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Railway Booking IRCTC ने बनाया 20 लाख टिकट बुकिंग का रिकॉर्ड

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त्योहारों का मौसम शुरू होते ही देशभर में एक ही चिंता सबसे ज्यादा दिखाई देती है—घर जाने की टिकट मिलेगी या नहीं? दिवाली हो, छठ पूजा हो या कोई और बड़ा त्योहार, दूसरे शहरों में रहने वाले लोग महीनों पहले से घर जाने की तैयारी शुरू कर देते हैं। जैसे ही टिकटों की एडवांस बुकिंग खुलती है, लाखों लोग एक साथ IRCTC की वेबसाइट और ऐप पर पहुंच जाते हैं। ऐसे में Railway Booking सिर्फ टिकट लेने का काम नहीं रह जाता, बल्कि कई लोगों के लिए यह त्योहार की तैयारी का सबसे जरूरी हिस्सा बन जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। त्योहारों की एडवांस बुकिंग शुरू होते ही Railway Booking की मांग इतनी तेजी से बढ़ी कि IRCTC ने एक दिन में 20 लाख से ज्यादा टिकट बुक करने का नया रिकॉर्ड बना दिया। 7 सितंबर 2026 को IRCTC के जरिए कुल 20,06,353 टिकट बुक हुए। यह अब तक का सबसे बड़ा सिंगल-डे ऑनलाइन टिकट बुकिंग रिकॉर्ड बताया गया है। लेकिन बात सिर्फ रिकॉर्ड बनने तक सीमित नहीं है। इस रिकॉर्ड के पीछे रेलवे के डिजिटल सिस्टम में किए गए बदलाव, बढ़ती ऑनलाइन Railway Booking, नए सर्वर, एंटी-बॉट सिस्टम और नई वेबसाइट जैसे कई बदलाव हैं। वहीं दूसरी तरफ बुकिंग शुरू होते ही ‘Unable to Process Request’, ‘System Overload’ और ‘Regret’ जैसी परेशानियों का सामना करने वाले यात्री भी कम नहीं थे। 1. एक दिन में 20 लाख से ज्यादा टिकट बुक त्योहारी सीजन में हर साल रेलवे पर टिकटों की मांग बढ़ जाती है। इस बार भी एडवांस रिजर्वेशन पीरियड खुलते ही IRCTC पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। खासकर दिवाली और दूसरे त्योहारों को देखते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने पहले ही Railway Booking की तैयारी कर रखी थी। 7 सितंबर 2026 को IRCTC के जरिए एक ही दिन में 20,06,353 टिकट बुक किए गए। इस आंकड़े ने Railway Booking के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। यानी एक दिन में 20 लाख का आंकड़ा पार करना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड बन गया। रिकॉर्ड बनने के अगले दिन भी IRCTC पर यात्रियों की भीड़ कम नहीं हुई। 8 सितंबर को भी 19,50,699 टिकट बुक किए गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि त्योहारों के समय Railway Booking की मांग कितनी ज्यादा बढ़ जाती है। अगर पिछले साल की बात करें तो 19 अगस्त 2025 को फेस्टिव सीजन में सबसे ज्यादा 18,40,203 टिकट बुक हुए थे। इस बार IRCTC ने इस आंकड़े को भी काफी पीछे छोड़ दिया। सिर्फ ऑनलाइन टिकट ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन और रेलवे काउंटरों को मिलाकर पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम यानी PRS ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। 7 सितंबर को कुल 22,26,786 रिजर्व्ड टिकट बुक किए गए। पिछले साल का रिकॉर्ड 20,45,272 टिकट का था। इस तरह इस बार कुल Railway Booking में भी लगभग 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। एडवांस रिजर्वेशन पीरियड को 120 दिनों से घटाकर 60 दिन किए जाने के बाद टिकटों की मांग एक छोटी अवधि में ज्यादा केंद्रित हो गई है। ऐसे में जब Railway Booking की विंडो खुलती है, तो कुछ ही समय में बड़ी संख्या में यात्री टिकट लेने की कोशिश करते हैं। 