Destination Review Travel Uttarakhand

देव भूमि उत्तराखंड में है दुनिया का सबसे खूबसूरत नेशनल पार्क जानिए इसके बारे में

  • 0 Comments

Valley of Flowers “क्या आपने कभी किसी ऐसे जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितना खूबसूरत होगा वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी? ….और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे?” क्या है वैली ऑफ़ फ्लावर?( what is valley of flower)? वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क पहले नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान का भाग था लेकिन बाद में इन दोनों नेशनल पार्कों को अलग कर दिया गया। इस फ्लॉवर वैली में खास क्या है? (What’s special in this valley of flower?) फ्लोरा (Floras in Valley of Flowers National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनीमोन (Anemone), जर्मेनियम (Germanium), मार्श (Marsh), गेंदा (Marigold), प्रिभुला (Pribula), पोटेन्टिला (Potentilla), जिउम (Geum), तारक (Aster), लिलियम (Lilium), हिमालयी नीला पोस्त (Himalayan Blue Poppy), बछनाग (Bacchanal), डेलफिनियम (Delphinium), रानुनकुलस (Ranunculus), कोरिडालिस (Corydalis), इन्डुला (Indula), सौसुरिया (Saussurea) और कम्पानुला (Campanula)। बेस्ट टाइम टू विजिट वैली ऑफ़ फ्लावर नेशनल पार्क (Best time to visit Valley of Flowers National Park) वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है। कैसे पहुंचे फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valley of Flowers National Park)? वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचना होगा। पुलना गांव से आपकी ट्रैकिंग की शुरुआत होगी। जब आप पुलना गांव से अपनी ट्रैकिंग की शुरुआत करेंगे तो रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम के एक बाजार से गुजरना होगा। जंगल चट्टी से गुजरते हुए आप भ्युवदार गांव पहुंचेंगे। भ्युवदार गांव इस ट्रक का सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट होगा। जहां से आप घांगरिया के लिए निकलेंगे। पुलना से घांगरिया तक का ट्रैक लगभग 10 किलोमीटर का होता है। घांगरिया पहुंचकर आपको एक दिन रुकना पड़ेगा, क्योंकि दिन के 12:00 के बाद घांगरिया से आगे की ट्रैकिंग रोक दी जाती है। अगले दिन आप वैली ऑफ फ्लावर के लिए ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। घांगरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और आप बहुत ही आसानी से इस ट्रैक को पूरा कर लेंगे।

