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यूपी का यह महल है फिल्म शूटिंग का अड्डा, इसमें हैं 60 खम्बे!

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उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में स्थित शिवगढ़ का महेश विलास पैलेस सिर्फ एक महल नहीं है, बल्कि यह एक जीता-जागता इतिहास है, जो राजस्थानी वास्तुकला और अवधी संस्कृति का अद्भुत संगम है। अपनी शानदार बनावट, हरे-भरे लॉन और विशाल बरामदों के कारण यह पैलेस फिल्म निर्माताओं और पर्यटकों के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यह महल न केवल अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, बल्कि बॉलीवुड व भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक महत्वपूर्ण शूटिंग डेस्टिनेशन बन गया है। बता दें, रायबरेली के शिवगढ़ में महेश विलास पैलेस का निर्माण वर्ष 1942 में शिवगढ़ के राजा महेश सिंह ने कराया था। यह महल राजपूताना शैली में बनाया गया है, जो बीकानेर के लालगढ़ किले की डिज़ाइन से प्रेरित है। स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना इस महल की सबसे खास बात यह है कि इसे बीकानेर के प्रसिद्ध लालगढ़ पैलेस की तर्ज पर बनाया गया है। इस पैलेस का डिजाइन राजस्थानी स्थापत्य शैली को दर्शाता है, जिसमें लाल पत्थर का उपयोग और विस्तृत नक्काशी शामिल है। महल के सामने का विशाल बरामदा 60 बड़े खंभों पर टिका हुआ है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ा देता है। यह बरामदा मेहमानों के स्वागत और आराम करने के लिए एक शानदार जगह प्रदान करता है। महल के अंदर कदम रखते ही इसकी भव्यता और बढ़ जाती है। इसका फर्श खूबसूरत इटालियन संगमरमर से बना है, जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। शांत और प्राकृतिक माहौल इस महल की सबसे बड़ी विशेषता इसके खूबसूरत और हरे-भरे लॉन हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ा देते हैं । यहां आने वाले लोग अपने परिवार के साथ बैठकर आराम कर सकते हैं और शांत तथा प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकते हैं। महल के सामने एक प्यारा सा फव्वारा भी है, जो खासकर चांदनी रातों में बेहद सुंदर लगता है। यह शांत और सुकून देने वाला माहौल प्रदान करता है, जो व्यस्त जीवन से दूर एक ब्रेक के लिए एकदम सही है। बच्चों के लिए भी यह खुली जगह खेलने और मस्ती करने के लिए आदर्श है। फिल्म इंडस्ट्री का पसंदीदा शूटिंग डेस्टिनेशन महेश विलास पैलेस अब फिल्मों और टीवी सीरियल्स की शूटिंग के लिए एक बहुत मशहूर जगह बन गया है। यहां अब तक 24 से अधिक फिल्में और टीवी सीरियल शूट हो चुके हैं। यह उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा पैलेस है, जिसे इतनी बड़ी संख्या में फिल्मों के लिए चुना गया है। फिल्म निर्माता इस जगह को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि इसका देसी इंटीरियर और शाही माहौल फिल्मों में राजमहल या शाही परिवार के दृश्यों को दर्शाने के लिए एकदम उपयुक्त है। बता दें, यहां बुलेट राजा, गांधीगिरी, भोजपुरी फिल्म गदर, अजय देवगन की मशहूर फिल्म रेड, भोजपुरी फिल्म जबरिया जोड़ी कलइयां भी शूट हो चुकीं हैं। पर्यटकों के लिए सुविधाएं महेश विलास पैलेस के अंदर पर्यटकों और फिल्म क्रू के लिए भी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। मनोरंजन के लिए यहां पूल और टेबल टेनिस जैसे इनडोर गेम्स की सुविधा है। इन सुविधाओं ने इस जगह को फिल्म इंडस्ट्री के लिए और भी आकर्षक बना दिया है। यहां का शाही माहौल और आधुनिक सुविधाएं इसे एक आदर्श शूटिंग लोकेशन बनाती हैं। कैसे पहुंचें महेश विलास पैलेस? महेश विलास पैलेस उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के पास, रायबरेली में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए सबसे अच्छा तरीका लखनऊ रेलवे स्टेशन या चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट आना है। स्टेशन और एयरपोर्ट से पैलेस की दूरी लगभग 25-30 किलोमीटर है। यहां तक पहुंचने के लिए टैक्सी, ऑटो या निजी वाहन आसानी से उपलब्ध हैं। लखनऊ शहर के किसी भी हिस्से से आप कैब या लोकल बस के जरिए भी महेश विलास पैलेस तक आराम से पहुंच सकते हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर महेश विलास पैलेस एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जो अपनी खूबसूरती, शांति और फिल्म उद्योग में अपने योगदान के लिए जाना जाता है। यह एक ऐसा स्थान है जो पर्यटकों को एक शांत और शाही अनुभव प्रदान करता है, वहीं फिल्म निर्माताओं को उनकी कहानियों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि देता है।

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पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं संगम नगरी के ये प्रमुख पर्यटन स्थल

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प्रयागराज का नाम सुनते ही हमारे मन में सबसे पहले जो ख्याल आता है वह है “कुंभ“प्रयागराज शहर को कुंभ नगरी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि यहां सिर्फ कुंभ के समय में हीं आया जाता है। आप कभी भी प्रयागराज विज़िट कर सकते हैं। यह एक बहुत ही खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस और आस्था का बहुत ही बेहतरीन केंद्र माना जाता है। इस ब्लॉग में हम आपको प्रयागराज शहर के बेहतरीन जगहों के बारे में तो बताएंगे हीं साथ ही साथ हम आपको यह भी बताएंगे कि प्रयागराज कैसे पहुंचे? और प्रयागराज में कहां ठहरे? 1. त्रिवेणी संगम त्रिवेणी संगम वह स्थान है जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इस जगह को देखने के लिए काफी लोग आते हैं। अगर आप भी त्रिवेणी संगम को देखना चाहते हैं तो उसके लिए आपको पहले नाव की सवारी करनी होगी और नाव के जरिए उस पवित्र जगह तक पहुंचना होगा जहां गंगा जमुना सरस्वती एक दूसरे में घुल मिल जाती हैं। जब आप नाव से त्रिवेणी संगम की ओर बढ़ेंगे तो चारों ओर कल कल बहती गंगा, शांत और प्रदूषण रहित वातावरण, आसमान में उड़ती चिड़ियाँ, आपको काफी अट्रैक्टिव लगेंगे। नेचर की खूबसूरती को एंजॉय करने के लिए इससे बेहतरीन कोई दूसरा ऑप्शन तो हो ही नहीं सकता है। अगर आप चाहे तो आकाश में उड़ रहे पंछियों को खाना खिला सकते हैं। इसके लिए आपको नदी के बीचो-बीच ही नमकीन के पैकेट बिकते हुए मिल जाएंगे जिसे खरीद कर आप पक्षियों को खाना खिला सकते हैं और यकीन मानिए जब आप वह नमकीन पक्षियों को खिलाएंगे तो वहां आसपास उमड़ी हुई पक्षियों के भीड़ को देखकर आपको भी ऐसा महसूस होगा जैसे आप खुद भी एक पंछी हो।अगर आप चाहे तो त्रिवेणी संगम पहुंचकर आप वहां गंगा जी में डुबकी भी लगा सकते हैं। हालांकि इसके लिए आपको यह भी ध्यान में रखना होगा कि आपके पास एक्स्ट्रा कपड़े रखे हो। 2. गंगा आरती (Ganga Aarti)अब गंगा की नगरी आओ और गंगा आरती ना देखो तो यह तो बहुत बड़ी नाइंसाफी वाली बात होगी। प्रयागराज जैसे शहर में जाकर गंगा आरती को देखना तो मस्ट विजिट हो जाता है। ऐसे में आप शाम के समय रामघाट का रुख कर सकते हैं। जहां हर रोज गंगा आरती होती है। यह गंगा आरती इतना सुकून देने वाली होती है कि आप अपने सारे तनाव को भूलकर एकदम से चार्ज्ड अप हो जाएंगे। पॉजिटिविटी तो यहां के फिजाओं में घुली रहती है। ऊपर से मंत्र उच्चारण के साथ-साथ शंखनाद की ध्वनि दिलो दिमाग पर इस तरह कब्जा कर लेती हैं कि आप कुछ पल के लिए बस उसी समय में ठहर कर रह जाना चाहेंगे। 3. श्री बड़े हनुमान जी मंदिर (Shri Bade Hanuman Ji Temple)इस मंदिर में हनुमान जी विश्राम की मुद्रा में लेटे हुए हैं। इसलिए इस मंदिर को बड़े हनुमान जी या फिर लेटे हनुमान जी मंदिर के नाम से जाना जाता है। वैसे तो यहां हर रोज हीं भीड़ देखने को मिलती है। लेकिन आप अगर मंगलवार या फिर शनिवार के दिन यहां घूमने आएंगे तो आपको बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिलेगी। यकीन मानिए इस मंदिर में आकर आपको इतनी पॉजिटिविटी मिलेगी कि आप एक पल को अपने लाइफ के सारे नेगेटिव प्वाइंट्स को भूल जाएंगे। 4. अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क (Amar Shaheed Chandrashekhar Azad Park)हमारे देश में कई सारे स्वतंत्रता सेनानी हुए जिन्होंने आजादी के लिए लड़ते हुए अपनी जान गवा दी। उन्हीं शहीद वीरों की सूची में एक नाम चंद्रशेखर आजाद का भी आता है। जिन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी। बताया जाता है कि चंद्रशेखर आजाद इस पार्क में घूम रहे थे। जब किसी ने इसकी सूचना अंग्रेजों तक पहुंचा दी। अंग्रेजों ने उन्हें इस पार्क में चारों ओर से घेर लिया। चंद्रशेखर आजाद काफी देर तक अंग्रेजों के गोलीबारी का जवाब देते रहे। लेकिन जब उनके पास सिर्फ एक गोली बची तो उन्होंने वह गोली खुद को मार ली। क्योंकि वह अंग्रेजों के हाथों नहीं मरना चाहते थे। उस समय का अल्फ्रेड पार्क आज के समय में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है। अगर आप प्रयागराज आ रहे हैं तो आप इस पार्क को जरुर विजिट करें। यह पार्क आजादी के लिए दिए गए बलिदानों का एक बेहतरीन उदाहरण है। 5. आनंद भवन (Anand Bhawan)आनंद भवन के विजिट के लिए पहले आपको टिकट लेना पड़ेगा। जहां आपको दो तरह के टिकट ऑप्शन मिलेंगे। एक ₹30 के टिकट की और ₹100 के टिकट की। अगर आप सिर्फ ग्राउंड फ्लोर को घूमना चाहते हैं तो आपको ₹30 का टिकट लेना होगा। जबकि अगर आप ग्राउंड फ्लोर के साथ-साथ फर्स्ट फ्लोर को भी घूमना चाहते हैं तो आपको ₹100 की टिकट लेनी होगी।आनंद भवन की टाइमिंग सुबह 10:00 बजे से शाम के 5:30 बजे तक की होती है और दोपहर में 1 घंटे का लंच टाइम होता है। आनंद भवन को 1927 में बनाया गया था। यह नेहरू जी का अपना घर था और यहां नेहरू जी रहा करते थे। गांधी जी भी यहां आया जाया करते थे। आज के समय में आनंद भवन एक म्यूजियम की तरह है। जहां पंडित जवाहरलाल नेहरू के यादों को बहुत हीं बेहतरीन तरीके से संजोकर रखा गया है। यहां आकर पता चलता है कि नेहरू जी किस तरह राजसी शान के साथ रहा करते थे। यहां कांग्रेस का ऑफिस भी हुआ करता था। ये प्रयागराज के मुख्य विजिटिंग प्लेसेस हैं। इनके अलावा प्रयागराज में और भी बहुत सारे मंदिर और घूमने के लिए बेहतरीन विजिटिंग प्लेसेस हैं। जहां आप घूमने के लिए जा सकते हैं। प्रयागराज में कहां ठहरे (Where to stay in Prayagraj) हम जब भी किसी नए शहर जाते हैं तो वहां सबसे बड़ी समस्या आती है कि बसेरा किस जगह बनाया जाए। अगर प्रयागराज की बात करें तो प्रयागराज में आपको हर रेंज में होटल और धर्मशालाएं उपलब्ध हो जाएंगे। अगर आप प्रीमियम होटल में ठहरना पसंद करते हैं तो आप सिविल लाइंस एरिया में होटल देख सकते हैं। वहीं अगर आप नॉर्मल रेंज के होटल और धर्मशाला में ठहरना चाहते हैं तो आप रामबाग या फिर रेलवे स्टेशन