2. अब टिकट के लिए काउंटर की लाइन जरूरी नहीं एक समय था जब त्योहारों में घर जाने के लिए लोगों को रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता था। कई बार लोग रात से ही स्टेशन पहुंच जाते थे ताकि सुबह टिकट मिल सके। लेकिन अब समय काफी बदल गया है। आज Railway Booking का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन हो चुका है। लोग घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से टिकट बुक कर लेते हैं। IRCTC की वेबसाइट और ऐप ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। आंकड़ों के मुताबिक भारतीय रेलवे के कुल रिजर्व्ड टिकटों में लगभग 89 प्रतिशत टिकट अब ऑनलाइन बुक होते हैं। यानी आज Railway Booking के लिए लोगों की पहली पसंद ऑनलाइन माध्यम बन चुका है। 2014-15 में सिर्फ 54 प्रतिशत रिजर्व्ड टिकट ऑनलाइन बुक होते थे। 2019-20 में यह आंकड़ा बढ़कर 73 प्रतिशत हुआ। 2024-25 में ई-टिकटिंग की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई। IRCTC की ऑनलाइन सेवा जब 3 अगस्त 2002 को शुरू हुई थी, तब पहले दिन सिर्फ 27 टिकट बुक हुए थे। आज उसी सिस्टम पर सामान्य दिनों में औसतन 14.5 लाख से ज्यादा टिकट प्रोसेस होते हैं और पीक सीजन में यह आंकड़ा 20 लाख से भी ऊपर पहुंच जाता है। Railway Booking में मोबाइल ऐप का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। अब ई-टिकटिंग में मोबाइल ऐप्स की हिस्सेदारी 53 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है। यानी यात्री कंप्यूटर के साथ-साथ मोबाइल से भी अपनी Railway Booking करना पसंद कर रहे हैं। 3. इतने ज्यादा यात्रियों का लोड IRCTC कैसे संभाल रहा है? एक दिन में 20 लाख से ज्यादा टिकट बुक होना सुनने में भले ही सिर्फ एक आंकड़ा लगे, लेकिन इसके पीछे बहुत बड़ा डिजिटल सिस्टम काम करता है। जब लाखों लोग एक साथ IRCTC पर लॉग-इन करते हैं और एक ही समय पर ट्रेन, सीट और पेमेंट की जानकारी मांगते हैं, तो सिस्टम पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है। इसी वजह से IRCTC और सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स यानी CRIS ने अपने नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकटिंग यानी NGeT प्लेटफॉर्म में बड़े स्तर पर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड किए हैं। पुराने सर्वर्स की जगह नए और आधुनिक सर्वर्स लगाए गए हैं। इससे सिस्टम की क्षमता पहले के मुकाबले दोगुनी हो गई है। इसका सीधा फायदा Railway Booking के दौरान बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालने में मिलता है। पीक दिनों में NGeT सिस्टम ने एक दिन में 1.33 करोड़ से लेकर 1.74 करोड़ तक लॉग-इन संभाले हैं। यह संख्या बताती है कि IRCTC पर सिर्फ टिकट बुक करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग ट्रेन और सीट की जानकारी भी एक साथ चेक करते हैं। रेलवे अब अपने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को क्लाउड-बेस्ड आर्किटेक्चर पर भी ले जा रहा है। नए सिस्टम की क्षमता 1.5 लाख बुकिंग प्रति मिनट और 40 लाख पूछताछ प्रति मिनट तक बताई गई है। मौजूदा सिस्टम लगभग

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Indian Railway में सीट किसी और को कब मिल सकती है?

