Railway दे रहा खास मौका, पूरी से देवघर तक करें Yatra
भारत में घूमने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब सफर में आस्था, मंदिर, समुद्र, इतिहास और ट्रेन यात्रा सब एक साथ मिल जाएं, तो उसका अनुभव थोड़ा अलग ही होता है। अगर आप भी परिवार के साथ कई बड़े तीर्थ स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं, लेकिन अलग-अलग ट्रेन, होटल और बस की बुकिंग को लेकर परेशान नहीं होना चाहते, तो IRCTC की भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। इस खास पैकेज में पूरी, कोणार्क, भुवनेश्वर, गंगासागर, कोलकाता और देवघर जैसे कई प्रमुख स्थानों को एक ही यात्रा में जोड़ा गया है। खास बात यह है कि सफर का बड़ा हिस्सा ट्रेन से होता है और बाकी जगहों के लिए बस, होटल, खाना और टूर एस्कॉर्ट जैसी सुविधाएं पैकेज में मिलती हैं। यानी आपको हर शहर में अलग से व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती। यह Yatra खासतौर पर उन लोगों के लिए सुविधाजनक हो सकती है जो धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ आराम से भारत के अलग-अलग हिस्सों को देखना चाहते हैं। IRCTC की भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन आखिर है क्या? भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन को देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है। यह ट्रेन सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन से थोड़ी अलग होती है, क्योंकि यहां सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचना ही मकसद नहीं होता, बल्कि पूरी यात्रा को एक पैकेज की तरह तैयार किया जाता है। ‘देखो अपना देश’ अभियान के तहत चलने वाली इस Yatra में ट्रेन यात्रा के साथ होटल में ठहरने, खाने, स्थानीय जगहों तक बस से पहुंचाने और यात्रियों की सुरक्षा जैसी सुविधाओं को भी जोड़ा गया है। इस वजह से इसे कई लोग आसान भाषा में चलता-फिरता होटल भी कहते हैं। इसमें अलग-अलग बजट के यात्रियों के लिए स्लीपर, 3AC और 2AC जैसी श्रेणियां उपलब्ध रहती हैं। रेलवे की ओर से मिलने वाली करीब 33 प्रतिशत की छूट को भी पैकेज की कीमत में शामिल किया गया है, जिससे यह Yatra उन लोगों के लिए भी आकर्षक बन जाती है जो कम बजट में कई धार्मिक जगहों को एक साथ देखना चाहते हैं। इस Yatra में किन-किन धार्मिक जगहों के दर्शन होंगे? इस पूरे पैकेज की सबसे खास बात इसका रूट है। इसमें ओडिशा से लेकर पश्चिम बंगाल और झारखंड तक के कई प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान शामिल हैं। पूरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ कोणार्क का सूर्य मंदिर देखा जा सकता है, वहीं भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर का दर्शन होता है। इसके बाद Yatra गंगासागर और कोलकाता की तरफ बढ़ती है, जहां गंगासागर में पवित्र स्नान और कालीघाट मंदिर के दर्शन का मौका मिलता है। इसके बाद ट्रेन जसीडीह पहुंचती है और वहां से देवघर जाकर बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराए जाते हैं। यानी एक ही Yatra में आपको मंदिर, समुद्र तट, ऐतिहासिक इमारतें और अलग-अलग राज्यों की संस्कृति देखने का मौका मिलता है। पूरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन और समुद्र का मजा पूरी इस Yatra का सबसे बड़ा आकर्षण है। भगवान जगन्नाथ का मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर दर्शन के अलावा पूरी का समुद्र तट भी यात्रियों को अपनी तरफ खींचता है। पैकेज में पूरी पहुंचने के बाद होटल में ठहरने और मंदिर दर्शन की व्यवस्था की जाती है। अगर समय और कार्यक्रम अनुमति देता है तो यात्री आसपास के बाजारों में भी घूम सकते हैं, जहां ओडिशा की स्थानीय चीजें, हस्तशिल्प और खाने-पीने की कई चीजें देखने को मिलती हैं। इस Yatra में पूरी को शामिल करने का फायदा यही है कि धार्मिक दर्शन के साथ समुद्र किनारे का माहौल भी महसूस किया जा सकता है। परिवार के साथ जाने वालों के लिए यह हिस्सा खासा अच्छा अनुभव दे सकता है। कोणार्क सूर्य मंदिर में दिखेगी शानदार स्थापत्य कला पूरी के बाद Yatra कोणार्क की तरफ बढ़ती है, जहां प्रसिद्ध सूर्य मंदिर देखने का मौका मिलता है। कोणार्क सूर्य मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। मंदिर को सूर्य देव के रथ के रूप में बनाया गया है और इसके विशाल पहिए इसकी पहचान हैं। यहां पहुंचकर सिर्फ धार्मिक नजरिए से नहीं, बल्कि इतिहास और कला के नजरिए से भी इस जगह को समझा जा सकता है। अगर आपको पुराने मंदिरों की वास्तुकला, मूर्तियां और भारतीय इतिहास में दिलचस्पी है, तो Yatra का यह पड़ाव आपको जरूर पसंद आएगा। यहां घूमते समय आरामदायक जूते पहनना बेहतर रहेगा, क्योंकि परिसर में पैदल चलना पड़ सकता है। भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर भी रहेगा यात्रा का हिस्सा ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को मंदिरों का शहर भी कहा जाता है और इसी शहर में प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर स्थित है। इस Yatra के दौरान यात्रियों को लिंगराज मंदिर के दर्शन का अवसर मिलता है। मंदिर की वास्तुकला ओडिशा की पारंपरिक शैली को दिखाती है और इसका धार्मिक महत्व भी काफी बड़ा है। मंदिर परिसर में जाने से पहले वहां के नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग मंदिरों में प्रवेश और फोटोग्राफी को लेकर अलग नियम हो सकते हैं। पूरी और कोणार्क के बाद भुवनेश्वर का यह पड़ाव Yatra को धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों तरह से खास बनाता है। गंगासागर में आस्था के साथ समुद्र का अलग अनुभव ओडिशा के बाद Yatra पश्चिम बंगाल की तरफ बढ़ती है और यहां गंगासागर एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनता है। गंगासागर सागर द्वीप पर स्थित है और इसे उस स्थान के रूप में जाना जाता है जहां गंगा समुद्र से मिलती है। यहां कपिल मुनि आश्रम भी प्रमुख धार्मिक स्थल है। सुबह के समय संगम के आसपास का माहौल काफी अलग महसूस होता है और श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं। इस Yatra में गंगासागर का अनुभव इसलिए भी खास है क्योंकि यहां धार्मिक आस्था के साथ समुद्र का विशाल रूप भी देखने को मिलता है। अगर आप स्नान करने की योजना बना रहे हैं तो अतिरिक्त कपड़े, तौलिया और जरूरी सामान एक छोटे बैग में अलग रखना काफी सुविधाजनक रहेगा। कोलकाता में कालीघाट मंदिर के दर्शन गंगासागर के बाद Yatra कोलकाता पहुंचती है। कोलकाता भारत के सबसे पुराने