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Top 5 National Parks in Madhya Pradesh

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मध्य प्रदेश भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक है और वन क्षेत्र के आधार पर यह भारत का सबसे अधिक वन विस्तार वाला राज्य है। ऐसे में यहां नेशनल पार्क और वन्य जीव अभ्यरण्यों की संख्या भी बहुत अधिक है। वैसे तो मध्य प्रदेश में 11 नेशनल पार्क हैं, लेकिन कुछ नेशनल पार्क्स ऐसे हैं जो बहुत हीं खास और खूबसूरत हैं। फाइव कलर्स का ट्रेवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख नेशनल पार्क (5 National Parks of Madhya Pradesh) के बारे में जहां एक बार जाना तो बनता है। 1. कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है। बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। कैसे पहुंचे कूनो राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kuno National Park)? 2. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान (Satpura National Park) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित है। सतपुड़ा नेशनल पार्क लगभग 524 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1981 में हुई थी। यह नेशनल पार्क एक टाइगर रिजर्व भी है तथा बोरी और पंचमढ़ी अभ्यारण्य के साथ अपनी सीमा साझा करता हैं। इसी नेशनल पार्क में धूपगढ़ चोटी (1350 मीटर) अवस्थित हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे बाघ, तेंदुआ, सांभर, चौसिंगा, भेडकी, नीलगाय, चीतल, चिंकारा, लोमड़ी, जंगली सुअर, साही, भालू, काला हिरण, गौर, जंगली कुत्ता, उड़न गिलहरी, मूषक मृग और भारतीय विशाल गिलहरी शामिल हैं। कैसे पहुंचे सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Satpura National Park)? 3. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। कैसे पहुंचे बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Bandhavgarh National Park)? 4. पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां पर पीफोल, कोपीजेन्ट, रेड जंगल फोल, रेड वेन्टेड बुलबुल, बेस्ट डबारबेट, क्रीमसन, मेंगपाई राबिन, रॉकेट टेल डोगों, व्हिस्टल टील, लेसर आदि पक्षियों की प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। पेंच नदी इस उद्यान को दो भागों में बाँटती है। पेंच टाइगर रिज़र्व को भारत का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिज़र्व होने का गौरव प्राप्त है। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘द जंगल बुक’ इसी पार्क पर आधारित है। कैसे पहुंचे पेंच राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Pench National Park)? 5. कान्हा-किसली राष्ट्रीय उद्यान (Kanha–Kisli National Park) कान्हा नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। यह नेशनल पार्क अपने बारहसिंगा (Reindeer) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 940 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सर्वप्रथम कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को 1 जून 1955 को नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। इसके पश्चात 1973 में इसे टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। कान्हा नेशनल पार्क में बारहसिंगा के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे बाघ, सारस, भेड़िया, छोटी बत्तख, चिन्कारा, भारतीय पेंगोलिन शामिल है। कैसे पहुंचे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kanha National Park)?

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बांधवगढ़ नेशनल पार्क जहां आप देख सकते हैं बेख़ौफ़ बंगाल टाइगर्स को

