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Durga Puja Kolkata 2026: पंडाल, घूमने की जगहें और फूड गाइड

Durga Puja

कोलकाता की गलियों में ढाक की थाप सुनाई देने लगे, हर तरफ रंग-बिरंगी रोशनी दिखे और रात के दो बजे भी सड़कों पर लोगों की भीड़ कम होने का नाम न ले, तो समझ जाइए कि शहर में Durga Puja का माहौल बन चुका है। यहाँ त्योहार के दिनों में लोग सिर्फ पूजा करने नहीं निकलते, बल्कि पूरे शहर को देखने, घूमने, खाने और उसकी संस्कृति को महसूस करने निकलते हैं। कहीं शानदार पंडाल देखने के लिए लंबी लाइन लगी होती है, तो कहीं सड़क किनारे पुचका और काठी रोल की दुकानों पर भीड़ नजर आती है।

कोलकाता को सिटी ऑफ जॉय कहा जाता है, लेकिन Durga Puja के दौरान इस शहर की रौनक कुछ अलग ही होती है। महीनों की मेहनत से तैयार किए गए पंडाल, मिट्टी से बनी खूबसूरत मूर्तियाँ, ढाक बजाते कलाकार और रातभर घूमते परिवार इस उत्सव को खास बनाते हैं। साल 2021 में UNESCO ने कोलकाता की दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया था। इसकी वजह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि इसमें शामिल कला, कारीगरी और लोगों की सामूहिक भागीदारी भी है।

अगर आप 2026 में कोलकाता घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यह गाइड आपके काम आएगी। इसमें जानिए कहाँ-कहाँ पंडाल देखने जाएँ, कौन-सी ऐतिहासिक जगहें घूमें, क्या खाएँ और यात्रा की तैयारी कैसे करें।

Durga Puja 2026: कोलकाता जाने का सही समय क्या है?

पश्चिम बंगाल सरकार के पूजा कैलेंडर के अनुसार, 2026 में महालया 10 अक्टूबर को है और मुख्य दुर्गा पूजा उत्सव महाषष्ठी से शुरू होकर विजयादशमी तक चलेगा। मुख्य पूजा की तारीखें 17 से 21 अक्टूबर 2026 हैं। महालया से ही शहर में उत्सव की हलचल बढ़ने लगती है, लेकिन बड़े पंडाल देखने और रातभर घूमने का सबसे खास समय आमतौर पर महाषष्ठी से नवमी तक रहता है। अष्टमी के दिन पूजा और अंजलि का विशेष महत्व है, जबकि दशमी पर सिंदूर खेला और प्रतिमा विसर्जन देखने को मिलता है।

अगर आप पहली बार Durga Puja देखने जा रहे हैं, तो कम से कम तीन से चार दिन का समय रखें। इससे आप उत्तर, मध्य और दक्षिण कोलकाता के अलग-अलग पंडालों के साथ शहर की कुछ मशहूर जगहें भी देख पाएँगे। ध्यान रखें कि त्योहार के दौरान होटल की कीमतें बढ़ सकती हैं और कई सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रहती है। इसलिए टिकट और होटल की बुकिंग पहले कर लेना बेहतर है। Durga Puja

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पंडाल हॉपिंग क्या है और इसे कैसे प्लान करें?

कोलकाता में पंडाल हॉपिंग का मतलब है एक ही रात में कई दुर्गा पूजा पंडाल घूमना। हर पंडाल की अपनी सजावट, मूर्ति, रोशनी और थीम होती है। कहीं पारंपरिक बंगाली शैली दिखाई देती है, तो कहीं कलाकार बाँस, कपड़े, मिट्टी, लकड़ी और दूसरी चीजों से विशाल कलाकृतियाँ तैयार करते हैं। इसी वजह से Durga Puja के दौरान पूरा शहर किसी खुली कला प्रदर्शनी जैसा लगने लगता है। Durga Puja

लेकिन एक बात याद रखें—कोलकाता में पंडाल बहुत बड़ी संख्या में होते हैं और लोकप्रिय जगहों पर काफी भीड़ रहती है। इसलिए इंटरनेट पर दिखने वाली हर जगह को एक ही रात में देखने की कोशिश न करें। अपनी पसंद के पंडाल चुनें और उन्हें इलाके के हिसाब से बाँट लें। उत्तर कोलकाता के पंडाल एक दिन, मध्य कोलकाता के दूसरे दिन और दक्षिण कोलकाता के पंडाल तीसरे दिन देख सकते हैं। इससे बार-बार लंबा सफर करने और ट्रैफिक में समय खराब होने से बचेंगे।

उत्तर कोलकाता: पुरानी गलियाँ और पारंपरिक पंडाल

अगर आप कोलकाता की पुरानी संस्कृति और पारंपरिक दुर्गा पूजा का अनुभव लेना चाहते हैं, तो उत्तर कोलकाता से शुरुआत करें। यहाँ कई पूजा समितियाँ वर्षों से उत्सव आयोजित करती आ रही हैं। पुराने मकान, संकरी गलियाँ, पारंपरिक मूर्तियाँ और आसपास की दुकानों की हलचल इस इलाके को अलग पहचान देती है। यहाँ घूमते समय आपको शहर की पुरानी जीवनशैली की झलक भी देखने को मिलेगी।

बागबाजार सर्बोजनिन, कुमारटुली पार्क, हाथीबागान सर्बोजनिन और नलिन सरकार स्ट्रीट जैसे नाम पंडाल हॉपिंग की सूची में शामिल किए जा सकते हैं। बागबाजार अपनी पारंपरिक पूजा के लिए जाना जाता है, जबकि कुमारटुली कलाकारों और मूर्तिकारों के इलाके के रूप में मशहूर है। हालाँकि हर साल पंडाल की सजावट और थीम बदल सकती है, इसलिए 2026 में किसी खास थीम को देखने के लिए निकलने से पहले उस साल की जानकारी जाँच लें।

उत्तर कोलकाता में सुबह या देर रात घूमने का अपना अलग अनुभव है। भीड़ कम होने पर मूर्तियों और सजावट को थोड़ा आराम से देखने का मौका मिल सकता है, लेकिन रात में निकलते समय सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षा और वापसी की व्यवस्था का ध्यान जरूर रखें।

मध्य कोलकाता: रोशनी, बड़ी सजावट और ऐतिहासिक बाजार

मध्य कोलकाता में कई ऐसे पंडाल मिलते हैं जहाँ सजावट और रोशनी खास आकर्षण होती है। संतोष मित्रा स्क्वायर, कॉलेज स्क्वायर, मोहम्मद अली पार्क और काशी बोस लेन को अपनी सूची में रख सकते हैं। कॉलेज स्क्वायर के आसपास का इलाका अपनी झील और पूजा के माहौल के लिए जाना जाता है। रात में रोशनी का प्रतिबिंब पानी पर दिखाई दे, तो तस्वीरें लेने का मन जरूर करता है। Durga Puja

इस इलाके में पंडाल देखने के साथ बाजारों और पुराने शहर की गलियों में घूमने का मौका भी मिलता है। लेकिन लोकप्रिय पंडालों के बाहर लंबी कतारें लग सकती हैं। किसी जगह तक पहुँचने से पहले यह देख लें कि वहाँ पैदल जाने का रास्ता खुला है या नहीं और आसपास वाहनों की आवाजाही पर कोई रोक तो नहीं है। त्योहार के दिनों में पुलिस द्वारा बनाए गए रास्तों और दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

अगर आप पहली बार Durga Puja के लिए कोलकाता आए हैं, तो मध्य कोलकाता में घूमते हुए समय का अंदाजा जरूर रखें। एक पंडाल से दूसरे पंडाल तक पहुँचने में दूरी कम दिख सकती है, लेकिन भीड़ के कारण पैदल सफर में ज्यादा समय लग सकता है।

दक्षिण कोलकाता: क्रिएटिव थीम और खूबसूरत सजावट

दक्षिण कोलकाता में आधुनिक और रचनात्मक पंडाल देखने को मिलते हैं। यहाँ कई पूजा समितियाँ हर साल अलग-अलग विषयों पर सजावट तैयार करती हैं। कभी पारंपरिक मंदिरों से प्रेरित संरचनाएँ देखने को मिलती हैं, तो कभी लोक कला, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर आधारित थीम लोगों का ध्यान खींचती हैं।

एकडालिया एवरग्रीन क्लब, देशप्रिय पार्क, सुरुचि संघा, चेतला अग्रणी और बोसपुकुर शीतला मंदिर जैसे पंडाल लोकप्रिय नामों में शामिल हैं। इन जगहों पर हर साल एक जैसी सजावट देखने की उम्मीद न रखें। पंडालों की थीम और कलाकारों की जानकारी आयोजन के करीब सामने आती है, इसलिए किसी खास कलाकृति को देखने के लिए निकलने से पहले मौजूदा साल का अपडेट देखना अच्छा रहेगा। Durga Puja