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ट्रेन का टिकट बुक करने के बाद सबसे बड़ी राहत यही होती है कि आपकी सीट कन्फर्म हो गई है। लेकिन परेशानी तब शुरू होती है, जब किसी वजह से आप अपने तय स्टेशन पर समय से नहीं पहुंच पाते। कभी यात्री ट्रैफिक में फंस जाते हैं, कभी घर से निकलने में देर हो जाती है और कई बार कोई जरूरी काम अचानक सामने आ जाता है। ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि अगर ट्रेन मेरे बोर्डिंग स्टेशन से निकल गई, तो क्या मैं अगले स्टेशन से ट्रेन पकड़ सकता हूं? और क्या मेरी कन्फर्म सीट तब तक मेरे लिए सुरक्षित रहेगी? Indian Railway से जुड़े इन सवालों को लेकर यात्रियों के बीच कई तरह की बातें सुनने को मिलती हैं। खासकर पुराने समय का एक नियम काफी चर्चा में रहा है, जिसे लोग आम तौर पर ‘टू-स्टॉप रूल’ कहते हैं। माना जाता था कि अगर यात्री अपने बोर्डिंग स्टेशन पर नहीं पहुंच पाया है, तो टीटीई अगले दो स्टेशनों या करीब एक घंटे तक उसकी सीट किसी दूसरे यात्री को नहीं दे सकता। इससे यात्री को अगले स्टेशन तक पहुंचकर ट्रेन पकड़ने का मौका मिल जाता था। लेकिन अब Indian Railway का सिस्टम काफी बदल चुका है। टिकट की जांच से लेकर सीट की जानकारी तक बहुत कुछ डिजिटल हो गया है। टीटीई के पास अब केवल कागज का चार्ट नहीं होता, बल्कि हैंडहेल्ड टर्मिनल यानी एचएचटी जैसी डिजिटल यंत्र भी होता है। ऐसे में अगर यात्री अपने बोर्डिंग स्टेशन से ट्रेन पकड़ने नहीं पहुंचता, तो उसकी सीट से जुड़ी आगे की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जा सकती है। ट्रेन छूट गई तो सीट का क्या होगा? मान लीजिए आपने Delhi से ट्रेन पकड़ने के लिए टिकट बुक किया है, लेकिन किसी वजह से आप समय पर स्टेशन नहीं पहुंच पाए। ट्रेन स्टेशन से निकल गई और अब आप अगले स्टेशन से ट्रेन पकड़ना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में केवल यह सोचकर न बैठें कि आपकी कन्फर्म सीट हर हाल में आपके लिए सुरक्षित रहेगी। Indian Railway की डिजिटल टिकट और चार्ट व्यवस्था में यात्री के समय पर नहीं पहुंचने की स्थिति को ‘नो-शो’ या ‘नॉट टर्न्ड अप’ के रूप में दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद सीट को खाली माना जा सकता है और उसे किसी दूसरे यात्री को दिया जा सकता है। खासकर अगर कोई आरएसी या प्रतीक्षा सूची वाला यात्री उपलब्ध है, तो खाली हुई सीट उसे दी जा सकती है। यही वजह है कि अगर ट्रेन आपके बोर्डिंग स्टेशन से निकल चुकी है, तो अगले स्टेशन से चढ़ने का फैसला करने से पहले अपनी स्थिति को समझना जरूरी है। सिर्फ यह मान लेना कि टीटीई आपकी सीट को दो स्टेशनों तक सुरक्षित रखेगा, अब सही तरीका नहीं माना जा सकता। Indian Railway में डिजिटल व्यवस्था आने के बाद सीटों का इस्तेमाल अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। टीटीई अपने हैंडहेल्ड टर्मिनल के माध्यम से ट्रेन में उपलब्ध सीटों की जानकारी देख सकता है और जरूरत के अनुसार सीट का आवंटन भी किया जा सकता है। पुराने ‘दो स्टेशन’ वाले नियम की चर्चा क्यों होती है? पुराने समय में ट्रेन से सफर करने वाले लोगों को याद होगा कि टिकट जांच की पूरी व्यवस्था आज से काफी अलग थी। उस समय कागजी चार्ट और हाथ से रखे जाने वाले रिकॉर्ड का इस्तेमाल अधिक होता था। इसलिए यात्रियों को कुछ समय की राहत मिल जाती थी और वे अगले स्टेशन से ट्रेन पकड़ने की कोशिश कर सकते थे। इसी वजह से ‘टू-स्टॉप रूल’ की बात आज भी लोगों के बीच सुनने को मिलती है। लेकिन आज Indian Railway की व्यवस्था डिजिटल हो चुकी है। इसलिए यात्रियों को इस पुरानी धारणा पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। अगर आपको पहले से पता है कि आप टिकट में दिए गए स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पाएंगे, तो सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपना Boarding Point पहले ही बदल दें। Boarding Point बदलने की सुविधा अगर आपको पहले से पता है कि आप टिकट में दिए गए स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पाएंगे, तो Indian Railway यात्रियों को Boarding Point बदलने की सुविधा देता है। यह सुविधा उन यात्रियों के लिए काफी उपयोगी हो सकती है, जिन्हें आखिरी समय पर अपना स्टेशन बदलना पड़ जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका टिकट किसी ऐसे स्टेशन से