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मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है।वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इतिहास (History)बांधवगढ़ का यह इलाका आजादी से पहले राजा महाराजाओं के लिए शिकार का स्थान हुआ करता था। लेकिन आजादी के बाद यहां के महाराज मार्तंड सिंह के अनुरोध पर सरकार ने इस क्षेत्र को बंधवगढ़ अभ्यारण घोषित कर दिया।इसके बाद 1968 में बांधवगढ़ अभयारण्य क्षेत्र को नेशनल पार्क की उपाधि दे दी गई और 1993 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया।इस क्षेत्र का नाम विंध्याचल के पहाड़ी पर बने हुए बांधवगढ़ किले के नाम पर बांधवगढ़ रखा गया। वैसे तो आज के समय में बांधवगढ़ किला सिर्फ खंडहर के रूप में बच गया है लेकिन यह आज भी विंध्याचल के गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है। बांधवगढ़ में जंगल सफारी के लिए दो तरह के टूर पैकेज उपलब्ध हैं। पहला टूर पैकेज दो रातों और तीन दिनों का है। वही दूसरा टूर पैकेज तीन रातों और चार दिनों का है। पहले टूर पैकेज के तहत आपका टूर प्लान कुछ इस प्रकार का होगा : पहले दिन आप बांधवगढ़ पहुंचेंगे जहां आपको रिजॉर्ट में रुकने के लिए दिया जाएगा। इसके बाद आपको दिन का लंच दिया जाएगा। लंच करने के बाद आप शाम को अपने रिजॉर्ट के आसपास के इलाकों में टहल सकते हैं और फिर रात को डिनर करके आप रिजॉर्ट में ही आराम करेंगे।पैकेज के दूसरे दिन आप सुबह-सुबह जिप्सी में सवार होकर जंगल सफारी के लिए निकल जाएंगे। रास्ते में ही आपको ब्रेकफास्ट दिया जाएगा। जंगल सफारी के बाद आप वापस लौटेंगे और लंच करेंगे। लंच करने के बाद आप फिर से जंगल सफारी के लिए निकल जाएंगे। शाम को जंगल सफारी करके लौटेंगे और रिजॉर्ट में रात का भोजन करके आराम करेंगे।तीसरा दिन आपके टूर पैकेज का आखिरी दिन होगा जिसमें आप सुबह नाश्ता करके आप अपने स्टेशन के लिए चेक आउट कर जाएंगे। दूसरे टूर पैकेज के तहत भी आपका टूर प्लान कुछ इसी प्रकार का होगा। आप पहले दिन बांधवगढ़ नेशनल पार्क पहुंचेंगे और वहीं के रिजॉर्ट में ठहरेंगे।दूसरे और तीसरे दिन जंगल सफारी पर जाएंगे। जिसमें दोनों दिन आप दो-दो जंगल सफारी करेंगे। एक लंच से पहले और एक लंच के बाद। चौथे दिन आप अपने घर के लिए वापस लौट जाएंगे। बांधवगढ़ नेशनल पार्क जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Bandhavgarh National Park) अगर आप भी बांधवगढ़ नेशनल पार्क जाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे सही समय ठंड के मौसम में होता है। इसलिए आप अक्टूबर से मार्च तक के बीच कभी भी यहाँ जंगल सफारी के लिए जा सकते हैं। इस समय टेंपरेचर बहुत ज्यादा नहीं होता है। जिसके कारण जंगल सफारी करना आसान हो जाता है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क कैसे पहुंचे (How to reach Bandhavgarh National Park)? अगर आप हवाई मार्ग से बांधवगढ़ नेशनल पार्क पहुंचाना चाहते हैं तो आपको जबलपुर हवाई अड्डा के लिए फ्लाइट की टिकट बुक करवानी होगी। जबलपुर हवाई अड्डा पहुंचकर वहां से आपको बांधवगढ़ नेशनल पार्क के लिए बाय रोड जाना होगा। जबलपुर हवाई अड्डा से बांधवगढ़ नेशनल पार्क की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है। इसे आप अपनी सुविधा अनुसार लोकल ट्रांसपोर्ट या फिर कैब के द्वारा तय कर सकते हैं।अगर आप रेल मार्ग के द्वारा बांधवगढ़ पहुंचाना चाहते हैं तो बांधवगढ़ नेशनल पार्क से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उमरिया रेलवे स्टेशन और कटनी रेलवे स्टेशन हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क से उमरिया रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। वहीं कटनी रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 100 किलोमीटर की है।आप बाय रोड भी बांधवगढ़ नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं।

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MP के इन जगहों पर भारतीय स्थापत्य कला और प्राकृतिक खूबसूरती की दिखती है झलक

