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INDORE: के यह 5 बाजार हैं शॉपिंग के लिए सबसे परफेक्ट, जहां एक बार तो जाना बनता है!

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INDORE: इंदौर बस साफ–सफाई में नंबर वन नहीं है, खरीदारी के लिए भी हिंदुस्तान के सबसे सुंदर और मोहक शहरों में से एक माना जाता है। यहां की गलियों में घूमते हुए जो अपनापन, ताज़गी और खुशबू महसूस होती है, वह शायद ही कहीं और मिले। इंदौर अपने बेहतरीन खान–पान, शानदार कपड़ा मंडियों, आकर्षक कॉस्मेटिक शॉप्स, किताबों की महक और रंग–बिरंगी साड़ियों के लिए मशहूर है। अगर कोई शख्स इंदौर घूमने आए और यहां की मार्केट की रौनक न देखे, तो समझिए सफर अधूरा है। शहर के कुछ खास बाज़ार जिसमें छप्पन दुकान, एमटी कपड़ा बाज़ार, अटाला बाज़ार, खजूरी बाज़ार और शीतलामाता बाजार न सिर्फ खरीदारी का केंद्र हैं, बल्कि यहां की संस्कृति, लोगों की गर्मजोशी और इंदौरी अंदाज़ को खुलकर बयां करती है। हर गली में एक नया रंग बिखरा हुआ हो और दुकानदारों की मुस्कुराहटों में अपनापन महसूस होता है। यही वजह है कि इंदौर की मार्केट्स पूरे देश में चर्चित हैं और यहां का माहौल पर्यटकों को हमेशा बांधकर रखता है। छप्पन दुकान मार्केट (Chappan Dukan Market) सबसे पहले बात करते हैं छप्पन दुकान की जिसे इंदौर का मिनी फूड पैराडाइज़ कहा जाता है। नाम छप्पन दुकान इसलिए पड़ा क्योंकि शुरुआत में यहां सिर्फ 56 दुकानें थीं और हर दुकान किसी न किसी खास व्यंजन के लिए फेमस थी। आज भी यह जगह इंदौर का दिल मानी जाती है जहां सुबह से रात तक भीड़ लगी रहती है। पोहा, जलेबी, भुट्टे का किस, दही वड़ा, गराड़ू, मकई, फलूदा, पान, मोमोज़, पिज़्ज़ा, सब कुछ यहां मिलता है। खाने के साथ–साथ यहां स्ट्रीट शॉपिंग भी काफी मज़ेदार है। परिवार, दोस्त, कपल, सभी कभी न कभी यहां जरूर आते हैं। छप्पन दुकान में स्वाद की खुशी और इंदौर की मेहमाननवाज़ी का असली मज़ा मिलता है। शाम के समय मार्केट लाइट्स, म्यूजिक और भीड़ का जो माहौल बनता है, वह अपने आप में त्यौहार जैसा लगता है। यह जगह बताती है कि भोजन सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं बल्कि शहर की पहचान और संस्कृति का प्रतीक है और सच कहें तो यहां खाए गए व्यंजनों का स्वाद ज़िंदगी भर याद रहता है। कहां है और कैसे पहुंचे? छप्पन दुकान इंदौर के न्यू पलासिया में स्थित है, शहर के बीचों बीच। इंदौर रेलवे स्टेशन से यह लगभग 3 किलोमीटर और देवी अहिल्या एयरपोर्ट से करीब 10 किलोमीटर दूर है। यहां ऑटो, कैब या सिटी बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है। पार्किंग और बैठने की अच्छी सुविधा भी उपलब्ध है।(यही वजह है कि इंदौर की मार्केट्स पूरे देश में चर्चित हैं और यहां का माहौल पर्यटकों को हमेशा बांधकर रखता है।) एमटी कपड़ा मार्केट (MT Kapda Market) अब ज़िक्र करते हैं एमटी कपड़ा बाज़ार का जो इंदौर ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी कपड़ा मंडी मानी जाती है। यहां थोक का कारोबार इतना बड़ा है कि पूरे देश से व्यापारी कपड़े खरीदने आते हैं। शादी–विवाह हो या त्यौहार हर मौके के लिए यहां शानदार वैराइटी मिलती है सूट–सलवार, कुर्ती, ब्लाउज़ डिजाइन, लहंगे, पुरुषों के शेरवानी, जोधपुरी सेट्स, बच्चों के गारमेंट्स और होम टेक्सटाइल की भी बेहतरीन रेंज उपलब्ध है। यहां कपड़े इतने किफायती दाम पर मिलते हैं कि लोग आसपास के शहरों से स्पेशल खरीदारी करने आते हैं। पूरे बाज़ार में दौड़ती–भागती गाड़ियां, कपड़े ले जाते मज़दूर, दुकानों में लगी भीड़ और सौदेबाज़ी का माहौल दिलचस्प लगता है। अगर किसी को फैशन बिज़नेस शुरू करना हो तो एमटी कपड़ा बाज़ार उसके लिए सोने की खान साबित हो सकता है। इतने विशाल स्तर पर व्यापार होने के बाद भी दुकानदारों की विनम्रता और व्यवहार दिल जीत लेते हैं। यह बाज़ार शहर की आर्थिक ताकत का बड़ा स्तंभ माना जाता है। यह भी पढे – Hidimba Devi Temple: हिमाचल के मनाली में एकमात्र भीम की पत्नी हिडिंबा को समर्पित महाभारत युगीन मंदिर!  