है, जहां पहुंचना आपके लिए मुश्किल हो गया है, लेकिन ट्रेन के अगले स्टेशन से आप आसानी से पहुंच सकते हैं, तो Boarding Point बदलना बेहतर विकल्प हो सकता है। दिए गए नियमों के अनुसार, ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से करीब 30 मिनट पहले तक इंटरनेट के माध्यम से बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा मिल सकती है। इसके लिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप में जाकर ‘बुक्ड टिकट हिस्ट्री’ का विकल्प देखा जा सकता है। हालांकि यहां एक बात ध्यान रखना बहुत जरूरी है। Boarding Point बदलने का मौका केवल एक बार मिलता है। एक बार आपने अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल दिया, तो पुराने स्टेशन से ट्रेन पकड़ने का अधिकार नहीं रहेगा। इसलिए बदलाव करने से पहले अच्छी तरह सोच लें कि आपको वास्तव में किस स्टेशन से ट्रेन पकड़नी है। क्या अगले स्टेशन से सीधे ट्रेन पकड़ सकते हैं? यह सवाल बहुत से यात्रियों के मन में रहता है। अगर आपका टिकट एक स्टेशन से है और आप वहां नहीं पहुंच पाए, तो क्या आप अगले स्टेशन से उसी टिकट पर चढ़ सकते हैं? सिर्फ अपनी तरफ से यह मान लेना कि आप अगले स्टेशन से चढ़ सकते हैं, सही तरीका नहीं है। अगर आपके बोर्डिंग स्टेशन से ट्रेन निकल चुकी है और आपकी सीट को खाली मानकर किसी दूसरे यात्री को दे दिया गया है, तो स्थिति बदल सकती है। ऐसे में अगर आप किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं, तो तुरंत टीटीई से संपर्क करना बेहतर है। टीटीई के पास ट्रेन की सीट और यात्री से जुड़ी जानकारी देखने के लिए डिजिटल व्यवस्था होती है। अगर आपकी सीट किसी दूसरे यात्री को आवंटित हो चुकी है, तो वह सीट वापस मिलना आसान नहीं होगा। Indian Railway में सफर करते समय समय पर स्टेशन पहुंचना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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Verification जरूरी! तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव

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अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं, तो तत्काल टिकट बुक करने की परेशानी से जरूर गुजरे होंगे। सुबह टिकट बुकिंग शुरू होते ही लाखों लोग एक साथ वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लॉगिन करने की कोशिश करते हैं। कुछ ही मिनटों में सीटें भर जाती हैं और बहुत से यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। कई बार तो यात्री अपनी सारी जानकारी भरने के बाद भुगतान तक पहुंच जाते हैं, लेकिन तब तक टिकट खत्म हो चुका होता है। इसके पीछे एक बड़ी वजह टिकटों की कालाबाजारी और बॉट्स यानी अपने आप काम करने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम भी माने जाते हैं। इसी समस्या को रोकने के लिए रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग में Verification की प्रक्रिया को जरूरी बनाया है। हाल ही में केरल हाई कोर्ट ने ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग में आधार आधारित Verification को सही माना है। अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार से जुड़ी पहचान की प्रक्रिया जरूरी की जा सकती है। अदालत ने इस व्यवस्था को सही मानते हुए कहा कि अगर इसका उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी रोकना और असली यात्रियों को टिकट दिलाना है, तो ऐसी Verification प्रक्रिया सार्वजनिक हित में हो सकती है। समस्या की शुरुआत कहां से हुई? इस पूरे मामले की शुरुआत उस समस्या से होती है जिससे आम यात्री लंबे समय से परेशान हैं। तत्काल टिकट की बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में बड़ी संख्या में टिकट बुक हो जाते हैं। कई यात्रियों का आरोप रहा है कि दलाल और कुछ विशेष कंप्यूटर प्रोग्राम बहुत तेजी से टिकट बुक कर लेते हैं। इसके बाद वही टिकट अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश की जाती है। ऐसे में जो व्यक्ति वास्तव में यात्रा करना चाहता है, वह टिकट के लिए परेशान होता रहता है। रेलवे का कहना है कि नई Verification व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य इसी तरह की गड़बड़ियों को कम करना है। रेलवे ने ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार आधारित Verification को अनिवार्य किया है। इसका मतलब है