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‘कॉकरोच जनता पार्टी’ भी रह गई दंग! दुनिया का इकलौता मंदिर जहां होती है Cockroach की पूजा, अनोखे देवता को देखने उमड़ रहे टूरिस्ट

Japan Cockroach Temple

Japan Cockroach Temple नई दिल्ली । दुनिया में अजीबोगरीब और अतरंगी चीजों के लिए मशहूर जापान से एक ऐसा हैरान कर देने वाला ट्रैवल ट्रेंड सामने आया है, जिसे सुनकर आप अपने होश खो बैठेंगे। अगर आप भी अपनी अगली विदेश यात्रा (International Trip) पर कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जो पूरी दुनिया में कहीं और न हो, तो जापान के नारा प्रांत का रुख कर लीजिए। कॉकरोच जनता पार्टी

यहां के एक शांत पहाड़ी गांव में स्थित ऐतिहासिक मंदिर इन दिनों सोशल मीडिया और ट्रैवलर्स के बीच हॉट टॉपिक बना हुआ है। वजह है, यहां स्थापित एक विशालकाय Cockroach (Cockroach deity) की कांस्य (Bronze) मूर्ति, जिसकी लोग बाकायदा पूजा करते हैं। जी हां, वही Cockroach जिसे देखकर अमूमन लोग डरकर भागते हैं या चप्पल उठा लेते हैं, उसे यहां ‘देवता’ का दर्जा मिला हुआ है। आइए जानते हैं इस बेहद अनोखे और अजीब टूरिस्ट डेस्टिनेशन की पूरी कहानी। कॉकरोच जनता पार्टी

कहां है यह अनोखा मंदिर और कैसा दिखता है यह ‘Cockroach देवता’?

यह अतरंगी नजारा देखने को मिलता है, पूर्वी-पश्चिमी जापान के नारा प्रांत (Nara Prefecture) में, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां के एक छोटे से पहाड़ी गांव ‘कामीकितायामा’ (Kamikitayama) में स्थित ‘रिनसेंजी मंदिर’ (Rinsenji Temple) के मुख्य द्वार पर कदम रखते ही पर्यटकों का सामना इस विशालकाय मूर्ति से होता है।

सुमो पहलवान जैसी कद-काठी: इस मूर्ति का नाम “गोकीबुरीतेन” (Gokiburiten) है, जिसका मतलब ‘Cockroach देवता’ होता है।

  • यह मूर्ति करीब 170 सेंटीमीटर (लगभग 5.5 फीट) ऊंची है और पूरी तरह ब्रॉन्ज (कांस्य) से बनी है।
  • इसे किसी साधारण कीड़े की तरह नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली इंसानी रूप में ढाला गया है। इसके चार बेहद मजबूत और गठीले हाथ बाहर की ओर फैले हुए हैं, और दो पैर सुमो पहलवान की तरह जमीन पर मजबूती से जमे हुए हैं।
  • इस Cockroach के पेट (Abdomen) के हिस्से में मूर्तिकार ने एक छोटा सा इंसानी शहर भी उकेरा है, जो यह संदेश देता है कि इस प्रकृति के सामने इंसान कितने छोटे और परजीवी (Parasitic) हैं।

क्यों बनाई गई Cockroach की मूर्ति? इसके पीछे की वजह है बेहद खास

अब आप सोच रहे होंगे कि, आखिर किसी पवित्र मंदिर में Cockroach की मूर्ति क्यों लगाई जाएगी? तो इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है। दरअसल, इस मूर्ति को आज से करीब 26 साल पहले नवंबर 2000 में स्थापित किया गया था। कॉकरोच जनता पार्टी

दरअसल, इसे ओसाका की एक मशहूर पेस्ट कंट्रोल (कीड़े-मकोड़े भगाने वाली) कंपनी ‘सोनो’ के संस्थापक रियोजाबुरो मिनामिसोनो (84 वर्ष) ने बनवाया था। उनकी कंपनी सालाना 2,000 से ज्यादा Cockroach खत्म करने के प्रोजेक्ट्स करती थी। मिनामिसोनो का मानना था कि, भले ही ये जीव इंसानों के लिए हानिकारक हैं, लेकिन अपने बिजनेस के चक्कर में उन्होंने लाखों बेजुबान Cockroach की जान ली है। इसलिए, उन मरे हुए जीवों की आत्मा की शांति और उनके प्रति सम्मान (Memorial for Pests) व्यक्त करने के लिए उन्होंने इस अनोखी मूर्ति का निर्माण करवाया। Bizarre Tourism Japan Cockroach Deity

इसके क्रिएटर 72 वर्षीय प्रसिद्ध मूर्तिकार हिरो अमानो हैं। उन्होंने बताया कि, वह Cockroach को एक डरावने जीव के बजाय एक शक्तिशाली और थियेट्रिकल रूप में दिखाना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने जापान के प्रसिद्ध ‘काबूकी’ डांस और सुमो रेसलिंग के पोज से प्रेरणा ली।

गांव के लिए वरदान बनी मूर्ति: पोलैंड से लेकर चीन तक के टूरिस्ट पहुंच रहे यहाँ

यह छोटा सा पहाड़ी गांव ‘कामीकितायामा’ पिछले कई सालों से घटती आबादी और वीरानेपन से जूझ रहा था। लेकिन इस अजीबोगरीब ‘Cockroach देवता‘ ने इस गांव की किस्मत बदल दी है। Unique places to visit in Nara Japan

आज इस अनोखे लैंडमार्क को देखने के लिए जापान के कोने-कोने से युवा तो आ ही रहे हैं, साथ ही चीन, पोलैंड और अन्य यूरोपीय देशों के इंटरनेशनल ट्रैवलर्स भी इस सुदूर जंगल के बीच बसे मंदिर में पहुंच रहे हैं। 26 सालों से इस मूर्ति को छूकर देखने वाले पर्यटकों के कारण अब इस ब्रॉन्ज स्टैच्यू की सतह और भी ज्यादा चमकदार और चिकनी हो गई है। मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी की पत्नी मिहो कोजिमा कहती हैं, “यह Cockroach मूर्ति अब इस शांत गांव में बाहरी दुनिया के लोगों से जुड़ने और बातचीत का एक बेहतरीन जरिया बन चुकी है।”

ट्रेवल गाइड: रिनसेंजी मंदिर (नारा) कैसे पहुंचें?

  • रूट (The Route): यह अनोखा मंदिर मुख्य नारा शहर (Nara City) से दक्षिण की ओर घने जंगलों के बीच स्थित है। नारा शहर से यहां के लिए खूबसूरत पहाड़ों और वादियों से होते हुए लगभग 2 घंटे की ड्राइव (Road Trip) करके पहुंचा जा सकता है।
  • बेस्ट टाइम टू विजिट: चूंकि यह मंदिर एक खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र में है, इसलिए वसंत (Spring) और शरद ऋतु (Autumn) का मौसम यहाँ घूमने और फोटोग्राफी के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है।
  • टूरिस्ट नोट: अगर आप यहां जा रहे हैं, तो मंदिर प्रशासन पर्यटकों को इस अनोखी कलाकृति को स्वतंत्र रूप से छूने, उसके साथ तस्वीरें खिंचाने और इसे एक अद्भुत आर्ट पीस के रूप में एन्जॉय करने की पूरी छूट देता है।

Ajay Raj

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