कहां है और कैसे पहुंचे? एमटी कपड़ा बाज़ार इंदौर के उषा नगर / सांताक्रूज़ Santa Cruz क्षेत्र में स्थित है। यह शहर का प्रमुख थोक कपड़ा हब है। इंदौर रेलवे स्टेशन से लगभग 5 से 6 किलोमीटर की दूरी पर है। टैक्सी, ऑटो या बस से आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। अटाला मार्केट इंदौर (Atala Market Indore) इसी अंदाज़ में चलते हैं अटाला बाज़ार, जो युवाओं और महिलाओं की मनपसंद जगहों में गिना जाता है। यहां पर ट्रेंडी कपड़े, कॉस्मेटिक्स, ज्वेलरी, बैग्स और फैशन एक्सेसरीज़ की इतनी विशाल रेंज मिलती है कि समझ नहीं आता पहले क्या खरीदें और छोड़ें क्या। छोटे–छोटे स्टॉल हों या बड़े शोरूम हर दुकान पर विकल्पों की दुनिया सजी मिलती है। कॉलेज जाने वाली लड़कियों से लेकर शादी में तैयार होने वाली महिलाओं तक के लिए यह मार्केट एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है। सस्ते दाम, न्यू ट्रेंड और मनमाफिक चयन यही इसकी पहचान है। खास बात यह है कि यहां के दुकानदार इतने फ्रेंडली होते हैं कि bargaining करना भी मज़ेदार लगता है। अगर किसी को आधुनिक फैशन से अपडेट रहना हो, तो अटाला बाज़ार जरूर जाना चाहिए। शाम के वक्त यहां की चहल–पहल और रंगीन रोशनी माहौल को और भी खूबसूरत बना देती है। कहां है और कैसे पहुंचे? अटाला बाज़ार इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र के पास स्थित है। शहर के पुराने और सबसे व्यस्त बाजारों में से एक। यहां पहुंचना बेहद आसान है। इंदौर रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर दूर। ऑटो, ई-रिक्शा, सिटी बस या पैदल भी आराम से पहुंचा जा सकता है। यह भी पढे – TERE ISHQ MEIN: दिल्ली की दिलकश गलियों में शूट हुई धनुष की नई फिल्म, सोशल मीडिया पर जमकर वायरल! खजूरी मार्केट इंदौर (Khajuri Market Indore) अब बात करते हैं खजूरी बाज़ार की, जिसे इंदौर का ज्ञान–केंद्र कहा जा सकता है। यह बाज़ार किताबों के प्रेमियों के लिए किसी खज़ाने से कम नहीं। स्कूल–कॉलेज की किताबें हों, कॉम्पिटीशन की तैयारी के लिए स्टडी मटीरियल, साहित्यिक किताबें, बेस्टसेलर नॉवेल, धार्मिक–आध्यात्मिक ग्रंथ, स्टेशनरी, आर्ट–क्राफ्ट सामान—सबकुछ यहां मिलता है। छात्रों, प्रोफेसरों और बुक–लवर्स की लगातार भीड़ यहां की पहचान है। कई लोग कहते हैं कि खजूरी बाज़ार की महक में पुरानी किताबों की सुगंध घुली होती है जो मन को आनंदित करती हैं। यहां किताब खरीदने का अनुभव किसी जश्न से कम नहीं लगता जैसे ज्ञान की एक नई खिड़की खुल रही हो। स्टेशनरी की दुकानों

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Zurich: स्विट्ज़रलैंड के इस शहर में घूमने के लिए दस वे जगहें जो खूबसूरती की मिसाल हैं!

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अगर आप Switzerland की यात्रा का सपना देखते हैं, तो Zurich जरूर शामिल कीजिए। यह एक बड़ा शहर तो है ही, साथ ही यूरोप की वह खास जगह है जो हर यात्री को अपनी सुंदरता, साफ़-सुथरे माहौल, झीलों और पहाड़ों से मोह लेता है। यहां आधुनिकता और प्रकृति का ऐसा अनोखा नजारा देखने को मिलता है। जिसे देखकर मन खुश हो जाता है। five colors of travel की इस पेशकश में जानें ज़्यूरिख में घूमने के 10 सबसे खूबसूरत और मशहूर स्थान, जिन्हें देखकर आपकी यात्रा अनफ़ॉरगेटेबल बन जाएगी। 1. ज़्यूरिख लेक Lake Zurich ज़्यूरिख लेक इस शहर की जान कहा जाए तो गलत नहीं होगा। नीले चमकते पानी के बीच दूर-दूर तक फैले पहाड़, किनारे बने वॉकवे और झील पर चलने वाली बोट सब कुछ इतना सुंदर लगता है कि दिल वहीं रुक जाने का मन करता है। यहां लोग सुबह–शाम टहलते, साइकलिंग करते और हंसते-खेलते नजर आते हैं। आप चाहें तो बोट क्रूज़ लेकर झील के शानदार नज़ारे करीब से देख सकते हैं।(five colors of travel की इस पेशकश में जानें ज़्यूरिख में घूमने के 10 सबसे खूबसूरत और मशहूर स्थान, जिन्हें देखकर आपकी यात्रा अनफ़ॉरगेटेबल बन जाएगी।) 2. ओल्ड टाउन Old Town Altstadt पुराने ज़्यूरिख की गलियां इतिहास की महक से भरी हैं। संकरी पत्थरों वाली सड़कों पर रंग–बिरंगी इमारतें, कैफे, पुरानी दुकानें और चर्च सब कुछ बेहद खूबसूरत है। यहां घूमते हुए ऐसा लगता है जैसे वक़्त कुछ देर के लिए रुक गया हो। यह जगह फोटोग्राफी के लिए भी बेस्ट है। 3. बॉनहोफस्ट्रासे Bahnhofstrasse दुनिया की सबसे फेमस और लग्ज़री शॉपिंग स्ट्रीट में Bahnhofstrasse का नाम ऊपर आता है। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी इस सड़क पर बड़ी-बड़ी ब्रांड्स, शो–रूम, खूबसूरत कैफे और आकर्षक स्टोर्स हैं। भले ही आप शॉपिंग न करना चाहें, फिर भी यहां टहलना एक शानदार एहसास देता है। 4. यूएटलीबर्ग पर्वत Uetliberg Mountain अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो ज़्यूरिख का पूरा नज़ारा ऊपर से देखने के लिए Uetliberg पर्वत जरूर जाएं। यहां तक ट्रेन से आराम से पहुंच सकते हैं। ऊपर से पूरा शहर, झील और दूर तक दिखने वाली Alps की बर्फीली पहाड़ियां देखने लायक नज़ारा है। यहां ट्रील वॉक और ट्रैकिंग का मज़ा भी लिया जा सकता है। 