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Uttarakhand Travel Guide: घूमने से पहले जान लें ये बातें

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अगर भारत में ऐसी कोई जगह है जहाँ पहाड़, झरने, मंदिर, जंगल, बर्फ और शांति एक साथ मिल जाए, तो वह है उत्तराखंड। हर साल लाखों लोग यहाँ घूमने आते हैं। कोई परिवार के साथ छुट्टियाँ बिताने आता है, कोई दोस्तों के साथ रोड ट्रिप पर निकलता है, तो कोई चारधाम यात्रा के लिए। यही वजह है कि Uttarakhand Travel आज भारत की सबसे लोकप्रिय ट्रैवल कैटेगरी में शामिल हो चुका है। पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। छुट्टियों के दौरान यहाँ कई जगहों पर इतनी भीड़ हो जाती है कि होटल, पार्किंग और सड़कें तक भर जाती हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने 2026 में कुछ नए नियम लागू किए हैं ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले और पहाड़ों का प्राकृतिक संतुलन भी बना रहे। इसलिए अगर आप इस साल Uttarakhand Travel का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ होटल बुक करना ही काफी नहीं है। कुछ जरूरी नियम पहले से जान लेना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। 2026 में Uttarakhand Travel से पहले कौन-कौन से नए नियम जानना जरूरी है? अगर आपकी यात्रा मसूरी, चारधाम या उत्तराखंड की दूसरी लोकप्रिय जगहों की है, तो सबसे पहले रजिस्ट्रेशन की जानकारी जरूर देख लें। अब कई जगहों पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया गया है। सरकार का मकसद सिर्फ भीड़ को नियंत्रित करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अगर आप अपनी कार से Uttarakhand Travel कर रहे हैं, तो कुछ रूट पर ग्रीन कार्ड की जरूरत पड़ सकती है। कई पहाड़ी इलाकों में देर रात गाड़ी चलाने से भी बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि रात के समय धुंध, बारिश और लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है। चारधाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल जांच और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर देख लें ताकि रास्ते में किसी तरह की परेशानी न हो। रिद्वार से शुरू करें अपनी Uttarakhand Travel ज्यादातर लोग उत्तराखंड की यात्रा हरिद्वार से ही शुरू करते हैं। जैसे ही आप हरिद्वार पहुँचते हैं, वहाँ का माहौल बाकी शहरों से बिल्कुल अलग महसूस होता है। सुबह-सुबह गंगा किनारे टहलना और शाम को हर की पौड़ी की गंगा आरती देखना अपने आप में एक यादगार अनुभव होता है। हरिद्वार सिर्फ धार्मिक शहर नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के लगभग हर बड़े पर्यटन स्थल का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। इसलिए लगभग हर Uttarakhand Travel प्लान में हरिद्वार जरूर शामिल होता है। अगर आपके पास समय हो, तो मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर भी जा सकते हैं। दोनों जगह रोपवे की सुविधा भी मिल जाती है, जिससे सफर आसान हो जाता है। हरिद्वार का स्थानीय खाना भी लोगों को काफी पसंद आता है। यहाँ की कचौड़ी, जलेबी, आलू पूरी और लस्सी का स्वाद जरूर लेना चाहिए। ऋषिकेश क्यों है Uttarakhand Travel की सबसे पसंदीदा जगह? हरिद्वार से करीब 25 किलोमीटर आगे ऋषिकेश है। पिछले कुछ सालों में यह शहर युवाओं के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। अगर किसी को एडवेंचर पसंद है, तो यहाँ रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, जायंट स्विंग और कैंपिंग जैसी कई गतिविधियाँ मिल जाती हैं। वहीं अगर कोई शांति चाहता है, तो गंगा किनारे बैठकर घंटों समय बिता सकता है। राम झूला, लक्ष्मण झूला, जानकी सेतु, परमार्थ निकेतन और त्रिवेणी घाट जैसी जगहें हर पर्यटक की लिस्ट में होती हैं। आजकल Uttarakhand Travel करने वाले लोग ऋषिकेश के सुंदर कैफे भी खूब पसंद करते हैं। गंगा किनारे बने इन कैफे में बैठकर पहाड़ों का नज़ारा देखना अलग ही अनुभव देता है।अगर आपका बजट कम है, तो यहाँ अच्छे होस्टल और बजट होटल भी आसानी से मिल जाते हैं।  मसूरी क्यों आज भी लोगों की पहली पसंद है? उत्तराखंड का नाम आते ही सबसे पहले मसूरी का नाम याद आता है। यही वजह है कि इसे आज भी “पहाड़ों की रानी” कहा जाता है। देहरादून से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित यह खूबसूरत हिल स्टेशन पूरे साल पर्यटकों से भरा रहता है। गर्मियों में यहाँ मौसम ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में कई बार बर्फबारी भी देखने को मिल जाती है। अगर आप पहली बार Uttarakhand Travel कर रहे हैं, तो मसूरी को अपनी लिस्ट में जरूर रखें। यहाँ की सबसे प्रसिद्ध जगहों में गन हिल, केम्पटी फॉल, कंपनी गार्डन, कैमल्स बैक रोड और मॉल रोड शामिल हैं। शाम के समय मॉल रोड पर घूमना और स्थानीय दुकानों से खरीदारी करना लगभग हर पर्यटक को पसंद आता है। अगर मौसम साफ हो, तो गन हिल से हिमालय की कई ऊँची चोटियाँ भी दिखाई देती हैं। ध्यान रखें कि छुट्टियों के दौरान मसूरी में काफी भीड़ रहती है, इसलिए होटल पहले से बुक करना बेहतर रहता है। नैनीताल आज भी क्यों है सबसे खूबसूरत Hill Station? अगर किसी एक झील ने उत्तराखंड को दुनिया भर में पहचान दिलाई है, तो वह है नैनी झील। नैनीताल सिर्फ एक हिल स्टेशन नहीं, बल्कि एक पूरा अनुभव है। सुबह झील के किनारे टहलना, बोटिंग करना और शाम को मॉल रोड पर घूमना हर किसी को पसंद आता है। आज भी Uttarakhand Travel करने वाले ज्यादातर लोग नैनीताल जरूर जाते हैं। अगर आपके पास समय हो, तो नैना देवी मंदिर के दर्शन जरूर करें। इसके अलावा स्नो व्यू पॉइंट तक रोपवे से जाने का अनुभव भी शानदार होता है। नैनीताल के आसपास भीमताल, सातताल और नौकुचियाताल जैसी कई खूबसूरत झीलें हैं। अगर भीड़ से दूर शांति चाहिए, तो इन जगहों पर जरूर जाएँ। बरसात के मौसम में यहाँ की हरियाली और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती है। औली क्यों बन गया है Winter Paradise? अगर आपको बर्फ पसंद है, तो उत्तराखंड का औली जरूर जाना चाहिए। सर्दियों में पूरा औली सफेद बर्फ की चादर से ढक जाता है। जनवरी और फरवरी के दौरान यहाँ देश-विदेश से हजारों लोग स्कीइंग करने आते हैं। Uttarakhand Travel की बात हो और औली का नाम न आए, ऐसा शायद ही कभी होता है। जोशीमठ से औली तक जाने वाला रोपवे भारत के सबसे प्रसिद्ध रोपवे में से एक माना जाता है। ऊपर पहुँचते ही नंदा देवी, कामेट और आसपास की कई ऊँची हिमालयी चोटियाँ साफ दिखाई देती हैं। अगर आपने

