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इस नेशनल पार्क में स्थित है माँ गंगा का उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर

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गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park) गंगोत्री हिमानी के गोद में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। गंगोत्री नेशनल पार्क लगभग 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इस उद्यान के पूर्व में तिब्बत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख इसी उद्यान में स्थित है। इस उद्यान का नाम गंगोत्री ग्लेशियर के नाम पर रखा गया है जो हिन्दुओं के प्रमुख पूजनीय स्थलों में से एक है। आपको यहाँ की ऊंचाई में भारी विषमता देखने को मिलेंगी। फॉउना (Fauna in Gangotri National Park) गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की 15 प्रजातियां और पक्षियों की लगभग 150 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow leopard), बाघ (Tiger), भरल (Bharal), हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), भूरा भालू (Brown Bear), हिमालयन मोनाल (Himalayan Monal), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), काला भालू (Black Bear), कस्तूरी मृग (Musk Deer) पाए जाते है। यहाँ आपको हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षी भी दिख जाएंगे। फ्लोरा (Flora in Gangotri National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, इस उद्यान में शंकुधारी वन और हाई अल्टीट्यूड पर पाई जाने वाली पश्चिमी हिमालयी अल्पाइन झाड़ियाँ और घास के मैदान हैं। इस उद्यान में पाई जाने वाली वनस्पतियों में चिरपाइन देवदार, देवदार, स्प्रूस, ओक और रोडोडेंड्रोन शामिल हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Gangotri National Park) अगर आप गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) और मानसून (Monsoon) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है तथा मानसून में यहाँ बहुत लैंडस्लाइड (Landslide) होता है। आप यहाँ समर (Summer) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gangotri National Park)?

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ट्रेकर्स को लुभाता है उत्तराखंड का नंदा देवी नेशनल पार्क

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उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सूची में गिना जाता है। इस नेशनल पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में भी शामिल किया गया है। नंदा देवी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 630 वर्ग किलोमीटर है और इस नेशनल पार्क को वर्ष 1982ई में स्थापित किया गया था। वर्ष 1988ई में यूनेस्को ने इसे अपने वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया। 2005ई में नंदा देवी नेशनल पार्क का नाम बदलकर नंदा देवी एंड वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क कर दिया गया तथा इसका क्षेत्रफल वैली ऑफ फ्लावर तक बढ़ा दिया गया। नंदा देवी नेशनल पार्क को नंदा देवी बायोस्फियर रिज़र्व भी घोषित किया जा चुका है। इस नेशनल पार्क के क्षेत्र में बहुत सारी ऐसी पर्वत श्रृंखलाएं हैं जो 6000 मीटर से भी ऊंची है। जिनमें सबसे ऊंची पहाड़ी नंदा देवी है, जो कि 7816 मीटर ऊंची है। इसके अलावा यहां सुनंदा देवी (7435m), त्रिशूली 1 (7120m), त्रिशूली 2 (6690m), त्रिशूल 3 (6008m), बेथरटोली हिमल (6352m), देवी स्थान (6529m), ऋषि प्रहर (6992m), ऋषिकोट (6236m), हनुमान (6075m), दूनागिरी (7066m), चंगा बांग (6866m), कलंक (6931m), लाटु धुरा (6392m), सकरम (6254m), देव दमला (6620m), मंगराओं (6568m), देवटोली (6788m), मैकटोली (6803m) आदि जैसी प्रमुख पर्वत चोटियां भी शामिल हैं जो 6000 मीटर से भी ज्यादा ऊंची हैं। हालांकि आपको बता दे कि यहां के सबसे ऊंचे पर्वत की चोटी यानि नंदा देवी पर आप चढ़ाई नहीं कर सकते हैं। क्योंकि धार्मिक कारणों तथा विषम परिस्थितियों के कारण नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा यहां चढ़ाई को बंद करवा दिया गया है। फॉउना और फ्लोरा (Fauna and Flora in Nanda Devi National Park) नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमें पक्षियों की लगभग 130, मकड़ियों की लगभग 40 और तितलियों की 40 प्रजातियाँ पायी जाती है। यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में हिमालयी ताहर (Himalayan Tahr), कस्तूरी मृग (Musk Deer), भरल (Bharal), गोरल (Goral), लंगूर (Langur), तेंदुए (Leopard), हिमालयी भालू (Himalayan Bear), रेड फॉक्स (Red Fox) आदि शामिल है। नंदा देवी नेशनल पार्क में तरह-तरह के जंगली जानवरों के साथ-साथ फूलों की भी अतरंगी प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां आपको फूलों की 500 से भी अधिक प्रजातियां देखने को मिलेंगी। जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अगर आप भी वाइल्डलाइफ में इंटरेस्ट रखते हैं तो यहां जाकर आपको बहुत कुछ जानने और सीखने को मिलेगा। बेस्ट टाइम टू विजिट नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Nanda Devi National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान साल के छह महीने (1 मई से 31 अक्टूबर तक) खुला रहता है। आप यहाँ इस छह महीने की अवधि में कभी भी आ सकते है। लेकिन अगर आप यहाँ आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nanda Devi National Park)?