5. स्विस नेशनल म्यूज़ियम Swiss National Museum स्विट्ज़रलैंड के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानना हो तो यह म्यूज़ियम बेहतरीन जगह है। यहां प्राचीन हथियार, कलाकृतियां, पुराने कपड़े, सिक्के और कला के शानदार प्रदर्शन देखने को मिलते हैं। यह जगह बच्चों और स्टूडेंट्स के लिए बेहद जानकारीपूर्ण मानी जा सकती है। 6. लिन्डेनहोफ़ हिल Lindenhof Hill Old Town के बीच स्थित यह छोटी सी पहाड़ी शहर का शांत और खूबसूरत व्यू पॉइंट है। यहां बैठकर लोग शांति महसूस करते हैं और सामने दिखती ऐतिहासिक इमारतें मन को सुकून देती हैं। पिकनिक के लिए यह एक बढ़िया स्थान माना जाता है। 7. ज़ू ज़्यूरिख Zoo Zurich परिवार, बच्चों या वाइल्डलाइफ प्रेमियों के लिए Zurich Zoo एक शानदार जगह है। यहां 300 से अधिक प्रजातियों के जानवर देखने को मिलते हैं, जिनके लिए प्राकृतिक जैसा ही वातावरण बनाया गया है। खासकर Masoala Rainforest Hall बहुत प्रसिद्ध है, जहां खुद को असली जंगल जैसा महसूस होता है। 8. कुंस्टहाउस ज़्यूरिख Kunsthaus Zurich Art Museum कला और पेंटिंग के शौकीन लोगों के लिए यह जगह किसी खजाने से कम नहीं। यहां यूरोप के मशहूर कलाकारों की हजारों पेंटिंग्स और आर्टवर्क मौजूद हैं। यह म्यूज़ियम शांत और सुकून देने वाला वातावरण प्रदान करता है। 9. सेंट पीटर चर्च St. Peter’s Church यह चर्च अपनी सुंदरता और दुनिया की सबसे बड़ी क्लॉक फेस घड़ी के लिए प्रसिद्ध है। यहां की वास्तुकला बेहद आकर्षक है और लोग यहां आकर प्रार्थना और शांति दोनों का आनंद लेते हैं। यह ज़्यूरिख के पुराने हिस्से की पहचान है। 10. ऑपेरा हाउस ज़्यूरिख Zurich Opera House अगर आपको म्यूज़िक, डांस, थिएटर और ओपेरा पसंद है, तो यह जगह मिस न करें। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के शानदार शो और कला प्रस्तुति होती है। बाहर का आर्किटेक्चर भी इतना सुंदर है कि हर पर्यटक रुककर फोटो खींचना पसंद करता है। 11. लोकल स्विस फूड और कैफे कल्चर ज़्यूरिख का स्वाद भी इसकी खूबसूरती जितना ही मशहूर है। यहां की गलियों में छोटे–छोटे कैफे, चॉकलेट की दुकानें और स्थानीय व्यंजन जैसे स्विस फोंड्यू और रॉस्टी ज़रूर चखिए। यहां की चॉकलेट दुनिया भर में प्रसिद्ध है और इसे चखना यात्रा की सबसे मीठी याद बन जाती है। ज़्यूरिख सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि एक अनुभव है। यहां का हर कोना रंगों, खुशबू, सुकून, कला और प्राकृतिक सुंदरता से भरा है। चाहे आप रोमांच के शौकीन हों, प्रकृति प्रेमी, संस्कृति जानने वाले या शांति चाहने वाले ज़्यूरिख हर किसी को खुश कर देता है। अगर आप यूरोप जा रहे हैं, तो ज़रूर अपने ट्रेवल प्लान में इस खूबसूरत शहर को शामिल करें।

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Mumbai: के 5 ऑफबीट डेस्टिनेशन, एक बार आओगे तो यहां की खूबसूरती को भुला नहीं पाओगे!

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Mumbai: सपनों का शहर “The City of Dreams” मुंबई नाम लेते ही चमक-दमक, बॉलीवुड, लोकल ट्रेन की रफ्तार, नाइटलाइफ और समंदर की लहरें दिमाग में एक साथ कौंध जाती हैं। यह शहर भारत का दिल भी है और धड़कन भी। लोग कहते हैं कि मुंबई सोती नहीं है और यह बात बिल्कुल सच लगती है जब आप इसकी सड़कों पर सुबह की ठंडी हवा से लेकर देर रात तक चलते हुए देखते हैं। लेकिन सिर्फ तेज़ जीवन, भीड़ और नियोन लाइट्स ही मुंबई की पहचान नहीं। इसके पास ऐसे अनगिनत आउटडोर डेस्टिनेशन भी हैं जो इंसान के भीतर शांति भर देते हैं। दिल में रोमांच की चिंगारी जगा देते हैं और जिंदगी को एक नई नज़र से देखने का मौका देते हैं। चाहे आप दिल्ली, भोपाल, जयपुर या कहीं से भी आए हों, मुंबई आपको खुली बाहों से अपनाती है और अपने खूबसूरत नज़ारों से मोह लेती है। मुंबई में घूमने की जगहों की कोई कमी नहीं पर यह पांच ऐसे प्रमुख स्थान हैं। जिनके बिना इस शहर की यात्रा अधूरी मानी जाती है। जिनमें एलीफेंटा केव्स, जुहू बीच, गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव और लोनावाला। Elephanta Caves: पत्थरों में उकेरी गई इतिहास और अध्यात्म की गाथा! मुंबई हार्बर से लगभग 10 किलोमीटर दूर, अरब सागर के बीचों-बीच स्थित है एलीफेंटा आइलैंड, जहां मौजूद हैं हजारों साल पुराने पत्थर काटकर बनाए गए अद्भुत गुफा-समूह, जिन्हें हम एलीफेंटा केव्स के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि यह गुफाएं 5वीं से 8वीं शताब्दी के बीच निर्मित की गई थीं। यहां पहुंचना खुद में एक छोटा सा समुद्री रोमांच जैसा है। गेटवे ऑफ इंडिया से चलने वाली फ़ेरी में एक घंटे की यात्रा, समंदर की लहरों की ताल, किनारे से दूर होते हुए मुंबई के गगनचुंबी बिल्डिंग, और फिर सामने आती एक रहस्यपूर्ण पहाड़ी द्वीप, एक ऐसा लम्हा जिसे कोई भूल नहीं सकता। गुफाओं का सबसे बड़ा आकर्षण है भगवान शिव की त्रिमूर्ति, जो शिव के तीन स्वरूप। सृजनकर्ता, पालक और संहारकर्ता को दर्शाती है। इसे भारतीय शिल्पकला की सबसे उत्कृष्ट मूर्तियों में गिना जाता है। गुफाओं में घूमते हुए ऐसा महसूस होता है जैसे इतिहास की सांसें अभी भी इन पत्थरों में कैद हों।( जिनमें एलीफेंटा केव्स, जुहू बीच, गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव और लोनावाला।) Juhu Beach: इसके बारे में कौन नहीं जानता! मुंबई का सबसे लोकप्रिय बीच, जुहू बीच सिर्फ एक बीच नहीं, बल्कि मुंबई की रोजमर्रा की धड़कन का आईना है। सुबह लोग यहां जॉगिंग करते दिखते हैं, शाम को कपल्स और परिवार टहलते नज़र आते हैं और रात में समंदर की लहरों के साथ शहर की लाइटें ऐसे चमकती हैं जैसे आसमान ज़मीन पर उतर आया हो। यहां की ठंडी हवा में ऐसा जादू है कि थकान अपने आप उड़ जाती है। यहां खड़े होकर समंदर के सामने घंटों बैठने का मज़ा ही कुछ और है। कोई जल्दी नहीं, कोई शोर नहीं, सिर्फ लहरों की आवाज़ और दिल का सुकून। जुहू बीच का सबसे स्वादिष्ट हिस्सा है इसका स्ट्रीट फूड कॉर्नर, बेलपुरी, सेवपुरी, पानीपुरी, पावभाजी, पिज्जा डोसा, कुल्फी फ़ालूदा, आप जो भी खाइए, दिल जीत लेगा। अगर किस्मत साथ दे, तो आप यहां बॉलीवुड सितारों को भी देख सकते हैं क्योंकि इनके कई घर यहीं आसपास हैं। बच्चों के लिए ऊंट-घोड़ा राइड और यूथ के लिए फोटोग्राफी स्पॉट्स, ड्रोन शूट्स, और बीच स्पोर्ट्स सबकुछ मौजूद है। दुनिया के कई समुद्रतट सुंदर हो सकते हैं, पर जुहू बीच दिल से जुड़ जाने वाली जगह है । जहां पर इंसान एक बार फिर से जीना सीख लेता है। Gateway of India: भारत का प्राइड अरे, मुंबई आए और गेटवे ऑफ इंडिया नहीं देखा? यह तो ऐसे ही है जैसे दिल्ली आए पर इंडिया गेट न देखा हो! 1911 में किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी के स्वागत के लिए बनाया गया यह भव्य स्मारक आज मुंबई का सबसे प्रतिष्ठित लैंडमार्क है। चाहे दिन हो या रात, यहां की खूबसूरती दिल को छू जाती है। यूं लगता है जैसे यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की ताकत, गौरव और साहस का प्रतीक हो, जो हमेशा खड़ा है। समंदर के सामने, हवाओं के बीच, बिना हिले, बिना थके। गेटवे के सामने से उठती समुद्री हवा और चारों तरफ उड़ते कबूतरों का दृश्य, एक ऐसी शांति देता है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। यहीं से एलीफेंटा के लिए फ़ेरी चलती है, और रात में यहां का लाइटिंग शो देखना अपने आप में एक यादगार अनुभव है। पास में ताज होटल की ऐतिहासिक इमारत इसे और भी भव्य बना देती है। Marine Drive: जो है प्यार, दोस्ती और सबसे खूबसूरत किनारा अगर किसी ने कभी मुंबई की रूह महसूस की है, तो वह जानता होगा कि मरीन ड्राइव सिर्फ एक सड़क नहीं एक एहसास है। इसे लोग प्यार से क्वीन्स नेकलेस भी कहते हैं क्योंकि रात में इसकी स्ट्रीट लाइटें ऐसे चमकती हैं जैसे मोतियों की लड़ी हो। 3.6 किलोमीटर लंबा ये समुद्री किनारा लोगों के लिए तनाव से राहत, प्रेमियों के लिए रोमांस और यात्रियों के लिए एक शानदार दृश्य है। यहां की शामें अविस्मरणीय होती हैं। लहरों का शोर, हवा की ताजगी और आसमान का रंग बदलना यह सब जिंदगी को बेहद खूबसूरत बना देता है। मरीन ड्राइव पर बैठकर भविष्य की चिंता भूल जाती है और मन में सुकून की लहर दौड़ जाती है। यह वह जगह है जहां लोग रोते भी हैं, हंसते भी हैं, सपने भी देखते हैं और खुद को समझते भी हैं। Lonavala hills: झरने और बादल का सुंदर कॉम्बो अगर आप मुंबई के शोर से दूर थोड़ी राहत चाहते हैं, तो लोनावाला आपके इंतज़ार में है। मुंबई से करीब 2 घंटे की दूरी पर स्थित यह हिल स्टेशन मानसून के दिनों में स्वर्ग से कम नहीं लगता। रास्ते में मिलते हरे-भरे पहाड़, गहरी घाटियां बादलों से मिलते झरने और पहाड़ी हवा दिल को एक ऐसी खुशी देती है जो कहीं और मिलनी मुश्किल है। Tigers Point, Bhushi Dam, Rajmachi Point और Pawna Lake जैसे स्पॉट मन मोह लेते हैं। मानसून में सड़कें धुंध से ढक जाती हैं और सबकुछ ऐसा लगता है जैसे आप किसी फिल्म के सीन में हों। लोनावाला सिर्फ कपल्स और दोस्तों के लिए नहीं, बल्कि परिवारों और

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Kolkata: यहां के बाजार, खाना, खूबसूरती और आस-पास के आकर्षण आपका दिल जीत लेंगे!