दक्षिण कोलकाता में पंडालों के साथ बाजारों और खाने-पीने की जगहों को भी योजना में शामिल किया जा सकता है। अगर परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो बीच-बीच में आराम करने का समय रखें। लगातार कई घंटे पैदल चलना थकाने वाला हो सकता है, खासकर जब सड़क पर भीड़ ज्यादा हो।

सॉल्ट लेक और आसपास: शहर के दूसरे हिस्से का अनुभव

कोलकाता की यात्रा को सिर्फ पुराने शहर तक सीमित नहीं रखना चाहते, तो सॉल्ट लेक और आसपास के इलाकों में भी पंडाल देख सकते हैं। सॉल्ट लेक एफडी ब्लॉक जैसे पूजा आयोजनों में स्थानीय लोगों की बड़ी भागीदारी रहती है। यहाँ की सजावट और माहौल शहर के दूसरे हिस्सों से अलग अनुभव दे सकता है।

Durga Puja

सॉल्ट लेक या न्यू टाउन को अपनी यात्रा में शामिल करते समय दूरी का ध्यान रखें। अगर आपकी रात की योजना उत्तर या दक्षिण कोलकाता के पंडाल देखने की है, तो उसी रात बहुत दूर के इलाके में जाने से बचें। बेहतर होगा कि एक ही क्षेत्र के आसपास की जगहों को चुनें और फिर अगले दिन किसी दूसरे हिस्से में जाएँ। इससे सफर कम थकाने वाला रहेगा और आप पंडालों को जल्दबाजी के बिना देख पाएँगे।

पंडालों के अलावा कोलकाता में ये जगहें भी जरूर देखें

कोलकाता की पहचान सिर्फ Durga Puja से नहीं है। यह शहर इतिहास, साहित्य, वास्तुकला और नदी किनारे बसे जीवन के लिए भी जाना जाता है। अगर दिन में आपके पास समय है, तो विक्टोरिया मेमोरियल घूमने जा सकते हैं। सफेद संगमरमर से बनी यह भव्य इमारत शहर की मशहूर ऐतिहासिक जगहों में शामिल है। इसके आसपास का मैदान भी लोगों को आकर्षित करता है। जाने से पहले संग्रहालय के समय और टिकट की जानकारी जाँच लें। Durga Puja

हावड़ा ब्रिज, जिसे रवींद्र सेतु भी कहा जाता है, हुगली नदी पर बना कोलकाता का एक जाना-पहचाना पुल है। इसके आसपास शहर की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखा जा सकता है। दूसरी ओर प्रिंसेप घाट नदी किनारे टहलने और शाम के समय कुछ सुकून भरे पल बिताने के लिए अच्छा विकल्प है। नाव की सवारी करना चाहते हैं, तो उस दिन उपलब्ध सेवा और सुरक्षा नियमों की जानकारी लें।

धार्मिक और आध्यात्मिक जगहों में दक्षिणेश्वर काली मंदिर और बेलूर मठ को शामिल किया जा सकता है। दोनों जगहों का अपना ऐतिहासिक महत्व है। त्योहार के दौरान यहाँ भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है, इसलिए दर्शन और आने-जाने के लिए पर्याप्त समय रखें।

कुमारटुली और कॉलेज स्ट्रीट: कला और किताबों की दुनिया

कोलकाता की संस्कृति को समझना है, तो कुमारटुली जरूर जाएँ। यह इलाका मूर्तिकारों और कारीगरों के लिए मशहूर है। यहाँ कलाकार मिट्टी, पुआल और दूसरे सामान की मदद से दुर्गा की प्रतिमाएँ तैयार करते हैं। पूजा से पहले के महीनों में काम करते कारीगरों को देखना इस उत्सव के पीछे की मेहनत समझने का अच्छा मौका है। हालाँकि हर कार्यशाला में प्रवेश की अनुमति नहीं होती, इसलिए तस्वीर लेने या अंदर जाने से पहले पूछ लें।

इसके बाद किताबों के शौकीन कॉलेज स्ट्रीट जा सकते हैं। यहाँ फुटपाथों पर पुरानी और नई किताबों की दुकानें मिलती हैं। आसपास स्थित इंडियन कॉफी हाउस भी लंबे समय से शहर के साहित्यिक और बौद्धिक माहौल का हिस्सा रहा है। किताबें खरीदने, कॉफी पीने और शहर को थोड़ा अलग अंदाज में जानने के लिए यह जगह अच्छी है। Durga Puja

कोलकाता का स्ट्रीट फूड: पंडाल घूमते हुए क्या खाएँ?

कोलकाता की यात्रा में खाना अपने आप में एक बड़ा आकर्षण है। पंडाल घूमते हुए सड़क किनारे मिलने वाले व्यंजनों का स्वाद लेना न भूलें। सबसे पहले आता है पुचका, जिसे कई लोग पानी पूरी या गोलगप्पे से अलग मानते हैं। इसमें मसालेदार आलू और खट्टे-तीखे पानी का स्वाद मिलता है। इसके बाद काठी रोल आजमाएँ, जिसमें पराठे के अंदर कबाब, प्याज और चटनी भरी जाती है। Durga Puja

अगर कुछ हल्का खाने का मन हो, तो झालमुड़ी बढ़िया विकल्प है। मुरमुरे, मसाले, प्याज, हरी मिर्च और सरसों के तेल से तैयार यह चटपटा नाश्ता घूमते हुए खाने के लिए सुविधाजनक है। इसके अलावा घुघनी, मुगलाई पराठा और लुची-आलू दम भी स्थानीय खाने के लोकप्रिय विकल्प हैं। Durga Puja

कोलकाता की बिरयानी अपने खास स्वाद और आलू के लिए मशहूर है। मांसाहारी खाना पसंद करते हैं, तो कोशा मांगशो भी आजमा सकते हैं। मिठाई में रसगुल्ला, राजभोग और मिष्टी दोई का स्वाद लेना न भूलें। खाने के लिए पार्क स्ट्रीट, न्यू मार्केट और कॉलेज स्ट्रीट के आसपास कई विकल्प मिलते हैं। भीड़भाड़ वाले स्टॉल पर ताजा बना खाना चुनें, साफ पानी पिएँ और अपनी तबीयत के अनुसार ही बाहर का खाना खाएँ।

न्यू मार्केट और गरियाहाट: शॉपिंग के लिए कहाँ जाएँ?

अगर आप कोलकाता से कुछ खरीदकर ले जाना चाहते हैं, तो न्यू मार्केट और गरियाहाट मार्केट अच्छे विकल्प हैं। न्यू मार्केट के आसपास कपड़े, बैग, जूते, चाय और कई तरह के सामान की दुकानें मिलती हैं। यहाँ खरीदारी करते समय अलग-अलग दुकानों में कीमत की तुलना करें और सामान की गुणवत्ता देखकर ही खरीदें। त्योहार के दिनों में बाजार में भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए बहुत ज्यादा सामान लेकर पंडाल हॉपिंग पर निकलना सुविधाजनक नहीं होगा।

गरियाहाट मार्केट पारंपरिक साड़ियों, कपड़ों, आभूषणों और घरेलू सामान के लिए जाना जाता है। अगर आपको बंगाली तांत की साड़ियाँ, हस्तशिल्प या स्थानीय डिजाइन पसंद हैं, तो यहाँ समय निकालें। बाजार के खुलने और बंद होने के समय में त्योहार के दौरान बदलाव हो सकता है, इसलिए जाने से पहले मौजूदा समय की पुष्टि कर लें।

कोलकाता में घूमने के लिए कौन-सा परिवहन चुनें?

Durga Puja के दौरान कोलकाता की सड़कों पर भारी भीड़ रहती है। ऐसे में Metro कई यात्राओं के लिए सुविधाजनक विकल्प हो सकती है, लेकिन त्योहार के दौरान समय-सारणी और विशेष सेवाएँ बदल सकती हैं। 2026 में पूजा के दिनों के लिए घोषित विशेष Metro सेवाओं और समय-सारणी को यात्रा से पहले आधिकारिक अपडेट के जरिए जाँचें। Durga Puja

कुछ रास्तों पर पैदल चलना ही सबसे आसान तरीका हो सकता है, क्योंकि लोकप्रिय पंडालों के आसपास वाहनों की आवाजाही सीमित की जा सकती है। ऐप कैब या टैक्सी लेते समय यह ध्यान रखें कि गाड़ी आपको पंडाल के बिल्कुल सामने तक न पहुँचा पाए। जरूरत पड़ने पर निर्धारित जगह से पैदल चलने के लिए तैयार रहें।

