रोहतास गढ़ किला : इतिहास, रहस्य और रोमांच से भरी एक अद्भुत यात्रा, जो दिल जीत ले!
रोहतास गढ़ का किला बिहार की धरती का वो शाही अध्याय है, जो आज भी अपनी वीर गाथाओं, रहस्यमयी रास्तों और घने जंगलों में छिपे सौंदर्य के साथ यात्रियों को प्रभावित करता है। कैमूर की पहाड़ियों के ऊपर बसा यह किला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि कई सदियों के उतार–चढ़ाव, पराक्रम, कला और रहस्यों का संगम है। यहां पहुंचने पर हर कदम ऐसा लगता है जैसे किसी पुराने समय के रास्तों पर चल रहे हों! जहां इतिहास आपकी बाजू पकड़कर खुद आपको अपना परिचय देता है। किले का इतिहास कब बना, किसने बसाया और क्यों? रोहतास गढ़ बिहार के रोहतास जिले की सबसे ऊंची पहाड़ियों पर बना भारत के सबसे मजबूत और विशाल किलों में से एक है। इसका इतिहास किसी महाकाव्य से कम नहीं। माना जाता है कि इस किले की शुरुआती नींव तीसरी सदी में पड़ी, जब रोहतास की पहाड़ियों पर स्थानीय शासकों का राज था। पर इसका असली विस्तार और वैभव 16वीं सदी में शेरशाह सूरी के समय दिखाई देता है, जिसने इस किले को सैन्य दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित स्थान के रूप में विकसित किया।(जहां इतिहास आपकी बाजू पकड़कर खुद आपको अपना परिचय देता है।) शेरशाह ने इसे अपना रणनीतिक किला बनाया, जहां से बंगाल से काबुल तक की आवाजाही पर नजर रखी जाती थी। यही वजह है कि रोहतास गढ़ को अजेय किला भी कहा जाता है। इतिहासकारों का कहना है कि इस किले को जीतना लगभग असंभव माना जाता था, क्योंकि यह 1500 फीट ऊंची पहाड़ी पर बसाया गया है, और इसका रास्ता इतना जटिल है कि बड़े से बड़े आक्रमणकारी को यहां पहुंचने में महीनों लग जाते थे। मुगल बादशाह हुमायूं, अकबर और कई अन्य शासकों के दौर में यह किला अस्थायी रूप से उनके नियंत्रण में तो आया, लेकिन इसका असली स्वरूप कभी नष्ट नहीं हुआ। ब्रिटिश शासन के दौरान भी यह किला विद्रोहियों का गढ़ बना रहा। आज भी इसकी टूटी दीवारें और वीरान महल इसकी युद्धगाथाओं को चुपचाप सुनाते हैं। किले की खासियतें और रहस्य, क्यों है यह इतना अलग? रोहतास गढ़ की खासियतों की बात करें तो सबसे पहले इसका लॉस्ट सिटी जैसा माहौल दिल जीत लेता है। जंगल के बीच अचानक एक विशाल किला दिख जाए तो दिल में जो रोमांच उठता है, वही इस जगह की असली पहचान है। यहां का माहौल रहस्यमयी इसलिए भी लगता है क्योंकि इस पूरे किले में दर्जनों गुप्त मार्ग, सुरंगें और तहखाने हैं, जिनका असली मकसद आज भी पूरी तरह समझ नहीं आया। कहते हैं कि किले के भीतर एक ऐसा सुरंग मार्ग है जो सीधे सोन नदी के किनारे निकलता है, जिससे युद्ध के समय पानी की सप्लाई और गुप्त आवाजाही होती थी। स्थानीय लोगों की मानें तो रात के वक्त यहां कई बार अनसुनी आवाजें, कदमों की गूंज और कहीं दूर किसी दरवाजे के खुलने–बंद होने की आवाजें सुनाई देती हैं। हालांकि, वैज्ञानिक रूप से इनमें से कई ध्वनियां पहाड़ियों की प्रतिध्वनि मानी जाती हैं। किले का एक और रहस्य यह है कि इसके अंदर कई महल, मस्जिदें, बावड़ियां