Culture Delhi Destination

Red Fort- Delhi

Red Fort- Delhi: लाल किला - देश की आन बान और शान का प्रतीक

by Pardeep Kumar

देश की आन बान और शान का प्रतीक लाल किला दिल्ली शहर का सबसे फेमस टूरिस्ट प्लेस है, जो हर साल यहां आने वाले लाखों पर्यटकों को अपनी और खूब आकर्षित करता है। यही वह प्रसिद्ध किला है, जहाँ से हर साल देश के प्रधानमंत्री 15 अगस्त के दिन यहां की प्राचीर से तिरंगा फहराते हैं और देश की जनता को सम्बोधित करते हैं। अगर पर्यटन स्थलों की बात की जाए तो लाल किला दिल्ली का सबसे बड़ा स्मारक भी है।(Red Fort, Delhi)

इस ब्लॉग में आज हम आपको बताएंगे इस किले के ऐतिहासिक और राजनैतिक महत्त्व के साथ-साथ इसकी शानदार वास्तुकला और अद्भुत बनावट के बारे में।
देश की राजधानी दिल्ली में स्थित यह लाल किला देश की आजादी का प्रतीक माना जाता है। भारतीय और मुगल वास्तुशैली से बने इस भव्य ऐतिहासिक किले का निर्माण पांचवें मुगल शहंशाह शाहजहां ने 1638 ईसवी में करवाया था। जो लगभग 10 साल निर्माण कार्य के बाद 1648 ईसवीं में बन कर तैयार हुआ। यमुना नदी के किनारे स्थित इस किले का अद्भुत सौंदर्य और आकर्षण देखते ही बनता है। (Red fort , Delhi)

देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक यह ऐतिहासक स्मारक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल है। लाल किले के सौंदर्य, भव्यता और आकर्षण को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं और इसकी शाही बनावट और अनूठी वास्तुकला की खूब प्रशंसा भी करते हैं।

आपको बता दें यह शाही किला मुगल बादशाहों का न सिर्फ राजनीतिक केन्द्र था, बल्कि यह उनका औपचारिक केन्द्र भी हुआ करता था, जिस पर करीब 200 सालों तक मुगल वंश के विभिन्न शासकों ने राज किया। देश की जंग-ए-आजादी का भी गवाह रहा लाल किला मुगलकालीन वास्तुकला, सृजनात्मकता और सौंदर्य का अनुपम और अनूठा उदाहरण है।

आपको बता दें कि शाहजहां, इस किले को उनके द्वारा बनवाए गए सभी किलों में बेहद आकर्षक और सुंदर बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 1638 ईसवी में ही अपनी राजधानी आगरा को दिल्ली शिफ्ट कर लिया था, और फिर तल्लीनता से इस किले के निर्माण में ध्यान देकर इसे भव्य और आर्कषक रुप दिया था। शाहजहां ने आगरा में स्थित ताजमहल को भव्य रुप देने वाले डिजाइनर और मुगल काल के प्रसिद्ध वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी को इस किले की शाही डिजाइन बनाने के लिए चुना था। वहीं उस्ताद अहमद अपने नाम की तरह ही अपनी कल्पना शक्ति से शानदार इमारत बनाने में उस्ताद थे, उन्होंने लाल किले को बनवाने में भी अपनी पूरी विवेकशीलता और कल्पनाशीलता का इस्तेमाल कर इसे अति सुंदर और भव्य रुप दिया था। यही वजह है कि लाल किले के निर्माण के इतने सालों के बाद आज भी इस किले की विशालता और खूबसूरती के लिए विश्व भऱ में जाना जाता है।

भारत का राष्ट्रीय गौरव समझे जाने वाले इस किले का इतिहास न केवल बेहद दिलचस्प है बल्कि यह किला अनेक लड़ाइयों का साक्षी भी रहा हैI इसी किले के कारण ही उस समय भारत की राजधानी दिल्ली को शाहजहांनाबाद कहा जाता था। कला प्रेमी, विशेषकर स्थापत्य कला प्रेमी शाहजहां के शासनकाल को मुग़ल शासन का स्वर्ण युग और भारतीय सभ्यता का सबसे समृद्ध काल भी कहा गया है। शाहजहां के बाद उसके बेटे औरंगजेब ने इस किले में मोती-मस्जिद का भी निर्माण करवाया था।

लगभग 250 एकड़ में फैला यह शानदार किला मुगलों और अंग्रेजों के संघर्ष की कहानी भी बयां करता हैं। 17वीं सदी में करीब 30 साल तक यह लाल किला बिना शासक के रहा। 18वीं सदी में अंग्रेजों ने लाल किले पर अपना कब्जा जमा लिया और इसे किले में जमकर लूट-पाट की।

भारत की आजादी के बाद सबसे पहले देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इस पर तिरंगा फहराकर देश के नाम संदेश दिया था।

आजादी के बाद लाल किले का इस्तेमाल सैनिक प्रशिक्षण के लिए किया जाने लगा और बाद में दिसम्बर 2003 में, भारतीय सेना ने इसे भारतीय पर्यटन विभाग को सौंप दिया।
इसके सौंदर्य, आर्कषण और भव्यता की वजह से इसे 2007 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल किया गया था और आज इस ऐतिहासिक किले की खूबसूरती को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग इसे देखने दिल्ली जाते हैं।
अपनी ऊँची-ऊँची और मजबूत दीवारों से घिरा यह किला करीब 250 एकड़ में फैला हुआ है।

छत्ता चौक या बाजार

इस किले के दो मुख्य द्वार है – दिल्ली दरवाज़ा एवं लाहौर दरवाज़ा। लाहौर दरवाज़ा इसका मुख्य प्रवेश द्वार है। इसके अन्दर प्रवेश करते ही आपको एक शानदार और आकर्षक बाजार दिखाई देगा जिसे छत्ता चौक या बाजार कहते हैं, छत्ता मतलब ढका हुआ।

आप जैसे ही लाहौरी दरवाजे से किले में अंदर प्रवेश करते हैं तो आपको यह बाजार दिखाई देगा जिसमे दोनों तरफ दो मंजिला मेहराबदार दुकानें बनी हुई हैं जो शाही परिवार की रानियों और महिलाओं के लिए बनवाया गया था ताकि वो आसानी से यहाँ से खरीददारी कर सके। दोनों तरफ 32 कमरें बने हुए हैं जो आज भी दुकानों के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।

नक्कारखाना

लाहौर गेट से छत्ता चौक तक आने वाली सड़क से लगे खुले मैदान के पूर्वी ओर नक्कारखाना बना है। यह संगीतज्ञों के लिए बनाये गए महल का मुख्य दरवाज़ा है।

दीवान-ए-आम

इस गेट के पार एक और खुला मैदान है, जो कि दीवाने-ए-आम का प्रांगण हुआ करता था। दीवान-ए-आम में बादशाह आम जनता से रूबरू होते थे। एक शानदार सिंहासन का छज्जा दीवाने आम के बीचों बीच बना था। यह बादशाह के लिए बनाया गया था जहाँ बैठ कर बादशाह जनता की फरियाद सुनता था।

महल की योजना मूलरूप से इस्लामिक शैली में है, परंतु यहाँ बने मण्डप हिन्दू वास्तुकला को छाप छोड़ते हैं।

ज़नाना

महल के दो हिस्से महिलाओं हेतु बने हैं, जिन्हें जनाना कहते हैं: मुमताज महल, जो अब संग्रहालय बना हुआ है, एवं रंग महल, जिसमें सुवर्ण मण्डित नक्काशीदार छतें एवं संगमरमर के सरोवर बने हैं, जिसमें नहर-ए-बहिश्त से जल आता था और समस्त महल में पानी की पूर्ति होती थी।

खास महल

यही दक्षिण में एक और मण्डप है जिसे खास महल कहते हैं। इसमें शाही कमरे बने हैं। इनमें राजसी शयन-कक्ष, प्रार्थना-कक्ष, एक बरामदा और मुसम्मन बुर्ज बने हैं। इसी बुर्ज से बादशाह जनता को दर्शन देते थे।

दीवान-ए-ख़ास

यहाँ आपको एक और मंडप दिखाई देगा जिसे दीवान-ए-खास कहते हैं, जो राजा का निजी सभा कक्ष था। यहाँ बादशाह अपने बेहद खास मंत्रीमण्डल के सदस्यों तथा सभासदों से बैठक करता था।
अगला मण्डप है, हमाम, जो को राजसी स्नानागार था, और तुर्की शैली में बनाया गया है। इसमें सफ़ेद संगमरमर एवं अन्य रंगीन पत्थर भी जडे़ गए हैं।

मोती मस्जिद

हमाम के पश्चिम में मोती मस्जिद बनी है। जिसे औरंगजेब ने बनवाया था। यह एक छोटी तीन गुम्बद वाली मस्जिद है।

हयात बख़्श बाग

मोती मस्जिद के पास ही हयात बख़्श बाग है जिसमे दो आकर्षक मंडप बनाये गए हैं। यह मुग़लों की प्रसिद्ध चार बाग शैली में बनाया गया है।

लाल किले पर पहुंचने के लिए सबसे निकटतम मेट्रो स्टेशन चांदनी चौक है जोकि येलो लाइन पर स्थित है यहां आप अपनी सुविधा अनुसार बस, कैब या ऑटो से जा सकते हैं साथ ही साथ आपको बता दें लाल किले के ठीक सामने पार्किंग की बहुत अच्छी सुविधा है।

टिकट्स और टाइमिंग

यह किला सप्ताह के 6 दिन मंगलवार से रविवार तक खुला रहता है और सोमवार को यह किला बंद रहता है।
लाल किले की टिकट भारतीयों के लिए 35 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 500 रुपए है

admin

admin

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल