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Matka Market: Buy Clay Home Decor Items – Delhi

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Matka Market- मटका मार्किट: डेकोरेटिव और ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स का हब Five Colors of Travel मशीनें हमें परफेक्शन तो दें सकती हैं लेकिन इमोशन्स नहीं, क्योंकि मशीनों के हमारी तरह दिल नहीं धड़कते। इमोशन्स को महसूस करने के लिए हम हस्तशिल्प वस्तुओं के पीछे लगी मेहनत को देख सकते हैं। मिट्टी से बना घड़ा भी किसी कला से कम थोड़ी है? हस्तशिल्प की इसी कला को देखने हम पहुंचे दिल्ली के सरोजनी नगर में बनी मटका मार्किट में। कैसे जाएं मटका मार्किट बड़े बाज़ारों के शोरगुल से दूर मटका मार्किट सरोजनी नगर मेट्रो स्टेशन से 1 किलोमीटर की दूरी पर बनी है। आप मेट्रो या बस किसी भी साधन से आसानी से मटका मार्किट पहुँच सकते हैं। डेकोरेटिव और ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स का हब मार्किट की शुरुवात होती है वैगटाइम शॉप से जो पॉट शॉप और डेकोरेटिव आइटम की दुकान है। दुकान के बाहर बेचने के लिए लगे छोटे-छोटे रंग-बिरंगे गमले दुकान को एक अलग ही लुक दे रहे थे। दुकान की बनावट में इस्तमाल वुडेन वर्क भी खूब अट्रैक्ट कर रहा था। दुकान के अंदर जितना अच्छा सामान था उतनी ही दुकान के बाहरी दीवार पर बनी आर्ट अच्छी लग रही थी, लेकिन इस दुकान पर सारा सामान हस्तशिल्प नहीं था। नई जनरेशन को देखते हुए और डिमांड के हिसाब से यहाँ भी कुछ दुकानदार रेडीमेड प्रोडक्ट रखने लगे हैं। वैगटाइम शॉप के बाद सफर शुरू होता है हाथों से बनी मटका मार्किट का। जहाँ तक नज़र जा रही थी मिट्टी से बना सामान दिख रहा था। आपको बता दें मटका मार्किट में काम करते हुए लोगों को 50 वर्ष से अधिक हो गए हैं। एक दुकान के मालिक ने बताया कि हम पीढ़ी दर पीढ़ी यहीं काम करते आ रहे हैं, पहले हमारे दादा, फिर पिता और अब हम इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। वैसे आम ग्राहकों के लिए भले ही यह सिर्फ एक मार्किट हो लेकिन यहाँ के दुकानदारों के लिए यही उनका घर भी है। यहां काम कर रहे बहुत से लोगों ने बताया की वह रहते भी यहीं हैं। देखने पर मार्किट सड़क के एक छोर से शुरू और दूसरे छोर पर खत्म होती दिखती है लेकिन मिट्टी की उम्दा हस्तशिल्प कला देखते-देखते न ही दुकाने खत्म होंगी और न ही उसमें रखा सामान। आपको हर दुकान पर कु  नया और उम्दा देखने को दिखेगा। यहां न सिर्फ दुकानों में रखा सामान बल्कि दुकानें भी बिल्कुल ऑथेंटिक हैं, कुछ दुकानें बांस और छप्पर से बनी हुई हैं जबकि कुछ बिल्कुल कच्ची हैं। दिवाली फेस्टीवल में होती है दुनिया भर की वैरायटी सुबह के 10 बजे से रात के 10 बजे तक लगने वाली मटका मार्किट में मिट्टी से बने जितने प्रकार की चीज़ो का आप अंदाजा लगा सकते हैं वो सब पलक झपकते ही यहां मिल जाएगा। फिर चाहे वो छोटा-सा दिया हो या किसी प्रकार का, डिज़ाइन का बड़ा गमला। दीवाली पर तो यहाँ की रौनक देखते ही बनती है। अगर आप दिवाली फेस्टीवल के समय यहाँ आएंगे तब आपको दुनिया भर की नई वैरायटी भी देखने को मिल जाएँगी। इस मार्किट में हर तरह का मटका, बुद्ध-गणेश से लेकर शिव-पार्वती और सरस्वती की मूर्तियां, फूलदान, गमले, अचार की बरनी, शो-पीस, विभिन्न प्रकार के जानवर के आकार का समान रखने वाला, सुंदर-सी परी और भी न जाने क्या-क्या यहाँ मिलता है। मटका मार्किट में राजस्थान, मणिपुर, बिहार और न जाने भारत के कितने राज्यों से कच्चा सामान आता है और उस कच्चे समान पर काम करके उसे फिनिशिंग मटका मार्किट में दी जाती है. जयपुर ब्लू पॉटरी’, ‘कागज़ी’ और ‘मणिपुर ब्लैक पॉटरी’ कुछ ऐसा है जिसे देख आप ‘वाह’ कहने पर मजबूर हो जाएंगे। (Matka Market, Sarojini Nagar, Delhi) Matka Market, Sarojini Nagar, New Delhi मटका मार्किट में न सिर्फ लोग घरेलू डेकोरेशन के सामान के लिए आते हैं बल्कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के दुकानदार भी यहीं से समान ले जाते हैं। इस मटका मार्किट में बहुत कम और जायज कीमत पर ही सामान मिलता है। एक छोटा सा शो-पीस 10 रूपय में और एक बड़ी और विशाल मूर्ति 1100-1500 तक में मिल जाती है। किस सामान की क्या कीमत होगी ये मौसम और खरीदने की मात्रा पर भी निर्भर करता है। जितनी ज्यादा मात्रा उतनी कम कीमत। बल्क में सामान लेने का फायदा मिलता है। दिल्ली जैसे शहर में इस तरह की मार्किट आपको कम ही दिखाई देंगी। इसलिए घर के डेकोरेशन को नया लुक देने का या कुछ ट्रेडिशनल खरीदने का दिल करे तो मटका मार्किट से बेहतर कुछ नहीं। Research by Geetu Katyal Edited By Pardeep Kumar