और मंदिर हैं, लेकिन फिर भी इतना बड़ा क्षेत्र आज भी पूरी तरह एक्सप्लोर नहीं किया गया है। ऐसा माना जाता है कि कई हिस्से अभी भी जंगल में पूरी तरह समा चुके हैं, जहां लोग शायद ही कभी पहुंचते हों। इसका रहस्यमय होने का एक आकर्षण यह भी है कि यह किला एक ही जगह पर इतिहास, वास्तुकला, प्रकृति, रोमांच और आध्यात्मिकता सभी को समेटे बैठा है। किले की बनावट और कला का कमाल रोहतास गढ़ की वास्तुकला इतनी भव्य है कि पहली नज़र में ही आप इसकी मजबूती का अंदाजा लगा लेते हैं। इस किले का फैलाव लगभग 42 वर्ग किलोमीटर में है यानी यह भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इसकी विशाल दीवारें, 80 से ज्यादा दरवाजे, और चट्टानों को काटकर बनाई गई ईंट-पत्थर की मजबूत संरचनाएं शेरशाह सूरी काल की उन्नत इंजीनियरिंग का उदाहरण हैं। किले का मुख्य प्रवेश द्वार हथिया पोल है, जिस पर विशाल हाथियों की आकृतियां उकेरी गई हैं। इतना बारीक पत्थर-नक्काशी देखकर आज भी लोग चकित रह जाते हैं। इसके अलावा संदीपनी तालाब, रानी महल, हवाखाना, बारादरी, दीवान-ए-खास, जनाना महल जैसी जगहें किले की भव्यता को दर्शाती हैं। यहां की मस्जिदें, खासकर शेरशाह सूरी की बनवाई हुई जमात मस्जिद, अफगानी वास्तुकला का बेहतरीन नमूना हैं। बड़े मेहराब, मजबूत खंभे और ऊंचे गुंबद आज भी जस के तस खड़े हैं। मंदिरों की बात करें तो किले में स्थित गणेश मंदिर और देवी मंदिर भी कला और आध्यात्म का सुंदर मिश्रण हैं। इस किले की बनावट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां पत्थरों को जोड़ने के लिए चूना या मसाले की मात्रा बेहद कम इस्तेमाल हुई। चट्टानों को इस तरह काटकर और जोड़कर रखा गया है कि वे सदियों से एक-दूसरे को संभाले हुए हैं। किले से जुड़ी कुछ कहानियां रोहतास गढ़ की कहानियां किसी लोककथा से कम नहीं। सबसे लोकप्रिय कहानी है रानी सोनावती की, जो शेरशाह सूरी के समय यहां रहती थीं। कहा जाता है कि रानी बेहद बहादुर थीं और युद्ध के समय उन्होंने सेना की कमान संभाली थी। किले के भीतर उनका महल आज पूरी तरह खंडहर हो चुका है, लेकिन उससे जुड़ी कहानियां आज भी स्थानीय लोग सुनाते हैं। एक और कथा है प्रेम तड़प की, जिसमें कहा जाता है कि यहां रहने वाली एक राजकुमारी किसी सैनिक से प्रेम करती थी, लेकिन सामाजिक बंधनों के कारण दोनों मिल नहीं पाए और उस सैनिक ने किले के पीछे वाली चट्टान से कूदकर जान दे दी। उस जगह को आज भी प्रेम घाटी कहा जाता है। कई कहानियां ऐसे भी हैं जिनमें कहा गया है कि रात के अंधेरे में किले के कुछ हिस्सों में स्त्री के पायल की आवाजें सुनाई देती हैं। एक कथा यह भी है कि युद्ध के दौरान यहां के कई सैनिकों को गुप्त सुरंगों में बंद कर दिया गया था, जिनकी आत्माएं आज भी भटकती हैं। हालांकि, ये बातें स्थानीय लोककथाओं का हिस्सा हैं और यात्रियों के रोमांच को कई गुना बढ़ा देती हैं। कैसे पहुंचे रोहतास गढ़ किले तक रोहतास गढ़ किला रोमांच पसंद यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। यहां पहुंचना थोड़ा कठिन जरूर