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मध्य प्रदेश में भारत के कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं जो न सिर्फ आर्कियोलॉजिस्ट को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, बल्कि सामान्य पर्यटकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। सबसे अधिक क्षेत्रफल पर वन होने के कारण मध्य प्रदेश में कई सारे नेशनल पार्क्स भी हैं। इसी वजह से यह राज्य प्राकृतिक रूप से भी सुंदर और मनमोहक है। अगर आप भी मध्य प्रदेश घूमना चाहते हैं तो हम आपको बताने वाले हैं मध्य प्रदेश के कुछ ऐसे जगहों के बारे में जहाँ एक बार जाना तो बनता है। 1. उज्जैन (Ujjain) इस शहर को महाकाल की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। मध्य प्रदेश के इस शहर को पहले पूरे भारतवर्ष में अवंतिका नगरी कहा जाता था। यह शहर महाकालेश्वर महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। भारत के कोने-कोने से लोग यहां महाकालेश्वर महादेव के दर्शन करने और उनकी पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं। इस शहर में इसके अलावा और भी कई पर्यटन स्थल हैं। जिनमें रामघाट, काल भैरव मंदिर और मंगलनाथ मंदिर प्रमुख हैं। कैसे पहुंचे उज्जैन (How to reach Ujjain) : उज्जैन पहुंचाना बहुत हीं आसान है, क्योंकि शहर का अपना रेलवे स्टेशन भी है। जहां देश के अलग-अलग राज्यों से ट्रेनें आती हैं। इसके अलावा अगर आप फ्लाइट से उज्जैन पहुंचाना चाहते हैं तो आप इंदौर एयरपोर्ट के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। इंदौर उज्जैन से लगभग 50 किलोमीटर की ही दूरी पर स्थित है। इसलिए आप बहुत ही आसानी से इंदौर से उज्जैन पहुंच सकते हैं। उज्जैन शहर सड़क मार्ग के द्वारा भी देश के अन्य राज्यों से बहुत अच्छे से जुड़ा हुआ है। आप उज्जैन अपनी गाड़ी से भी आ सकते हैं। 2. मैहर माता मंदिर सतना (Maihar Mata Temple Satna) त्रिकूट पर्वत की ऊंचाइयों पर स्थित मैहर मंदिर की कहानी आदिशक्ति सती के आत्मदाह से जुड़ी हुई है। देश के 108 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ (Shaktipeeth) त्रिकूट पर्वत के इस पहाड़ी पर भी स्थित है। जिस स्थान पर इस मंदिर का निर्माण करवाया गया है। बताया जाता है कि इस स्थान पर माता का हार टूट कर गिरा था, इसलिए इस जगह को मैहर का नाम दिया गया। यह मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिला के त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित है। जहां तक पहुंचाने के लिए भक्तों को पहाड़ी पर चढ़ाई करनी होती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे भारत में माता शारदा का यह इकलौता मंदिर है। इस मंदिर में माता शारदा के साथ ही अन्य देवी देवताओं की पूजा भी की जाती है। 3. खजुराहो (Khajuraho) इस स्थान को मध्य प्रदेश का सम्मान माना जाता है। यह वही स्थान है जहां आपको विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों से समृद्ध मंदिरों का समूह देखने को मिलता है। मध्य प्रदेश का खजुराहो भारत के प्राचीन कालीन इतिहास को बखूबी बयां करता है। खजुराहो के मंदिरों के समूह का निर्माण आज से लगभग 1300 साल पहले हुआ था। मंदिरों पर बनाई गई कलाकृतियां यह दर्शाती हैं कि हमारा भारत आज से हजार साल पहले भी कितना मॉडर्न (modern) था।खजुराहो में आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम (Archaeological Museum) है, जहां आपको कई सारे छोटे बड़े मंदिरों का समूह देखने को मिलेंगे। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम के इस एरिया को पश्चिमी मंदिर समूह के नाम से भी जाना जाता है। आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम में जैसे ही आप इंटर करेंगे आपको बहुत ही खूबसूरत से गार्डन से होकर गुजर कर जाना होगा। यहाँ के मंदिरों में कंदरिया मंदिर, मतंगेश्वर मंदिर, लक्ष्मण मन्दिर, विश्वनाथ मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर और विष्णु गुप्त मंदिर प्रमुख हैं। 4. भोपाल (Bhopal) इस शहर को महाराजा भोज की नगरी के नाम से जाना जाता है। यह शहर आज के समय में मध्य प्रदेश की राजधानी है और इस शहर को एक अच्छा टूरिस्ट डेस्टिनेशन माना जाता है। क्योंकि यहां के टूरिस्ट प्लेसेस इतने बेहतरीन हैं कि यहां आने वाले लोगों को यही का हो कर रह जाने का मन करने लगता है। अगर आपको भी कभी मौका मिले मध्य प्रदेश जाने का तो आप एक बार भोपाल जरुर विजिट करें। (Visiting places of Bhopal) भोपाल की घूमने लायक जगहों की सूची में अपर लेक (Upper Lake), वन विहार (Van Vihar), सैर सपाटा (Sair Sapata), गौहर महल (Gauhar Mahal), मध्य प्रदेश ट्राईबल म्यूजियम (Madhya Pradesh Tribal Museum), पीपल्स मॉल (People’s Mall), भीमबेटका की गुफ़ाएँ (Bhimvetka caves), ताज उल मस्जिद (Taj ul Masjid) और सांची स्तूप (Sanchi Stupa) का नाम आता है। 5. कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है। बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचे (How to reach Kuno National Park) ग्वालियर एयरपोर्ट कूनो नेशनल पार्क के सबसे नजदीक स्थित एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट देश के अन्य शहरों जैसे दिल्ली, कोटा, पटना, जयपुर आदि से भली भांति जुड़ा हुआ है। दिल्ली एयरपोर्ट से ग्वालियर के लिए फ्लाइट लगभग ₹2000 से ₹3000 तक की आती है। आप नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से भी ग्वालियर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप बाय रोड भी कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं।