Hidden Gems- भारत के ये 4 पर्यटन स्थल आपको ज़रूर देखने चाहिए
अगर आप भी घूमने-फिरने के बहुत शौकीन हैं, तो आपको ज़रूर जाना चाहिए इन चार हिडन जेम पर। यह प्रकृति, रहस्य और रोमांच से भरी हुई हैं। यहाँ की सुंदरता, खाना, पहनावा और लोगों का रहन-सहन आपके मन को एक अलग ही प्रकार का सुकून देगा। क्योंकि ये ऑफबीट डेस्टिनेशन में से एक हैं, तो आपको यहाँ भीड़भाड़ न के बराबर मिलेगी, पर मज़े और रोमांच फेमस डेस्टिनेशन से ज़्यादा मिलेंगे क्योंकि ये भारत के उन रत्नों में से एक हैं जो अभी तक छिपे हुए हैं। (Hidden Gems) मेचुका, अरुणाचल प्रदेश मेचुका अरुणाचल प्रदेश के सुदूर पूर्वी हिमालय की एक शांत घाटी है, जिसे एक “छिपा हुआ स्वर्ग” और “पोस्टकार्ड से बाहर निकली हुई घाटी” भी कहा जाता है। यह शहर की भागमभाग, व्यस्त जिंदगी से बहुत दूर एक शांतमय वातावरण में बर्फ से ढकी चोटियों, हरे-भरे जंगलों और शांत सियांग नदी से घिरा हुआ है। साथ ही यह तिब्बती एवं भारतीय संस्कृति का एक अनोखा मेल-मिलाव है, जिसे देखकर मानो हम दो संस्कृतियों को एक साथ ही देख लेते हों। इस घाटी की पहचान इसके 400 साल पुराने समतेन योंगचा मठ, पारंपरिक लकड़ी के घरों और स्थानीय लोगों के अच्छे बर्ताव से होती है, जो कि यात्रा प्रेमी लोगों के लिए एक शानदार जगह बन जाती है। “वेस्ट सियांग” क्षेत्र में स्थित मेचुका ट्रैक 6 से 7 दिनों का एक “सांस्कृतिक ओडिसी” ट्रैक है। हालांकि यह ट्रैक बहुत कठिन नहीं होता, पर इसे बहुत सरल मानने की गलती भी न करें। यह ट्रैक जनजातीय संस्कृति, बांस जंगलों और नदी घाटियों से होकर गुजरता है,जिसकी सुंदरता हमारे मन में ऐसे बस जाती है जैसे मानो हमने कोई स्वर्ग देख लिया हो। यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल/मार्च के बीच का है। हालांकि ऊँचाई वाले स्थानों की तरह यहाँ भी बर्फ और जमा देने वाले तापमान के कारण सर्दियों में (दिसंबर से फरवरी) यह ट्रैक दुर्गम हो सकता है तथा इन महीनों में केवल अनुभवी यात्रियों को ही जाना चाहिए, जो कठोर परिस्थितियों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। तीर्थन घाटी, हिमाचल प्रदेश तीर्थन घाटी हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की एक ऐसी मनमोहक जगह है, जिसे लोग “प्राचीन स्वर्ग” भी कहते हैं। यह मनाली या शिमला जैसे स्थलों से दूर, जहाँ अक्सर पर्यटकों की भीड़ होती है, प्रकृति की गोद में छुपा हुआ है। इस ऑफबीट डेस्टिनेशन का नाम “क्रिस्टल क्लियर तीर्थन नदी” के नाम पर रखा गया है, जो यहाँ के अद्भुत दृश्य, स्वच्छ नदियों और ऊँची-ऊँची हिमालय की पहाड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यह घाटी केवल सुंदरता के लिए ही फेमस नहीं है, बल्कि यह “ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार” भी है, जो कि यूनेस्को विश्व धरोहर भी है। इसी कारण यह नेचर लवर्स और एडवेंचर करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है। यहाँ चारों तरफ पेड़-पौधों से घिरे जंगलों में ट्रैकिंग करके दुर्लभ वन्यजीवों को देखा जा सकता है। इसके साथ-साथ यह स्थान मछली पकड़ने और सामान्य जानवरों को देखने के लिए भी बहुत अच्छा है। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि आप यहाँ पर आरामदायक लकड़ी के कॉटेज में रहने का एक्सपीरियंस ले सकते हैं, साथ ही पंछियों और बहती नदियों की आवाज़ों का मज़ा ले सकते हैं। तीर्थन घाटी जाने का सही समय तीर्थन घाटी जाने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून है, जब बसंत ऋतु दरवाजे पर दस्तक देती है और हर जगह हरियाली, फल, फूल खिले होते हैं और हल्की-हल्की गर्मियों की शुरुआत हो जाती है। इस समय यहाँ घूमने का एक अलग ही मज़ा है। साथ ही सितंबर से नवंबर, जब पतझड़ का समय होता है और सर्दियाँ मानो हमारे दरवाज़े पर दस्तक देने को खड़ी हों — यह समय भी यहाँ घूमने का सबसे बेस्ट होता है। वैसे तो यहाँ सर्दियों यानी दिसंबर से फरवरी में भी आराम से घूमा जा सकता है, लेकिन यहाँ आने वाली सड़कों पर बर्फ गिरने के कारण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस समय यहाँ न आने की सलाह दी जाती है। चोपता, उत्तराखंड चोपता, उत्तराखंड में स्थित एक ऐसी जगह है जिसे भारत का मिनी स्विट्ज़रलैंड कहते हैं। ऊँची-ऊँची हिमालय की चोटियों से चारों ओर से घिरा हुआ एक हरा-भरा घास का मैदान, जिसे एक छोटा हिल स्टेशन भी कहा जाता है। यह ट्रैकिंग, कैंपिंग और प्रकृति की सैर के लिए एकदम सही जगह है। साथ ही इसकी सबसे खास बात यह है कि यहाँ अन्य हिल स्टेशनों के मुकाबले सबसे कम भीड़ होती है। अपनी ओर खींच लेने वाली सुंदरता होने के बावजूद चोपता भारत के सबसे अनदेखे स्थानों में से एक है। ट्रैकर्स और एकांत चाहने वालों के लिए यह एक शानदार जगह है। यहीं से तुंगनाथ मंदिर का ट्रैक शुरू होता है, जो दुनिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर माना जाता है। यहाँ से केवल तुंगनाथ मंदिर ही नहीं, बल्कि चंद्रशिला चोटी तक भी जाया जाता है, जहाँ बर्फ से ढके हिमालय के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं, जो किसी चमत्कार से कम नहीं लगते।चोपता जाने का बेस्ट टाइम मार्च से मई तक का होता है क्योंकि इस दौरान तापमान 8 से 15 डिग्री सेल्सियस रहता है और इसी समय आपको आदर्श ट्रैकिंग की स्थितियाँ मिलती हैं। हालांकि अक्टूबर से फरवरी या दिसंबर से फरवरी के दौरान भी यहाँ जाया जा सकता है, पर इस समय ज्यादातर अनुभवी यात्रियों को ही जाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस समय बर्फबारी और कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जालोर किला, राजस्थान जालोर किला, जो राजस्थान के जालोर शहर के बीचों-बीच स्थित है, आकर्षक रत्नों में से एक है। इस किले का निर्माण दसवीं शताब्दी में परमार राजवंश द्वारा किया गया था। यह किला 1200 फीट की ऊँचाई पर स्थित एक ऊँची पहाड़ी पर बना है। यह पहाड़ी इतनी ऊँची है कि आने वाले सभी पर्यटकों का ध्यान स्वतः ही इस पर चला जाता है। यह किला भारत की सबसे अद्भुत रचनाओं में से एक माना जाता है। इस किले की खासियत सिर्फ इसकी बनावट नहीं, बल्कि इसका इतिहास भी है। इस किले ने चौहानों, परमारों, पोपाबाई और अंत में मुसलमानों सहित कई विजेताओं को देखा है। इस किले की खास बात यह भी है कि