Bhalugad Waterfall मुक्तेश्वर के पास इस झरने की पूरी जानकारी
अगर आपको पहाड़ों पर घूमना पसंद है और किसी ऐसी जगह की तलाश है जहां ज्यादा शोर न हो, आसपास हरियाली हो और कुछ दूर पैदल चलने के बाद एक खूबसूरत झरना आपका इंतजार कर रहा हो, तो मुक्तेश्वर के पास मौजूद भालूगाड़ Waterfall आपको पसंद आ सकता है।
कुमाऊँ की पहाड़ियों के बीच जंगलों से घिरा यह झरना उन जगहों में से है जहां पहुंचने के लिए थोड़ा पैदल चलना पड़ता है, लेकिन यही छोटी सी पैदल यात्रा इस सफर को और खास बना देती है।
भालूगाड़ Waterfall तक पहुंचने के रास्ते में जंगल, पहाड़ी ढलान, छोटी पानी की धाराएं और आसपास की हरियाली आपका साथ देती है। जैसे-जैसे आप झरने के करीब पहुंचते हैं, पानी गिरने की आवाज साफ सुनाई देने लगती है।
जब आखिर में पेड़ों के बीच से गिरती करीब 60 फीट ऊंची पानी की धार दिखाई देती है, तो थोड़ी देर के लिए बस वहीं खड़े होकर उसे देखने का मन करता है। यह झरना मुक्तेश्वर से करीब 10 से 14 किलोमीटर के आसपास बताया जाता है और यहां तक पहुंचने के लिए Dhari या Boranshi गांव की तरफ से जाना होता है।
भालूगाड़ नाम कैसे पड़ा, इसके पीछे क्या कहानी है?
भालूगाड़ नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में भालू का ख्याल आता है। स्थानीय कुमाऊँनी भाषा में ‘भालू’ का मतलब जंगली भालू और ‘गाड़’ का मतलब पानी की धारा या छोटी नदी माना जाता है। स्थानीय लोगों के बीच यह मान्यता है कि पुराने समय में इस इलाके के जंगलों में जंगली भालू पानी पीने के लिए इस धारा के आसपास आया करते थे। इसी वजह से इस जगह को भालूगाड़ कहा जाने लगा।
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इस जगह की एक और खास बात झरने के पास बनने वाला इंद्रधनुष है। जब सुबह की धूप पानी की गिरती बूंदों पर पड़ती है, तो झरने के नीचे हल्का सा इंद्रधनुष दिखाई दे सकता है। इसी वजह से भालूगाड़ Waterfall को कई लोग इंद्रधनुष वाले झरने के नाम से भी जानते हैं। हालांकि इंद्रधनुष दिखना मौसम, धूप और पानी की फुहारों की दिशा पर निर्भर करता है, इसलिए हर दिन ऐसा नजारा मिले, यह जरूरी नहीं है।
मुक्तेश्वर से भालूगाड़ Waterfall कितनी दूर है?
भालूगाड़ Waterfall उत्तराखंड के नैनीताल जिले में मुक्तेश्वर के आसपास का एक लोकप्रिय प्राकृतिक स्थल है। यह मुक्तेश्वर से करीब 10 से 14 किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है और Dhari, Boranshi या आसपास के गांवों की तरफ से यहां पहुंचा जा सकता है।
मुक्तेश्वर घूमने आने वाले यात्रियों के लिए भालूगाड़ Waterfall को एक दिन की छोटी यात्रा में शामिल करना आसान रहता है। अगर आप मुक्तेश्वर में पहले से ठहरे हुए हैं तो सुबह निकलकर झरना देख सकते हैं और इसके बाद आसपास के दूसरे पहाड़ी इलाकों में घूम सकते हैं।
हालांकि पहाड़ों में दूरी को सिर्फ किलोमीटर से नहीं समझना चाहिए। सड़क घुमावदार होने के कारण कुछ किलोमीटर का रास्ता भी मैदानी इलाके के मुकाबले ज्यादा समय ले सकता है। इसलिए अपनी यात्रा बनाते समय केवल दूरी नहीं, बल्कि रास्ते का समय भी ध्यान में रखें।
Delhi से भालूगाड़ जाने में कितना समय लग सकता है?
अगर आप Delhi या NCR से भालूगाड़ Waterfall जाने का सोच रहे हैं तो सड़क मार्ग से दूरी लगभग 330 से 350 किलोमीटर के आसपास पड़ सकती है। सामान्य परिस्थितियों में इस सफर में करीब 8 से 10 घंटे लग सकते हैं, हालांकि मौसम, ट्रैफिक और पहाड़ी सड़क की स्थिति के हिसाब से समय कम-ज्यादा हो सकता है।
Delhi से निकलने के बाद हल्द्वानी और भवाली की तरफ बढ़ते हुए पहाड़ों का सफर शुरू हो जाता है। आगे रामगढ़ और मुक्तेश्वर की तरफ जाने पर रास्ते में पहाड़ी गांव, फल के बाग और हरियाली देखने को मिलती है।
अगर आप सुबह बहुत जल्दी Delhi से निकलते हैं तो रास्ते में पर्याप्त समय बचा सकते हैं। लेकिन अगर उसी दिन भालूगाड़ Waterfall देखना है तो बहुत देर से निकलने से बचें, क्योंकि झरने तक पहुंचने के लिए सड़क के बाद पैदल भी चलना पड़ता है।
Kathgodam से भालूगाड़ कैसे पहुंचें?
Kathgodam भालूगाड़ Waterfall जाने वालों के लिए सबसे उपयोगी रेलवे स्टेशनों में से एक है। यहां से आगे Bhawali, Ramgarh और Mukteshwar की तरफ सड़क मार्ग से जाना होता है। अलग-अलग रूट और शुरुआती स्थान के हिसाब से दूरी बदल सकती है।
अगर आप Train से Kathgodam पहुंच रहे हैं तो वहां से टैक्सी या अपने वाहन से आगे जा सकते हैं। पहाड़ों का रास्ता होने के कारण धीरे-धीरे चलना बेहतर रहता है। रास्ते में कई जगह रुककर पहाड़ों और घाटियों का नजारा भी देखा जा सकता है।
अगर आप पहली बार इस इलाके में जा रहे हैं तो दिन के समय यात्रा करना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। खासकर आखिरी हिस्से में पहुंचने से पहले रास्ते, पार्किंग और ट्रैक की स्थिति की स्थानीय जानकारी जरूर ले लें।
Nainital से भालूगाड़ की दूरी कितनी है?
Nainital से भालूगाड़ Waterfall की दूरी अलग-अलग रूट के अनुसार लगभग 40 से 50 किलोमीटर के आसपास हो सकती है। अगर आप Nainital घूमने के बाद यहां आना चाहते हैं तो यह यात्रा एक अच्छे दिन के कार्यक्रम का हिस्सा बन सकती है।
Nainital से Bhawali और आगे Mukteshwar की तरफ जाते हुए रास्ता काफी खूबसूरत है। रास्ते में पहाड़ों के साथ-साथ फल के बाग भी दिखाई देते हैं। मौसम अच्छा हो तो बाइक या स्कूटी से जाने का अनुभव भी अच्छा हो सकता है, लेकिन पहाड़ी रास्ते पर वाहन चलाते समय सावधानी जरूरी है।
अगर आपको पहाड़ों पर वाहन चलाने की आदत नहीं है तो स्थानीय टैक्सी लेना ज्यादा आसान विकल्प हो सकता है।
पार्किंग से शुरू होता है असली जंगल का सफर
भालूगाड़ Waterfall की सड़क तक पहुंचने के बाद आपका वाहन मुख्य पार्किंग के आसपास खड़ा करना होता है। पार्किंग और Entry Fee स्थानीय व्यवस्था के अनुसार बदल सकती है, इसलिए पहुंचने पर ताजा जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
गाड़ी पार्क करने के बाद असली रोमांच शुरू होता है। यहां से झरने तक पैदल जाना पड़ता है। यही पैदल रास्ता इस जगह को सिर्फ एक सामान्य झरने की यात्रा से थोड़ा अलग बनाता है।
शुरुआत में आपको आसपास की हरियाली और जंगल दिखाई देते हैं। आगे बढ़ने पर रास्ता कहीं पत्थरीला तो कहीं थोड़ा ढलान वाला मिलता है। बीच-बीच में पानी की छोटी धाराएं भी दिखाई दे सकती हैं।
करीब 1 से 2 किलोमीटर का जंगल ट्रैक कैसा है?
पार्किंग से भालूगाड़ Waterfall तक की पैदल दूरी अलग-अलग शुरुआती जगहों के हिसाब से करीब 1 से 2 किलोमीटर बताई जाती है। कई यात्रियों के अनुसार मुख्य ट्रेल लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर का है, जबकि कुछ रास्तों से दूरी 2 किलोमीटर तक हो सकती है।
यानी बहुत लंबी ट्रैकिंग नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह आसान रास्ता भी नहीं कहा जा सकता। यह रास्ता जंगल, घास वाले हिस्सों और पत्थरों से होकर गुजरता है। कई जगह रास्ता समतल है तो कहीं हल्की चढ़ाई या उतराई मिल सकती है। इसलिए आराम से चलना बेहतर है।
अगर आप नियमित रूप से पैदल चलते हैं तो यह ट्रैक बहुत मुश्किल नहीं लगेगा। लेकिन बच्चों, बुजुर्गों या कम चलने वाले लोगों के साथ जा रहे हैं तो बीच में रुकने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय रखें।
रास्ते में छोटी-छोटी धाराएं भी मिलेंगी
भालूगाड़ Waterfall तक पहुंचने वाले रास्ते की खूबसूरती सिर्फ झरने में नहीं है। रास्ते में आपको छोटी पानी की धाराएं, पत्थर, जंगल और हरियाली मिलती है। कुछ हिस्सों में पानी को पार करने के लिए पत्थरों या छोटे पुलों का सहारा लेना पड़ सकता है।
बारिश के बाद इन धाराओं में पानी बढ़ सकता है। इसलिए मानसून के दौरान कदम बहुत संभालकर रखना चाहिए। गीले पत्थरों और मिट्टी वाले हिस्सों पर फिसलने का खतरा रहता है।
कई यात्रियों के लिए यह छोटी पैदल यात्रा ही पूरी यात्रा का मजेदार हिस्सा बन जाती है, क्योंकि यहां आपको लगातार गाड़ी में बैठे रहने के बजाय प्रकृति के बीच पैदल चलने का मौका मिलता है।
झरने तक पहुंचने में कितना समय लगता है?
सामान्य तौर पर एक तरफ का रास्ता करीब 25 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकता है। लेकिन अगर आप रास्ते में फोटो खींचते हैं, आसपास का नजारा देखते हैं और आराम से चलते हैं तो एक घंटे तक भी लग सकता है।
वापसी में कुछ हिस्सों में चढ़ाई महसूस हो सकती है। इसलिए झरने तक पहुंचते समय पूरी ऊर्जा खर्च न करें। पानी की बोतल साथ रखें और जरूरत पड़ने पर रास्ते में आराम करते रहें।
अगर आप भालूगाड़ Waterfall पर काफी समय बिताना चाहते हैं तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा। इससे आपके पास झरना देखने, पानी के आसपास समय बिताने और आराम से वापस आने के लिए पर्याप्त समय रहेगा।
60 फीट ऊंचा झरना पहली नजर में कैसा लगता है?
जैसे ही आप जंगल का रास्ता पार करके भालूगाड़ Waterfall के सामने पहुंचते हैं, आसपास की आवाजों में सबसे ज्यादा ध्यान पानी के गिरने की आवाज खींचती है। करीब 60 फीट की ऊंचाई से गिरती पानी की धार पहाड़ों और पेड़ों के बीच काफी खूबसूरत दिखाई देती है। झरने की पानी की धार नीचे बने प्राकृतिक कुंड में गिरती है। आसपास की चट्टानों और हरियाली के कारण यह जगह फोटो के लिए भी अच्छी लगती है।
अगर धूप सही दिशा से पड़ रही हो और पानी की फुहार हवा में हो तो इंद्रधनुष जैसा नजारा भी दिखाई दे सकता है। यही वह समय होता है जब भालूगाड़ Waterfall का दृश्य और ज्यादा खूबसूरत लग सकता है।
झरने के नीचे बने कुंड में उतरना कितना सुरक्षित है?
भालूगाड़ Waterfall के नीचे प्राकृतिक कुंड बना हुआ है और इसकी गहराई काफी ज्यादा हो सकती है। कुछ स्थानीय विवरणों में इसकी गहराई करीब 40 फीट तक बताई जाती है। इसलिए पानी को देखकर यह बिल्कुल न मानें कि पूरा कुंड उथला है।
अगर पानी में उतरने की अनुमति हो और आप तैरना चाहते हैं तो सुरक्षा के लिए Life Jacket लेना जरूरी है। पानी में उतरने से पहले स्थानीय स्टाफ से गहराई, बहाव और सुरक्षित क्षेत्र की जानकारी जरूर लें।
सबसे जरूरी बात यह है कि रस्सी या सुरक्षा सीमा के आगे न जाएं। पानी के नीचे की चट्टानें दिखाई नहीं देतीं और बारिश के बाद पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। झरने के पास गीली चट्टानों पर चढ़ना भी खतरनाक हो सकता है।
भालूगाड़ घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
भालूगाड़ Waterfall साल के अलग-अलग मौसम में अलग रूप दिखाता है। अगर आप साफ मौसम, अच्छा पानी और आसपास के पहाड़ों का खूबसूरत नजारा चाहते हैं तो अक्टूबर और नवंबर का समय अच्छा माना जा सकता है।
मानसून के बाद जंगल हरे रहते हैं और झरने में भी अच्छा पानी दिखाई दे सकता है। मौसम साफ होने पर आसपास की पहाड़ी चोटियों के नजारे भी देखने को मिल सकते हैं।
अगर आप फूलों और हरियाली का आनंद लेना चाहते हैं तो मार्च और अप्रैल का समय भी अच्छा हो सकता है। इस दौरान आसपास बुरांश के फूल दिखाई देते हैं और मौसम भी घूमने के लिए आरामदायक रहता है।
गर्मियों में भालूगाड़ जाना कैसा रहेगा?
मई और जून में मैदानी इलाकों में गर्मी काफी बढ़ जाती है, जबकि पहाड़ों का मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक रहता है। इसी वजह से गर्मियों में भी भालूगाड़ Waterfall घूमने के लिए लोग पहुंचते हैं।
इस समय जंगल और आसपास के फल के बाग देखने का भी मौका मिलता है। आड़ू, खुबानी और प्लम जैसे पहाड़ी फलों का मौसम भी इसी समय के आसपास देखने को मिल सकता है।
अगर गर्मियों में जा रहे हैं तो दिन के बीच की तेज धूप से बचने के लिए सुबह का समय चुनना बेहतर रहेगा। दोपहर बाद वापस लौटने की योजना रखें ताकि शाम तक जंगल के ट्रैक में न फंसना पड़े।
मानसून में झरना खूबसूरत भी और चुनौतीपूर्ण भी
जुलाई से सितंबर के बीच भालूगाड़ Waterfall में पानी का बहाव बढ़ सकता है। इस मौसम में झरना काफी शानदार दिखाई दे सकता है, लेकिन यही मौसम यात्रा में सबसे ज्यादा सावधानी मांगता है।
पथरीला रास्ता फिसलन भरा हो सकता है। छोटी धाराओं में भी पानी का स्तर अचानक बढ़ सकता है। इसलिए तेज बारिश के दौरान झरने की तरफ बढ़ने से पहले स्थानीय लोगों या वहां की व्यवस्था से रास्ते की स्थिति जरूर पूछें।
सिर्फ अच्छी फोटो के लिए जोखिम लेना बिल्कुल ठीक नहीं है। पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है। अगर बारिश तेज हो जाए तो ट्रैक पर आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित जगह पर लौटना बेहतर है।
सर्दियों में भालूगाड़ का माहौल कैसा रहता है?
दिसंबर से फरवरी के बीच यहां ठंड काफी बढ़ जाती है। आसपास के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना भी रहती है। ठंड के मौसम में पर्यटकों की संख्या कुछ समय पर कम हो सकती है, जिससे आपको ज्यादा शांत वातावरण मिल सकता है।
अगर आपको ठंडी पहाड़ी हवा और शांत जगहें पसंद हैं तो सर्दियों में भालूगाड़ Waterfall का सफर अलग अनुभव दे सकता है। हालांकि इस मौसम में सुबह और शाम काफी ठंड हो सकती है।
गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी है और बहुत देर शाम तक जंगल के रास्ते में रुकने से बचना चाहिए। सूरज ढलने के बाद ट्रैक पर रोशनी और तापमान, दोनों जल्दी कम हो सकते हैं।
भालूगाड़ में खाने-पीने की क्या व्यवस्था है?
झरने की तरफ जाने वाले रास्ते और आसपास छोटी दुकानें मिल सकती हैं। यहां चाय, कॉफी, मैगी, बिस्किट, जूस और कुछ हल्का खाना मिल जाता है। लेकिन सभी दुकानें हर समय खुली मिलें, यह जरूरी नहीं है।
अगर आप सुबह बहुत जल्दी भालूगाड़ Waterfall जाने वाले हैं तो पानी की बोतल और थोड़ा हल्का नाश्ता अपने साथ रखना बेहतर रहेगा। लंबे ट्रैक के लिए बहुत भारी बैग ले जाने से बचें।
पहाड़ों में घूमते समय जितना जरूरी खाना साथ रखना है, उतना ही जरूरी अपना कचरा वापस लाना भी है। प्लास्टिक की बोतल, चिप्स के पैकेट और खाने का बचा हुआ सामान जंगल में न छोड़ें।
भालूगाड़ में कौन-कौन सी रोमांचक गतिविधियां मिलती हैं?
अगर आपको सिर्फ झरना देखना ही पसंद नहीं है और थोड़ा रोमांच भी चाहिए तो भालूगाड़ Waterfall के आसपास कुछ गतिविधियां उपलब्ध हो सकती हैं। स्थानीय ऑपरेटरों के जरिए Zipline, Rope Bridge, Burma Bridge, Rock Climbing और Rappelling जैसी गतिविधियां कराई जा सकती हैं।
इनमें से किसी भी गतिविधि को करने से पहले उसकी सुरक्षा व्यवस्था, शुल्क, प्रशिक्षक की उपलब्धता और मौसम की स्थिति जरूर जांचें। खासकर बारिश के दौरान ऊंचाई वाली गतिविधियों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
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अगर आप बच्चों के साथ जा रहे हैं तो उनके लिए गतिविधि चुनते समय उम्र, ऊंचाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का ध्यान रखें। केवल फोटो या वीडियो के लिए किसी जोखिम वाली गतिविधि में भाग न लें।
क्या भालूगाड़ में Camping भी कर सकते हैं?
भालूगाड़ Waterfall के रास्ते में या आसपास Camping की सुविधा वाले स्थान मिल सकते हैं। अगर आप सिर्फ कुछ घंटे के लिए झरना देखने के बजाय प्रकृति के बीच रात बिताना चाहते हैं तो स्थानीय Camping विकल्प देख सकते हैं।
नदी के किनारे टेंट में रहना और रात में पहाड़ों के शांत वातावरण का अनुभव करना अच्छा लग सकता है। लेकिन Camping करते समय मौसम और पानी के बहाव की जानकारी जरूर रखें।
नदी के बिल्कुल किनारे या पानी के रास्ते में टेंट लगाना सुरक्षित नहीं है, खासकर बारिश के मौसम में। Booking से पहले Camp की सुरक्षा, भोजन, शौचालय, बिजली, स्थानीय अनुमति और वापसी के रास्ते की जानकारी ले लें।
भालूगाड़ जाते समय कौन से जूते पहनें?
भालूगाड़ Waterfall का रास्ता बहुत लंबा नहीं है, लेकिन पथरीला और कहीं-कहीं फिसलन वाला हो सकता है। इसलिए चप्पल, सैंडल या ऊंची एड़ी वाले जूते पहनकर जाने से बचें। अच्छी पकड़ वाले बंद जूते या Trekking Shoes ज्यादा बेहतर रहेंगे। इससे छोटे पत्थरों, मिट्टी और गीले रास्ते पर चलते समय पैर फिसलने का खतरा कम होगा।
खासकर मानसून के दौरान जूतों का चुनाव और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर आपके जूते पानी में भीग जाएं तो वापसी के समय फिसलन बढ़ सकती है, इसलिए संभव हो तो अतिरिक्त मोजे रखें।
भालूगाड़ जाते समय क्या सामान साथ रखें?
भालूगाड़ Waterfall के लिए बहुत ज्यादा सामान ले जाने की जरूरत नहीं है। एक पानी की बोतल, हल्का नाश्ता, जरूरी दवाएं, मोबाइल, थोड़ा नकद पैसा और मौसम के अनुसार कपड़े काफी रहेंगे। अगर पानी में उतरने का विचार है तो अतिरिक्त कपड़े भी साथ रखें। बारिश के मौसम में एक छोटा बरसाती कपड़ा या Rain Jacket उपयोगी रहेगा।
मोबाइल या कैमरे को पानी की फुहारों से बचाने के लिए Waterproof Cover रखना भी अच्छा विचार है। ट्रैक पर हाथ खाली रखने के लिए छोटा Backpack इस्तेमाल करें।
भालूगाड़ में सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व क्यों दें?
प्राकृतिक जगहों की सबसे बड़ी खूबसूरती यही होती है कि वहां हर चीज इंसान के हिसाब से नियंत्रित नहीं होती। भालूगाड़ Waterfall भी एक प्राकृतिक झरना है, इसलिए पानी का बहाव मौसम के साथ बदल सकता है। झरने के नीचे गहरे पानी में बिना सुरक्षा के न उतरें। गीली चट्टानों पर फोटो लेने के लिए किनारे तक जाने की कोशिश न करें। बच्चों को पानी के पास अकेला न छोड़ें।
अगर बारिश तेज हो रही हो तो झरने के आसपास ज्यादा देर रुकने के बजाय सुरक्षित रास्ते से वापस लौटना बेहतर है। हमेशा चिन्हित रास्ते पर चलें और स्थानीय कर्मचारियों या गाइड की सलाह को नजरअंदाज न करें।
भालूगाड़ जाने वाले पर्यटकों की सबसे आम गलती क्या होती है?
