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भारत के 5 National Parks, जहाँ मिलेगा वन्यजीव और प्रकृति का अनुभव

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भारत अपने विशाल भू-भाग, अलग-अलग जलवायु और अनोखी भौगोलिक विविधता के कारण दुनिया के सबसे समृद्ध वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में गिना जाता है। हिमालय की ऊँची पहाड़ियों से लेकर पश्चिमी घाट के घने जंगलों तक, और रेगिस्तानी इलाकों से लेकर मैंग्रोव वनों तक, यहाँ प्रकृति ने हर रूप में अपनी खूबसूरती बिखेरी है। यही वजह है कि देश के राष्ट्रीय उद्यान न केवल दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों का सुरक्षित आश्रय स्थल हैं, बल्कि वे प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और रोमांच के शौकीनों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। (Indian National Parks) इन उद्यानों में आपको शेर, बाघ, गैंडे, हाथी और अनगिनत पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिलता है, जो किसी भी जंगल सफारी को यादगार बना देता है। नीचे हम ऐसे 5 प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के बारे में बता रहे हैं, जहाँ जाकर आप भारत की समृद्ध जैव विविधता, असली जंगल-जीवन और वन्यजीवों के बेहद करीब रहने का अद्भुत अनुभव हासिल कर सकते हैं। Jim Corbett National Park- भारत का सबसे प्राचीन राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित भारत और मुख्य भूमि एशिया का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे 1936 में ‘हेली नेशनल पार्क’ के रूप में स्थापित किया गया था। शिकारी से संरक्षणवादी बने जिम कॉर्बेट के नाम पर प्रसिद्ध यह पार्क मुख्य रूप से रॉयल बंगाल टाइगर और एशियाई हाथियों के लिए जाना जाता है, जहाँ वर्तमान में भारत में बाघों की संख्या सबसे अधिक (260) दर्ज की गई है। लगभग 1,318 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को रामगंगा नदी, घास के मैदान जिन्हें ‘चौड़’ कहा जाता है, और घने साल के जंगल और भी बढ़ा देते हैं। यहाँ पर्यटन के लिए ढिकाला, बिजरानी और झिरना जैसे छह प्रमुख पारिस्थितिकी पर्यटन क्षेत्र (zones) हैं, जहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक होता है, लेकिन बाघों को देखने के लिए मई का महीना सबसे आदर्श माना जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में सर्दियों के दौरान पार्क के आस-पास के गाँवों में बाघों के हमलों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जो संरक्षण और स्थानीय सुरक्षा के बीच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। Kaziranga National Park- गैंडे और जैव विविधता का खज़ाना असम में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जो पूरी दुनिया में एक सींग वाले गैंडों की लगभग दो-तिहाई आबादी का घर होने के लिए मशहूर है। यहाँ गैंडों के अलावा रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, जंगली भैंस और बारहसिंगा जैसे ‘बिग फाइव’ जानवर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं और हाल के सालों में यहाँ बाघों की संख्या बढ़कर 148 हो गई है। जहाँ एक तरफ पार्क प्रशासन ने शिकार (पोचिंग) को काफी हद तक नियंत्रित करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है, वहीं दूसरी ओर इसे जलवायु परिवर्तन की वजह से आने वाली भयानक बाढ़, राजमार्ग पर ट्रैफिक से होने वाली जानवरों की मौत और अनियंत्रित पर्यटन (टूरिज्म) के दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि पार्क का प्रबंधन काफी प्रभावी माना जाता है और सुरक्षा के लिए ड्रोन एवं सेंसर जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन भविष्य में इसकी पारिस्थितिक अखंडता बनाए रखने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी और बेहतर बुनियादी ढांचे की ज़रूरत महसूस की जा रही है। Kanha National Park- बाघों और बारासिंघा का घर कान्हा नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रमुख टाइगर रिजर्व है, जो विशेष रूप से अपने शाही बंगाल बाघों और लुप्तप्राय ‘बारहसिंघा’ (हार्ड-ग्राउंड स्वैम्प डियर) के सफल संरक्षण के लिए दुनिया भर में मशहूर है। लगभग 940 वर्ग किलोमीटर के कोर क्षेत्र में फैला यह जंगल ‘भूरसिंह द बारहसिंघा’ को अपने आधिकारिक शुभंकर (mascot) के रूप में पेश करता है, जो भारत में किसी भी टाइगर रिजर्व के लिए अपनी तरह की पहली पहल है। यहाँ का सुंदर दृश्य ऊंचे साल के पेड़ों, बांस के जंगलों और घास के मैदानों (मैदानों) से भरा हुआ है, जो न केवल बाघों बल्कि तेंदुओं, जंगली कुत्तों और 350 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों के लिए एक आदर्श घर है। पर्यटक यहाँ कान्हा, किसली, मुक्की और सरही जैसे ज़ोन में सफारी का आनंद ले सकते हैं, और यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से जून के बीच होता है, जहाँ गर्मियों में पानी के स्रोतों के पास बाघों को देखने की संभावना सबसे अधिक होती है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यहाँ की सुनहरी रोशनी और प्राकृतिक विविधता इसे एक बेहतरीन गंतव्य बनाती है। Manas National Park- जैव विविधता का जीवंत बायोस्फीयर रिज़र्व असम के उत्तर-पूर्व में स्थित मानस राष्ट्रीय उद्यान भारत का एक प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जिसे नेशनल पार्क के साथ-साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, टाइगर रिजर्व और बायोस्फीयर रिजर्व का गौरव प्राप्त है। मानस नदी के किनारे बसा यह पार्क बाघ, एशियाई हाथी, एक सींग वाला गैंडा, और दुर्लभ पिग्मी हॉग जैसे कई लुप्तप्राय जानवरों का घर है। यहाँ की समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता में पक्षियों की 327 से अधिक प्रजातियाँ और घने पर्णपाती वन शामिल हैं। हालांकि, 1980 के दशक से 2000 की शुरुआत तक चले गृह-युद्ध और नागरिक अशांति की वजह से यहाँ के वन्यजीवों और जंगलों को भारी नुकसान पहुँचा था, जिसके चलते इसे ‘खतरे में’ (In Danger) सूची में डाल दिया गया था, लेकिन स्थानीय समुदायों और सरकार के सफल संरक्षण प्रयासों के बाद 2011 में इसे पुनः गौरव मिला। वर्तमान में, यह पार्क भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क के साथ मिलकर एक बड़ा सीमा-पारीय (transboundary) सुरक्षित क्षेत्र बनाता है, जो वन्यजीवों के मुक्त आवागमन और संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। Sundarbans National Park- मैन्ग्रोव जंगलों की दुनिया सुंदरवन दुनिया का सबसे बड़ा निरंतर मैंग्रोव जंगल और एक यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल है, जो भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह अनोखा क्षेत्र अपने खास रॉयल बंगाल टाइगर्स के लिए प्रसिद्ध है, जो यहाँ के खारे पानी, ज्वार-भाटे और दलदली वातावरण में रहने के लिए पूरी तरह ढल चुके हैं। सुंदरवन में बाघों के अलावा गंगा और इरावदी डॉल्फिन, खारे पानी के मगरमच्छ, वॉटर मॉनिटर छिपकली और सैकड़ों प्रकार के दुर्लभ पक्षी भी

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15 Best National Parks of India

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ चुनिंदा नेशनल पार्क्स के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. पेरियार नेशनल पार्क (Periyar National Park) पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है। 2. गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के घूम रहे बब्बर शेर, गुजरात के सोमनाथ जिले में स्थित गिर नेशनल पार्क की पहचान हैं। यहां मैमल्स (mammals) के 38 प्रजाति पक्षियों (birds) के 300 से अधिक प्रजाति रेप्टाइल्स (reptiles) के साथ इस प्रजाति और इनसेक्टस (insects) के 2,000 से भी ज्यादा प्रजाति पाए जाते हैं। यह नेशनल पार्क सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले पौधों के विविधता के लिए भी मशहूर है। 3. दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 490 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1977 में हुई थी। इस राष्ट्रीय उद्यान का उद्देश्य बारहसिंघा का संरक्षण करना है। यहां पर बाघ, बारहसिंघा, सुस्त भालू, एक सींग वाले गैंडे और 400 से अधिक पक्षी प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। सुहेली नदी और मोहाना नदी इस उद्यान की जीवन रेखा का कार्य करती है। इन नदियों में गंगेटिक डॉल्फिन भी निवास करती है। 4. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 5. सुंदरवन नेशनल पार्क (Sundarban National Park) सुंदरवन नेशनल पार्क विश्व के सबसे बड़े डेल्टाई क्षेत्र (सुंदरवन डेल्टा) में स्थित है। यह नेशनल पार्क अपने रॉयल बंगाल टाइगरों (Royal Bengal Tigers) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 1330 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।सर्वप्रथम सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान को 1973 में मूल सुंदरवन बाघ रिज़र्व क्षेत्र का कोर क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इसके पश्चात 1977 में इसे वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। तथा बाद में 4 मई 1984 को इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। सुंदरवन नेशनल पार्क में रॉयल बंगाल टाइगरों के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे बर्ड्स (Birds), रेप्टाइल्स (Reptiles) और इनवर्टेब्रेट्स (Invertebrates) शामिल है। इसके अलावा यहाँ साल्ट वाटर (Salt Water) में रहने वाले मगरमच्छ भी पाए जाते है। 6. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। 7. पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां पर पीफोल, कोपीजेन्ट, रेड जंगल फोल, रेड वेन्टेड बुलबुल, बेस्ट डबारबेट, क्रीमसन, मेंगपाई राबिन, रॉकेट टेल डोगों, व्हिस्टल टील, लेसर आदि पक्षियों की प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। पेंच नदी इस उद्यान को दो भागों में बाँटती है। पेंच टाइगर रिज़र्व को भारत का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिज़र्व होने का गौरव प्राप्त है। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘द जंगल बुक’ इसी पार्क पर आधारित है। 8. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। 9. ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (Great Himalayan National Park) ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (GHNP) पर्यटकों की मनपसंद जगहों में से एक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है। यह नेशनल

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10 Best National Parks of India

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं भारत के कुछ चुनिंदा नेशनल पार्क्स के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के घूम रहे बब्बर शेर, गुजरात के सोमनाथ जिले में स्थित गिर नेशनल पार्क की पहचान हैं। यहां मैमल्स (mammals) के 38 प्रजाति पक्षियों (birds) के 300 से अधिक प्रजाति रेप्टाइल्स (reptiles) के साथ इस प्रजाति और इनसेक्टस (insects) के 2,000 से भी ज्यादा प्रजाति पाए जाते हैं। यह नेशनल पार्क सिर्फ जानवरों के लिए नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले पौधों के विविधता के लिए भी मशहूर है। 2. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। 3. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। 4. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। 5. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) चारों तरफ घने जंगल और स्वतंत्र रूप से बिना किसी डर के रह रहे जंगली जानवर!  वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की यही खासियत लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हैं। बापू के पहले सत्याग्रह की भूमि पश्चिम चंपारण, उपजाऊ भूमि के साथ-साथ टाइगर रिजर्व के लिए भी मशहूर है। यहां स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक राष्ट्रीय उद्यान है, जिसका उद्देश्य बाघों का संरक्षण करना है। जंगल सफारी के शौकीन लोगों के घूमने के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ बिहार का इकलौता राष्ट्रीय उद्यान है। यहां बाघों की अनुमानित संख्या लगभग 50 है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी भी की जा सकती है। यहां जंगल सफारी के लिए एक जीप में अधिकतम 6 लोगों को सीट दी जा सकती है। 6. कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है।  बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। 7. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। 8. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbette National Park) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे पहले हैली नेशनल पार्क भी कहा जाता था। यह हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है। यह उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी करीबन 250 किलोमीटर है। यहां पर आप किसी भी साधन से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते है। यहां पर आपको 2000 से भी ज्यादा रंग बिरंगी तितलियों की प्रजातियां मिल जाएगी। आप यहां किफायती दाम में होटल या रिसोर्ट में भी रुक सकते हैं। यह कॉर्बेट