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Sahastradhara, Dehradun – All You Need to Know

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Pardeep Kumar पहाड़ों के इस नए सफर में आज हम आपको ले चलेंगे देहरादून की एक ऐसी खूबसूरत और टूरिस्ट्स की बेहद पसंदीदा जगह सहस्त्रधारा, जहां की बाइक राइड और नदी, खूबसूरत पहाड़ और हरे भरे घुमावदार रास्ते आपको बेशक ही लद्दाख से रूबरू करा देंगे। देव भूमि उत्तराखंड में अनेक पर्यटक स्थल हैं जो अपनी ख़ूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है उन्ही में से एक है देहरादून में स्थित सहस्त्रधारा। यहाँ देश भर से ही नही बल्कि विदेशो से भी पर्यटक यहाँ आते है और इसकी ख़ूबसूरती का लुत्फ़ उठाते हैं। यदि आप भी फैमिली ट्रिप की सोच रहे हैं तो आप इस जगह को जरूर एक्सप्लोर कर सकते हैं।(Sahastradhara, Dehradun) सहस्त्रधारा देहरादून का नेचुरल वाटरपार्क जब भी आप बाइक राइड पर सहस्त्रधारा तक जायेंगे तो यकीनन यहाँ आपको पूरी लद्दाख वाली वाइब्स महसूस होगी। घुमावदार रास्ते , सड़क किनारे बहती नदी, और नदी के ऊपर लगे सतरंगी झंडे, थोड़ी देर के लिए आप इस बेहतरीन नज़ारे को देखकर जन्नत सा फील करेंगे। क्लॉक टावर से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर सहस्त्रधारा एक लाजवाब पिकनिक स्पॉट है, जहां आप महादेव मंदिर के दर्शन से लेकर नदी और फॅमिली पिकनिक स्पॉट सभी तरह का लुत्फ़ उठा सकते हैं।(Sahastradhara, Dehradun) इस जगह की ख़ास बात यह है कि यहाँ आने वाला पानी प्राकृतिक रूप से बहता रहता है। और कहा जाता है कि यहाँ नहाने से स्किन रोग दूर हो जाते हैं। यहाँ चेंजिंग रूम और लॉकर की सुबिधा भी उपलबध है। यहाँ पहुँचने की सबसे खास बात कि जितना खूबसूरत सहत्रधारा है उतना ही बेहतरीन इसका सफर भी है शहर से 15 किलोमीटर दूर और 40 मिनट के सफर में इसकी खूबसूरती आपको लद्दाख से रूबरू करा देगी। How to reach –सहस्त्रधारा का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून है। फ्लाइट से उतरने के बाद आप कैब या टैक्सी की मदद से यहाँ तक आसानी से पहुँच सकते हैं। देहरादून ट्रैन और सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। शहस्त्रधारा पहुंचने के लिए आप अपनी पर्सनल गाड़ी या फिर आपको दर्शन लाल चौक से डायरेक्ट टैक्सी मिल जाएगी, इसके अलावा आप ऑटो बुक करके भी आ सकते है।शहस्त्रधारा के जिस पिकनिक स्पॉट पर हम पहुंचे उस जगह की खूबसूरती को बयान कर पाना बिलकुल भी आसान नहीं। यह जगह सच में किसी का भी दिल जीत लेने के काबिल है। यहाँ जैसे ही आप एंट्री करेंगे देवभूमि की झलक देता एक खूबसूरत सा मंदिर आपको दिखाई देगा। यहां दर्शन के साथ ही आप इसके अंदर गुफा में जरूर जाएँ। यह गुफा यहाँ आने वाले सैलानियों में अच्छी खासी फेमस है। सहस्त्रधारा को पूरे देहरादून के सबसे बेहतरीन और लाजवाब पिकनिक स्पॉट्स में से एक माना जाता है, और हो भी क्यों न मन को शांति देता मंदिर और मंदिर से निकलते ही एडवेंचर के लिए खूबसूरत नदी और नदी के सामने खाने पीने के लिए खूबसूरत सा कैफ़े। सब कुछ है यहाँ। Cafe & Snacks क्वालिटी टाइम स्पेंड करने का इससे अच्छा स्पॉट और क्या ही होगा। नदी के किनारे बने इस कैफ़े में आप स्नैक्स से लेकर पहाड़ों के बीच चाय या कॉफी का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं, और इसके के साथ एक छोटी से मार्केट भी आपको यहां देखने को मिलेगी। इस स्पॉट के ठीक थोड़ा आगे चलकर आप गर्मियों में वाटर पार्क का आनद भी ले सकते हैं। Sahastradhara, Dehradun Best Time to Visit बारिश के मौसम में सहस्त्रधारा की शानदार सुंदरता का सबसे अच्छा अनुभव किया जा सकता है। हालांकि यहां घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का होगा।  Some Pics of Sahastradhara……

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Buddha Temple in Dehradun-Mindrolling Monastery

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Pardeep Kumar–Five Colors of Travel हेलो फ्रेंड्स, फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रवेल के इस नए ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। आज इस ब्लॉग में हम आपको लेकर आये हैं देहरादून के बुद्धा टेम्पल में…..वैसे तो देहरादून में घूमने लायक बहुत अच्छे स्थान हैं। मगर यदि आप देहरादून में कुछ अलग ढूढ़ रहे हैं, तो आपके लिए देहरादून का प्रसिद्ध बुद्ध मंदिर सबसे अच्छा विकल्प रहेगा। इसे सामान्य प्रचलित भाषा मे देहरादून का बुद्धा टेम्पल कहते हैं। यहाँ आकर आपको आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा साथ ही, बौद्ध कला और स्थापत्य कला का यह मंदिर बेजोड़ नमूना है। (Buddha Temple in Dehradun) देहरादून के क्लेमेनटाउन में स्थित बुद्धा टेंपल देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अच्छा खासा लोकप्रिय है। इसको मिंड्रोलिंग मोनेस्ट्री के नाम से भी जाना जाता है। पूरे क्षेत्र में शांतिपूर्ण माहौल है , एक बार मंदिर में प्रवेश करने के बाद आप अपने संपूर्ण शरीर में शांति और आराम महसूस कर सकते है. एशिया की सबसे बडी Buddhist समाधि बौद्ध मंदिर का निर्माण 1965 में प्रसिद्ध “कोहेन रिनपोछे” और बौद्ध धर्म के धर्म की रक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए कई अन्य भिक्षुओं द्वारा किया गया था । यह मंदिर जापानी वास्तुकला शैली में बनाया गया है । बुद्धा मंदिर के बारे में यह माना जाता है कि यह एशिया की सबसे बडी Buddhist समाधि है , हर साल हज़ारो की गिनती में देश – विदेश के टूरिस्ट यंहा दर्शन करने आते है | जिसमें लार्ड बुद्धा और गुरु पद्मसम्भावा (Guru Padmasambhava) की विशालकाय प्रतिमा है । मंदिर में स्थित बुद्धा जी की 103 feet की प्रतिमा बहुत ही सुन्दर और आकर्षण का केंद्र है । पहले तीन फ्लोर में लार्ड बुद्धा की सरूप पेंटिंग्स है , जिसमें बुद्धा जी के जीवन के बारे में दिखाया गया है । कैसे पहुंचे बुद्धा टेम्पलक्‍लेमेनटाउन स्‍थि‍त बुद्धा टेंपल देहरादून आइएसबीटी से सहारनपुर मार्ग पर सात किलोमीटर की दूरी पर स्‍थ‍ित है। यहां के लिए हर पांच मिनट बाद विक्रम चलते हैं। आप चाहें तो आइएसबीटी चौक से आटो भी बुक कर यहां तक पहुंच सकते हैं। बड़े क्षेत्र में तीन मंज‍िला बुद्धा टैंपल के दर्शन को सुबह से लोग पहुंचते रहते हैं, लेक‍िन शाम को यहां भीड़ अधिक बढ़ जाती है। हरे भरे मैदान और जंगल से सटे इस मंद‍िर पर‍िसर में व‍िभ‍िन्‍न जगहों पर कुर्सियां लगी हैं जहां आप बैठकर आनंद भी उठा सकते हैं। लोग यहां आकर सेल्‍फी के साथ इस पल को यादगार बनाते हैं। इसके अलावा मंद‍िर से बाहर न‍िकलते ही सड़क किनारे कई खाने पीने की दुकान भी हैं। जहां से आप अपनी पसंद के व्‍यंजन का लुत्फ़ उठा सकते हैं। आध्यात्मिक शांति वाला स्थलबुद्ध मंदिर देहरादून एक मधुर और आध्यात्मिक शांति वाला स्थल है। यहाँ आकर मन को सुकून मिलता है।यह मंदिर अपनी अदभुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की स्थापत्य कला जापानी कला से प्रेरित है। यहां आप इस प्रसिद्ध स्थापत्य कला और चित्रकला का आनन्द ले सकते हैं। रोलिंग मठयह बौद्ध मठ रोलिंग मठ के नाम से प्रसिद्ध है, यहाँ बड़े बड़े रोलर लगे हैं, जिनको घुमा कर आप भगवान बुद्ध से जीवन मे सुख और शांति की कामना कर सकते हैं।बुद्धा टेम्पल देहरादून में आप प्रसिद्ध तिब्बती भोजन विशेष मोमोज, चाउमीन और थोप्पा और अन्य पकवानों का आनन्द ले सकते हैं।बुद्ध मंदिर देहरादून से आप तिब्बती समान, कपड़े, सजावट की चीजे खरीद सकते हैं।

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Char Dham Yatra 2023 – Kedarnath, Badrinath, Yamunotri and Gangotri 

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The sacred Char Dham Yatra in Uttarakhand is one of the most popular Hindu pilgrimages in India.  उत्तराखंड की वादियों में विद्यमानमैं गंगा की धार हूंहिंदुत्व का सार हूंऔर बद्री का द्वार हूंमैं छोटी चार धाम हूं। हिन्दुओं का मान हूंउत्तराखंड की शान हूंमैं केदारनाथ में बस्ता पंच केदार हूंऔर लाखों की आस्था का प्रतीक हूंमैं चार धाम हूं भगवन शिव को हूँ समर्पितकेदारनाथ का धाम हूंविष्णु का हूं पवित्र स्थलहां, मैं ही बद्रीनाथ हूं छः महीने बाद खुलते कपाटश्रद्धालुओं का करता सत्कार हूंमैं चार धाम हूंमैं चार धाम हूं। हिंदू धर्म के पवित्र स्थलचार धाम यात्रा भारत की सबसे बड़ी और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है। (Char dham Yatra)जिसमें उत्तराखंड के गढ़वाल रीजन में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री की यात्रा शामिल है। लेकिन इस यात्रा को छोटी चार धाम यात्रा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि चार धाम की एक और यात्रा होती है। जिसमें उत्तराखंड का बद्रीनाथ, गुजरात में द्वारका, उड़ीसा में जगरनाथ पुरी, और तमिलनाडु का रामेश्वरम जैसे पवन स्थल शामिल हैं। हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य माना गया है। और ये माना जाता है कि चार धाम की यात्रा इस लक्ष्य तक पहुंचने की एक मंजिल है। Char Dham Yatra- Kedarnath, Badrinath, Gangotri, Yamunotri. हिमालय की गोद में बसा चार धामपहाड़ो की ऊंचाइयों और श्रद्धालुओं की सेफ्टी का पूरा-पूरा ध्यान रखते हुए यह मंदिर गर्मियों यानि अप्रैल या मई में खुलते हैं, और वहीं सर्दियों की सुरुवात