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Travel News-PM Modi ने Sant Ravidas Express को दिखाई हरी झंडी, Varanasi से Amritsar तक आसान होगा सफर

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अगर आप Spiritual Travel के शौकीन हैं या North India में आरामदायक Train Journey का इंतज़ार कर रहे थे, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। PM Narendra Modi ने नई Sant Ravidas Express को हरी झंडी दिखाई है, जो Varanasi और Chheharta (Amritsar) के बीच सीधी कनेक्टिविटी देगी। इस नई Overnight Train से न सिर्फ़ सफर ज़्यादा Comfortable होगा, बल्कि Religious Tourism, Family Travel और Business Travel को भी बड़ा Boost मिलने की उम्मीद है। क्या है Sant Ravidas Express? Sant Ravidas Express एक नई Premium Sleeper Train है, जो उत्तर प्रदेश के Varanasi और पंजाब के Chheharta (Amritsar) के बीच चलेगी। यह Train दोनों राज्यों के लाखों यात्रियों के लिए बेहतर Connectivity लेकर आएगी और खासतौर पर उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद होगी जो धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं। Train Route और Major Stops यह Train अपने सफर के दौरान कई अहम शहरों से होकर गुज़रेगी। Varanasi Jaunpur City Sultanpur Lucknow Shahjahanpur Bareilly Moradabad Saharanpur Ambala Cantt Ludhiana Jalandhar City Amritsar Chheharta इन स्टेशनों की वजह से उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के यात्रियों को Direct Rail Connectivity मिलेगी। Train Schedule Varanasi से Chheharta Departure – 7:05 PM Arrival – अगले दिन 5:10 PM Chheharta से Varanasi Departure – 2:05 PM Arrival – अगले दिन 12:15 PM यह Train फिलहाल सप्ताह में तीन दिन चलेगी, जिससे यात्रियों को बेहतर Travel Planning का मौका मिलेगा। Passengers को क्या-क्या मिलेगा? नई Sant Ravidas Express में कई Modern Features दिए गए हैं। Fully Air-Conditioned Sleeper Coaches आरामदायक Berths Bio-Vacuum Toilets CCTV Surveillance Automatic Doors Passenger Information System बेहतर Safety Features इन सुविधाओं का मक़सद Overnight Journey को ज़्यादा Safe और Comfortable बनाना है। Religious Tourism को मिलेगा बड़ा Boost यह Train दो बेहद अहम धार्मिक शहरों को जोड़ती है। Varanasi – Kashi Vishwanath Temple, Ganga Ghats और शाम की Ganga Aarti के लिए दुनियाभर में मशहूर। Amritsar – Golden Temple, Jallianwala Bagh और Wagah Border Ceremony के लिए जाना जाता है। नई Direct Connectivity की वजह से Weekend Pilgrimage और Family Trips पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो जाएंगी। किन लोगों को होगा सबसे ज़्यादा फायदा? Pilgrimage करने वाले श्रद्धालु। Family Vacation प्लान करने वाले यात्री। Business Travellers। Students और Regular Passengers। उत्तर प्रदेश और पंजाब के बीच आने-जाने वाले लोग। Five Colors of Travel Tips अगर आप Varanasi जा रहे हैं, तो सुबह की Ganga Aarti और Kashi Vishwanath Corridor को अपनी Itinerary में ज़रूर शामिल करें। Amritsar पहुँचकर Golden Temple में सुबह या रात का वक़्त चुनें, उस समय का माहौल सबसे ज़्यादा सुकूनभरा होता है। Peak Season में Travel कर रहे हैं तो अपनी Train Tickets पहले से Book कर लें। Overnight Journey के लिए हल्का सामान और ज़रूरी Documents हमेशा साथ रखें। अगर समय हो, तो Amritsar में Jallianwala Bagh और Wagah Border Ceremony भी ज़रूर Explore करें। Sant Ravidas Express सिर्फ़ एक नई Train नहीं, बल्कि North India के दो बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों के बीच एक मज़बूत कड़ी है। इससे लाखों यात्रियों का सफर आसान होगा, Tourism को नई रफ़्तार मिलेगी और Comfortable Rail Travel का Experience भी बेहतर बनेगा। अगर आपकी Next Trip Varanasi या Amritsar की है, तो यह नई Train आपके Travel Plan को और भी Smooth बना सकती है।