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बेहतरीन पर्यटन स्थलों से भरा हुआ है पूर्वोत्तर का गेटवे असम

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भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य असम अपने खूबसूरत वादियों और चाय के बागानों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। असम में बर्फीले सफेद ऊंचे पहाड़ भी हैं और हरे भरे चाय के बागान भी, यहां रिलिजियस टूरिज्म को बढ़ावा देने वाले मंदिर भी हैं और कई वन्य जीव अभ्यारण्य भी। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहे हैं असम के कुछ फेमस टूरिस्ट प्लेस के बारे में, जहां एक बार जाना तो बनता है। 1. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और अगर इसके भौगोलिक परिस्थितियों की बात की जाए तो यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे कार्बी की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले असम के गुवाहाटी शहर तक पहुंचना होगा। काजीरंगा नेशनल पार्क असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 194 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप यहां फ्लाइट से आना चाहते हैं तो आप गुवाहाटी हवाई अड्डे तक की फ्लाइट ले सकते हैं।  2. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी।  मानस नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आप सड़क रेल और हवाई तीनों ही मार्गों का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप हवाई मार्ग से मानस नेशनल पार्क पहुंचना चाह रहे हैं तो आपको सबसे पहले गुवाहाटी एयरपोर्ट पहुंचना होगा। जो कि असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित है। रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बरपेटा रेलवे स्टेशन है जो मानस नेशनल पार्क से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप मानस नेशनल पार्क जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करना चाहते हैं तो सिलीगुड़ी गलियारा के द्वारा बड़े ही आसानी से मानस नेशनल पार्क तक पहुंचा जा सकता है। 3. दिसपुर (Dispur) असम के दिसपुर शहर को उसके खूबसूरत प्राकृतिक नजारों और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के लिए जाना जाता है। इस शहर में कई ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशंस हैं जिनकी ओर पर्यटकों का मुख्य रूप से रुझान होता है। अगर आप असम आ रहे हैं तो आप इस शहर को घूमना बिल्कुल भी मिस नहीं कर सकते हैं। वरना असम का टूर आपके लिए अधूरा माना जाएगा। दिसपुर के टूरिस्ट प्लेस में से एक है सूअल्कुची गांव। इस गांव के लोग बहुत ही साधारण और आम जीवन जीने वाले लोग हैं। इस गांव को पूर्व का मैनचेस्टर भी कहा जाता है। असम घूमने आने वाले पर्यटकों को इस गांव में एक बार जरूर जाना चाहिए। यह गांव रेशम के उत्पादन के लिए भी काफी मशहूर है। दिसपुर के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में कामाख्या देवी मंदिर का भी नाम आता है। जो राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। जहां दूर-दूर से लोग देवी कामाख्या की आराधना करने के लिए आते हैं। भारत के सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या शक्तिपीठ। कामाख्या शक्तिपीठ के अलावा दिसपुर में एक और प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। जिसका नाम है सिद्धेश्वर देवालय जो सुअल्कुची गांव में स्थित है। इस मंदिर में कई देवी देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन विशेष रूप से यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। जनार्दन टेंपल दिसपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसका निर्माण दसवीं शताब्दी में करवाया गया था और 17वीं शताब्दी में इसका जीर्णोद्धार करवाया गया था। अगर इस मंदिर के वास्तुकला की बात करें तो यहां बौद्ध और जैन दोनों तरह के वास्तुकलाओं का संगम देखने को मिलता है। इसके अलावा दिसपुर में वशिष्ठ आश्रम भी है। इसके बारे में बताया जाता है कि इस आश्रम का संबंध रामायण काल के गुरु वशिष्ट से है। दिसपुर में असम स्टेट जॉन बोटैनिकल गार्डन भी है। जहां आप कई तरह के पेड़ पौधों के साथ-साथ पक्षियों के प्रजातियों को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं। 