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भारत के 10 Hidden Village जहाँ समय जैसे थम सा गया है

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शहरों की भागदौड़, लगातार बजते notifications और रोज़ की hectic life के बीच कभी-कभी बस ऐसी जगह जाने का मन करता है जहाँ कुछ पल के लिए सब कुछ ठहर जाए। भारत में आज भी ऐसे कई Hidden Villages हैं, जहाँ पहुँचते ही ऐसा महसूस होता है कि वक्त ने अपनी रफ़्तार धीमी कर दी है। यहाँ न भीड़ का शोर सुनाई देता है और न ही ऊँची-ऊँची इमारतें नज़र आती हैं। इसके बजाय चारों तरफ़ हरियाली, पहाड़, पुराने घर, लोक संस्कृति और सुकून से भरी फ़िज़ा आपका इस्तक़बाल करती है। इन Villages की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहाँ की ज़िंदगी आज भी अपनी असली रफ़्तार में चलती है। लोग प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहते हैं और सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी संभाले हुए हैं। अगर आपको offbeat destinations explore करना पसंद है और भीड़ से दूर कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो ये Hidden Villages आपकी travel bucket list का हिस्सा ज़रूर होने चाहिए। 1. मावलिन्नोंग (Mawlynnong), मेघालय मेघालय के East Khasi Hills में बसा मावलिन्नोंग एक छोटा-सा लेकिन बेहद खूबसूरत Village है। इसे Asia के सबसे साफ-सुथरे Villages में गिना जाता है। यहाँ पहुँचते ही ऐसा लगता है कि ज़िंदगी की सारी भागदौड़ कहीं पीछे छूट गई है। साफ़ गलियाँ, bamboo से बने घर और हर तरफ़ फैली हरियाली इस Village को किसी postcard जैसा बना देती है। अगर आप nature और peace दोनों का perfect combination चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए बिल्कुल सही है। विशेषता मावलिन्नोंग की सबसे बड़ी पहचान इसकी cleanliness और eco-friendly lifestyle है। यहाँ के लोग सफाई को अपनी ज़िम्मेदारी नहीं बल्कि अपनी पहचान मानते हैं। Village में bamboo dustbin हर जगह दिखाई देते हैं और Plastic का इस्तेमाल बेहद कम होता है। यहाँ की सादगी, लोगों की मेहमाननवाज़ी और शांत माहौल इस Village को भारत की सबसे अलग destinations में शामिल करते हैं। यहाँ क्या देखें? मावलिन्नोंग में Living Root Bridge सबसे बड़ा attraction है, जिसे पेड़ों की जड़ों से तैयार किया गया है। इसके अलावा Sky View Point से Bangladesh के मैदानों का शानदार नज़ारा दिखाई देता है। Village की छोटी-छोटी गलियाँ, bamboo walkways, रंग-बिरंगे फूल और आसपास के waterfalls photography lovers के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय October से April तक का समय मावलिन्नोंग घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और खुशनुमा रहता है। सुबह के समय Village की फ़िज़ा सबसे ज़्यादा दिलकश लगती है और हर तरफ़ ताज़गी महसूस होती है। कैसे पहुँचें? मावलिन्नोंग पहुँचने के लिए पहले Shillong पहुँचना होगा। Shillong से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी taxi या private cab के ज़रिए आसानी से तय की जा सकती है। रास्ते में दिखाई देने वाले पहाड़ और हरियाली सफर को भी यादगार बना देते हैं। 2. कल्पा (Kalpa), हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में बसा कल्पा एक ऐसा Village है जहाँ हर सुबह बर्फ़ से ढकी चोटियाँ आपका स्वागत करती हैं। समुद्र तल से लगभग 2,960 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह Village अपनी शांत वादियों, देवदार के जंगलों और सेब के बागों के लिए जाना जाता है। यहाँ की धीमी ज़िंदगी आपको कुछ समय के लिए दुनिया की हर टेंशन भुला देती है। विशेषता कल्पा की सबसे खास बात यह है कि यहाँ से दिखाई देने वाली Kinnaur Kailash Range हर मौसम में अलग रंग बिखेरती है। Village में आज भी पारंपरिक Himachali architecture वाले लकड़ी के घर मौजूद हैं। यहाँ की सादगी, ठंडी हवा और शांत माहौल किसी भी traveller को लंबे समय तक याद रहता है। यहाँ क्या देखें? कल्पा में Kinnaur Kailash View Point सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है। इसके अलावा Roghi Village, Suicide Point, Narayan Nagini Temple और Apple Orchards भी देखने लायक हैं। Sunrise और Sunset के दौरान पहाड़ों पर पड़ती सूरज की किरणें बेहद खूबसूरत मंज़र पेश करती हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय April से June और September से November तक का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है। इस दौरान मौसम साफ़ रहता है और पहाड़ों का नज़ारा खुलकर दिखाई देता है। अगर आपको snowfall पसंद है, तो Winter season भी अच्छा विकल्प हो सकता है। कैसे पहुँचें? Shimla से कल्पा लगभग 230 किलोमीटर दूर है। Shimla से बस और taxi दोनों की सुविधा उपलब्ध रहती है। Road trip के दौरान सतलुज नदी और पहाड़ी रास्तों के शानदार नज़ारे सफर को और भी यादगार बना देते हैं। 3. ज़ीरो (Ziro), अरुणाचल प्रदेश अरुणाचल प्रदेश की मशहूर Ziro Valley में स्थित यह Village प्रकृति और Tribal Culture का अनोखा संगम है। चारों तरफ़ फैले धान के खेत, हरे-भरे जंगल और शांत वातावरण इसे भारत के सबसे खूबसूरत Hidden Villages में शामिल करते हैं। यहाँ का हर नज़ारा ऐसा लगता है जैसे किसी painting से निकलकर सामने आ गया हो। विशेषता ज़ीरो की सबसे बड़ी पहचान यहाँ रहने वाली Apatani Tribe है। यह समुदाय आज भी अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और जीवनशैली को संजोए हुए है। Modern life से दूर यहाँ का सुकून और cultural richness travellers को एक अलग ही experience देती है। यही वजह है कि यह Village nature lovers और culture enthusiasts दोनों के बीच काफी popular है। यहाँ क्या देखें? Ziro Valley, Talley Valley Wildlife Sanctuary, Pine Forest और Apatani Villages यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। अगर आप September में यहाँ आते हैं, तो मशहूर Ziro Music Festival का हिस्सा भी बन सकते हैं। Local markets और traditional houses भी घूमने लायक हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय March से October तक का समय Ziro घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहाना रहता है और पूरी Valley हरियाली से भर जाती है। बारिश के बाद यहाँ की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। कैसे पहुँचें? Naharlagun Railway Station यहाँ का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है। वहाँ से taxi लेकर लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करके Ziro पहुँचा जा सकता है। सबसे नज़दीकी Airport Itanagar के पास स्थित है। 4. लाचेन (Lachen), सिक्किम North Sikkim में स्थित लाचेन एक छोटा लेकिन बेहद मनमोहक Village है। बर्फ़ से ढके पहाड़, बहती नदियाँ और बादलों से घिरी

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पहाड़ों की रानी मसूरी: जहाँ वादियाँ दिल के हाल सुनाती हैं

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धुंध में लिपटी वो सुबह की वादियाँ,बोलती नहीं… पर सब कुछ कह जाती हैं।हर मोड़ पर रुकी हुई सी एक कहानी,यहाँ की हवा भी जैसे गीत सुनाती है।हाँ, मसूरी, सिर्फ़ एक जगह नहीं,बल्कि जिन्दादिली से भरी एक नज़्म है जो बस दिल में उतर जाती है… मसूरी की गलियों में टहलिए, झीलों में अपना अक्स देखिए, और हर सांस में पहाड़ों की ताजगी भर लीजिए। चाहे आप फैमिली ट्रिप पर हों या रोमांटिक हनीमून पर, मसूरी हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास ज़रूर लेकर आती है। उत्तराखंड की वो पहाड़ों की रानी जो हर मौसम में दिल चुरा लेती है।हिमालय की वादियों में बसा यह हिल स्टेशन ना सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का खज़ाना है, बल्कि सुकून, रोमांच और रोमांस का अद्वितीय संगम भी है। अगर आप भारत के बेस्ट हिल स्टेशनों में छुट्टियाँ बिताने की योजना बना रहे हैं, तो मसूरी को ज़रूर आपकी ट्रैवल सूची में होना चाहिए।मसूरी उत्तराखंड राज्य के देहरादून जिले में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 2,000 मीटर की ऊँचाई पर बसा है। यह देहरादून से केवल 35 किलोमीटर की दूरी पर है और यहाँ सड़क मार्ग से आराम से पहुँचा जा सकता है। मसूरी में घूमने की जगहें | Top Places to Visit in Mussoorie केम्पटी फॉल्स (Kempty Falls) मसूरी का सबसे लोकप्रिय झरनामसूरी की खूबसूरती में चार चाँद लगाने वाला स्थान है केम्पटी फॉल्स, जो ना सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यहां हर साल लाखों पर्यटक अपनी यादों में एक ठंडी, झरने से भीगी छाप ले जाते हैं। हरियाली के बीच गिरते झरने की आवाज़ आपके दिल को सुकून देगी। यहाँ आप नहाने और पिकनिक का मजा ले सकते हैं।केम्पटी फॉल्स, मसूरी से लगभग 12 किलोमीटर दूर यमुनोत्री रोड पर स्थित है। गन हिल पॉइंट (Gun Hill Point) मसूरी की सबसे प्रसिद्ध और ऊँची जगहों में से एक है गन हिल पॉइंट (Gun Hill Point)। यह स्थान केवल एक व्यू पॉइंट नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक धरोहर, रोमांच और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। अगर आप मसूरी के बेस्ट व्यू पॉइंट्स खोज रहे हैं, तो गन हिल पॉइंट आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। मसूरी का दूसरा सबसे ऊँचा स्थान, जहाँ से आपको हिमालय की बर्फीली चोटियाँ साफ़ दिखाई देंगी। यहाँ आप केबल कार की सवारी करना ना भूलें।गन हिल का नाम एक समय की ब्रिटिश सैन्य परंपरा से जुड़ा है। कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन काल में हर दिन दोपहर को एक तोप (Gun) दागी जाती थी, जिससे लोग अपने घड़ियों का समय मिला सकें। तभी से इस जगह का नाम पड़ा गन हिल।यह मसूरी के मॉल रोड से लगभग 400 फीट ऊपर स्थित है। आप यहां पैदल ट्रेक करते हुए या केबल कार (Ropeway) से पहुंच सकते हैं, जो लिबरटी चौक से शुरू होती है। मॉल रोड (Mall Road) मॉल रोड मसूरी का वो हिस्सा है जो हर यात्री के दिल को छू लेता है। ये सड़क सिर्फ चलने का रास्ता नहीं, बल्कि मसूरी के इतिहास, संस्कृति, स्वाद और शॉपिंग का सबसे जीवंत केन्द्र है। शॉपिंग, लोकल स्ट्रीट फूड और झील के किनारे टहलने का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है यह जगह। मॉल रोड, मसूरी का धड़कता हुआ दिल है, जहाँ हर कदम पर एक नई कहानी, एक नया स्वाद और एक नई याद मिलती है।