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‎अमृतसर: डेस्टिनेशन ही नहीं, दिल को छू लेने वाला एक शहर

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कुछ शहर देखने के लिए होते हैं तो कुछ जीने के लिए और उन्हीं शहरों में से एक है अमृतसर, जो अपने भीतर इतिहास की झलक, संस्कृति की मिठास, श्रद्धा और पावनता समेटे खड़ा है। पंजाब की पावन धरती पर बसा यह शहर बना है आस्था, संघर्ष और अपनेपन की ऐतिहासिक समरूपता की भवना से। जब आप पहली बार अमृतसर की सड़कों पर कदम रखेंगे तो जैसे वहाँ की हवा भी कहती है- “स्वागत है, यहाँ आप अकेले नहीं हैं।” क्योंकि यहाँ आपको व्यक्तिगत तौर पर ही नहीं बल्कि एक नागरिक होने की भावना के लिहाज से भी अनूठा महसूस होगा। श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मन्दिर) ‎अमृतसर शहर का दिल, या यह कहें कि इसकी आत्मा.. तो वह है श्री हरिमंदिर साहिब, जिसे दुनिया ‘स्वर्ण मंदिर’ के नाम से जानती है। दिन की पहली किरण जब मंदिर के सोने से ढके गुंबदों पर पड़ती है, तो लगता है जैसे आसमान खुद इस पूरे शहर को आशीर्वाद दे रहा हो। मंदिर को चारों ओर से घेरे शांत जल का सरोवर- ‘अमृत सरोवर’ न केवल शहर के नाम का प्रतीक है, बल्कि एक ऐसी जगह है जहाँ बैठकर इंसान खुद से बातें कर सकता है। यहाँ कोई बड़ा या छोटा नहीं, सब एक समान हैं। सिर पर रुमाल बाँधे लोग नंगे पाँव चलकर यहाँ आते हैं और लंगर में बैठकर एक साथ भोजन करते हैं। वहाँ न जात देखी जाती है, न धर्म, वहाँ होती है तो केवल सेवा। हर रोज़ हज़ारों लोगों का भोजन बनाना, परोसना और साफ-सफाई करना, यह सब जिस समर्पण से किया जाता है, वही तो इस स्थान की खासियत है। बलिदान और संघर्ष की भूमि- अमृतसर अमृतसर केवल श्रद्धा और गुरुद्वारों का शहर नहीं, बलिदान और संघर्ष की भी भूमि है। स्वर्ण मंदिर से कुछ कदम की दूरी पर है जलियांवाला बाग, जिसकी दीवारें आज भी चीख-चीखकर उस दिन की गवाही देती हैं जब 1919 में निहत्थे, मासूम भारतीयों पर अंग्रेज़ों ने गोलियाँ बरसाईं। वह कुआँ, जिसमें लोग जान बचाने के लिए कूदे थे, आज भी वहाँ है। हर बार जब कोई पर्यटक वहाँ खड़ा होता है, तो एक गहरी चुप्पी उसे घेर लेती है। वो समझ पाता है कि आज़ादी सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक जंग थी जिसे हमने अपने खून से जीता है। जो हमें न जाने कितनी कुर्बानियों के बाद मिली है। वाघा बॉर्डर अमृतसर का एक पहलू है, देशभक्ति से लबरेज़ वाघा बॉर्डर। शाम के वक्त जब भारत और पाकिस्तान के सैनिक आमने-सामने खड़े होते हैं और कदमों की गूंज, तिरंगे की ऊँचाई, और देशभक्ति के नारे गूंजते हैं, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की रगों में जोश भर जाता है। यह एक सैन्य परंपरा होने के साथ एक भावनात्मक प्रदर्शन है जहाँ हर नागरिक एक सैनिक की तरह खड़ा होता है, जिसके हाथ में झंडा होता है और दिल में गर्व। जब आप अमृतसर जाएं, तो ऐसे मंज़र को भी महसूस कर सकते हैं। अमृतसर का खान-पान कहते हैं, दिल का रास्ता पेट से होकर गुज़रता है। अमृतसर अपने खान-पान के मामले में किसी जन्नत से कम है। यहाँ के अमृतसरी कुलचे, छोले, पराठें, स्वादिष्ट लस्सी और देसी घी की मिठाइयाँ- सब कुछ ऐसा है कि स्वाद ज़ुबान पर नहीं, सीधे दिल में उतरता है। पुराने शहर की गलियों में जब सुबह-सुबह तवे पर कुलचा सेंका जाता है, और पास ही ढाबे वाला आवाज़ लगाता है- “ओ जी, गरम-गरम कुल्चा लाओ!”, तो लगता है जैसे आप सिर्फ खाना नहीं खा रहे बल्कि इस शहर का एक हिस्सा बन गए हैं। अमृतसर के बाज़ार ‎यहाँ के बाज़ार, चाहे वो हॉल गेट हो, कटरा जामांदारा हो या गुरु बाज़ार; पंजाबी जूतियों, फुलकारी दुपट्टों और रंग-बिरंगे पटियालों से हमेशा सजे रहते हैं। हर दुकान से उठती पंजाबी गानों की बीट्स, दुकानदारों की हँसी और ग्राहकों की चहल-पहल मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो किसी त्योहार से कम नहीं लगता। अमृतसर की सबसे खास बात है, उसकी गर्मजोशी और अपनापन। यहाँ के लोग बिना जाने-पहचाने भी मुस्कुराकर बात करते हैं, रास्ता बताते हैं, और लस्सी का एक एक्स्ट्रा गिलास आपके सामने रख देते हैं। ये शहर आपको अपनी गोद में बिठाता है, और जब आप लौटने लगते हैं, तो आपके दिल में कुछ न कुछ छोड़ देता है। शायद एक याद, एक रंग, एक आवाज़, एक स्वाद- हाँ शायद लस्सी का! यात्रा से पहले जानने योग्य बातें: सबसे अच्छा समय : अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम सुहावना रहता है, यह समय अमृतसर की यात्रा के लिए अच्छा है।‎स्थान : अमृतसर, पंजाब (भारत-पाक सीमा से लगभग 28 किलोमीटर दूर) कैसे पहुँचे? ट्रेन, हवाईजहाज, या बस, तीनों विकल्प सुविधाजनक हैं।‎ठहरने के लिए जगहें : यहाँ हर बजट के अनुसार होटल मौजूद हैं। लेकिन स्वर्ण मंदिर के पास ठहरना, इस अनुभव को और खास बना देता है। ‎अमृतसर का बखान अगर एक वाक्य में करना हो, तो कहा जा सकता है कि- यह वो शहर है जहाँ आस्था, इतिहास, संस्कृति और आत्मीयता एक साथ देखने को मिलते हैं। और मिलता है अपनेपन का वो एहसास जो हमेशा याद रहे।

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Amritsar- आस्था और सुकून का शहर

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मुझे जब भी अपने व्यस्त शेड्यूल में या रोज़मर्रा की ज़िंदगी में थोड़े सुकून के पल चाहिए होते हैं तब अनायास ही यात्रा का ख्याल आता है। जब कभी ऐसा लगता है कि इस तनावपूर्ण और भागदौड़ भरी ज़िंदगी से थोड़ी निजात चाहिए तब मेरे पास अंतिम विकल्प यात्रा का ही बचता है। इस बार कार्यक्रम बना अमृतसर का। वो भी प्रसिद्ध त्यौहार बैसाखी के अगले दिन। स्टेशन से उतरते ही फ्री बस बैसाखी के त्यौहार की शुरुआत भारत के पंजाब राज्य से ही हुई है और इसे रबी की फसल की कटाई शुरू होने की ख़ुशी के रूप में मनाया जाता है। बैसाखी के दिन गोल्डन टेम्पल को जगमगाती लाइटों से सजाया जाता है। देश भर से सिख श्रद्धालु इस दिन अमृतसर पहुँचते हैं। बैसाखी से अगले दिन जाने का फायदा ये हुआ कि भीड़ इतनी नहीं थी। वैसे अमृतसर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च ही रहता है। हम हिसार से अमृतसर ट्रैन से पहुंचे। स्टेशन से उतरते ही बाहर फ्री बस सेवा का भी इंतेज़ाम रहता है जो ‘सतनाम वाहेगुरु’ के जयकारें लगाते हुए सीधे गोल्डन टेम्पल ले जाती है। गुरूद्वारे पहुँचते-पहुँचते रात के 11 बज चुके थे। हमनें अंदर परिसर में ही स्थित गंगा निवास में वातानुकूलित रूम बुक करवाया था। भले ही अप्रैल के महीने में ठीक-ठाक गर्मी होती है पर अंदर परिसर में ठंडक थी। थोड़ा आराम करने के बाद जैसे ही हमनें हरमंदिर साहिब में कदम रखा एक हमें अलग ही वातावरण की अनुभूति हुई। और लगा जैसे यहाँ आना पूरी तरह सार्थक हो गया। मेन हाल में दर्शन के लिए लम्बी-लम्बी लाइनें लगी हुयी थी। सुबह तड़के पालकी के दर्शन किये। दर्शन के लिए भले ही भीड़ कितनी ही क्यों न हो पर थकान जरा-सी भी नहीं होती, बस यही खासियत है यहाँ की। परमात्मा एक है और वो सब जगह मौज़ूद है।