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लखनऊ के नवाबी शान के प्रतीक हैं ये नवाबी स्मारक

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नवाबों के शहर के नाम से मशहूर शहर लखनऊ (Lucknow) को अपने नजाकत और तहजीब से भरी संस्कृति के लिए जाना जाता है। अगर इतिहास की बात करें तो लखनऊ प्राचीन काल के अवध क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। लखनऊ हमेशा से हीं एक बहुरंगी संस्कृतियों वाला शहर रहा है। यहां के नवाबों के तमीज, तहजीब और उनके कविता, संगीत और शाही व्यंजनों के प्रति प्रेम के कारण लखनऊ को नबाबी ठाठ बाठ का प्रतीक माना जाता है। इस शहर का इतिहास जितना खूबसूरत रहा है, इसका वर्तमान भी उतना ही खूबसूरत और प्रगतिशील है। आज के समय में इस शहर का काफी तेजी से विकास हो रहा है। लेकिन इस शहर की एक खासियत जो इसे दूसरे शहरों से अलग बनाती है वह यह है कि, इस शहर ने विकास की राह पर चलते हुए भी अपनी संस्कृति को अपने अंदर सहेज कर रखा है। इस शहर के अंदर बहुत से ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो देश हीं नहीं बल्कि दुनिया भर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। आइए जानते हैं लखनऊ के उन्हीं पर्यटन स्थलों (Tourist places) के बारे में जो इस शहर की पहचान है। (Places to visit in Lucknow) 1. बड़ा इमाम बाड़ा (Bada Imam Bada)लखनऊ के सबसे फेमस टूरिस्ट स्पॉट (Famous Tourist Spot) में से एक बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण नवाब आसफ़उद्दौला ने करवाया था। इसीलिए इस इमामबाड़े का दूसरा नाम आसफी इमामबाड़ा (Aasfi Imambada) भी है। इसी इमामबाड़े के अंदर लखनऊ की सबसे प्रसिद्ध भूल भुलैया और बावड़ी भी है, जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कहा जाता है कि इमामबाड़े के भीतर बने इस भूलभुलैया के अंदर जाने के बाद सेम गेट (Same gate) से वापस आना बहुत हीं मुश्किल है। यहां के बावड़ी के बारे में बताया जाता है कि इस बावड़ी के अंदर बहुत सारा खजाना छुपा हुआ है। इस इमामबाड़े को बनाने का काम 1780 में शुरू हुआ और 1784 में जाकर इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह जगह कोई मकबरा या मस्जिद नहीं है, लेकिन फिर भी लखनऊ के सबसे फेमस बिल्डिंग्स (Famous buildings) में से एक है। आप जब इमामबाड़े के भीतर जाएंगे तो यहां के आर्किटेक्चर (Architecture) को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। इमामबाड़े में 489 एक जैसे दिखने वाले दरवाजे हैं, जिनकी नक्काशी और खूबसूरती देखकर एक बार को आप भी ख्यालों की दुनिया में खो जायेंगे। बड़ा इमामबाड़ा मुगल आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन उदाहरण है। 