यह जगह यात्रियों को अपने जीवन की रफ्तार से हटाकर कुछ देर के लिए ठहरने, देखने, महसूस करने और मुस्कुराने का मौका देती है। “मसूरी की रूह अगर कहीं बसती है, तो वो है – मॉल रोड पर, जहाँ हर शाम एक उत्सव सी लगती है।”सड़क के किनारे बने बेंचों से वादियों और घाटियों का नज़ारा ले सकते हैं। सूर्यास्त के समय का दृश्य खास तौर पर मनमोहक होता है। यहां का ब्रिटिश-कालीन लैंप पोस्ट और पैदल पथ फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट हैं।मॉल रोड मसूरी के लाइब्रेरी चौक (Library Chowk) से शुरू होकर पिक्चर पैलेस तक फैला हुआ है। यह मसूरी की मुख्य सड़क है, जो स्थानीय जीवन और पर्यटक गतिविधियों का केन्द्र मानी जाती है। लाल टिब्बा (Lal Tibba) लाल टिब्बा (Lal Tibba) मसूरी का सबसे ऊँचा और सबसे शांत व्यू पॉइंट है, जहाँ से आप हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों को अपनी आंखों के सामने महसूस कर सकते हैं। ये वो जगह है जहाँ नज़ारा सिर्फ “देखा” नहीं जाता, बल्कि जिया जाता है। लाल टिब्बा मसूरी के लैंडौर क्षेत्र में स्थित है। यह जगह फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है। टेलिस्कोप से आप केदारनाथ और बद्रीनाथ की पहाड़ियों को देख सकते हैं।यहां शोरगुल बहुत कम होता है, जो इसे मेडिटेशन और रिलैक्सेशन के लिए आदर्श बनाता है।पक्षियों की चहचहाहट, देवदार और बुरांश के वृक्षों की भीनी भीनी खुशबू यहाँ के माहौल को खुशनुमा बनाने के लिए काफी है. मसूरी झील (Mussoorie Lake) मसूरी झील एक कृत्रिम लेकिन बेहद सुंदर झील है, जो मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता और सुकून भरे पलों का संगम है। यह झील परिवार, कपल्स और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए एक आदर्श स्थान है, जहाँ झील के शांत पानी में नौका विहार (boating) और चारों ओर पहाड़ियों की हरियाली आपका स्वागत करती है। मसूरी झील मसूरी-देहरादून मार्ग पर स्थित है। यह मसूरी से लगभग 6 किलोमीटर पहले स्थित है – यानी देहरादून से मसूरी आते समय रास्ते में ही।झील में पेडल बोटिंग और फैमिली बोट राइड्स उपलब्ध हैं। झील के चारों ओर खूबसूरत पहाड़ियाँ, ठंडी हवा और झील में तैरती नावें आपको रोमांच से भरने के लिए काफी हैं. क्राइस्ट चर्च (Christ Church) मसूरी सिर्फ पहाड़ों, झीलों और बाजारों की नगरी नहीं है — यह एक सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत भी समेटे हुए है। यहाँ की पुरानी गॉथिक स्टाइल चर्च न सिर्फ आस्था का केंद्र हैं, बल्कि अंग्रेज़ी शासनकाल की वास्तुकला और इतिहास की अनमोल धरोहर भी हैं।यह मॉल रोड के पास, कासल हिल में स्थित है. इसकी स्थापना वर्ष 1836 में हुई थी.यह उत्तर भारत की सबसे पुरानी प्रोटेस्टेंट चर्चों में से एक है. मसूरी में खाने की खास चीज़ें • तिब्बती मोमोज़• गरमा-गरम कॉर्नर कॉफी• मैगी प्वाइंट्स पर पहाड़ी स्टाइल मैगी• बेकरीज़ में बन और पेस्ट्रीज़ मसूरी में कहाँ ठहरें? | Best Hotels in Mussoorie मसूरी में ठहरने के लिए आपको हर तरह के विकल्प मिलते हैं – बजट फ्रेंडली होमस्टे