एक औंकार, सतनाम करता पुरख निरभउ निरवैर…… गोल्डन टेम्पल में दिन रात शब्द कीर्तन और गुरुबाणी चलती रहती है जो दुनिया की भाग दौड़ से थके हारे मन को रूहानी सुकून देती है। अद्भुत और अलौकिक गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार है जो इस बात के प्रतीक हैं की यहाँ के दरवाज़े हर धर्म के लोगो के लिए खुले हैं। रात में जगमगाती रौशनी में संगमरमर और सोने के आवरण से बना यह गुरुद्वारा अद्भुत और अलौकिक लगता है। दुनिया की सबसे बड़ी रसोई अंदर परिसर में ही दुनिया की सबसे बड़ी रसोई में से एक गुरु के लंगर में रोज़ाना हज़ारों लोग प्रशाद रूप में भोजन ग्रहण करते है। इतनी बेहतरीन व्यवस्था, इतना स्वाद और इतना अपनापन। सच में अद्भुत। इसी कारण कहते हैं अमृतसर में कोई भूखा नहीं सोता। पवित्र जल के तालाब के बीचों-बीच गुरुद्वारा साहिब है व चारों तरफ बड़ा-सा प्रांगण है। जहाँ आपको सैंकड़ों श्रद्धालु सिमरन करते मिल जायेंगे। गुरूद्वारे में एक भव्य म्यूजियम भी है जहां सिख धर्म से जुडी ऐतिहासिक चीज़ें रखी गयी है। गुरुओं की देन- अमृतसर शहर वैसे तो अमृतसर को देश विदेश में सब जानते हैं लेकिन दरबार साहिब (गोल्डन टेम्पल ) इस शहर की लाइफ लाइन है। पूरा अमृतसर शहर गोल्डन टेम्पल के इर्द गिर्द ही बसा हुआ है। अमृतसर शहर गुरुओं की देन माना जाता है। चौथे गुरु रामदास जी ने पांच सौ बीघा जमीन लेकर यह शहर बसाया था। तभी इसका नाम पड़ा रामदासपुर। महाराज रंजीत सिंह ने हरमिंदर साहिब पर उन्नीसवीं शताब्दी में सोने का आवरण चढ़वाया था और तब से अमृतसर को स्वर्ण नगरी भी कहा जाने लगा। एक शहर के तौर पर देखें तो यह सिर्फ अपने गुरुद्वारों के लिए प्रसिद्ध नहीं है बल्कि कौमी एकता का एक बेहतरीन उदाहरण भी है – यहाँ जहां एक तरफ बेहद खूबसूरत दुर्गियाना मंदिर है वहीँ आज़ादी की लड़ाई की गवाह दिल्ली की जामा मस्जिद जैसी दिखती खैरउद्दीन मस्जिद भी है। जहाँ हज़ारों लोग इबादत के लिए आते हैं।(Golden Temple, Amritsar) वाघा बॉर्डर अमृतसर शहर से 30-32 किलोमीटर एकऔर डेस्टिनेशन है वाघा बॉर्डर। यहाँ पर रोज़ शाम को दोनों देशों के सिपाहियों द्वारा बहुत ही जोशीले ढंग से अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज को वापिस उतरा जाता है। इस दौरान देशभक्ति का ऐसा रंग चढ़ जाता है जिसकी कल्पना करना भी सम्भव नहीं। यहाँ की ये जोशीली परेड देखने के लिए आपको समय से पहले ही जाना पड़ता है वरना भीड़ इतनी हो जाती है कि वहां पर खड़े होने की भी जगह नसीब नहीं होती। जलियावालां बाग अमृतसर में ही भारत की आज़ादी के इतिहास का साक्षी प्रसिद्ध जलियावालां बाग भी है। आज जलियावालां बाग एक पर्यटक स्थल बन गया है और रोजाना हजारों सैलानी इसे देखने आते हैं। यहाँ की दीवार पर आज भी उन गोलियों के निशान मौज़ूद हैं जो जनरल डायर ने निहत्थी भीड़ पर चलवाई थी जिसमे हज़ारों लोग मारे गए थे। अमृतसर शहर के पुराने बाजार आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जैसे किसी ज़माने में हुआ करते थे। आप शाम के समय पैदल ही बाजार की सैर पर निकल सकते हैं। भीड़-भाड़ वाले ये बाजार एक बार तो आपको चांदनी चौक की याद दिला देंगे। अगर आप खाने के शौकीन हैं तो अमृतसर आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं होगा। अमृतसर लस्सी, छोले भटूरे, राजमा चावल और पिन्नी का स्वाद पूरी दुनिया में मशहूर है। बात चाहे धार्मिक आस्था की हो, इतिहास की हो, संस्कृति की या फिर खानपान की, अमृतसर का कोई सानी नहीं। by Pardeep Kumar