Destination Travel

भारत के 90% से अधिक एक सींग वाले गैंडों का आशियाना है काजीरंगा नेशनल पार्क

  • 0 Comments

असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। काजीरंगा का नेशनल पार्क इतिहास (History of Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क की स्थापना 1905 ईस्वी में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन के द्वारा की गई थी। बताया जाता है कि लॉर्ड कर्जन की पत्नी मैरी विक्टोरिया लिटर कर्जन ने गैंडों की घटती संख्या की समस्या से चिंतित होकर अपने पति से उनके संरक्षण के लिए कार्रवाई करने के लिए कहा। इसके बाद लॉर्ड कर्जन द्वारा 1904 में काजीरंगा को एक रिजर्व बनाने का प्रस्ताव रखा गया और यह प्रस्ताव 1905 में पारित हुआ।हजारों जीव जंतुओं का यह आशियाना यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट में भी शामिल है। यूनेस्को ने इसे 1985 ईस्वी में वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में अपने सूची में स्थान दिया। काजीरंगा नेशनल पार्क कैसे पहुंचे (How to reach Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और अगर इसके भौगोलिक परिस्थितियों की बात की जाए तो यह ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे कार्बी की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले असम के गुवाहाटी शहर तक पहुंचना होगा। काजीरंगा नेशनल पार्क असम की राजधानी गुवाहाटी से लगभग 194 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप यहां फ्लाइट से आना चाहते हैं तो आप गुवाहाटी हवाई अड्डे तक की फ्लाइट ले सकते हैं। जहां देश के मुख्य हवाई अड्डों से आपको डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा मिल जाएगी। अगर आपके निकटतम हवाई अड्डे से डायरेक्ट फ्लाइट की सुविधा न हो तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट भी ले सकते हैं। गुवाहाटी शहर से काजीरंगा नेशनल पार्क जाने के लिए आप बस या फिर कैब की सुविधा ले सकते हैं। नेशनल हाईवे 37 काजीरंगा नेशनल पार्क के पास से ही गुजरती है। अगर आप रेल मार्ग के द्वारा काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंचाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हेलेम रेलवे स्टेशन पड़ेगा, जो काजीरंगा नेशनल पार्क से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नजदीक के शहरों से आप बस के जरिए भी काजीरंगा नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle Safari in Kaziranga National Park) काजीरंगा नेशनल पार्क के चार रेंज हैं। जिनमें सबसे पहला है वेस्टर्न रेंज, जिसे बागरी रेंज के नाम से भी जाना जाता है। सेंट्रल रेंज को कोहरा रेंज कहा जाता है। पूर्वी रेंज को अगरतोली रेंज के नाम से पुकारा जाता है। बुरापहाड़ रेंज का कोई दूसरा उपनाम नहीं है। अगर आप यहां जंगल सफारी करना चाहते हैं तो जंगल सफारी में अलग-अलग रेंज के लिए अलग-अलग चार्ज लगते हैं।काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के दो ऑप्शंस देखने को मिलते हैं। पहला जीप सफारी और दूसरा एलिफेंट सफारी! जीप सफारी की सुविधा तो लगभग सभी नेशनल पार्क में अवेलेबल हो जाती है, लेकिन एलिफेंट सफारी की सुविधा कहीं-कहीं उपलब्ध है। काजीरंगा के नेशनल पार्क में भी आप एलिफेंट सफारी कर सकते हैं। एलिफेंट सफारी के लिए उपयोग में ले जाने वाले हाथी वाइल्ड एलिफेंट से काफी अलग होते हैं। बड़े से गजराज पर बैठकर जंगल की सैर करते समय आपको बिल्कुल राजा महाराजाओं वाली फीलिंग आएगी। अगर आप कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो आप जंगल सफारी के लिए एलिफेंट सफारी का उपयोग कर सकते हैं। यह सच में एडवेंचरस होता है। काजीरंगा नेशनल पार्क में जंगल सफारी के खर्च (Charges of Jungle Safari in Kaziranga National Park) जीप सफारी (Jeep Safari) सेंट्रल यानी कोहरा रेंज के जंगल सफारी के टिकट की कीमत भारतीयों के लिए ₹3700 और विदेशियों के लिए ₹6800 है। वेस्टर्न रेंज जिसे बागोरी रेंज भी कहा जाता है, में जंगल सफारी के टिकट की कीमत ₹3800 भारतीयों के लिए और ₹6900 विदेशियों के लिए है। पूर्वी रेंज यानी अगरतोली रेंज में जंगल सफारी के लिए विदेशियों को ₹10,300 की टिकट लेना पड़ता है, वहीं भारतीयों के लिए इस टिकट की कीमत ₹4400 होती है। अगर बात करें बुरापहाड़ रेंज के सफारी के टिकट की तो इसके लिए विदेशियों को ₹10,800 की टिकट लेनी होती है। वहीं भारतीयों को ₹4900 की टिकट लेना होता है। एलिफेंट सफारी (Elephant Safari) काजीरंगा में एलिफेंट सफारी की सुविधा वेस्टर्न यानी बागोरी रेंज और सेंट्रल यानी कोहरा रेंज में उपलब्ध है। वेस्टर्न रेंज की एलिफेंट सफारी सिर्फ भारतीय पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। जिसके टिकट की कीमत ‘₹900 प्लस सर्विस चार्ज’ प्रति व्यक्ति है।वहीं सेंट्रल रेंज की एलिफेंट सफारी सिर्फ विदेशी पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। जिसके टिकट की कीमत ₹3500 पर पर्सन है।