यानि अक्टूबर और नवंबर में बंद हो जाते हैं। माना जाता है कि चार धाम यात्रा दक्षिणावर्त दिशा में पूरी करनी चाहिए और यही कारण है कि, इस चार धाम यात्रा की शुरुआत यमनोत्री से शुरू होती है और बद्रीनाथ में जाकर खतम होती है। श्रद्धालु कोई दो तीर्थ यात्रा जैसे सिर्फ बद्रीनाथ और केदारनाथ के दर्शन भी कर सकते हैं। Time to Visit Chardham Yatra चार धाम यात्रा यूं तो सिर्फ छः महीने खुलती है। गर्मियों में अप्रैल से मई तक इसके कपाट खोले जाते हैं। यमनोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमनोत्री धाम के कपाट 3 मई से 24 अक्टूबर 2023 तक खोले जायेंगे।दर्शन का समय सुबह 7 बजे से रात 8 बजे तक है। गंगोत्री मंदिर देवी गंगा को समर्पित यह मंदिर समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, गंगोत्री उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यहाँ से हरिद्वार 285 किमी और देहरादून 240 किमी है। गंगोत्री के कपाट खुलने का समय 3 मई से 25 अक्टूबर तक है।यहां मंदिर में पूजा सुबह चार बजे साथ शुरू होती है और शाम को सात बजे आरती के साथ समाप्त होती है |मंदिर सुबह 6 बजे तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित और हिमालय की गोद में स्थित यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में समुद्र ताल से 3553 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। इस प्राचीन मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भी माना जाता है। केदारनाथ धाम 7 मई से 24 अक्टूबर 2023 तक खुलेगा |यहाँ सुबह 4 बजे महाभिषेक आरती होती है, और शाम 7 बजे आरती के बाद दर्शन बंद कर दिए जाते हैं।मंदिर सुबह 6 बजे तीर्थयात्रियों के दर्शन के लिए खुलता हैं | बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से 3300 मीटर की ऊंचाई पे स्थित है। बद्रीनाथ के कपाट 8 मई से 20 नवंबर 2023 तक खोले जायेंगे |यहाँ अभिषेक पूजा सुबह 4 :30 बजे और सयन पूजा रात्रि 9 बजे होती हैं|मंदिर आम जनता के लिए सुबह 7 बजे खुलता हैं | कैसे करें चार धाम यात्रा का रजिस्ट्रेशनउत्तराखंड पर्यटन विभाग ने इस बार रजिस्ट्रेशन में श्रद्धालुओं के लिए कई विकल्प रखे हैं। आप पर्यटन विभाग की ऑफिसियल वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in के जरिये रजिस्ट्रशन करा सकते हैं। इसके अलावा वाट्सएप नंबर 8394833833, टोल फ्री नंबर 1364 और मोबाइल ऐप touristcare uttrakhand app के जरिए भी अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आसानी से करवा सकते हैं। आपको बता दें कि रजिस्ट्रेशन और पैकेज बुकिंग के बाद आप 21 दिन पर अपनी यात्रा कैंसल करते हैं। जिसमें आपके बुकिंग अमाउंट में से 30 प्रतिशत पैसे कट जाते हैं। इसके साथ ही 8 दिन पहले कैंसल करने पर 80 प्रतिशत राशि काटी जाती है, और यात्रा वाले दिन कैंसिल कराने पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। यात्रा के दौरान कहाँ ठहरे ? (Where to stay During Chardham Yatra)चार धाम यात्रा के दौरान रुकने के लिए काफी होटल, गेस्ट हाउस, रिसॉर्ट्स, आश्रम, और धर्मशाला आदि आपको आसानी से मिल जाएंगे। लक्ज़री होटल्स से लेकर अफोर्डेबल रेंज के होटल्स भी आपको मिल जाएंगे। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार गेस्ट हाउस या होटल्स चुन सकते हैं। कैसे पहुंचे : (How to reach Char Dham)चारधाम यात्रा देहरादून या हरिद्वार से शुरू होती है। यात्रा शुरू करने के दो तरीके हैं – सड़क और हेलीकाप्टर। आप दोनों में से किसी भी साधन का उपयोग कर तीर्थ स्थलों तक जा सकते हैं।सड़क मार्गआप चार धाम यात्रा हरिद्वार, दिल्ली, ऋषिकेश,और देहरादून से शुरू कर सकते हैं। हरिद्वार रेलवे स्टेशन इन पवित्र स्थानों से सबसे निकटम रेलवे स्टेशन है। जहां से आप सबसे पहले हरिद्वार में गंगा आरती कर इन पवित्र स्थलों तक पहुँच सकते हैं। हरिद्वार सड़क और रेल लाइन्स के ज़रिये दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड परिवहन और निजी बसें इन पवित्र तीर्थ स्थलों के लिए उपलब्ध हैं । आपको हिरद्वार, ऋषिकेश, और देहरादून से टैक्सी भी आसानी से मिल जाएगी। हेलीकॉप्टर द्वारादेहरादून सहस्त्रधारा हेलीपैड से चार धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा उपलब्ध है। हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून से खरसाली तक है, जो यमुनोत्री मंदिर से लगभग 6 किमी दूर है। गंगोत्री मंदिर के लिए निकटतम हेलिपैड हरसिल हेलीपैड है, जो मंदिर से 25 किमी दूर स्थित है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के हेलिपैड मंदिर के पास ही स्थित हैं। Research by Sakshi Joshi/ Edited by Pardeep Kumar

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Most Famous food of Uttarakhand

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तो चलिए करवाते हैं आपको उत्तराखंड के फ़ूड से वाकिफ उत्तराखंड – नाम सुनते ही पहाड़ों की छवि मन में आना तो लाज़िमी ही है और फिर वो गाना भी तो गुनगुनाना है…… बताया गया है पुराणों में, यहीं से जाती है स्वर्ग की सीढी,रातों को गुज़रो तुम डांडो से डर लगता,भूत न मांग ले बीड़ी।।उत्तराखंड में पहाड़, वादियां, झरनें, ठण्ड और मौसम इन सब के बारे में तो आपने बेशक सुना ही होगा। पर , क्या आप जानते है उत्तराखंड के फेमस फ़ूड क्या हैं, आग में बनी भट्ट की चढ़कानी क्या है, शहर से दूर जाने पर माँ के हाथों से बनें सेल क्या हैं।और अगर आप उत्तराखंड से हैं तो इन्हें खाये बिना तो बेशक ही आपका कोई त्यौहार, त्यौहार सा नहीं लगता होगा।तो चलिए आज हम आपको पहाड़ों के खान-पान से रूबरू करवाते हैं, जहाँ बुजुर्गों के आशीर्वाद के बिना कुछ काम शुरू नहीं होता और इन पकवानों के बिना त्यौहार खत्म नहीं होता। (Famous Food of Uttarakhand) Most Famous food of Uttarakhand with name भटिया(Bhatia) अगर आप उत्तराखंड से नहीं है तो “भट्ट” क्या होता है इससे आप बिल्कुल ही अनजान होंगे। भट्ट की खेती उत्तराखंड के कुमाऊँ रीजन में जेठ और आषाढ़ के महीने में की जाती है। भट्ट को एक तरह से दाल कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इसे कुमाऊँ के लोग ज्यादातर चावल के साथ खाना पसंद करते हैं। ये ना सिर्फ एक दाल बल्कि सेहत के लिए काफी फायदेमंद भी है काले भट्ट में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है और इस दाल से कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद मिलती है। इसे बहुत ही आसानी से और दालों की तरह बनाया जाता है और फिर आग में नानी या दादी के हाथों से बनी भटिया तो हर पहाड़ी का एनेर्जी बूस्टर है। भटिया बनाने की एकदम सिंपल सी रेसिपी है जिसमें भट्ट को पीस के उसे पानी में पकाया जाता है। पर वो कहते हैं ना चूल्हे में बनी सिंपल दाल का मुकाबला तो शहर की दाल-मखनी क्या ही कर पायेगी। (Famous food of Uttarakhand) बड़ी की सब्ज़ी (badi ki sabji) अब आप सोच रहे होंगे कि बड़ी की सब्ज़ी में भी क्या स्पेशल है, बाजार से न्यूट्रीला का पैकेट लेकर हम भी बना लेते हैं, फिर उत्तराखंड में ये स्पेशल कैसे। पर नहीं ये बड़ी न्यूट्रीला के पैकेट वाली बड़ी नहीं है, उत्तराखंड में स्पेशल बड़ी उड़द की दाल से बनाई जाती है। उड़द की दाल को पीस कर उसमें मसाले डालकर उसे बड़ी के शेप में बनाया जाता है, और फिर धूप में सूखाने के लिए रख दिया जाता है और फिर सूखने के बाद फ्राई करके तैयार हो जाती है मसाला बड़ी। इसके स्वाद और क्रंच का अंदाज़ा अब आप बिना खाए भी लगा चुके होंगे। हाँ, सच में ये बेहद लाजवाब होती है।(famous food of Uttarakhand) सेल सेल एक ऐसा पकवान है जिसके बिना कुमाऊँ के तो सारे त्यौहार अधुरे हैं। भाई दूज, मकर सक्रान्त, राखी, सभी तैयारों में सेल पकाने की परंपरा कई पुश्तों से चली आ रही है। खासकर ठंड के मौसम में, चूल्हे में, बड़ी सी कढ़ाई में, जलेबी की तरह बनाये गए सेल एक अलग ही माहोल बना देते हैं। सेल चावल के आटे से बनाया जाता है। जिसमें केला और दौन के साथ पानी डालकर घोल बनाया जाता है और एकदम जलेबी की तरह कढ़ाई में गोल-गोल जलेबी का आकर दिया जाता है। और एक बात बता दू कि पहाड़ों में अगर एक घर में सेल बन रहें हो तो बाकि का आधा मोहल्ला भी वहीं गप्पें मारते दिखाई पड़ता है। क्योंकि सेल कहें तो त्यौहार और त्यौहार भला कौन अकेले मनाता है। जौला उत्तराखंड में आपको न केवल सिर्फ स्वादिष्ट व्यंजन मिलेंगे बल्कि यहाँ के कुछ पकवान स्वास्थ्यवर्धक है, और जौला भी उनमें से एक है। क्योंकि यह खाने में हल्का है। उत्तराखंड में छोटे-छोटे बच्चे तो जौला इतना पसंद करते हैं कि वह सिर्फ बीमारी में ही नहीं बल्कि महीने में एक बार तो जौला खाने की परंपरा का निर्वाह करते है। इसे बनाने का तरीका भी एकदम सरल है, काले भट्ट को पीस कर मसालों में चावल के साथ उबाल दिया जाता है। जौला खासकर बच्चों का पसंदीदा व्यंजन माना जाता है। डुब्का दुबका सर्दियों में बनाए जाने वाला व्यंजन है और आमतौर पर सर्दियों में ही खाया जाता है। दुबका प्रोटीन का एक पावरहाउस है और कुछ ही समय में तैयार करने के लिए एक आसान रेसिपी है। आमतौर मूंग दाल डुब्का रेसिपी को उबले हुए चावल और कलौंजी गोभी आलू के साथ दोपहर के खाने में बनाया जाता है। तो आप उत्तराखंड के इन परंपरागत और फेमस फ़ूड के बारे में तो जान ही गए पर चूल्हे के खाने का स्वाद लेने समय निकाल कर जरूर आएं इन पहाड़ों में। (Famous food of Uttarakhand)