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नथ, हंसुल और चवन्नीमाला से है उत्तराखंड की संस्कृति की पहचान।

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पहाड़ और उत्तराखंड किसे पसंद नहीं यह जगह घूमने के शौकीन लोगों के लिए एक बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। खास कर दिल्ली वालों का तो उत्तराखंड से एक अलग हीं नाता रहता है। तभी तो हर बार गर्मियों की छुट्टी में अक्सर लोग उत्तराखंड की सैर पर निकल जाते हैं। लेकिन पहाड़ों के अलावा उत्तराखंड की एक और विशेषता है और वह है उनका पारंपरिक परिधान। अगर आप भी कभी उत्तराखंड गए हैं तो आपने वहां के स्थानीय लोगों को अपने पारंपरिक परिधान में घूमते हुए आवश्यक देखा होगा। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको उत्तराखंड के परिधान (Traditional clothes of Uttarakhand) के बारे में बताने वाले हैं। कहते हैं हमारा पहनावा हमारे कल्चरल बैकग्राउंड को दर्शाता है। पहनावा से इतिहास का एक बड़ा हीं बेजोड़ नाता रहता है। किसी जगह के स्थानीय लोगों के पहनावे को देखकर उस जगह के ऐतिहासिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि को बताना आसान हो जाता है। भारत विविधताओं का देश है जहां हर राज्य के लोगों का अपना एक अलग वेशभूषा और परिधान होता है। ऐसा ही परिधान उत्तराखंड के निवासियों का भी है। आईए जानते हैं उत्तराखंड के परिधान के बारे में कुछ विशेष बातें : नथ से है खास लगाव : अगर आप किसी त्योहार के समय उत्तराखंड जा रहे हैं तो वहां की अधिकतर महिलाएं आपको बड़े-बड़े नथ पहने हुए दिख जाएंगी। उत्तराखंड के लगभग सभी भागों में ऐसे बड़े-बड़े नथ पहनने का प्रचलन कई सौ सालों पुराना है। इन्हें बुलाक या फिर फुल्ली के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड की महिलाओं के लिए नथ एक पूंजी की तरह होता है। जिसे वह पीढ़ी दर पीढ़ी संभाल कर रखती हैं। खासकर टिहरी क्षेत्र की महिलाओं का नथ काफी भारी होता है। कहा जाता है कि जो महिला जितने धनी परिवार से होगी वह उतना ही भारी नथ पहनेगी। पुलिया बिछिया और बिछुआ सब हैं एक : थारू और जोहरी जनजाति की औरतें पुलिया पहने हुए दिख जाती हैं, जिसे उत्तराखंड के दूसरे भाग में बिछिया या बिछुआ के नाम से जाना जाता है। गढ़वाल में बिछुवा कहने का प्रचलन है तो कुमाऊं में इसे बिछिया कहते हैं। दरअसल पुलिया बिछिया अथवा बिछुआ पैरों में पहने जाने वाला एक गहना है जिसे पैर की उंगलियों में पहनते हैं। भारत के अन्य भागों में भी अक्सर विवाहित महिलाएं पैरों में बिछिया पहना करती हैं। गले में पहनी जाती है विशेष हार : यहां की महिलाओं के गले में आपको सिक्कों की मालाएं दिख जाएंगी। जहाँ इन मालाओं को कुमाऊं में अठन्नीमाला, रुपैयामाला, चवन्नीमाला, हंसुली, कंठीमाला, गुलूबंद तथा लॉकेट कहते हैं तो वहीं गढ़वाल में यह माला हमेल के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा गले में चंद्रहार, कंठीमाला और तिलहरी जैसे गहने पहनने का भी प्रचलन है। कमर बंद है खास :- गढ़वाल क्षेत्र की महिलाएं कमरबंद के रूप में कपड़े का कमरबंद पहनती हैं। जिससे उन्हें काम करने में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है। इसके अलावा वहां की महिलाएं अपने कमर में करधनी, तगड़ी, कमर ज्योड़ी जैसे आभूषण पहना करती हैं।

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Top 6 National Parks of Uttarakhand

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उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में बसा हुआ एक राज्य है जहाँ धार्मिक संस्कृति के साथ-साथ नेचुरल ब्यूटी भी हैं। यहाँ गंगा और यमुना का उद्गम स्थल भी है और दुनिया का सबसे खूबसूरत नेशनल पार्क भी। यहाँ हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) भी है। यहाँ नेचुरल ब्यूटी बहुत ज्यादा है इसलिए छोटा राज्य होने के बावजूद, यहाँ छह नेशनल पार्क्स है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन सभी नेशनल पार्क्स (National Parks of Uttarakhand) के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 1. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbette National Park) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे पहले हैली नेशनल पार्क भी कहा जाता था। यह हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है। यह उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी करीबन 250 किलोमीटर है। यहां पर आप किसी भी साधन से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते है। यहां पर आपको 2000 से भी ज्यादा रंग बिरंगी तितलियों की प्रजातियां मिल जाएगी। आप यहां किफायती दाम में होटल या रिसोर्ट में भी रुक सकते हैं। यह कॉर्बेट यकीनन प्रकृति के बहुत करीब और शांति प्रिय है। कैसे पहुंचे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Jim Corbette National Park)? 2. फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। यहाँ लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनीमोन (Anemone), जर्मेनियम (Germanium), मार्श (Marsh), गेंदा (Marigold), प्रिभुला (Pribula), रानुनकुलस (Ranunculus), कोरिडालिस (Corydalis), इन्डुला (Indula), सौसुरिया (Saussurea) और कम्पानुला (Campanula)। कैसे पहुंचे फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valley of Flowers National Park)? वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचना होगा। पुलना गांव से आपकी ट्रैकिंग की शुरुआत होगी। जब आप पुलना गांव से अपनी ट्रैकिंग की शुरुआत करेंगे तो रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम के एक बाजार से गुजरना होगा। जंगल चट्टी से गुजरते हुए आप भ्युवदार गांव पहुंचेंगे। भ्युवदार गांव इस ट्रक का सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट होगा। जहां से आप घांगरिया के लिए निकलेंगे। पुलना से घांगरिया तक का ट्रैक लगभग 10 किलोमीटर का होता है। घांगरिया पहुंचकर आपको एक दिन रुकना पड़ेगा, क्योंकि दिन के 12:00 के बाद घांगरिया से आगे की ट्रैकिंग रोक दी जाती है। अगले दिन आप वैली ऑफ फ्लावर के लिए ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। घांगरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और आप बहुत ही आसानी से इस ट्रैक को पूरा कर लेंगे। 3. गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (Govind Pashu Vihar National Park) गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान सुपीन रेंज में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पास स्थित है। गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क लगभग 958 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राजनितज्ञ गोविन्द बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया था जो उस समय होम मिनिस्टर (Home Minister) के पद पर आसीन थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में गोविन्द बल्लभ पंत का प्रमुख हाथ था। यह नेशनल पार्क गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट (Snow Leopard Project) के तहत यहाँ स्नो लेपर्ड का संरक्षण किया जाता है। आप इस नेशनल पार्क में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। कैसे पहुंचे गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Govind Pashu Vihar National Park)? 4. गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park)  गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान गंगोत्री हिमानी के गोद में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। गंगोत्री नेशनल पार्क लगभग 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इस उद्यान के पूर्व में तिब्बत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख इसी उद्यान में स्थित है। इस उद्यान का नाम गंगोत्री ग्लेशियर के नाम पर रखा गया है जो हिन्दुओं के प्रमुख पूजनीय स्थलों में से एक है। आपको यहाँ की ऊंचाई में भारी विषमता देखने को मिलेंगी। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow leopard), बाघ (Tiger), भरल (Bharal), हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), भूरा भालू (Brown Bear), हिमालयन मोनाल (Himalayan Monal), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), काला भालू (Black Bear), कस्तूरी मृग (Musk Deer) पाए जाते है। कैसे पहुंचे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gangotri National Park)? 5. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। कैसे पहुंचे राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Rajaji National Park)? 6. नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सूची में गिना जाता है।

