि यहाँ कानून और व्यवस्था को कितनी अहमियत दी जाती थी। रानियों के लिए बनाया गया पर्दे के पीछे आम दरबार एक और दिलचस्प बात ये है कि बादशाह के सिंहासन के ठीक पीछे संगमरमर की जाली वाली खिड़कियाँ बनी हुई थीं। इन जालियों के पीछे से महल की शाही महिलाएँ बिना किसी की नज़र में आए पूरे दरबार को देख सकती थीं। उन्हें सब कुछ साफ़ दिखाई देता था, लेकिन बाहर खड़े लोगों को पता भी नहीं चलता था कि पीछे कोई मौजूद है। इससे साफ़ समझ आता है कि उस ज़माने में पर्दे और परंपराओं का कितना ध्यान रखा जाता था। साथ ही सुरक्षा का भी पूरा इंतज़ाम किया जाता था, ताकि शाही परिवार सुरक्षित रहे और दरबार की गरिमा बनी रहे। क्यों देखें दीवान-ए-आम? दीवान-ए-आम सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि यह मुगल शासन के दौर को साफ़ तौर पर दिखाता है, जहाँ बादशाह खुद को अपनी जनता का रक्षक मानते थे और उनकी बातें सीधे सुनते थे। आज की आसान भाषा में कहें तो यह उस ज़माने का Public Grievance Cell था, जहाँ राजा और आम लोगों के बीच बिना किसी रुकावट के सीधा संवाद होता था। इसलिए जब भी आप आगरा किला घूमने जाएँ, तो दीवान-ए-आम में थोड़ा समय ज़रूर बिताइए, कुछ पल रुककर आँखें बंद कीजिए और सोचिए कि कभी इसी जगह दरबार लगा करता था, लोग अपनी फरियाद लेकर आते थे और इतिहास के बड़े-बड़े फैसले लिए जाते थे। Five Colors of Travel की ओर से 5 सुझाव-

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Gurudwara Sisganj Sahib- शीशगंज साहिब गुरुद्वारा, दिल्ली

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अगर आप लाल किला और चांदनी चौक घूमने आते हैं और आपको गुरुद्वारा जाना पसंद है तो, आप शीशगंज साहिब गुरुद्वारा (Gurudwara Sisganj Sahib) का रुख कर सकते हैं। रुमाल से ढके हुए सिर और चेहरे पर सुकून को देखकर ही कोई यह बता सकता है कि, यह व्यक्ति गुरुद्वारा से होकर आया है। गुरुद्वारा है ही ऐसा जगह! यहां आप ना सिर्फ भगवान की आराधना कर सकते हैं बल्कि पुण्य का काम भी कर सकते हैं। कुछ लोगों को गुरुद्वारा इसलिए जाना पसंद होता है क्योंकि वह अपने जीवन के सभी कष्टों को दूर करना चाहते हैं, तो कुछ वह सुकून की तलाश में गुरुद्वारा जाते हैं। कुछ ऐसे व्यक्ति भी हैं, जो धन से परिपूर्ण होने के बाद भी वहां जाकर समाज सेवा करना चाहते हैं। वहीं कुछ लोग बस एक पर्यटक के तौर पर गुरुद्वारा जाते हैं। गुरुद्वारे जाने के सबके कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन गुरुद्वारे से बाहर निकलते वक्त सबके चेहरे पर चमक और सुकून एक जैसा ही होता है। दिल्ली में कुल 9 प्रमुख गुरुद्वारे हैं और उन्हीं में से एक है चांदनी चौक स्थित शीश गंज साहिब गुरुद्वारा। तो आइए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रेवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताते हैं इस विशेष ऐतिहासिक महत्व वाले गुरुद्वारे के बारे में! Gurudwara Sisganj Sahib -इतिहास इस गुरुद्वारे का इतिहास बहुत ही मार्मिक रहा है। यह गुरुद्वारा उस जगह पर स्थित है जहां मुगल बादशाह औरंगजेब ने सिक्खों के नौंवे गुरु, गुरु तेग बहादुर सिंह का गला काट दिया था। बताया जाता है कि, गुरु तेग बहादुर सिंह के शहादत के बाद उनके सिर को भाई जैता जी आनंदपुर साहिब ले गए और उनके धड़ (पवित्र शरीर) को लक्खी शाह वणजारा ने अपने घर