Destination Travel

बांधवगढ़ नेशनल पार्क जहां आप देख सकते हैं बेख़ौफ़ बंगाल टाइगर्स को

  • 0 Comments

मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है।वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इतिहास (History)बांधवगढ़ का यह इलाका आजादी से पहले राजा महाराजाओं के लिए शिकार का स्थान हुआ करता था। लेकिन आजादी के बाद यहां के महाराज मार्तंड सिंह के अनुरोध पर सरकार ने इस क्षेत्र को बंधवगढ़ अभ्यारण घोषित कर दिया।इसके बाद 1968 में बांधवगढ़ अभयारण्य क्षेत्र को नेशनल पार्क की उपाधि दे दी गई और 1993 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया।इस क्षेत्र का नाम विंध्याचल के पहाड़ी पर बने हुए बांधवगढ़ किले के नाम पर बांधवगढ़ रखा गया। वैसे तो आज के समय में बांधवगढ़ किला सिर्फ खंडहर के रूप में बच गया है लेकिन यह आज भी विंध्याचल के गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है। बांधवगढ़ में जंगल सफारी के लिए दो तरह के टूर पैकेज उपलब्ध हैं। पहला टूर पैकेज दो रातों और तीन दिनों का है। वही दूसरा टूर पैकेज तीन रातों और चार दिनों का है। पहले टूर पैकेज के तहत आपका टूर प्लान कुछ इस प्रकार का होगा : पहले दिन आप बांधवगढ़ पहुंचेंगे जहां आपको रिजॉर्ट में रुकने के लिए दिया जाएगा। इसके बाद आपको दिन का लंच दिया जाएगा। लंच करने के बाद आप शाम को अपने रिजॉर्ट के आसपास के इलाकों में टहल सकते हैं और फिर रात को डिनर करके आप रिजॉर्ट में ही आराम करेंगे।पैकेज के दूसरे दिन आप सुबह-सुबह जिप्सी में सवार होकर जंगल सफारी के लिए निकल जाएंगे। रास्ते में ही आपको ब्रेकफास्ट दिया जाएगा। जंगल सफारी के बाद आप वापस लौटेंगे और लंच करेंगे। लंच करने के बाद आप फिर से जंगल सफारी के लिए निकल जाएंगे। शाम को जंगल सफारी करके लौटेंगे और रिजॉर्ट में रात का भोजन करके आराम करेंगे।तीसरा दिन आपके टूर पैकेज का आखिरी दिन होगा जिसमें आप सुबह नाश्ता करके आप अपने स्टेशन के लिए चेक आउट कर जाएंगे। दूसरे टूर पैकेज के तहत भी आपका टूर प्लान कुछ इसी प्रकार का होगा। आप पहले दिन बांधवगढ़ नेशनल पार्क पहुंचेंगे और वहीं के रिजॉर्ट में ठहरेंगे।दूसरे और तीसरे दिन जंगल सफारी पर जाएंगे। जिसमें दोनों दिन आप दो-दो जंगल सफारी करेंगे। एक लंच से पहले और एक लंच के बाद। चौथे दिन आप अपने घर के लिए वापस लौट जाएंगे। बांधवगढ़ नेशनल पार्क जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Bandhavgarh National Park) अगर आप भी बांधवगढ़ नेशनल पार्क जाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे सही समय ठंड के मौसम में होता है। इसलिए आप अक्टूबर से मार्च तक के बीच कभी भी यहाँ जंगल सफारी के लिए जा सकते हैं। इस समय टेंपरेचर बहुत ज्यादा नहीं होता है। जिसके कारण जंगल सफारी करना आसान हो जाता है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क कैसे पहुंचे (How to reach Bandhavgarh National Park)? अगर आप हवाई मार्ग से बांधवगढ़ नेशनल पार्क पहुंचाना चाहते हैं तो आपको जबलपुर हवाई अड्डा के लिए फ्लाइट की टिकट बुक करवानी होगी। जबलपुर हवाई अड्डा पहुंचकर वहां से आपको बांधवगढ़ नेशनल पार्क के लिए बाय रोड जाना होगा। जबलपुर हवाई अड्डा से बांधवगढ़ नेशनल पार्क की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है। इसे आप अपनी सुविधा अनुसार लोकल ट्रांसपोर्ट या फिर कैब के द्वारा तय कर सकते हैं।अगर आप रेल मार्ग के द्वारा बांधवगढ़ पहुंचाना चाहते हैं तो बांधवगढ़ नेशनल पार्क से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उमरिया रेलवे स्टेशन और कटनी रेलवे स्टेशन हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क से उमरिया रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 35 किलोमीटर है। वहीं कटनी रेलवे स्टेशन की दूरी लगभग 100 किलोमीटर की है।आप बाय रोड भी बांधवगढ़ नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं।