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Travel News: पानी की भाप छोड़ेगी, हवा से ऑक्सीजन खींचेगी! पहली 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन की 5 बातें, जो इसे बनाती हैं दुनिया से अलग

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Travel News नई दिल्ली/जींद ।  भारतीय रेलवे के इतिहास में 17 जुलाई का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। देश की पहली ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन’ (India’s First Hydrogen Train) पटरी पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह ट्रेन केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के रेलवे नेटवर्क के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल बनने जा रही है? World Largest 10 Coach Passenger Hydrogen Train, How Hydrogen Fuel Cell Train Works  अमूमन लोग हाइड्रोजन ट्रेन को केवल ‘प्रदूषण मुक्त’ या ‘इको-फ्रेंडली’ मानकर देख रहे हैं, लेकिन इस ट्रेन के पीछे का विज्ञान, इसकी विशाल क्षमता और इसकी सुरक्षा से जुड़ी कुछ ऐसी अनसुनी और अनदेखी बातें हैं जो इसे दुनिया के विकसित देशों की ट्रेनों से भी कहीं आगे खड़ा करती हैं। आइए जानते हैं भारत की इस ‘नीली परी’ की वे 5 सबसे बड़ी और अनोखी खूबियां, जो आपको हैरान कर देंगी। Jind Hydrogen Refueling Station, Indian Railways Travel News Update 2026 Travel News: पंजाब जाने वाले पर्यटकों की बल्ले-बल्ले! 62 करोड़ से संवरेंगे ऐतिहासिक स्थल; कजली वेटलैंड से लेकर हेरिटेज गेट तक सब कुछ बदलेगा Travel News- दुनिया हैरान: बाकी देश 2 कोच पर अटके, भारत ने खड़ी की 10 डिब्बों की ट्रेन वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीक अभी बिल्कुल शुरुआती चरण में है। जर्मनी, फ्रांस, चीन और जापान जैसे बड़े देशों ने हाइड्रोजन ट्रेनें तो बनाई हैं, लेकिन उनमें केवल 2 से 4 कोच (डिब्बे) ही होते हैं और वे बहुत छोटे रूट पर चलती हैं। 2600 यात्रियों की क्षमता: भारत ने पूरी दुनिया को चौंकाते हुए पहली बार में ही 10 कोच वाली भारी-भरकम पैसेंजर ट्रेन तैयार कर दी है। एक साथ सफर: इस विशाल ट्रेन में एक बार में लगभग 2,600 यात्री बेहद आराम से सफर कर सकेंगे। इतनी बड़ी यात्री क्षमता के साथ हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन करना उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग में भारत की स्वदेशी ताकत का सबसे बड़ा लोहा मनवाता है। बिजली घर साथ लेकर चलती है यह ट्रेन: हवा से ऑक्सीजन लेकर खुद बनाती है ईंधन यह ट्रेन किसी पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेन की तरह ऊपर बिछी तारों (Overhead Lines) से बिजली नहीं लेती। इसके बजाय, इसके दोनों सिरों पर 1200 किलोवाट (1600 HP) क्षमता वाली दो ‘ड्राइविंग पावर कार’ (DPC) लगी हैं, जो इसके पहियों को ताकत देती हैं। प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) का कमाल: ट्रेन के अंदर ही एक छोटा पावर प्लांट लगा है, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘पीईएम फ्यूल सेल’ कहा जाता है। हवा से बिजली: ट्रेन में रखे सिलेंडरों की हाइड्रोजन जब वातावरण की हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ रासायनिक क्रिया करती है, तो ट्रेन के अंदर ही बिजली पैदा होती है। प्रदूषण की