4. माजुली द्वीप (Majuli Island) माजुली आईलैंड दुनिया का सबसे बड़ा नेचुरल रिवर आईलैंड है, जोकि ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित है। अगर आप माजुली आईलैंड घूमना चाहते हैं तो इसके लिए आपको निमती घाट से फेरी के जरिए लगभग डेढ़ घंटे का सफर करके माजुली आईलैंड पहुंचना होगा। अगर आप फेरी नहीं लेना चाहते तो आप बाय ब्रिज भी माजुली आईलैंड जा सकते हैं। जिसके लिए डिब्रूगढ़ के पास से ही एक ब्रिज जाती है। माजुली आईलैंड के खास होने के पीछे और भी कई सारे कारण हैं। जिनमें से सबसे प्रमुख कारण यहां का शांत माहौल और यहां की संस्कृति है। यहां के लोग बहुत हीं सीधे-सादे और सरल व्यक्तित्व के होते हैं। अगर आप शहरों के पॉल्यूशन और शोर सराबे से दूर कुछ दिन शांति से बिताना चाहते हैं तो माजुली आईलैंड का टूर आपके लिए बहुत ही बेहतरीन साबित होगा। माजुली आईलैंड से सनराइज और सनसेट दोनों ही बहुत ही खूबसूरत दिखता है। क्योंकि यह आइलैंड तीन तरफ से ब्रह्मपुत्र नदी और एक तरफ से एक लोकल नदी की धारा से घिरा है। जिसके कारण यह चारों ओर से दूर-दूर तक पानी से घिरा हुआ नजर आता है। जो आयरलैंड की खूबसूरती में चार

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काजीरंगा नेशनल पार्क घूमने का है प्लान तो जानिए टूर पैकेजों के इन ऑपशंस के बारे में

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असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle Safari in Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क के चार रेंज हैं। जिनमें सबसे पहला है वेस्टर्न रेंज, जिसे बागरी रेंज के नाम से भी जाना जाता है। सेंट्रल रेंज को कोहरा रेंज कहा जाता है। पूर्वी रेंज को अगरतोली रेंज के नाम से पुकारा जाता है। बुरापहाड़ रेंज का कोई दूसरा उपनाम नहीं है। अगर आप भी काजीरंगा नेशनल पार्क का टूर करना चाहते हैं तो इसके लिए यहां चार तरह के टूर पैकेज उपलब्ध हैं। 1. काजीरंगा फन टूर 1 जीप सफार:- टूर पैकेज 2 दिन और एक रात का है, जिसका टूर प्लानर कुछ इस प्रकार का होगा:- पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) यात्रा के पहले दिन आप गुवाहाटी पहुंचेंगे और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकल जाएंगे। जहां पहुंचकर आप जंगल के रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे। दोपहर के समय आपको भोजन उपलब्ध करवाया जाएगा। दोपहर का खाना खाकर आप काजीरंगा नेशनल पार्क के वेस्टर्न रेंज यानी बागोरी रेंज और केंद्रीय रेंज यानी कोर रेंज में जीप सफारी के लिए जाएंगे। आपको रात इसी रिसोर्ट में बितानी होगी। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) सुबह के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के सेंट्रल रेंज यानी कोहरा रेंज और वेस्टर्न रेंज यानी बागोरी रेंज में हाथी की सफारी के लिए निकल जाएं। एलिफेंट सफारी के बाद आप काजीरंगा ऑर्किड पार्क घूमने के लिए चले जाएंं। यहां आपको ऑर्किड की 500 से भी अधिक अलग-अलग तरह की प्रजातियां देखने को मिलेगी। इसके अलावा भी आप यहां 132 अलग-अलग तरह की पत्तेदार सब्जियों की वैरायटी और बेत की 12 प्रजातियों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। इसके बाद आप असम के खूबसूरत चाय के बागानों का दौरा करने जाएंगे। चाय के बागानों में घूमने के बाद आप गुवाहाटी हवाई अड्डा के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आपकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। 2. जीप और हाथी सफारी के साथ काजीरानागा मनोरंजन यात्रा:- यह टूर पैकेज तीन दिनों और दो रातों का होगा। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) पहले दिन आप गुवाहाटी हवाई अड्डे या फिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के लिए निकलेंगे। जहां पहुंचकर आप रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे और शाम को इधर-उधर टहलने के बाद रात को रिजॉर्ट में हीं आराम करेंगे। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)दूसरे दिन सुबह के समय काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी और केंद्रीय रेंज में हाथी सफारी के लिए निकल जाएंगे। हाथी सफारी के बाद आप काजीरंगा ऑर्किड पार्क का दौरा करेंगे। जहां आप 500 से भी अधिक प्रकार की ऑर्किड के प्रजातियों का निरीक्षण करेंगे और इसके अलावा खट्टे फलों और पत्तेदार सब्जियों की कई प्रजातियों के बारे में भी जानेंगे और समझेंगे। ऑर्किड पार्क से लौट कर असम के चाय बागानों के दौरे के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आप दोपहर में लौट कर आएंगे और भोजन करके काजीरंगा के केंद्रीय रेंज में जीप सफारी के लिए चले जाएंगे। जीप सफारी के बाद वापस रिजॉर्ट लौट कर वहीं रात को आराम करेंगे। तीसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) अगले दिन आप पहले सुबह नाश्ता करने के बाद गुवाहाटी हवाई अड्डा या रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएंगे। इसके बाद आपकी यात्रा समाप्त हो जाएगी। 3. काजीरंगा हॉलिडे टूर:- यह टूर पैकेज तीन रातों और चार दिनों का है। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)यात्रा के पहले दिन आप गुवाहाटी रेलवे स्टेशन या फिर हवाई अड्डा से काजीरंगा नेशनल पार्क के लिए आगे बढ़ेंगे। नेशनल पार्क पहुंचकर आप वहीं के जंगल रिजॉर्ट में चेक इन करेंगे और रात को यहीं आराम करेंगे। दूसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान)अगले दिन आप सुबह नाश्ता करने के बाद काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी क्षेत्र यानी बागोरी और केंद्रीय क्षेत्र यानी कोहरा रेंज में हाथी की सफारी का आनंद लेंगे। इस दिन आप भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों को जानने और समझने के लिए काजीरंगा नेशनल पार्क को एक्सप्लोर करेंगे। यहां आप ऑर्किड पार्क के विजिट के लिए भी जा सकते हैं। जहां आपको 500 से अधिक तरह की और किट की प्रजातियां देखने को मिलेगी। इसके अलावा आप काजीरंगा में 132 प्रकार की पत्तेदार सब्जियों की प्रजातियां और 46 प्रकार के बँसो की प्रजातियां को करीब से देखेंगे और उनके बारे में जानेंगे। तीसरा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान) सुबह नाश्ता करने के बाद आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पूर्वी रेंज में जीप सफारी के लिए जाएंगे इसके बाद आप काजीरंगा नेशनल पार्क के पास बसे हुए आदिवासी गांव कार्बी का दौरा करेंगे और कार्बी के लोगों की ग्रामीण जीवन शैली के बारे में जानने और समझने का प्रयास करेंगे। कार्बी गांव से लौटकर आप दोपहर का भोजन करेंगे और फिर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के केंद्रीय रेंज में जीप सफारी के तीसरे दौर के लिए चले जाएंगे। फिर रात में जंगल रिजॉर्ट में आराम करेंगे चौथा दिन (काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुवाहाटी) यह आपके इस सफर का आखिरी दिन होगा। जहां आप सुबह नाश्ता करने के बाद नेशनल पार्क से गुवाहाटी हवाई अड्डा या फिर रेलवे स्टेशन के लिए निकल जाएंगे। आपकी यात्रा यहीं समाप्त हो जाएगी। 4. काजीरंगा शिलांग यात्रा:- यह टूर पैकेज चार रातों और पाँच दोनों का होगा। पहला दिन (गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क) इस टूर पैकेज का पहला दिन भी बाकी के टूर पैकेज की तरह ही होगा। जिसमें आप गुवाहाटी से काजीरंगा नेशनल पार्क की ओर आएंगे और जंगल रिसॉर्ट में चेकिंग करके वही रात को आराम करेंगे। दूसरा दिन काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान सुबह के समय आप काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के बागोरी और कोहरा रेंज में हाथी के सफारी के लिए जाएंगे। हाथी के सफारी से लौट

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भारत के 90% से अधिक एक सींग वाले गैंडों का आशियाना है काजीरंगा नेशनल पार्क