ले जाकर वहां उनका अंतिम संस्कार किया। जिस स्थान पर गुरु तेग बहादुर सिंह जी का अंतिम संस्कार किया गया उस स्थान को आज रक़ीब गंज साहिब के नाम से जाना जाता है। इस गुरुद्वारे का निर्माण श्री बघेल सिंह द्वारा 1783 में करवाया गया था। निर्माण के कुछ वर्षों पश्चात इसे सोने से मंडवाया भी गया। गुरु तेग बहादुर सिंह के शहादत की याद में बनाया गया यह गुरुद्वारा आज भी सिक्खों के आस्था का केंद्र है। गुरुद्वारे के सामने रोड के दूसरे ओर सती दास जी, मती दास जी और दयाला जी के याद में स्मारक बनाए गए हैं। बताया जाता है कि यहां मती दास जी को आरे से काट दिया गया था। सती दास जी को रुई में लपेटकर जला दिया गया और दयाला जी को उबलते देग में डाल कर उबाल दिया गया था। गुरुद्वारा के सामने औरा स्मारक के बगल में हीं मती दास म्यूजियम भी है जहां उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से जाना जा सकता है। इस गुरुद्वारे को सेना भी करती है सलाम आपको यह जानकर हैरानी होगी कि, गणतंत्र दिवस की परेड में भारतीय सेना के सिक्ख रेजीमेंट के जवान राष्ट्रपति को सलामी देने के बाद गुरुद्वारा शीश गंज साहिब पर भी सलामी देते हैं। इस गुरुद्वारे को मिलने वाला यह सम्मान इसे अन्य गुरुद्वारों से अलग बनाती है। प्राचीन स्थापत्य कला की दिखती है यहां झलक: यह गुरुद्वारा हल्के केसरिया और सफेद रंग के पत्थरों से बना हुआ है। इसके गुंबदों को सोने से मंडवाया गया है। इस गुरुद्वारे में उस कुए को भी संरक्षित किया गया है जहां गुरु तेग बहादुर ने अंतिम बार स्नान किया था। भक्तगण यहां जाकर भी मत्था टेकते हैं। गुरुद्वारा दो मंजिलों में बँटा हुआ है। जिसमें निचली मंजिल में जूता घर, सामान घर, पैर हाथ धोने के जगह, पीने के पानी की व्यवस्था और पार्किंग है। वहीं पहली मंजिल पर मुख्य गुरुद्वारा और लंगर घर है। गुरुद्वारे के दीवारों पर हर जगह पंजाबी भाषा में उपदेश खुदवाए गए हैं। गुरुद्वारे के मुख्य भवन में तख्त के सामने का स्थान लोगों के बैठने के लिए है। मुख्य भवन के सामने वाले भवन में लंगर गृह है। जहां एक साथ 100 से भी अधिक लोगों को बिठा कर खिलाया जा सकता है। यहां लोग अपनी स्वेच्छा से सेवा भी कर सकते हैं और बर्तनों को साफ करने में मदद भी कर सकते हैं। लंगर और प्रसाद लोग तख्त के सामने मत्था टेकने के बाद वहां से निकलकर प्रसाद लेने जाते हैं। जहां शुद्ध घी और आटे की बनी हलवा प्रसाद में दी जाती है। इस हलवे के स्वाद की बराबरी दुनिया का कोई भी व्यंजन नहीं कर सकता, क्योंकि यह हलवा एक व्यंजन नहीं बल्कि भगवान का प्रसाद है जिसे आस्था और प्रेम भाव से तैयार किया जाता है। हलवा खाने के बाद लोग लंगर गृह में लंगर खाने जाते हैं। जहां आपको थाली देने से पहले वह आपसे वाहेगुरु जी की जय बोलने को कहेंगे। जिसके बाद लंगर के लिए लगी पंक्तियों में बैठकर लंगर का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। गुरुद्वारे में हो रही गुरबाणी की मधुर ध्वनि, आपके मन में सकारात्मकता का संचार करती है। गुरुद्वारे में जाकर मन तो शांत होता हीं है, साथ ही साथ यहां जाने से जीवन में एक तहजीब और अनुशासन आता है। उम्मीद है इस ब्लॉग में दी गई जानकारी आपके लिए हेल्पफुल होगी।

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Best Place for Photoshoot or aesthetic Reel in Delhi

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अगर आप दिल्ली में कुछ खूबसूरत और फोटोग्राफी या रील के लिहाज़ से किसी जगह की तलाश में है, तो आप बिलकुल सही जगह आए हैं। आज अच्छी रील और अच्छे फोटोग्राफ से अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सजाना कौन नहीं चाहता। फिर एस्थेटिक शूट तो आजकल बिल्कुल ट्रेंडिंग में है, वो चाहे एस्थेटिक रील हो या एस्थेटिक पिक्चर। ऐसे में अपना इंस्टाग्राम या फिर अपना कोई भी सोशल मीडिया अकाउंट बढ़ाने के लिए, या यूं कहें कि अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सुन्दर और सबसे अलग बनाने लिए जो सबसे मेन चीज़ आपको ध्यान में रखनी पड़ती है वो है एक सुन्दर सा बैकग्राउंड। (Best Place for Photoshoot or aesthetic Reel in Delhi) चांदनी चौक के मसाला बज़ार से लेकर ऐतिहासिक इमारत, गार्डन्स और मकबरे यूं तो यहां आपको सब कुछ अपनी अलग अंदाज़ के साथ दिखाई देगा पर आज हम आपको उन जगहों से रूबरू कराएंगे जो आजकल काफी ट्रेंड में है। हर चीज़ में एक अलग अंदाज़ और इतिहास समेटे यह दिल्ली, आपको किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने देगी। और यही कारण है कि आज हम आपके लिए लेकर ए हैं दिल्ली की बेस्ट ट्रेंडिंग इंस्टाग्रामएबल जगहों की लिस्ट। जहां जाकर आपका कंटेंट काफी अट्रक्टिंग होने वाला है। सुन्दर नर्सरी – Best Family Picnic Spot इंस्टाग्राम रील्स में आजकल जो सबसे ट्रेंडिंग में है, वो है सुन्दर नर्सरी। ये न सिर्फ एक गार्डन है बल्कि अब दिल्ली के बेस्ट पिकनिक स्पॉट्स में भी शुमार है। शाम के ढ़लते सूरज की पड़ती हल्की-हल्की किरणें आपकी रील्स और फोटोज को अलग ही इफ़ेक्ट देती हैं। हुमायूँ टॉम्ब के सामने स्थित यह नर्सरी एक नर्सरी के साथ-साथ बायो-डाइवर्सिटी पार्क, एक ऐतिहासिक विरासत और एक गार्डन भी है। जहां आप 40 रुपए टिकट देकर प्रवेश कर सकते हैं। यह सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। तो आप सुबह उगते सूरज और शाम के ढलते सूरज के साथ काफी शानदार शॉट्स ले सकते हैं। नाम से समझ आता है कि यह सिर्फ एक गार्डन हो। पर अंदर जाने पर आपको कुछ अलग ही माहौल देखने को मिलेगा। जिससे सूरज ढलने के बाद यहां जगमगाती लाइट्स में भी आप शूट कर सकते हैं। एक और खास बात यह है कि इस खूबसूरत जगह में बांस के पेड़ों की ओंठ में ठीक झील के सामने आपको एक कैफ़े भी मिल जायेगा। सोच के देखिये कुदरत की गोद में बैठ कर लंच करने का मज़ा कैसा होगा। इसकी दूसरी तरफ ठीक सामने फूलों से भरी रंगीन नर्सरी भी है। ऐसे में प्रेमी जोड़ों की हस्ते और खिलखिलाते चेहरे किसी का भी फोटोग्राफर का दिन मुकम्मल कर देती हैं। हुमायूं टॉम्ब – Beautiful Location हुमायूं टॉम्ब में एंट्री भारतियों के लिए 30 रुपए और फॉरनर्स के लिए 500 रुपए है। आजकल हुमायूं टॉम्ब भी काफी ट्रेंडिंग में है, और यक़ीनन आपने काफी एस्थेटिक रील्स देखी भी होंगी हुमायूं टॉम्ब की। यह टॉम्ब सच में काफी सुन्दर है। जहां आप एक से बढ़कर एक रील और फोटोशूट कर सकते हैं। जैसा की हम सभी जानते हैं कि मुगलों द्वारा बनाई गयी हर विरासत काफी भव्य और शानदार होती है, तो एक ऐसी ही उत्कृष्ट विरासतों में से एक है हुमायूं टॉम्ब। अगर आप सोच रहें हैं कि हुमायूं का मकबरा भी इतिहास पढ़ने की तरह उबाऊ होगा तो आप बिलकुल गलत है। एक बात इस मकबरे की खास है कि हर हैरिटेज की तरह हुमायूं का मकबरा किसी बादशाह द्वारा नहीं बल्कि हुमायूं की बेगम रानी हमीदा बानो ने अपने शोहर की याद में बनाया था। इस मकबरे में आप एस्थेटिक लुक के साथ काफी शानदार शूट कर सकते हैं। तो दोस्तों खिले हुए फूलों और ऊँचे पेड़ों के साथ सही तस्वीर और रील्स का कई सारा कंटेंट लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को सजाएं। हौज़ ख़ास – Where History meets Modernity यह तो हम सभी जानते है कि दिल्ली की सबसे मशहूर जगह माना जाता है, हौज़ ख़ास। पर यह जगह आपकी विडिओ शूट और फोटोशूट के लिहाज़ से भी बेस्ट है। हौज़ ख़ास विलेज में एक शांत झील के साथ एक पुराना ऐतिहासिक किला है जिसे शूटिंग के लिए काफी पसंद किया जाता है। यहां आपको प्री वेडिंग शूट करते कपल्स भी दिखाई देंगे। आपको एक ओपिनियन के तौर पर बता दें कि यहां आप किसी इंडियन लुक, या इंडियन वियर में शूटिंग करें तो यह काफी खूबसूरत होगा। क़ुतुब मीनार – Best Travel Spot of Delhi क़ुतुब मीनार की रील्स भी आजकल काफी ट्रेंडिंग पर चल रही हैं। दिन में क़ुतुब मीनार की खूबसूरती की झलक तो बेशक ही आप सभी ने देखि होगी। पर अगर आपको क़ुतुब मीनार की कुछ अलग तस्वीरों को अपने कमरे में कैद करना है तो यहां रात को जाएं। चमचमाती लाइट्स इस मीनार को काफी सुन्दर बना देती है, जिसमे आप काफी शानदार सिनेमेटिक शॉट्स ले सकते हैं। और इसके अलावा क़ुतुब मीनार के ऊपर से गुजरता प्लेन रात के समय दोनों की जगमगाती लाइट्स एक अलग ही माहौल बना देती है। पर इसके लिए आपको सही समय का इंतज़ार करना होगा। और एक फोटोग्राफर तो हमेशा से ही ऐसे किसी शॉट की तलाश में रहता है। तो अब यहां की रात में बनाई गयी रील्स ज्यादा चलती हैं, एक बार जरूर जाएं और अपने अकाउंट को औरों से अलग बनाएं। चंपा गली न सिर्फ स्वादिष्ट खाना बल्कि यह जगह सोशल मीडिया के लिए परफेक्ट एस्थेटिक वाइब्स प्लेस है। यकीन मानिये, यहां जाकर आपका कैमरा खुद-ब-खुद चलना शुरू हो जायेगा क्योंकि यहां की वाइब्स ही काफी अत्त्रक्टिंग हैं। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए यह जगह बिलकुल परफेक्ट है। इस जगह में आपको ऐसे-ऐसे कैफे दिखाई देंगे जो सोशल मीडिया वाइब के लिए बिलकुल सही है। इसके अलावा यहां जलती अलग-अलग लाइट्स परियों के शहर जैसा फील देती हैं।  चंपा-गली इस युथ की सबसे फेमस और सबसे पसंदीदा जगहों  है।

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Hidden Leaf Homestay- रामनगर में घर से दूर भी घर जैसा एहसास

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जब भी हम कहीं बाहर जाने की प्लानिंग करते हैं तो हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि आखिर हम कहां रुकेंगे या कहाँ ठहरेंगे? उसमें भी बात अगर उत्तराखंड जैसे डेस्टिनेशन की हो, तो प्लानिंग और सॉलिड होनी चाहिए! आज फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में आप जानेंगे एक ऐसे होमस्टे Hidden Leaf Homestay के बारे में जहां रुकना किफायती भी होगा और मजेदार भी। आजकल होमस्टे रुकने और ठहरने के लिए एक बेहतर विकल्प माने जाते हैं क्योंकि यह न केवल आपको ठहरने की जगह देते हैं बल्कि ऐसा एहसास कराते हैं जैसे आप अपने ही किसी दूसरे घर में रुके हों। Hidden leaf Homestay यह होमस्टे रामनगर में जिम कॉर्बेट के पास स्थित है, जो जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क से लगभग 5 किमी दूर है। ये एक पहाड़ी घर है जिसे बने हुए बहुत लम्बा वक़्त नहीं हुआ है इसलिए ये बेहद सुंदर और नया-नया सा भी लगता है। इस होमस्टे की सबसे बड़ी खासियत है इसके आसपास का शांत माहौल। अगर आप यहाँ रुकते हैं तो आपके दिन की शुरुआत सुबह पक्षियों की चहचहाहट और ठंडी हवाओं के साथ होती है। कमरे और ठहरने की जानकारी यहाँ डीलक्स और सुपर डीलक्स कमरे उपलब्ध हैं, जिनके साथ आपको बालकनी और माउंटेन व्यू भी देखने को मिलता है। रोजाना कमरों की सफ़ाई और हॉउसकीपिंग की सुविधा मिलती है। कुछ कमरों में वर्क डेस्क भी मिलती है। कमरे में मिलेंगी ये सुविधाएँ-आरामदायक बेड और साफ बिस्तरएसी ACवाई-फाई Wi-Fiअटैच बाथरूम Attach Bathroomसीटिंग एरिया Seating Area खाने पीने की व्यवस्था (Hidden Leaf Homestay) इस होमस्टे की एक खासियत है कि यहाँ आपको बिल्कुल घर जैसा खाना मिलता है। इस होमस्टे में इन-हाउस रेस्टोरेंट है जहाँ लंच/डिनर, ब्रंच और हाई-टी सर्व की जा सकती है। साथ ही, यहाँ मेहमानों के अनुसार खाने में स्थानीय ऑप्शन्स में भी उपलब्ध कराए जाते हैं। पार्किंग और अन्य सुविधाएँ यहाँ पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। कार और बाइक दोनों के लिए सुरक्षित जगह मिल जाती है। और होमस्टे के मालिक राजदीप सिंह सूद से बातचीत कर आप अन्य सुविधाओं की पुष्टि भी कर सकते हैं क्योंकि यहाँ आपको बिल्कुल पारिवारिक माहौल मिलता है। Hidden Leaf Homestay में रुकना और यहां वक्त बिताना अपने आप में शानदार अनुभव होता है। इसकी लोकेशन ऐसी है कि आपको आसपास की प्रसिद्ध जगहों पर जाने के लिए बहुत दूर नहीं निकालना पड़ता, बल्कि कुछ किलोमीटर के अंदर ही आप जिम कॉर्बेट और अन्य विजिटिंग प्लेसेस पर जा सकते हैं। न सिर्फ Hidden leaf homestay बल्कि आजकल आपको लगभग हर राज्य में ऐसे होमस्टे मिल जाएंगे। ये एक बेहतर विकल्प होते हैं तो अब आप जब कहीं घूमने जाएं और ठहरने की जगह देखें तो अपनी लिस्ट में होमस्टे को ज़रूर शामिल करें। होमस्टे कैसे काम करते हैं और सरकार से इन्हें कैसे सहायता मिलती है? ये जानने के लिए अभी देखिए हमारे युट्यूब चैनल पर ये वीडियो-

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Galta ji-जयपुर का एक ऐसा ऑफ बीट डेस्टिनेशन – जहाँ के जलकुंड कभी नहीं सूखते

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जब भी हम जयपुर घूमने की लिस्ट बनाते हैं तो सबसे पहले हवा महल, जल महल, सिटी पैलेस जैसे फेमस प्लेसेज़ के नाम ही हमारे दिमाग में आते है। लेकिन क्या आप भी जयपुर में कोई ऐसी जगह देखना चाहते हैं जहाँ भीड़-भाड़ बहुत कम हो और सुकून बहुत ज़्यादा मिले? जहाँ आप बिना किसी शोर-शराबे, बिना भीड़ भाड़ से परेशान हुए, बस शांति और नेचर के बीच खड़े होकर कुछ पल अपने लिए जी सकें। तो इस ब्लॉग में फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल आपको बताएगा एक ऐसा ही ऑफ बीट डेस्टिनेशन है, जो जयपुर शहर की भीड़-भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट्स से बिल्कुल अलग है। जहां न कोई धक्का-मुक्की है, न लंबी लाइने है, और न ही कैमरों का शोर। बस पहाड़ों की हवा, आसपास की शांति और वो सुकून, जिसे महसूस करने के लिए लोग अक्सर शहर से दूर निकल कर यहां आते हैं। तो अगर आप भी जयपुर ट्रिप में भीड़ से हटकर कुछ अलग और कोई यूनिक जगह को घूमकर एक्सपीरियंस करना चाहते हैं, तो आपको जयपुर के गलता जी मंदिर जरूर जाना चाहिए। जिसी मंकी टेंपल भी कहते हैं। अरावली की पहाड़ियों के बीच, एक पतली सी घाटी में बसा हुआ गलता जी मंदिर शहर के भागदौड़ से आपको बिल्कुल अलग ही दुनिया में ले जाता है जैसे ही आप यहां पर पहुंचते हैं तो पहाड़ियों से आ रहे पक्षियों की आवाज और पहाड़ी की ठंडी हवा आपको महसूस होने लगेगी जो आपको नेचर के करीब होने का एहसास दिलाएगी। लोगों के शोर के बावजूद यहां पर आपको एक अलग ही तरह की शांति का एहसास होगा। यहाँ पहुँचते ही क्या खास लगता है (What feels special the moment you reach here) जयपुर में जहाँ सभी फेमस स्पॉट गुलाबी बलुए पत्थर से बने हुए हैं वहीं गलत जी मंदिर इन बलुए पत्थर की बनावट से बिल्कुल अलग किसी पुराने राज महल जैसा लगता है। चारों तरफ पहाड़ से घिरा पहाड़ी की ऊँचाई पर एक खूबसूरत सा मंदिर और पहाड़ी से नीचे एक खूबसूरत सा कुंड जिसे देखकर मन को एक अलग ही तरह का सुकून मिल रहा हो। कुंड और पानी का सुकून गलता जी मंदिर अपने पवित्र कुंडों के लिए भी बहुत मशहूर है और सबसे खास यहाँ का गलवाकुंड जिसका पानी हमेशा बहता देता है, और इसके पीछे वजह ये मानी जाती है कि यह पानी पहाड़ी के ऊपर से एक नेचुरल झरने की तरह आता है और कभी सूखता नहीं है, जिससे इस पूरे परिसर में कभी भी पानी की कमी नहीं होती। इसके साथ ही इस पानी की वजह से यहाँ पर एक अलग ही तरह की ठंडक आपको देखने को मिलेगी, जो आपको जयपुर की गर्मी से बिल्कुल, एक अलग ही तरह की ठंडक का एहसास कराएगी। इसके साथ-साथ यहाँ बैठकर पानी की आवाज़ सुनना आपको एक अलग ही एक्सपीरियंस देगा। क्यों गलता जी टेंपल का नाम पड़ गया मंकी टेंपल गलता जी टेंपल का नाम मंकी टेंपल यूँ ही नहीं पड़ा। यहाँ आपको हर जगह बंदर दिख जाएंगे जो कभी सीढ़ियों पर बैठे मस्ती करते हुए नजर आएंगे, तो कभी दीवारों पर कूदते हुए, और एक बात ध्यान रखें, अपना चश्मा, मोबाइल और खाने का सामान संभालकर रखें, वरना ये बंदर बहुत चालाक होते हैं। आपको पता भी नहीं लगेगा और ये आपके हाथ से अपना सामान ले कर फ़ूर हो जायेंगे। हालांकि ये आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे पर फिर भी आपको सावधान जरुर रहना हैं। कई लोग इन बंदरों को हमुनाम जी का रूप भी माते है, और इसी वजह से तो लोग इस मंदिर को मंकी टेंपल भी कहते हैं। Best time to visit Galta ji Temple (गलता जी मंदिर जाने का सही समय) अगर आप गलता जी जाना चाहते हैं तो सुबह जल्दी या फिर शाम के समय जाना सबसे बढ़िया रहता है। सुबह की शांति और शाम का सनसेट दोनों ही टाइम जगह बहुत खूबसूरत लगती है। शाम को ऊपर से जयपुर का नज़ारा भी देखने को मिलता है, जो वाकई देखने लायक होता है। क्यों जाएँ गलता जी (Why Galta Ji should be on your travel list) अगर आप जयपुर ट्रिप में थोड़ा सुकून, नेचर और अलग तरह का एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो गलता जी मंदिर ज़रूर जाएँ। ये जगह आपको बताएगी कि जयपुर सिर्फ महलों और बाजारों का शहर नहीं, बल्कि शांति और सादगी का भी एक खूबसूरत चेहरा है। सच में, गलता जी एक ऐसा डेस्टिनेशन है जहाँ एक बार जाकर मन करता है बस यही थोड़ी देर और बैठ जाएँ।

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राजस्थानी कंदोरा बना नया फैशन ट्रेंड, Royal Twist with Tradition

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राजस्थान की पहचान उसके ट्रेडिशनल गहनों और शाही अंदाज़ से हमेशा जुड़ी रही है। यहां के पारंपरिक गहने न सिर्फ भारत में, बल्कि देश-विदेश में भी खूब मशहूर हैं। चाहे फिर वो कुंदन हार हो, पोलकी या भंवरकंडी नथ की बात हो, ये सभी राजस्थानी गहने अपनी खूबसूरती और कारीगरी के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। इन्हीं खास गहनों में से एक है राजस्थानी कंदोरा, जो कमर में पहना जाने वाला ट्रेडिशनल गहना है। फिर लौटा कंदोरा का ट्रेंड पहले के समय में कंदोरा ज़्यादातर राजा-महाराजाओं और सामंतों की शान हुआ करता था। यह उनकी खास पोशाक और रॉयल पहचान का हिस्सा माना जाता था। समय के साथ यह गहना महिलाओं के पहनावे में आ गया, लेकिन धीरे-धीरे इसका चलन कम होता चला गया और लोग इसे कम पहनने लगे। लेकिन अब एक बार फिर वही दौर लौट रहा है। आजकल महिलाएं कंदोरा को बड़े शौक से पहन रही हैं और यह गहना फिर से ट्रेंड में आ गया है। खासकर शादी-ब्याह और ट्रेडिशनल मौकों पर कंदोरा पहनना स्टाइल और परंपरा दोनों का खूबसूरत मेल बन गया है। आज के समय में कंदोरा को पहले के मुकाबले ज्यादा हल्का और आरामदायक बनाया जा रहा है। पहले जहां ये गहने भारी हुआ करते थे, वहीं अब इन्हें हल्के वज़न का बनाया जाने लगा है जिसकी वजह से कोई भी महिला इन्हें आसानी से पहन सकती है। कम वजन होने के कारण ये गहने पहनने में अनकंफर्टेबल भी नहीं लगते। ट्रेडिशनल लुक बिना किसी परेशानी के अब आप अपना ट्रेडिशनल लुक बिना किसी परेशानी के, पूरे कंफर्ट के साथ कैरी कर सकती हैं। यही वजह है कि राजस्थानी कंदोरा आज फिर से महिलाओं की पसंद बनता जा रहा है और फैशन के साथ-साथ परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है। एक समय हुआ करता था जब राजस्थानी कंदोरा सिर्फ चांदी में ही बनाया जाता था। लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, वैसे-वैसे इसमें भी कई तरह की वैरायटी जुड़ती चली गई। अब कंदोरा सिर्फ चांदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सोने, पीतल और कई तरह के आर्टिफिशियल मटेरियल में भी बनने लगा है। हर बजट में उपलब्ध, राजस्थानी कंदोरा आजकल ऐसे कंदोरा भी बनाए जा रहे हैं जो देखने में बिल्कुल असली और ट्रेडिशनल लगते हैं, लेकिन उनकी कीमत काफी किफायती होती है। यही वजह है कि अब यह गहना सिर्फ खास या अमीर लोगों तक सीमित नहीं रहा। अब कोई भी व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या साधारण परिवार से हो, अपनी पसंद और बजट के हिसाब से कंदोरा खरीद सकता है और बड़े आराम से पहन भी सकता है। यही बदलाव इस ट्रेडिशनल गहने को एक बार फिर लोगों के दिलों के करीब ला रहा है।

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शोर से दूर शांति चाहिए? ऋषिकेश से करें नए साल की आध्यात्मिक शुरुआत

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नया साल सिर्फ पार्टियों और शोर-शराबे का नाम नहीं है। कई लोग New Year 2026 की शुरुआत शांति, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करना चाहते हैं। अगर आप भी भीड़-भाड़ से दूर सुकून चाहते हैं, तो आध्यात्मिक जगह पर नया साल मनाना सबसे बेहतरीन विकल्प है। ऋषिकेश: योग, ध्यान और शांति की राजधानी उत्तराखंड में स्थित ऋषिकेश को विश्व की योग राजधानी कहा जाता है। गंगा नदी के पवित्र