जगह पानी की भाप: कोयले या डीजल की तरह कुछ भी जलता नहीं है, इसलिए साइलेंसर से काले धुएं के बजाय सिर्फ शुद्ध जल वाष्प (पानी की भाप) और थोड़ी सी भाप वाली गर्मी बाहर निकलती है। यह सफर के साथ-साथ पर्यावरण को भी शुद्ध रखने का अद्भुत फॉर्मूला है। Scenic Highway – भारत के 7 सबसे खूबसूरत Highway जहाँ हर मोड़ पर मिलेगा नया नज़ारा डबल सुरक्षा कवच से लैस: लीक हुई तो हवा में गायब हो जाएगी गैस हाइड्रोजन को अत्यधिक ज्वलनशील माना जाता है, इसलिए कई लोगों के मन में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते हैं। लेकिन भारतीय रेलवे ने इस ट्रेन को ‘गहन सुरक्षा’ (Defense-in-depth) के अंतरराष्ट्रीय फॉर्मूले पर डिजाइन किया है। मल्टी-लेयर सेंसर सिस्टम: ट्रेन के कोने-कोने में ऐसे सुपर-सेंसिटिव सेंसर लगाए गए हैं जो हाइड्रोजन रिसाव, मामूली सी असामान्य गर्मी, आग की लपटों या धुएं का पता पलक झपकते ही लगा लेते हैं। ऑटोमैटिक वेंटिलेशन: हाइड्रोजन गैस हवा से बेहद हल्की होती है। अगर ट्रेन में कहीं जरा सा भी रिसाव होता है, तो हवा के निरंतर प्रवाह (Ventilation) की वजह से वह गैस तुरंत ट्रेन से बाहर निकलकर खुली हवा में सुरक्षित रूप से उड़ जाएगी, कहीं जमा नहीं हो पाएगी। ऑटोमैटिक शट-ऑफ: किसी भी आपातकालीन स्थिति में कंप्यूटर सिस्टम लोको पायलट की प्रतिक्रिया का इंतजार किए बिना खुद ही तुरंत हाइड्रोजन की सप्लाई को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। Travel News जींद में बना है देश का पहला एकीकृत हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन ट्रेन को दौड़ाने के लिए सबसे जरूरी है ईंधन, और इसके लिए हरियाणा के जींद में भारत की पहली और सबसे बड़ी विशेष रिफ्यूलिंग सुविधा तैयार की गई है। पानी से बनेगी हाइड्रोजन: यहाँ लगे ‘ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट’ में पानी के कणों को बिजली की मदद से तोड़कर बिल्कुल शुद्ध हाइड्रोजन तैयार की जाती है। 3000 किलो का बड़ा स्टोरेज: इस स्टेशन पर एक समय में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन को पीईएसओ (PESO) के कड़े नियमों के तहत सुरक्षित स्टोर किया जाता है। डबल डिस्पेंसर: दो विशेष नोजल की मदद से ट्रेन के दोनों पावर इंजन को एक साथ बेहद कम समय में रिफ्यूल किया जा सकता है। Travel News: पंजाब जाने वाले पर्यटकों की बल्ले-बल्ले! 62 करोड़ से संवरेंगे ऐतिहासिक स्थल; कजली वेटलैंड से लेकर हेरिटेज गेट तक सब कुछ बदलेगा विरासत रूटों पर भी चलेगी ट्रेन: जींद-सोनीपत के बाद पहाड़ों की बारी यह ट्रेन शुरुआत में उत्तरी रेलवे के जींद-सोनीपत खंड के 89 किलोमीटर लंबे रूट पर चलेगी। इसकी सामान्य परिचालन रफ्तार 75 किमी/घंटा और अधिकतम डिज़ाइन स्पीड 110 किमी/घंटा होगी। ये होंगे मुख्य स्टेशन: ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना और सोनीपत के साथ-साथ पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भम्भेवा, इसापुर खेरी, बुटाने, खंडराई, राब्रा, लाठ, मोहना और बरवासनी जैसे मध्यवर्ती स्टेशनों पर रुकेगी। कालका-शिमला की तैयारी: इस रूट पर सफलता के बाद भारतीय रेलवे देश के ऐतिहासिक और खूबसूरत हेरिटेज रूटों जैसे कि कालका-शिमला टॉय ट्रेन मार्ग पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है। इससे पहाड़ों की हसीन वादियों में प्रदूषण पूरी तरह खत्म हो जाएगा।