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असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा का नेशनल पार्क इतिहास (History of Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क की स्थापना 1905 ईस्वी में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन के द्वारा की गई थी। बताया जाता है कि लॉर्ड कर्जन की पत्नी मैरी विक्टोरिया लिटर कर्जन ने गैंडों की घटती संख्या की समस्या से चिंतित होकर अपने पति से उनके संरक्षण के लिए कार्रवाई करने के लिए कहा। इसके बाद लॉर्ड कर्जन द्वारा 1904 में काजीरंगा को एक रिजर्व बनाने का प्रस्ताव रखा गया और यह प्रस्ताव 1905 में पारित हुआ।हजारों जीव जंतुओं का यह आशियाना यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल है। यूनेस्को ने इसे 1985 ईस्वी में वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में अपने सूची में स्थान दिया। काजीरंगा नेशनल पार्क कैसे पहुंचे (How to reach Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और अगर इसके भौगोलिक परिस्थितियों की बात की जाए तो यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे कार्बी की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले असम के गुवाहाटी शहर तक पहुंचना होगा। काजीरंगा नेशनल पार्क असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 194 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप यहां फ्लाइट से आना चाहते हैं तो आप गुवाहाटी हवाई अड्डे तक की फ्लाइट ले सकते हैं। जहां देश के मुख्य हवाई अड्डों से आपको डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा मिल जाएगी। अगर आपके निकटतम हवाई अड्डे से डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा न हो तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट भी ले सकते हैं। गुवाहाटी शहर से काजीरंगा नेशनल पार्क जाने के लिए आप बस या फिर कैब की सुविधा ले सकते हैं। नेशनल हाईवे 37 काजीरंगा नेशनल पार्क के पास से ही गुजरती है। अगर आप रेल मार्ग के द्वारा काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हेलेम रेलवे स्टेशन पड़ेगा, जो काजीरंगा नेशनल पार्क से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीक के शहरों से आप बस के जरिए भी काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle Safari in Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क के चार रेंज हैं। जिनमें सबसे पहला है वेस्टर्न रेंज, जिसे बागरी रेंज के नाम से भी जाना जाता है। सेंट्रल रेंज को कोहरा रेंज कहा जाता है। पूर्वी रेंज को अगरतोली रेंज के नाम से पुकारा जाता है। बुरापहाड़ रेंज का कोई दूसरा उपनाम नहीं है। अगर आप यहां जंगल सफारी करना चाहते हैं तो जंगल सफारी में अलग-अलग रेंज के लिए अलग-अलग चार्ज लगते हैं।काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के दो ऑप्शंस देखने को मिलते हैं। पहला जीप सफारी और दूसरा एलिफेंट सफारी! जीप सफारी की सुविधा तो लगभग सभी नेशनल पार्क में अवेलेबल हो जाती है, लेकिन एलिफेंट सफारी की सुविधा कहीं-कहीं उपलब्ध है। काजीरंगा के नेशनल पार्क में भी आप एलिफेंट सफारी कर सकते हैं। एलिफेंट सफारी के लिए उपयोग में ले जाने वाले हाथी वाइल्ड एलिफेंट से काफी अलग होते हैं। बड़े से गजराज पर बैठकर जंगल की सैर करते समय आपको बिल्कुल राजा महाराजाओं वाली फीलिंग आएगी। अगर आप कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो आप जंगल सफारी के लिए एलिफेंट सफारी का उपयोग कर सकते हैं। यह सच में एडवेंचरस होता है। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के खर्च (Charges of Jungle Safari in Kaziranga National Park) जीप सफारी (Jeep Safari) सेंट्रल यानी कोहरा रेंज के जंगल सफारी के टिकट की कीमत भारतीयों के लिए ₹3700 और विदेशियों के लिए ₹6800 है। वेस्टर्न रेंज जिसे बागोरी रेंज भी कहा जाता है, में जंगल सफारी के टिकट की कीमत ₹3800 भारतीयों के लिए और ₹6900 विदेशियों के लिए है। पूर्वी रेंज यानी अगरतोली रेंज में जंगल सफारी के लिए विदेशियों को ₹10,300 की टिकट लेना पड़ता है, वहीं भारतीयों के लिए इस टिकट की कीमत ₹4400 होती है। अगर बात करें बुरापहाड़ रेंज के सफारी के टिकट की तो इसके लिए विदेशियों को ₹10,800 की टिकट लेनी होती है। वहीं भारतीयों को ₹4900 की टिकट लेना होता है। एलिफेंट सफारी (Elephant Safari) काजीरंगा में एलिफेंट सफारी की सुविधा वेस्टर्न यानी बागोरी रेंज और सेंट्रल यानी कोहरा रेंज में उपलब्ध है। वेस्टर्न रेंज की एलिफेंट सफारी सिर्फ भारतीय पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। जिसके टिकट की कीमत ‘₹900 प्लस सर्विस चार्ज’ प्रति व्यक्ति है।वहीं सेंट्रल रेंज की एलिफेंट सफारी सिर्फ विदेशी पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। जिसके टिकट की कीमत ₹3500 पर पर्सन है।