कि जो यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से तत्काल टिकट बुक करना चाहते हैं, उन्हें अपने खाते की पहचान की पुष्टि करनी होगी। इस प्रक्रिया में यात्री की पहचान आधार से जुड़ी जानकारी और मोबाइल पर आने वाले एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड के जरिए जांची जाती है। इस Verification के बाद रेलवे को यह समझने में मदद मिलती है कि टिकट बुक करने वाला व्यक्ति वास्तविक यात्री है या किसी तरह का स्वचालित कार्यक्रम। Verification का मतलब क्या है? यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है कि Verification का मतलब यह नहीं है कि हर बार टिकट बुक करते समय आपको पूरी प्रक्रिया दोहरानी होगी। आमतौर पर खाता सत्यापित होने के बाद यह प्रक्रिया एक बार पूरी करनी होती है। इसके बाद यात्री को तत्काल टिकट बुक करते समय पहले से तैयार खाते के साथ आगे बढ़ने में आसानी होती है। इसलिए अगर आप नियमित रूप से तत्काल टिकट बुक करते हैं, तो पहले से अपनी पहचान Verification पूरी कर लेना आपके लिए काफी उपयोगी हो सकता है। रेलवे ने टिकट बुकिंग में बॉट्स और स्वचालित कार्यक्रमों को रोकने के लिए कई स्तरों पर Verification व्यवस्था मजबूत की है। पहले कई बार ऐसा होता था कि टिकट बुकिंग शुरू होते ही कुछ खाते असामान्य तेजी से बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे। ऐसे खातों की पहचान करना रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती थी। अब पहचान Verification, मोबाइल नंबर की पुष्टि और कंप्यूटर प्रणाली की निगरानी के जरिए संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। केरल हाई कोर्ट के फैसले में निजता का मुद्दा केरल हाई कोर्ट के फैसले में निजता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि क्या किसी व्यक्ति को तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार Verification से गुजरना जरूरी किया जा सकता है। अदालत ने इस मामले में माना कि रेलवे का उद्देश्य टिकटों की धोखाधड़ी और कालाबाजारी को रोकना है। अगर Verification का इस्तेमाल सीमित उद्देश्य के लिए किया जाता है और यात्रियों की जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है, तो यह व्यवस्था असली यात्रियों के हित में हो सकती है। रेलवे की ओर से यह भी बताया गया है कि आधार नंबर को सीधे अपने पास रखने के बजाय पहचान की पुष्टि के लिए सीमित जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि यात्री की पहचान सही है या नहीं। इस तरह की Verification व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि टिकट बुकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाना बताया गया है। क्या बिना आधार Verification के तत्काल टिकट नहीं मिलेगा? अब सवाल यह है कि क्या आधार Verification के बिना तत्काल टिकट बुक नहीं किया जा सकता? ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के मामले में आधार आधारित Verification जरूरी है। हालांकि रेलवे काउंटर से टिकट लेने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। अगर कोई यात्री ऑनलाइन बुकिंग नहीं करना चाहता, तो वह रेलवे के टिकट काउंटर से उपलब्ध नियमों के अनुसार टिकट लेने का विकल्प चुन सकता है। इसलिए यात्रियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट बुकिंग के नियमों के बीच अंतर समझना चाहिए। तत्काल टिकट बुकिंग में अधिकृत एजेंटों के लिए भी रेलवे ने अलग नियम बनाए हैं। एजेंटों को तत्काल टिकट खुलते ही शुरुआती समय में बुकिंग करने की अनुमति नहीं होती। इसका उद्देश्य यह है कि आम यात्री को टिकट बुक करने का पहला मौका मिले। पहले कई यात्रियों की शिकायत थी कि टिकट खुलते ही बड़ी संख्या में सीटें बुक हो जाती हैं और आम लोगों के लिए बहुत कम विकल्प बचते हैं। एजेंटों पर समय सीमा और Verification नियम लागू करने से इस समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है। IRCTC खाता Verification कैसे करें? अगर आप अपना आईआरसीटीसी खाता Verification करना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बहुत मुश्किल नहीं है। आपको अपने खाते में जाकर पहचान Verification से जुड़े विकल्प को चुनना होता है। इसके बाद मांगी गई जानकारी भरनी होती है और मोबाइल पर आए पासवर्ड के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यह काम टिकट बुकिंग