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Kolkata: का इतिहास कोलकाता, जिसे पहले कलकत्ता कहा जाता था, भारत का एक ऐसा शहर है जिसकी सांस्कृतिक जड़ें बेहद गहरी और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध हैं। 1690 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के जॉब चैर्नॉक ने इस क्षेत्र में व्यापारिक केंद्र स्थापित किया और धीरे-धीरे तीन छोटे गांव सुतानुटी, कालिकाता और गोविंदपुर मिलकर कलकत्ता शहर का रूप लेने लगे। 1772 से 1911 तक यह ब्रिटिश भारत की राजधानी रहा और यहीं से आधुनिक भारतीय राजनीति, शिक्षा, साहित्य और समाज सुधार की शुरुआत होती है। राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस जैसे महानायक यहीं से निकले जिन्होंने भारत के विचार और संघर्ष की धार को तेज बनाया। यहां बंगाल पुनर्जागरण Bengal Renaissance ने भारतीय समाज को नई दिशा दी और साहित्य, कला तथा पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। लम्बे समय तक यह शहर भारत का बौद्धिक केंद्र माना जाता रहा और आज भी किताबों, थिएटर, वाद-विवाद और सिनेमा का गढ़ माना जाता रहा है। यही वजह है कि कोलकाता को City of Joy तथा Cultural Capital of India कहा जाता है। घूमने के लिए प्रसिद्ध स्थान कोलकाता में घूमने के लिए इतने अनोखे स्थान हैं कि यात्रियों को यहां कई दिन बिताने पड़ते हैं। हुगली नदी के तट पर बना हावड़ा पुल इस शहर की पहचान है और इसकी इंजीनियरिंग दुनिया भर में मिसाल मानी जाती है। विक्टोरिया मेमोरियल सफेद संगमरमर से बना ब्रिटिश काल का स्मारक है, जिसके हरे-भरे बगीचे और संग्रहालय पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। दक्षिणेश्वर काली मंदिर और कालीघाट मंदिर धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र हैं, जहां हजारों भक्त रोज़ दर्शन करने आते हैं। भारतीय संग्रहालय भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा संग्रहालय है, जिसमें जीवाश्म, प्राचीन मूर्तियां, ममी और ऐतिहासिक धरोहरों का विशाल संग्रह है। विज्ञान नगरी, बिरला तारामंडल, नीको पार्क बच्चों के लिए बेहतरीन जगहें हैं। साहित्य और बुद्धिजीवियों के लिए कॉलेज स्ट्रीट और कॉफी हाउस तीर्थस्थल समान हैं। मार्बल पैलेस, मदर हाउस, सेंट पॉल कैथेड्रल, इको पार्क, अलीपुर पशु उद्यान भी शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। हर दिशा में कला, इतिहास और आधुनिकता की झलक देखने को मिलती है।(यही वजह है कि कोलकाता को City of Joy तथा Cultural Capital of India कहा जाता है।) कोलकाता के मशहूर बाजार शॉपिंग के शौकीनों के लिए कोलकाता किसी रोमांचक स्थान से कम नहीं। न्यू मार्केट यानी सरोजिनी नायडू मार्केट शहर का सबसे पुराना और सबसे व्यस्त बाज़ार है, जहां कपड़े, साड़ियाँ, चमड़े के बैग, गहने और खाने-पीने की चीज़ें बेहतरीन दामों पर मिलती हैं। गरियाहाट मार्केट और हाटीबागान मार्केट बंगाली रेशम, कांथा-वर्क और पारंपरिक तांत तथा बलूचरी साड़ियों के लिए खास पहचान रखते हैं। कॉलेज स्ट्रीट किताब बाज़ार दुनिया का सबसे बड़ा सेकेंड-हैंड किताब बाज़ार है, जहां हर विषय की किताबें मिलती हैं। बड़ा बाज़ार थोक खरीदारी का दिल माना जाता है और यहां से होलसेल कपड़ों से लेकर सूखे मेवे तक, हर चीज़ मिल जाती है। कला प्रेमियों के लिए कुम्हारटुली एक ऐसी जगह है, जहां कारीगर अपने हाथों से देवी-देवताओं की अद्भुत मूर्तिययां बनाते हैं, विशेषकर दुर्गा पूजा के समय यहां का माहौल देखने लायक होता है। कोलकाता का प्रसिद्ध फूड कोलकाता का भोजन सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि भावनाओं का सुंदर सा मेल है। यहां की मिष्ठी, रसगुल्ला, संदेश, नोलान गुर दुनिया भर में मशहूर हैं। स्ट्रीट फूड में कोलकाता काठी रोल, घुगनी चाट, फुचका जोकि पानी पूरी का ही एक रूप है, झालमूड़ी, फिश फ्राई, कोचुरी, आलूर दम हर किसी को दीवाना बना देते हैं। बंगाली फिश करी, इलिश, चिंगड़ी मलाई करी, भेटकी पातुरी, सरसों माछ समुद्री खाने के शौकीनों के लिए खास अनुभव है। वेज पसंद करने वालों के लिए बंगाली थाली, लाबड़ा और शुक्तो बेहतरीन विकल्प हैं। यहां की चाय का अलग ही अंदाज़ है मिट्टी के कुल्हड़ में सुगंधित चाय पीने का मज़ा ही कुछ और है। यदि आप मिठाइयों के दीवाने हैं, तो के.सी. दास, बाला राम मुल्लिक और राधा रमण मुल्लिक, भिखारम चांदमल, और मिठाई ज़रूर जाएं। कैसे जाएं और कहां रुकें कोलकाता भारत के हर बड़े शहर से रेल, हवाई और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर का मुख्य एयरपोर्ट है। हावड़ा जंक्शन और सीलदह दो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जहां से देशभर की ट्रेनें मिलती हैं। शहर का स्थानीय परिवहन बेहद सुविधाजनक है। मेट्रो रेल, ट्राम, पीली टैक्सी, ओला, ऊबर, स्थानीय बस और फेरी सभी यहां उपलब्ध हैं। रहने के लिए हर बजट के विकल्प मिलते हैं। पार्क स्ट्रीट, एस्प्लेनेड, न्यू टाउन, सॉल्ट लेक और हावड़ा में अच्छे होटल, अतिथि गृह और होम-स्टे मिल जाएंगे। लग्ज़री रहने के लिए द ओबेरॉय ग्रैंड, ताज बंगाल, आईटीसी रॉयल बंगाल शानदार विकल्प हैं; जबकि कम बजट वाले यात्रियों के लिए जॉस्टल, बैकपैकर होस्टल और ओयो भी आसानी से मिल जाते हैं। कोलकाता की खूबसूरती कोलकाता की खूबसूरती सिर्फ इमारतों या रोशनी में नहीं बल्कि इसकी नजारों में बसती है। यहां के लोग बेहद सरल, भावनात्मक और बातचीत पसंद करने वाले होते हैं। बारिश की फुहारों में ट्राम की धीमी चाल, हुगली नदी किनारे नौका विहार, शाम की चाय और पार्क स्ट्रीट की चमक एक शानदार अनुभव बयां करते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान शहर की सजावट, पंडाल कला, रोशनी और पारंपरिक ढाक की आवाज़ दिल को रोमांचित कर देती है। शहर की रातें शांत, सुरक्षित और मोहक होती हैं। पुरानी हवेलियों, पुराने बाज़ारों, पुराने ट्राम लाइनों की nostalgia यहां की पहचान है। यह शहर पुराना भी है और आधुनिक भी।  कोलकाता का कल्चर कोलकाता का सांस्कृतिक जीवन अपने आप में अनोखा है। यहां थिएटर, संगीत, कविता, नृत्य और कला को पूजा की तरह माना जाता है। Rabindra Sangeet, Nazrul Geeti, Baul Music, बंगाली थिएटर, लोक कला और फिल्में यहां की सांस्कृतिक धड़कन हैं। इस शहर ने सत्यजित राय, ऋत्विक घटक, उत्तम कुमार, किशोर कुमार और रबीन्द्रनाथ टैगोर जैसी महान हस्तियां दी हैं। बुक फेयर, फिल्म फेस्टिवल, दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा, पोइसाखी जो कि बंगाली नववर्ष है। जैसे आयोजन शहर को उत्सवमय बना देते हैं। हर व्यक्ति में कला और संवाद की भूख है। लोग बहसें करते हैं, विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, किताबें पढ़ते हैं और नई सोच और समझ को जन्म देते हैं। यही वजह है कि कोलकाता सिर्फ एक शहर

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Chausath Yogini Temple: यह वही मंदिर है जिसकी थीम पर बना भारत का संसद भवन!

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Chausath Yogini Temple Chausath Yogini Temple: जिसके हूबहू शैली में बनी है भारतीय संसद। अब आपका सवाल वाजिब है कि कैसे? तो आइए मैं बताता हूं कैसे? आज हम अपनी इस विशेष यात्रा में आपको ले चलते हैं, एक बेहद खास जगह। जो इतिहास का ऐसा उदाहरण है। जिसकी छवि आप भारत की पुरानी संसद भवन में देख सकते हैं। जी हां ग्वालियर शहर से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है एक ऐसी रहस्यमय जगह जिसको देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। बिल्कुल हमारी तरह। क्योंकि हमने जब इस मंदिर की सैकड़ों सीढ़ियां चढ़ीं और इसके दर्शन किए तो हमारी वही प्रतिक्रिया थी, जो एक असमान्य चीज देख लेने से किसी की भी होती है। यहां की खूबसूरती यह इलाके आधुनिक चीजों से थोड़े पीछे हैं, पर यह जगह भारत की वास्तविक आत्मा को समझने के लिए सबसे बढ़िया हैं। यहां आप शुद्ध हवा का लुत्फ उठा सकते हैं और पक्षियों की आवाजें सुन सकते हैं। साथ ही सूर्य उदय और अस्त देख पाना सौभाग्य का पल होगा। यह समय यहां बिताना किसी सपने से कम से नहीं है, आपके पास समय हो तो एक बार यहां के गांव में घूमें और लोकल लोगों से बात करें। आपको नए नए अनुभव देखने और सुनने को मिल सकते हैं। यहां के लोग बहुत प्यारे हैं। उनका बोलना और बात करना बहुत अच्छा है। बहुत ही सम्मान के साथ आपसे बात करते हैं और आपसे भी वह यही उम्मीद करते हैं। (जिसके हूबहू शैली में बनी है भारतीय संसद। ) कैसे बना यह चौंसठ योगनियों का मंदिर? लगभग 100 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर गूढ़ रहस्यों का स्थान तो है ही और कमाल की बात यह है कि बहुत ही पवित्र भी। क्योंकि अभी तक यह मंदिर भीड़ भाड़ से बचा हुआ है। इस खास जगह को कच्छप राजा देवपाल द्वारा लगभग 1383 में बनाया गया था। कुछ किंवदंतियों का मानना है की इस मंदिर को 9 वीं शताब्दी में भौम वंश की रानी हीरा देवी ने की थी। जो अभी तक उसी अंदाज में इतिहास की कहानियों को बयां करते हुए खड़ा है। यहां जाने के बाद जब हमने यहां के लोकल लोगों से पूछा तो एक और बात पता चली कि यह मंदिर तंत्र मंत्र विद्या के लिए जाना जाता है। हालांकि आज के समय में यह चौसठ योगनियों के मंदिर वैसे ही बने हैं। जैसे इनका निर्माण हुआ था। चौसठ योगनियों का मंदिर इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इस मंदिर में चौसठ कमरे हैं जो आप आज भी वैसे ही देख सकते हैं।  जैसे निर्माण के वक्त थे। चौसठ कमरे चौसठ योगनियों को समर्पित हैं जो भगवान शिव की आराधना करती थीं। या तप करती थीं। इन चौसठ कमरों के बिलकुल बीच में बना है भगवान शिव का मंदिर। जिसमें लगभग 2 फीट ऊंची शिवलिंग विराजमान है। एक और प्राचीन शिवलिंग बीचों बीच इस मंदिर के चबूतरे पर रखी हुई है। जिसको देखने पर ऐसा लगता है जैसे यह शिवलिंग मंदिर से भी ज्यादा प्राचीन है। सैकड़ों साल से कई भूकंप और आंधियां आईं पर इस चौसठ योगनियों के पवित्र मंदिर की नींव हिला न सकीं। यही खासियत है इतिहास के इस बेजोड़ नमूने की। कहां है और कैसे पहुंचे? यह मंदिर मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में आता है और मुरैना से लगभग 34 किलोमीटर दूर मितावली गांव में स्थित यह मंदिर इतिहास प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपको ग्वालियर या मुरैना से यहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं मात्र 1 घंटा लग सकता है। जैसा कि इतनी ही दूरी ग्वालियर की है तो बिल्कुल इतना ही समय यहां से भी आपको देना पड़ सकता है। ट्रेन के जरिए ग्वालियर एक ऐसा जंक्शन है जहां से देश के किसी भी कोने में आप कहीं भी आ जा सकते हैं। इसके अलावा आप मुरैना से भी यहां पहुंच सकते हैं। मुरैना में भी रेलवे स्टेशन मौजूद है। पर बात आती है मुरैना या ग्वालियर से यहां तक कैसे पहुंचे? तो आप यहां से टैक्सी या ऑटो बुक कर सकते हैं। बस से कैसे पहुंचे? बस से आप मुरैना और ग्वालियर होते हुए यहां पहुंच सकते हैं। मुरैना और ग्वालियर तक आपको कहीं से भी बस मिल जाएगी। लेकिन यहां से आपको टैक्सी या ऑटो ही बुक करना पड़ सकता है। यदि आप अपने ही वाहन से हैं तब तो बात अलग ही है। आप आराम से यहां पहुंच सकते हैं। रास्ता बढ़िया है, गाड़ी सरपट दौड़ती है। आस पास के आकर्षण जब भी आप यहां जाने का प्लान बना रहे हैं तो यहां के कुछ अदभुत स्थान आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल होने चाहिए जिनमें- बटेश्वर धाम वास्तव में जब भी आप ग्वालियर, मुरैना या मितावली के चौसठ योगनियों के मंदिर जाने का सोच रहें हैं, तो बटेश्वर धाम जाना बिल्कुल न भूलें। क्योंकि यह एक ऐसा स्थान है जहां आप जाते ही अपने आपको प्राचीन युग में पाएंगे। 100 मंदिरों का यह गढ़ आज भी अपनी जीवंतता बनाए हुए है। यहां के हर पत्थर में आपको कुछ न कुछ गढ़ा हुआ मिलेगा। इन सैकड़ों मंदिरों में आप देख पाएंगे दिव्य शिवलिंग। इन सैकड़ों छोटे बड़े मंदिरों की अद्भुत कहानी है जो अगली पेशकश में आप पढ़ पाएंगे। शनि मंदिर जब आप ग्वालियर से मितावली या गढ़मुक्तेश्वर जाते हैं तो रस्ते में ही आपको मिलेगा, प्राचीन और दिव्य शनि मंदिर। माना जाता है कि यह मंदिर उल्का पिंड के पत्थर से निर्मित है। इसपर कई मतभेद हैं। जो आप यहां आकर ही सुलझा सकते हैं। गड़ी पढ़ावली यात्रा के दौरान जब आप गढ़मुक्तेशर से मितावली जाते हैं तो रस्ते में ही आप पाएंगे। गड़ी पढ़ावली जहां पर एक प्राचीन किले का दीदार आप कर पाएंगे। जो बेहद खास जगह है इतिहास प्रेमियों के लिए। यहां आकर आप यहां की सुंदरता और ग्रामीण जीवन को समझ पाएंगे। और इतिहास के इन पन्नो को पलटकर इनमें छिपे रहस्य जान पाएंगे। रुकने और खाने पीने का इंतजाम मितावली, गड़ी पढ़ावली या बटेश्वर ये छोटे छोटे गांव व कस्बे हैं। यहां आपको ज्यादा सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाएंगी। इसलिए आप एक दो दिन के सफर पर निकले हैं तो ग्वालियर और मुरैना में आप

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Rishikesh: की यह वही चमत्कारी गुफा है, जिसमें महर्षि वशिष्ठ ने क्या था तप!