Category Destination Travel Uttarakhand

जन्नत का दूसरा नाम है वैली ऑफ फ्लावर्स

  • 0 Comments

“क्या आपने कभी किसी ऐसे जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितना खूबसूरत होगा वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी? ….और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे?” यह सब पढ़ कर आपके मन में ख्याल आ रहा होगा कि मैं ऐसा क्यों सोचूं? वैसी जगह थोड़ी ना एक्जिस्ट करती है! तो मेरे दोस्तों यह जगह सच में एक्जिस्ट करती है, वह भी भारत में। यह जगह है उत्तराखंड की वैली ऑफ़ फ्लावर!आज के इस ब्लॉग में हम आपको इस खूबसूरत से जगह के बारे में बताने वाले हैं। तो आईए जानते हैं- क्या है वैली ऑफ़ फ्लावर?( what is valley of flower?) वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। कैसे पहुंचे वैली ऑफ फ्लावर? (How to visit valley of flowers? ) बद्रीनाथ से 25 किलोमीटर पहले एक जगह पड़ता है, जिसका नाम है गोविंद घाट। जहां अलकनंदा और लक्ष्मण गंगा का संगम होता है। गोविंद घाट से आपको फूलों की घाटी जाने के लिए पहले आपको पुलना गांव जाना होगा। पुलना गांव जाने के लिए आप शेयरिंग टैक्सी भी ले सकते हैं। पुलना पहुंचने के बाद आपको घांगरिया के लिए पैदल ट्रैकिंग करना होगा। लेकिन घांगरिया के लिए निकलने से पहले आप पुलना में ही रुक कर वैली ऑफ फ्लावर के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा ले। रजिस्ट्रेशन के बाद आप घांगरिया के लिए निकल सकते हैं।अगर आप अपने बाइक या फिर कार से आ रहे हैं तो पुलना में आपको छोटे-छोटे होमस्टे, ढाबे और मोटरसाइकिल या कार की पार्किंग मिल जाएगी। पुलना से घांगरिया लगभग 10 किलोमीटर दूर है और इसकी चढ़ाई आपको पैदल ही करनी होगी।थकान तो बहुत होगी, लेकिन यकीन मानिए इस ट्रैकिंग के रास्ते में आने वाले खूबसूरत नजारे देख कर आप खुद को आगे बढ़ने से रोक नहीं पाएंगे। ये रास्ते इतनी खूबसूरत होते हैं कि आपको पहले से ही एक्साइटमेंट होने लगेगी कि अगर रास्ता इतना खूबसूरत है तो मंजिल कितना खूबसूरत होगा? और यकीन मानिए, जब आप फूलों की घाटी तक पहुंचेंगे तो आपको लगेगा कि आप किसी जन्नत में उतर आए हैं। घांगरिया के रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम का एक बाजार मिलेगा। जो एक बहुत ही छोटा सा बाजार है। जिसके बाद फिर जब आप आगे बढ़ेंगे तो आपको भ्युवदार गांव से गुजरना होगा। यह गांव इस ट्रैक का एक इंपॉर्टेंट पॉइंट माना जाता है। जहां आपको कई सारे ढाबे देखने को मिल जाएंगे। आप यहां कुछ देर रुक कर लंच कर सकते हैं और थोड़ा रेस्ट कर सकते हैं। इस गांव को क्रॉस करते हुए हीं आप लक्ष्मण गंगा को पार करेंगे।पुलना से भ्युवदार गांव के रास्ते में आपको पानी लेकर चलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। क्योंकि इस रास्ते में जगह-जगह मिनरल वाटर के नल लगाए गए हैं। जहां से आप पानी पी सकते हैं। लेकिन भ्युवदार गाँव से आगे आपको सीधा घांगरिया पहुंचने पर ही पानी मिलेगा। इसीलिए आप घांगरिया के लिए निकलने से पहले आप अपने साथ पानी का बोतल रख ले। ट्रैकिंग का समय (Timing of treckking)घंगारिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और सुबह के 7:00 बजे से दोपहर के 12:00 बजे के तक हीं यहां से आगे की ट्रैकिंग के लिए रास्ता खुला होता है। 12:00 बजे के बाद घंगारिया से फ्लावर वैली के लिए आपको ट्रैकिंग करने नहीं दिया जाएगा। इसीलिए आपको घंगारिया पहुंचकर उस दिन वहीं रुकना होगा। घांगरिया में आपको बहुत सारे होटल और टेंट्स भी रहने के लिए मिल जाएंगे। घांगरिया से आप अगले दिन सुबह 7:00 बजे के बाद फ्लावर वैली के लिए निकल सकते हैं। पुलना से घांगरिया का रास्ता जितना खूबसूरत है, घांगरिया से फ्लावर वैली का रास्ता उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत हो जाता है। जब आप घांगरिया से निकलेंगे तो आपको बहुत ही जल्दी ग्लेशियर दिखने शुरू हो जाएंगे। जैसे-जैसे आप फूलों की घाटी की ओर बढ़ेंगे, आपको रास्ते में कई सारे झरने और देवदार के पेड़ देखने को मिलेंगे। देवदार पहाड़ी इलाकों में मिलने वाला एक ऐसा पेड़ है जिसके छाल से पुराने जमाने में भोजपत्र बनाए जाते थे। इस फ्लॉवर वैली में खास क्या है? (What’s special in this valley of flower?) बेस्ट टाइम टू विजिट (Best time to visit) वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है।