Travel News: 250 साल से जल में कैसे खड़ी है 5 मंजिला इमारत?, पुराने जमाने की इंजीनियरिंग जानकर रह जाएंगे दंग
Travel News जयपुर । राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, किलों और राजसी ठाट-बाट के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहां की हर एक दीवार कोई न कोई अनसुनी कहानी कहती है। जयपुर आने वाले सैलानी हवा महल, आमेर किला और नाहरगढ़ तो जाते ही हैं, लेकिन मानसागर झील के बीचों-बीच स्थित ‘जल महल’ (Jal Mahal) को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। पानी के ऊपर तैरती हुई यह अद्भुत इमारत वास्तुकला का एक ऐसा अजूबा है, जिसके पीछे का सच बहुत कम लोग जानते हैं। Travel News अमूमन लोग सोचते हैं कि, यह कोई महल या रहने का ठिकाना रहा होगा, लेकिन इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि, यह राजाओं का एक आलीशान ‘चिल ज़ोन’ (Royal Chill Zone) था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि, इस पांच मंजिला इमारत में रहने के लिए एक भी कमरा नहीं बनाया गया है। आइए जानते हैं कि, आखिर पानी के बीच इस रहस्यमयी महल को क्यों बनाया गया था और इसके भीतर कौन से गहरे राज छिपे हैं। Bihar Heli Tourism: अब आसमान से दिखेगा बिहार का वैभव! पटना, राजगीर और बोधगया के लिए शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा, जानें किराया और रूट Travel News- रहस्यमयी बनावट: पानी के नीचे छिपी हैं महल की 4 मंजिलें जल महल को देखने वाले पर्यटकों को बाहर से सिर्फ इसकी ऊपरी एक मंजिल ही दिखाई देती है, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाली है। 5 मंजिला इमारत का सच: यह महल केवल एक मंजिल का नहीं, बल्कि पूरे पांच मंजिला ऊंचा ढांचा है। जब मानसागर झील पूरी तरह पानी से भर जाती है, तो इस महल की नीचे की चार मंजिलें पानी के भीतर डूब जाती हैं। पर्यटकों को सिर्फ इसकी सबसे ऊपर वाली पांचवीं मंजिल ही पानी के ऊपर तैरती हुई दिखाई देती है। सीपेज प्रूफ तकनीक: करीब 250 साल से भी ज्यादा पुरानी यह इमारत पानी के भीतर खड़ी है, लेकिन इसकी दीवारों में पानी का एक कतरा तक नहीं रिसता। इसे बनाने में विशेष रूप से चूने के गारे और एक खास प्राचीन तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जो इसे आज के आधुनिक कंक्रीट से भी ज्यादा मजबूत बनाती है। रहस्यमयी महल: क्यों यहां नहीं बना कोई भी कमरा? इस महल की सबसे बड़ी खासियत और रहस्य यही है कि, इसमें रहने के लिए कोई बेडरूम, रसोई या रिहायशी कमरा नहीं है। दरअसल, इसका निर्माण आमेर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने करवाया था। बत्तखों के शिकार का अड्डा: महाराजा को बत्तखों का शिकार करने का बहुत शौक था। उन्होंने इस महल को किसी रहने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि एक ‘हंटिंग लॉज’ और गर्मियों के दिनों में फुर्सत के पल बिताने के लिए बनवाया था। शाही महफिलें और पार्टी का केंद्र: गर्मियों के मौसम में जब जयपुर में भारी तपिश होती थी, तब राजा अपनी रानियों और खास मेहमानों के साथ यहां आते थे। पानी के बीच होने के कारण यहां का तापमान बेहद कम और सुहावना रहता था। महल की छत पर बनी खूबसूरत छतरियों के नीचे नाच-गाने की महफिलें सजती थीं, शाही शादियां और दावतें हुआ करती थीं। यानी यह राजाओं का एक तरह से ‘रॉयल रीक्रिएशन सेंटर’ था। छत पर बना ‘चमेली बाग’ और अद्भुत वास्तुकला का संगम जल महल को राजपूत और मुगल वास्तुकला के बेजोड़ फ्यूजन के रूप में डिजाइन किया गया है। टेरेस गार्डन (Chameli Bagh): महल की छत पर एक बेहद खूबसूरत बगीचा बनाया गया है, जिसे ‘चमेली बाग’ कहा जाता है। इस बाग में चारों तरफ सुगंधित फूलों के पौधे लगाए गए थे, जिनकी खुशबू पानी की ठंडी हवाओं के साथ मिलकर पूरे महल को महका देती थी। चारों तरफ पहाड़ियों का नजारा: इस महल की छत से सामने दिखने वाली अरावली की पहाड़ियों और आमेर किले का नजारा इतना खूबसूरत लगता है कि आज भी फोटोग्राफर्स यहाँ आकर घंटों तस्वीरें खींचते हैं। Bihar Heli Tourism: अब आसमान से दिखेगा बिहार का वैभव! पटना, राजगीर और बोधगया के लिए शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा, जानें किराया और रूट ट्रैवलर गाइड: कैसे दीदार करें इस अनोखे अजूबे का? नजदीकी लोकेशन: यह महल जयपुर-आमेर मार्ग पर मानसागर झील के बीच स्थित है। जयपुर रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट से यहाँ के लिए आसानी से ऑटो, कैब या बसें मिल जाती हैं। फोटोग्राफी टिप: वर्तमान में सुरक्षा कारणों से महल के अंदर जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन झील के किनारे (प्रॉमिनेड) से इसका नजारा बेहद शानदार दिखता है। खासकर शाम के समय जब इस महल पर रंग-बिरंगी लाइट्स जलाई जाती हैं, तब पानी में इसका अक्स देखना किसी जादुई सपने जैसा लगता है।