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एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जिसका नाम गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया है

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गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (Govind Pashu Vihar National Park) सुपीन रेंज में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पास स्थित है। गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क लगभग 958 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राजनितज्ञ गोविन्द बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया था जो उस समय होम मिनिस्टर (Home Minister) के पद पर आसीन थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में गोविन्द बल्लभ पंत का प्रमुख हाथ था। यह नेशनल पार्क गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट (Snow Leopard Project) के तहत यहाँ स्नो लेपर्ड का संरक्षण किया जाता है। आप इस नेशनल पार्क में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। फॉउना (Fauna in Govind Pashu Vihar National Park) गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 150 प्रजातियां और मैमल्स की 15 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow Leopard), भूरा भालू (Brown Bear), एशियाई काला भालू (Asian Black Bear), तेंदुआ (Leopard), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), हिमालयी तहर (Himalayan Tahr), चील (Steppe Eagle), कस्तूरी मृग (Musk Deer), भरल (Bharal), ब्लैक ईगल (Black Eagle), हिमालयन चूहा (Himalayan Field Rat), बियर्डेड वल्चर (Bearded Vulture), गोरल (Goral), गोल्डन ईगल (Golden Eagle), सिवेट (Civet), जंगली सूअर (Wild Boar) और हिमालयन मोनाल तीतर (Himalayan Monal Pheasant) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Govind Pashu Vihar National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे यहाँ निचले भागों में चिर पाइन (Chir Pine), देवदार (Deodar), ओक (Oak), आदि पाई जाती है। इसके अलावा हाई अल्टीट्यूड पर ब्लू पाइन (Blue Pine), सिल्वर फ़िर (Silver Fir), यु (Yew), स्प्रूस (Spruce), ओक (Oak), मैपल (Maple), हैज़ल (Hazel), वॉलनट (Walnut), हॉर्स चेस्टनट (Horse Chestnut) आदि पाई जाती है। बेस्ट टाइम टू विजिट गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क (Best time to visit Govind Pashu Vihar National Park) अगर आप गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है। आप यहाँ अप्रैल से जून और सितम्बर से नवंबर के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Govind Pashu Vihar National Park)? सड़क मार्ग- आप धारकाधी से गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क पहुंच सकते है जो देहरादून से जुड़ा हुआ हैं।रेल मार्ग- इस नेशनल पार्क का नजदीकी रेलवे स्टेशन है- देहरादून रेलवे स्टेशन जहाँ से आप टैक्सी बुक करके या बस लेकर गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क पहुंच सकते है।हवाई मार्ग- इस नेशनल पार्क का निकटम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट (देहरादून) में है जो 231 किलोमीटर दूर है।

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इस नेशनल पार्क में स्थित है माँ गंगा का उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर

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गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park) गंगोत्री हिमानी के गोद में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। गंगोत्री नेशनल पार्क लगभग 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इस उद्यान के पूर्व में तिब्बत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख इसी उद्यान में स्थित है। इस उद्यान का नाम गंगोत्री ग्लेशियर के नाम पर रखा गया है जो हिन्दुओं के प्रमुख पूजनीय स्थलों में से एक है। आपको यहाँ की ऊंचाई में भारी विषमता देखने को मिलेंगी। फॉउना (Fauna in Gangotri National Park) गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की 15 प्रजातियां और पक्षियों की लगभग 150 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow leopard), बाघ (Tiger), भरल (Bharal), हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), भूरा भालू (Brown Bear), हिमालयन मोनाल (Himalayan Monal), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), काला भालू (Black Bear), कस्तूरी मृग (Musk Deer) पाए जाते है। यहाँ आपको हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षी भी दिख जाएंगे। फ्लोरा (Flora in Gangotri National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, इस उद्यान में शंकुधारी वन और हाई अल्टीट्यूड पर पाई जाने वाली पश्चिमी हिमालयी अल्पाइन झाड़ियाँ और घास के मैदान हैं। इस उद्यान में पाई जाने वाली वनस्पतियों में चिरपाइन देवदार, देवदार, स्प्रूस, ओक और रोडोडेंड्रोन शामिल हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Gangotri National Park) अगर आप गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) और मानसून (Monsoon) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है तथा मानसून में यहाँ बहुत लैंडस्लाइड (Landslide) होता है। आप यहाँ समर (Summer) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gangotri National Park)?

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ट्रेकर्स को लुभाता है उत्तराखंड का नंदा देवी नेशनल पार्क

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उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सूची में गिना जाता है। इस नेशनल पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में भी शामिल किया गया है। नंदा देवी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 630 वर्ग किलोमीटर है और इस नेशनल पार्क को वर्ष 1982ई में स्थापित किया गया था। वर्ष 1988ई में यूनेस्को ने इसे अपने वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया। 2005ई में नंदा देवी नेशनल पार्क का नाम बदलकर नंदा देवी एंड वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क कर दिया गया तथा इसका क्षेत्रफल वैली ऑफ फ्लावर तक बढ़ा दिया गया। नंदा देवी नेशनल पार्क को नंदा देवी बायोस्फियर रिज़र्व भी घोषित किया जा चुका है। इस नेशनल पार्क के क्षेत्र में बहुत सारी ऐसी पर्वत श्रृंखलाएं हैं जो 6000 मीटर से भी ऊंची है। जिनमें सबसे ऊंची पहाड़ी नंदा देवी है, जो कि 7816 मीटर ऊंची है। इसके अलावा यहां सुनंदा देवी (7435m), त्रिशूली 1 (7120m), त्रिशूली 2 (6690m), त्रिशूल 3 (6008m), बेथरटोली हिमल (6352m), देवी स्थान (6529m), ऋषि प्रहर (6992m), ऋषिकोट (6236m), हनुमान (6075m), दूनागिरी (7066m), चंगा बांग (6866m), कलंक (6931m), लाटु धुरा (6392m), सकरम (6254m), देव दमला (6620m), मंगराओं (6568m), देवटोली (6788m), मैकटोली (6803m) आदि जैसी प्रमुख पर्वत चोटियां भी शामिल हैं जो 6000 मीटर से भी ज्यादा ऊंची हैं। हालांकि आपको बता दे कि यहां के सबसे ऊंचे पर्वत की चोटी यानि नंदा देवी पर आप चढ़ाई नहीं कर सकते हैं। क्योंकि धार्मिक कारणों तथा विषम परिस्थितियों के कारण नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा यहां चढ़ाई को बंद करवा दिया गया है। फॉउना और फ्लोरा (Fauna and Flora in Nanda Devi National Park) नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमें पक्षियों की लगभग 130, मकड़ियों की लगभग 40 और तितलियों की 40 प्रजातियाँ पायी जाती है। यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में हिमालयी ताहर (Himalayan Tahr), कस्तूरी मृग (Musk Deer), भरल (Bharal), गोरल (Goral), लंगूर (Langur), तेंदुए (Leopard), हिमालयी भालू (Himalayan Bear), रेड फॉक्स (Red Fox) आदि शामिल है। नंदा देवी नेशनल पार्क में तरह-तरह के जंगली जानवरों के साथ-साथ फूलों की भी अतरंगी प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां आपको फूलों की 500 से भी अधिक प्रजातियां देखने को मिलेंगी। जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अगर आप भी वाइल्डलाइफ में इंटरेस्ट रखते हैं तो यहां जाकर आपको बहुत कुछ जानने और सीखने को मिलेगा। बेस्ट टाइम टू विजिट नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Nanda Devi National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान साल के छह महीने (1 मई से 31 अक्टूबर तक) खुला रहता है। आप यहाँ इस छह महीने की अवधि में कभी भी आ सकते है। लेकिन अगर आप यहाँ आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nanda Devi National Park)?