कई लोग झरने को देखकर उत्साहित हो जाते हैं और तुरंत पानी में उतरने लगते हैं। लेकिन पहाड़ों के झरनों में ऊपर से आने वाले पानी का बहाव कभी भी बढ़ सकता है। दूसरी गलती लोग सही जूते न पहनकर करते हैं। छोटी सी फिसलन भी चोट का कारण बन सकती है। ट्रैक को आसान मानकर लापरवाही से चलना सही नहीं है।
तीसरी गलती है रास्ते में प्लास्टिक और खाने का कचरा छोड़ देना। अगर आप भालूगाड़ Waterfall जैसी प्राकृतिक जगह को लंबे समय तक खूबसूरत देखना चाहते हैं तो सफाई की जिम्मेदारी पर्यटकों की भी है।
भालूगाड़ की यात्रा में कितना समय रखें?
अगर आप सिर्फ झरना देखकर वापस लौटना चाहते हैं तो आधा दिन पर्याप्त हो सकता है। पार्किंग से झरने तक आने-जाने का समय, झरने पर रुकने का समय और रास्ते में फोटो के लिए समय जोड़कर अपनी यात्रा बनाएं।
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अगर आप रोमांचक गतिविधियां करना चाहते हैं या Camping भी करना चाहते हैं तो ज्यादा समय रखना होगा। ट्रैक, झरना और वापसी मिलाकर लगभग 2 से 3 घंटे रखना सुविधाजनक हो सकता है।
मुक्तेश्वर की यात्रा के साथ भालूगाड़ Waterfall जोड़ रहे हैं तो सुबह झरने के लिए निकलना और दोपहर या शाम तक वापस आसपास के दूसरे स्थानों को देखने का कार्यक्रम बनाया जा सकता है।
भालूगाड़ Waterfall क्यों जाना चाहिए?
भालूगाड़ Waterfall की सबसे खास बात यह है कि यहां पहुंचने के लिए सिर्फ गाड़ी से उतरकर झरने के सामने पहुंचने का अनुभव नहीं मिलता। आपको पहले जंगल के बीच पैदल चलना पड़ता है।
यही छोटी सी यात्रा आपको धीरे-धीरे शहर की भागदौड़ से दूर ले जाती है। रास्ते में पेड़ों की आवाज, पक्षियों की चहचहाहट और पानी की छोटी धाराएं आपका ध्यान खींचती हैं।
और जब आखिर में झरना सामने आता है तो लगता है कि यह छोटी सी मेहनत बिल्कुल सही थी। अगर आप मुक्तेश्वर जा रहे हैं और प्रकृति के बीच कुछ घंटे बिताना चाहते हैं तो भालूगाड़ Waterfall आपकी यात्रा में एक अच्छा पड़ाव बन सकता है।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- सुबह जल्दी पहुंचें। सुबह के समय मौसम शांत रहता है और भीड़ भी अपेक्षाकृत कम मिल सकती है। धूप सही हो तो झरने की फुहारों में इंद्रधनुष भी देखने को मिल सकता है।
- जूते सोच-समझकर पहनें। भालूगाड़ Waterfall तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता है। अच्छी पकड़ वाले बंद जूते पहनें और चप्पल या ऊंची एड़ी वाले जूते बिल्कुल न पहनें।
- पानी में उतरते समय सावधानी रखें। कुंड की गहराई काफी ज्यादा हो सकती है। बिना सुरक्षा के गहरे पानी में न जाएं और अगर Life Jacket जरूरी बताई गई हो तो उसे जरूर पहनें।
- मौसम देखकर यात्रा बनाएं। अक्टूबर-नवंबर साफ मौसम और अच्छे बहाव के लिए अच्छा समय हो सकता है, जबकि मानसून में झरना सुंदर जरूर दिखता है लेकिन रास्ता ज्यादा फिसलन भरा हो सकता है।
- पहाड़ को साफ छोड़कर आएं। बोतल, चिप्स के पैकेट और दूसरा कचरा रास्ते में न छोड़ें। जिस जंगल और झरने को देखने के लिए आप इतनी दूर आए हैं, उसकी खूबसूरती बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।