2. ब्रिटिश रेजीडेंसी (British Residency) अंग्रेजों के जमाने में बनाई गई इस रेजीडेंसी में ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश एंप्लॉय (British Employees of East India Company) रहा करते थे। यह रेजीडेंसी 35 एकड़ में फैली हुई है। जहां बहुत सारे बिल्डिंग्स हैं। जिसे पूरा मिला करके रेजीडेंसी का नाम दिया गया है। कहते हैं कि 1857 के विद्रोह में भारतीय लोगों ने इस रेजीडेंसी पर हमला कर दिया था। जिसमें 2000 अंग्रेजी सैनिक मारे गए थे। जिनकी कब्र इस रेजीडेंसी के अंदर बनवायी गई है। रेजीडेंसी के अंदर आपको रेजीडेंसी कंपलेक्स (Residency Complex), ट्रेजरी बिल्डिंग, रेजीडेंसी का म्यूजियम (Musuem of residency), किचन (Kitchen) और रेजीडेंसी का मस्जिद देखने को मिलेगा। इस बिल्डिंग का निर्माण भी आसफ़उद्दौला ने करवाया था। आज के समय में यह बिल्डिंग लखनऊ के प्रसिद्ध दार्शनिक स्थलों (Famous visiting places) में से एक है। 3. छोटा इमामबाड़ा (Chhota Imambara) लखनऊ शहर में एक छोटा इमामबाड़ा भी है। जिसका निर्माण नवाब मोहम्मद अली ने करवाया था। जो उस समय अवध के नवाब थे। इस जगह को इमामबाड़ा हुसैनाबाद मुबारक के नाम से भी जाना जाता है। इस जगह पर आप को ताजमहल के दो प्रतिरूप देखने को मिलेंगे। जिनमें से पहला नवाब मोहम्मद अली की याद में बनवाया गया था और दूसरा उनकी बेटी प्रिंसेस जीनत के याद में बनवाया गया था। यह जगह एक धार्मिक जगह मानी जाती है। इसलिए यहां लड़कियों को अपना सर ढक कर रखना होता है और विजिटर्स को यहां अपने जूते उतार कर जाना होता है। छोटा इमामबाड़ा एक बेहतरीन आर्किटेक्चर वाला जगह है। इस जगह को पैलेस ऑफ़ लाइट (Palace of Light) के नाम से भी जाना जाता है। इसके अंदर शीशे की नक्काशी की गई है और जिसके कारण यहां एक दिया जलाने पर भी यहाँ चारों ओर सौ दिया के बराबर की रोशनी फैल जाती है। इस इमामबाड़े के भीतर लगे झूमरों को नवाब ने बेल्जियम से मंगवाए थे। इस इमामबाड़े की वास्तुकला भारतीय इस्लामिक और फारसी वास्तु कलाओं से मिलती-जुलती है। 4. रूमी दरवाजा (Rumi Darwaza) छोटा इमामबाड़ा और बड़े इमामबाड़े के बीच में स्थित इस दरवाजे को हम लखनऊ शहर का शान (Pride of lucknow) कह सकते हैं। यह दरवाजा 60 फीट ऊंचा है और इसकी निर्माण शैली अवधि वास्तु कला पर आधारित है। इस दरवाजे का निर्माण भी आसफ़उद्दौला ने करवाया था और इस दरवाजे को तुर्किश गेटवे के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि यह दरवाजा तुर्की के बाव-ए-हुमायूं गेटवे (जो कि इस्तानबुल में है) से मिलता जुलता है।रूमी दरवाजा को गौर से देखने पर इसमें दरवाजे के चारों ओर फूलों की नक्काशी देखने को मिलेगी। इस दरवाजे के ऊपर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां भी हैं, जिससे पता चलता है कि इस दरवाजे का निर्माण नजर रखने के लिए भी करवया गया था। दरवाजे के ऊपर एक छोटा सा गुंबद है जहां से आप चारों ओर झांक सकते हैं। 5. हुसैनाबाद क्लॉक टावर (Hussainabad Clock Tower) लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों के लिस्ट में अगला नाम है हुसैनाबाद क्लॉक टावर का। जोकि इंडिया के सबसे लंबे क्लॉक टावरों में से एक है। कहते हैं इस क्लॉक टावर के घंटे और सुईयों को बनवाने के लिए लंदन से सामग्रियां मंगवाई गई थीं। इस क्लॉक टावर के पेंडुलम (Pendulam) की लंबाई 14 फिट है। इस क्लॉक टावर का निर्माण रिचर्ड रॉक्सेल बेन (Rechard Rockcell ben) ने करवाया था। इस क्लॉक टावर की ऊंचाई लगभग 67 मीटर है। यह क्लॉक टावर भारत में विक्टोरियन गोथिक स्टाइल आर्किटेक्चर (Victorian gothic style architecture) का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस क्लॉक टावर को बनवाने में लगभग ₹175000 का खर्च आया था और इसे हुसैनाबाद ट्रस्ट ने 1881 में बनवाया था। 6. दिलखुश कोठी (Dilkhush Kothi) लखनऊ की फेमस दिलखुश कोठी को लाल ईंटों