तट, हिमालय की गोद और आध्यात्मिक वातावरण इसे नए साल के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं। यहाँ न तेज़ म्यूज़िक है, न शोर—सिर्फ मंत्रों की गूंज, गंगा की धारा और आत्मा को सुकून देने वाली शांति। New Year 2026 में ऋषिकेश जाने के 5 बड़े कारण 1. गंगा आरती से मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा हर शाम त्रिवेणी घाट पर होने वाली गंगा आरती मन और आत्मा को शुद्ध कर देती है। नए साल की पहली आरती देखना एक यादगार अनुभव होता है। 2. योग और मेडिटेशन से करें साल की शुरुआत ऋषिकेश में कई आश्रम और योग केंद्र हैं जहाँ New Year Meditation Retreats आयोजित किए जाते हैं। यह आपको मानसिक शांति और स्पष्टता प्रदान करता है। 3. डिजिटल डिटॉक्स का बेस्ट मौका यहाँ आकर आप मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहकर खुद से जुड़ सकते हैं—जो नए साल के लिए बेहद ज़रूरी है। 4. आध्यात्मिक के साथ एडवेंचर का संतुलन अगर चाहें तो रिवर राफ्टिंग, नेचर वॉक और हिमालयन ट्रेक्स का आनंद भी ले सकते हैं। 5. बजट-फ्रेंडली Spiritual Trip ऋषिकेश एक किफायती डेस्टिनेशन है—आश्रमों में ठहरना, सादा भोजन और फ्री योग सेशन इसे बजट में रखता है। ऋषिकेश में घूमने की प्रमुख आध्यात्मिक जगहें त्रिवेणी घाट-त्रिवेणी घाट ऋषिकेश का सबसे पवित्र और प्रसिद्ध घाट माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम होता है। हर शाम होने वाली गंगा आरती मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। नए साल की शुरुआत यहाँ स्नान और आरती के साथ करना बहुत शुभ माना जाता है। परमार्थ निकेतन आश्रम-परमार्थ निकेतन आश्रम योग, ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। यहाँ रोज़ाना योग कक्षाएं, सत्संग और ध्यान सत्र आयोजित होते हैं। शांत वातावरण और गंगा किनारे स्थित यह आश्रम आत्मचिंतन और मानसिक शांति के लिए आदर्श जगह है। बीटल्स आश्रम-बीटल्स आश्रम (चौरासी कुटिया) ध्यान और साधना के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि मशहूर विदेशी बैंड The Beatles ने यहाँ ध्यान साधना की थी। आज यह स्थान शांति, प्रकृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सुंदर संगम है, जहाँ लोग ध्यान और आत्मचिंतन के लिए आते हैं। लक्ष्मण झूला-लक्ष्मण झूला ऋषिकेश का ऐतिहासिक और धार्मिक प्रतीक है। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने इसी स्थान से गंगा पार की थी। झूले से गंगा का दृश्य बेहद मनमोहक लगता है और आसपास मौजूद मंदिर एवं आश्रम आध्यात्मिक अनुभव को और गहरा बना देते हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर-ऋषिकेश से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान शिव ने यहाँ विषपान किया था। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर ध्यान, भक्ति और प्राकृतिक शांति का अद्भुत अनुभव कराता है। New Year 2026 के लिए ऋषिकेश के लिए फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल टिप्स अगर आप New Year 2026 में शोर-शराबे से दूर रहकर अपने मन, शरीर और आत्मा को नई दिशा देना चाहते हैं, तो ऋषिकेश से बेहतर जगह कोई नहीं। यह सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि खुद से जुड़ने की एक आध्यात्मिक यात्रा है। एक खास मशवरा – इस नए साल, बाहर नहीं—अंदर की यात्रा पर निकलें।