Bazar Delhi Destination Travel

पर्यटकों को खूब लुभाता है ये दिल्ली का मीना बाजार

  • 0 Comments

आई हो कहाँ से गोरी आंखों में प्यार लेके,दिल्ली शहर का पूरा मीना बाजार लेके,,,,, इस गाने के बोलने जिस तरह से दिल्ली शहर के मीना बाजार का जिक्र किया गया है वह अपने आप में हीं दिल्ली के मीना बाजार को मुकम्मल तरीके से कहानी के रूप में बयां करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है यह जो दिल्ली शहर का मीना बाजार है वह आखिर दिखता कैसा है और इसे कब और क्यों बसाया गया था? दिल्ली वासियों के लिए तो यह आम बात है, लेकिन दिल्ली से बाहर रहने वाले लोग इस बात को लेकर जरूर उत्सुक होते होंगे कि आखिर दिल्ली शहर का यह मीना बाजार दिखता कैसा है? तो आज के फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको दिल्ली शहर के मीना बाजार के बारे में बताएंगे। लाल किला के सामने लगने वाला यह बाजार हर तरह के शॉपिंग करने वाले लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन होता है। क्योंकि यहां हर तरह के समान आपको मिल जाएंगे। चाहे फिर इलेक्ट्रॉनिक्स की बात हो या फिर डेकोरेटिव आइटम्स की, हर तरह के खरीदारी के लिए यह मीना बाजार परफेक्ट है। इस बाजार को छाता बाजार भी कहा जाता है। चलिए इस बाजार के बारे में जानते हैं और जानते हैं कि यहां से आप किस तरह की शॉपिंग कर सकते हैं। दूर से हीं दिखने लगते हैं गहनों के दुकान : इस मीना बाजार को बसाने का उद्देश्य हीं मुगल राजकुमारियों का मनोरंजन था। इसलिए इस मीना बाजार में हर तरह के गहने और साथ सजावट के समान मिलते थे और आज भी आपको मीना बाजार में यह सारे सामान देखने को मिल जाएंगे। यहां आपको हर वैरायटी की चूड़ियां झुमके बालियां और गहने खरीदने को मिल जाएंगे। यहां गहनों की इतनी वैरायटी है कि उन्हें देखकर आप खुद हीं यह डिसाइड नहीं कर पाएंगे कि कौन सा लेना है? क्लासी लेडीज पर्स (Classy Ladies Purse in Chhata Bazaar) यहां आपको बहुत ही बढ़िया क्वालिटी के जरी और मोती के वर्क वाले पर्स देखने को मिल जाएंगे जो किसी भी लूक में चार चांद लगाने का काम करते हैं। ऐसे में आप यहाँ से बहुत अच्छे-अच्छे और यूनिक क्वालिटी के पर्स को परचेस कर सकते हैं। आपको भी तरह-तरह के क्लच रखने का शौक है तो यहां क्लच के मामले में भी बहुत सारी वैराइटीज उपलब्ध है। जो यहां आने वाले महिला पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनते हैं एंटीक कलेक्शन (Antique Collection of Chhata Bazaar) अगर आपको भी अपने घरों को पुराने और एंटीक चीजों से सजाने का शौक है और आप भी बहुत सारे रंग-बिरंगे शोपीसेज से अपने आशियाने को और भी खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो इस बाजार में आपको ऐसे कई सारे एंटीक ऑब्जेक्ट्स मिल जाएंगे जिन्हें आप अपने घर में सजा सकते हैं और घर की खूबसूरती को बढ़ा सकते हैं। अगर आप किसी के लिए एक परफेक्ट गिफ्ट की तलाश कर रहे हैं तो यहां मिलने वाले एंटीक पीस आपके लिए एक बेहतरीन गिफ्ट बन सकते हैं। क्लासिक शॉल (Classic Shawl in Chhata Bazaar) अगर आप भी अपने फैशन के साथ एक्सपेरिमेंट करना पसंद करते हैं तो आपके वार्डरोब में शॉल की उपस्थिति अनिवार्य हो जाती है। मीना बाजार में आपको बहुत सारे ऐसे दुकान मिल जाएंगे जहां आपको हर तरह के शॉल देखने को मिल जाएंगे। सर्दियों का मौसम शुरू होने वाला है ऐसे में शॉल फैशन ट्रेंड में आने वाले हैं। इस समय शॉल लेना आपके लिए दोहरे फायदे का काम हो सकता है और मीना बाजार में आपको बहुत ही अच्छी क्वालिटी के शॉल देखने को मिल जाएंगे। बच्चों के खिलौने (Children’s Toys in Chhata Bazaar) अब किसी बाजार का जिक्र हो और वहां बच्चों के खिलौने ना हो तो वह बाजार, बाजार नहीं हो सकता। अगर आप भी लाल किला आ रहे हैं और आपके साथ बच्चे भी हैं तो, आप उनके लिए भी बहुत अच्छी खरीदारी कर सकते हैं। यहां आपके बच्चों के बहुत सारे खिलौने जैसे रुबिक्स क्यूब्स, पजल्स और भी अतरंगे खिलौने देखने को मिल जाएंगे। यहां से आप अपने बच्चों के लिए गिफ्ट के तौर पर खिलौने भी ले जा सकते हैं।

Culture Destination Lifestyle Travel

Humayun’s Tomb, Delhi

  • 0 Comments

Humayun’s Tomb- हुमायूँ का मकबरा : मुग़ल वास्तुकला का बेहतरीन नमूना मुगलों ने अपने शासन के दौरान मकबरों का निर्माण करते वक़्त शायद यही सोचा होगा की एक दिन वे दुनिया से चले जाएंगे, लेकिन उनके बनाए गए ये मकबरें उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगे। क्योंकि मुगलों द्वारा बनाई हर विरासत बेहद भव्य और आकर्षक है और ऐसे ही एक उत्कृष्ट विरासत की बात आज हम अपनी इस यात्रा में करेंगे। बाबर के सबसे बड़े बेटे हुमायूँ को हम सभी ने इतिहास की पुस्तकों में पढ़ा है। लेकिन क्या आपने हुमायूँ का मकबरा देखा है? अगर अब आप ये सोच रहे हैं कि हुमायूँ का मकबरा भी इतिहास के अध्याय की तरह उबाऊ है तो आप गलत हैं, क्योंकि हुमायूँ का मकबरा भारत का पहला उद्यान-मकबरा है जो मुगल स्थापत्य के बेहतरीन उदहारणों में से एक है जिसे 1993 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज के रूप में घोषित किया गया था।(Humayun’s Tomb) दिलवालों की दिल्ली में 1565 ई. में बना हुमायूँ का मकबरा मथुरा रोड़ पर स्थित है। एक बात गौर करने वाली है कि हर हेरिटेज की तरह हुमायूँ का मकबरा किसी बादशाह द्वारा नहीं बल्कि हुमायूँ की बेगम रानी हमीदा बानो ने अपने शोहर की याद में बनवाया था। साथ ही आपको बता दें ताजमहल का निर्माण इसी मकबरे से प्रभावित होकर किया गया था।(Humayun Tomb) टिकट घर और यहाँ कैसे पहुंचे जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से हुमायूँ का मकबरा लगभग 2 किलोमीटर दूर है. अब 2 किलोमीटर का रास्ता आपको 11 नंबर गाड़ी से पार करना है या ऑटो से, ये आप पर और आपकी जेब पर निर्भर करता है।  मकबरे में एंट्री के लिए भारतीय नागरिक की 35 रुपये  और विदेशी सैलानियों के लिए 550 रुपए की टिकट लगती है. टिकट खरीदने के लिए कैशलेस माध्यम अपनाना पड़ता है क्यूंकि नकद भुगतान का विकल्प फिलहाल कोरोना काल के कारण मौजूद नहीं है। टिकट लेते ही सफर शुरू हो जाता है, जिसमें मुसाफिर होते हैं हम, आप और हमारी दिलचस्पी।(Humayun’s Tomb) किस समय यहाँ आना सबसे बेहतर वैसे तो साल भर यहाँ पर्यटकों  का आना लगा रहता है लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहाँ आने के लिए बेस्ट रहता है। सर्दियों में ऐतिहासिक इमारतों का दीदार मन को भाता है। ईसा खान का मकबरा To watch video of this blog, you can visit our YouTube channel- Five colors of travel – Like & Subscribe हुमायूँ के मकबरे तक पहुंचने की शुरुवात ईसा खान के मकबरें और मस्ज़िद के साथ होती है जो हुमायूँ के मकबरे से 20 साल पहले बनाया गया था। ईसा खान शेरशाह सूरी के दरबार में एक अफगान रईस था। यह मकबरा अष्टकोणीय मकबरा है जो अपनी आकर्षक वास्तुकला से किसी को भी अपना दीवाना बना सकता है।  इसमें लगी छतरियां, चमकदार टाइल्स और जालीदार जालियां इसकी खूबसूरती  को और अधिक  बढ़ाती हैं। ईसा खान के मकबरे के बाहर लगे एक सूचना बोर्ड को पढ़ने के बाद पता चला कि 20वी शताब्दी में यहां पूरा एक गांव आबाद था। वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण देखने के बाद अब हम आगे बढ़ें।  