कोलकाता की ट्राम भी शहर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा रही है, लेकिन मौजूदा सेवाएँ सीमित और रूट के हिसाब से अलग हो सकती हैं। इसलिए पुरानी ट्राम के किसी खास रूट पर यात्रा करने का प्लान बनाने से पहले यह जरूर जाँच लें कि सेवा उपलब्ध है या नहीं। फेरी से हुगली नदी पार करना चाहते हैं, तो उस दिन के संचालन समय और घाट की जानकारी भी देख लें।

पंडाल हॉपिंग से पहले ये जरूरी बातें जान लें

कोलकाता में Durga Puja का आनंद लेने के लिए आरामदायक कपड़े और जूते पहनें, क्योंकि कई जगह काफी पैदल चलना पड़ सकता है। अक्टूबर में मौसम गर्म और उमस भरा हो सकता है और बारिश भी हो सकती है, इसलिए पानी की बोतल, छोटी छतरी या हल्का रेनकोट साथ रखना उपयोगी है।

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फोन की बैटरी पूरी रखें और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल के लिए पावर बैंक साथ ले जाएँ। भीड़ में परिवार या दोस्तों से अलग हो जाने की स्थिति के लिए पहले ही मिलने की जगह तय कर लें। बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो उनका हाथ पकड़े रखें और उन्हें अपना फोन नंबर याद करवाएँ या सुरक्षित तरीके से अपने पास लिखकर रखें। Durga Puja

पंडालों में प्रवेश के नियम अलग-अलग हो सकते हैं। कतार में धैर्य रखें, आयोजकों और पुलिस के निर्देशों का पालन करें और किसी भी जगह जबरदस्ती भीड़ में आगे बढ़ने की कोशिश न करें। तस्वीर लेते समय दूसरे लोगों की निजता का ध्यान रखें। अगर किसी इलाके में रास्ता बंद हो या प्रवेश रोक दिया गया हो, तो दूसरा रास्ता चुनें।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • पंडालों की सूची पहले बना लें। उत्तर, मध्य और दक्षिण कोलकाता को अलग-अलग दिनों में कवर करें। इससे कम समय में ज्यादा जगहें देखने की बजाय सफर आराम से कर पाएँगे।
  • होटल और यात्रा की बुकिंग पहले करें। पूजा के दिनों में होटल और परिवहन की माँग बढ़ती है। अपनी तारीखों के हिसाब से बुकिंग करें और होटल से पंडालों तक आने-जाने का तरीका पहले समझ लें।
  • रात की यात्रा सुरक्षित रखें। देर रात घूमने का प्लान है, तो वापसी के लिए Metro, कैब या दूसरे उपलब्ध साधन की जानकारी पहले जाँचें। सिर्फ पुराने समय-सारणी के भरोसे न रहें।
  • स्थानीय खाने का स्वाद जरूर लें। पुचका, झालमुड़ी, काठी रोल और मिष्टी दोई जैसे व्यंजन आजमाएँ। साफ-सफाई पर ध्यान दें और पानी की सुरक्षित व्यवस्था रखें।
  • सिर्फ पंडाल नहीं, शहर की संस्कृति भी देखें। कुमारटुली के कारीगर, कॉलेज स्ट्रीट की किताबें, विक्टोरिया मेमोरियल और प्रिंसेप घाट जैसी जगहें आपकी यात्रा को और खास बना सकती हैं। Durga Puja

कोलकाता में Durga Puja सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि शहर को नए अंदाज में जानने का मौका है। यहाँ कला और परंपरा साथ चलती हैं, पुरानी गलियाँ रोशनी से भर जाती हैं और खाने की खुशबू हर तरफ महसूस होती है। कहीं ढाक की आवाज सुनाई देती है, तो कहीं लोग परिवार और दोस्तों के साथ पंडाल देखने निकलते हैं।

अगर आप 2026 में कोलकाता जाने की सोच रहे हैं, तो अपनी यात्रा की तैयारी पहले करें, लेकिन हर घंटे का हिसाब बनाकर सफर को बोझिल न बनाएँ। कुछ समय बिना किसी तय योजना के भी शहर में घूमने के लिए रखें। हो सकता है कि किसी छोटी-सी गली में दिखा पंडाल, किसी कारीगर की बनाई मूर्ति या सड़क किनारे खाया गया पुचका ही आपकी यात्रा की सबसे प्यारी याद बन जाए। Durga Puja

Shivani Pal

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