चारों तरफ बस हरियाली ही हरियाली पसरी हुई थी जो पूरी धरोहर को चार-चाँद लगा रही थी। बू हतीमा गेट ईसा खान के मकबरे के बाद आता है बू हतीमा गेट। यह विशाल दरवाजा बू हतीमा के मकबरे-बगीचे तक जाता है। रास्ते का अग्रभाग कत्तलदार है और टाइल कार्य के अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं। बगीचे की दीवार के दो उत्तरी बुर्ज़ गुम्बदी छतरियों से सुसज्जित हैं। 19वीं शताब्दी में बगीचे की पश्चिमी दीवार के कुछ हिस्से को तोड़कर प्रवेश द्वार बनाया गया था। अरब सराय दरवाज़ा बू हतीमा गेट पार करते ही दाएं हाथ पर अरब सराय दरवाज़ा दिखता है जो लगभग 14 मीटर बड़ा है। इस दरवाज़े को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो हम इतिहास के पन्नो पर वापस लौट गए हों। यह दरवाज़ा हुमायूँ के मकबरे के निर्माण के लिए शिल्पकारों के अहाते की ओर जाता है। लाल पत्थर, सफ़ेद सांगमंरमर, झरोखें और चमक़दार टाइलों के अवशेष से बना ये दरवाज़ा पर्यटकों  को खूब आकर्षित करता है। थोड़ा आगे चलने पर एक और दरवाज़ा आता है।  जिसमें घुसते ही दोनों तरफ हुमायूँ के मकबरे से जुड़े इतिहास के बोर्ड और पुस्तकें देखने को मिलती है। इसी दरवाज़े से सामने देखने पर खूबसूरती के सारे पैमाने लांघता हुमायूँ का मकबरा दिखाई देता है। हुमायूँ का मकबरा यकीन मानिये, हुमायूँ का मकबरा तस्वीरों में जितना खूबसूरत लगता है वास्तव में उससे कही ज्यादा है। इतना की शायद ही कोई इसकी ख़ूबसूरती बखान कर पाए।  लाल और सफ़ेद सेंड स्टोन से बनी ये इमारत उतनी ही नायाब है जितना आगरा में बना ताजमहल।  मकबरे के सामने बने फव्वारे की ठंडक को महसूस करते हुए आप जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगें, आपका मन इसकी सुंदरता के वश में कैद होता चला जाएगा।  इस दो मंजिला स्मारक की सीढ़ियां चढ़ते-चढ़ते आप महसूस करेंगे की मकबरा पहले से दुगना आकर्षक होता जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दूं फारसी और तुर्की स्थापत्य शैली के मिश्रण से बना हुआ ये मकबरा लगभग 27 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। हुमायूँ के मकबरे को मुगलों का ‘शयनागार’ भी कहा जाता है। सच मानिए लाल और काले बलुआ पत्थर से बना ये मकबरा बहुत उम्दा विरासत है जिसे आप सभी को देखना चाहिए। आप इस मकबरे के सामने बने उद्यान में बैठकर अपनी थकान मिटाते हुए इसकी मोहकता का रसपान कर सकते हैं। मन ऐसा हो रहा था मानो इस अद्भुत विरासत को एक बार शुरू से दुबारा घूमूँ।लेकिन 3 घंटे होने में बस 5 मिनट ही बाकी थे जिसके कारण मुझे न चाहते हुए भी मकबरे को अलविदा कहना पड़ा। आपको बता दूं इन दिनों शायद कोरोना महामारी की वजह से एंट्री के बाद मकबरे में 3 घंटे तक ही रहने की अनुमति है। शायद मकबरें में ज्यादा भीड़ न हो इस वजह से। बाहर निकलते ही चटनी और भुट्टे की ख़ुश्बू आ रही थी। मैंने भुट्टा लिया और मकबरे को अलविदा कह अपने कदम बढ़ा दिए घर की तरफ। (Humayun’s Tomb) Written & Edited by Pardeep Kumar glimpse of Humayun Tomb…best monument of Mughals. The world heritage