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Rishikesh: उत्तराखंड की पावन धरती पर बसे ऋषिकेश से करीब 22–25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित वशिष्ठ गुफा एक ऐसा ध्यान-स्थल है, जहां पहुंचते ही मन अपने आप शांत होने लगता है। गंगा के निर्मल किनारे, ऊंचे देवदार साल के वृक्षों और स्वच्छ हवा के बीच स्थित यह स्थल प्रकृति, आध्यात्मिकता और इतिहास का अनोखा संगम है। यह गुफा महान ऋषि वशिष्ठ की तपस्या भूमि मानी जाती है, जो सप्तर्षियों में से एक और भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र थे। कथाओं के अनुसार, अपने पुत्रों की मृत्यु के बाद जब उन्हें दुख की अनुभूति हुई, तब भगवान राम के मार्गदर्शन में उन्होंने इसी स्थान पर कड़ी तपस्या और ध्यान किया जिससे उन्हें मोक्ष मार्ग का ज्ञान प्राप्त हुआ। आज यह स्थान साधकों, योगियों और आम यात्रियों के लिए आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन का केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति की शांति जीवन का सही अर्थ समझाती है। गुफा का प्राकृतिक वातावरण वशिष्ठ गुफा का वातावरण इतना शांत और ऊर्जावान है कि कोई भी व्यक्ति यहां पहुंचते ही आंतरिक सुकून का अनुभव कर सकता है। गुफा में प्रवेश करते ही हल्की रोशनी, ठंडी हवा और चारों तरफ पसरी शांत ऊर्जा मन को मौन कर देती है। गुफा के भीतर एक छोटा सा कक्ष है, जहां साधु संत और आगंतुक ध्यान करते हैं। अंदर बैठकर कुछ मिनट भी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से मन भार का मुक्त हो जाता है, जैसे बाहरी दुनिया शोर और तनाव से दूर किसी दूसरी ही दुनिया में पहुंच गई हो। कई साधक बताते हैं कि वहां गंगा की लहरों की आवाज़, हवा की सरसराहट और ध्यान का मौन तीनों मिलकर एक दिव्य अनुभव देते हैं जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। यहीं पास में गंगा के किनारे शांत बैठने के लिए पत्थर और छोटी चट्टानें हैं, जहां लोग प्रकृति के साथ पूरी तरह घुल-मिल जाते हैं।(धार्मिक महत्व के कारण इसे ऋषिकेश का “Tapovan of Silence” भी कहा जाता है।) वशिष्ठ गुफा से जुड़ी पौराणिक कहानियां पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि वशिष्ठ और उनकी पत्नी अरुंधति का यह निवास स्थान माना जाता है। जब ऋषि वशिष्ठ ने अपने पुत्रों की मृत्यु का दुख सहा, तब वे जीवन छोड़ने का मन बना चुके थे, लेकिन गंगा माता ने उन्हें समझाया कि मृत्यु समाधान नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और तपस्या ही वास्तविक मुक्ति का मार्ग है। उसी प्रेरणा के तहत उन्होंने इस गुफा में ध्यान शुरू किया और वर्षों की साधना के पश्चात वह गहन आध्यात्मिक शक्ति से समृद्ध हुए। ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान उनके दर्शन इसी गुफा में किए थे और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया था। स्थानीय लोग मानते हैं कि आज भी यह स्थान दिव्य ऊर्जा से भरा है, जहां साधक अपनी आध्यात्मिक यात्रा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा प्राप्त करते हैं। धार्मिक महत्व के कारण इसे ऋषिकेश का “Tapovan of Silence” भी कहा जाता है। कैसे पहुंचे वशिष्ठ गुफा तक? वशिष्ठ गुफा पहुंचना बहुत ही आसान है यह ऋषिकेश बद्रीनाथ हाईवे पर स्थित है और टैक्सी, निजी वाहन या स्थानीय बस से पहुंचा जा सकता है। नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश रेलवे स्टेशन और निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून है। मुख्य सड़क से गुफा तक उतरने के लिए लगभग 200 सीढ़ियां हैं, जिनके दोनों ओर घना जंगल और गंगा का दृश्य मन मोह लेता है। गुफा आमतौर पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक खुली रहती है, दोपहर में कुछ घंटों के लिए साधना के दौरान बंद रहती है। प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। आसपास एक शांत आश्रम है जहां योग ध्यान कक्ष, रहने की साधारण सुविधा और सत्संग भी समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं। पास में स्वच्छ घाट बना हुआ है, जहां लोग डुबकी लगाकर या बस गंगा किनारे बैठकर समय बिताते हैं, जो खुद में एक अनुभव है। ध्यान साधना और गंगा तट पर जीवन बदलने वाला अनुभव जो लोग तनाव, मानसिक दबाव या तेज़ भागदौड़ से थक चुके हैं, उनके लिए वशिष्ठ गुफा मानसिक चिकित्सा जैसा काम करती है। यहां रोज सुबह शाम सामूहिक ध्यान होता है, जिसमें देश-विदेश के साधक शांति और ऊर्जा का अनुभव प्राप्त करने आते हैं। गुफा में ध्यान करना सिर्फ आध्यात्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मन और शरीर की प्रकृति से जुडने का अभ्यास है। गंगा की बहती धारा, पक्षियों की ध्वनि और पहाड़ों की ताज़ा हवा मिलकर ऐसा माहौल बनाती है जहां मन अपने आप मौन हो जाता है। कई यात्रियों ने बताया है कि यहां बिताया गया एक घंटा भी अंदर की सारी नकारात्मकता को साफ कर देता है और व्यक्ति खुद को हल्का व संतुलित महसूस करता है। यहां ध्यान करना जीवन में नए दृष्टिकोण और आत्मविश्वास लाने में अत्यंत सहायक माना गया है। क्यों जाएं और क्या-क्या करें? वशिष्ठ गुफा सिर्फ एक पर्यटन-स्थल नहीं बल्कि वह स्थान है जहां इंसान खुद से मिलने आता है अपने विचारों, अपने प्रश्नों और अपनी शांति से। यहां प्रकृति किसी गुरु की तरह आपको सिखाती है कि मौन ही वास्तव में सबसे बड़ा ज्ञान है। गंगा की आवाज़ के साथ बैठना, कुछ देर आंखें बंद करके सांसों को महसूस करना और यह समझ पाना कि जीवन की असली सुंदरता सरलता में है यही इस यात्रा का सबसे बड़ा उपहार है। यदि आप आध्यात्मिक रूप से जागरूक होना चाहते हैं, मन की थकान दूर करना चाहते हैं, या बस शांति भरा समय बिताना चाहते हैं, तो वशिष्ठ गुफा एक अनिवार्य गंतव्य है। यह यात्रा सिर्फ आंखों के लिए सुंदर दृश्य नहीं देती, बल्कि आत्मा को हल्का, मन को शांत और जीवन को गहराई से समझने की दिशा भी प्रदान करती है। सच में, यहां आकर लौटने वाला हर व्यक्ति कुछ न कुछ बदलकर ही जाता है और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। जाने का सही समय वशिष्ठ गुफा घूमने का सबसे सही समय अक्टूबर से मार्च तक माना जाता है। इन महीनों में ऋषिकेश का मौसम ठंडा, सुखद और यात्रा के लिए अनुकूल रहता है, जिससे गुफा तक पहुंचने और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने में कोई दिक्कत नहीं होती। गर्मियों में भी अप्रैल से जून तक यहां जाया जा सकता है, लेकिन दिन में थोड़ी गर्मी का

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Winter Special Foods: 10 व्यंजन जो ठिठुरन में दिल तक गर्माहट पहुंचाते हैं!

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Winter Special Foods: सर्दियां जैसे-जसे जकड़ती हैं, वैसे-वैसे रसोई का किचन टॉप गरम-गरम कड़ाही की चटक और तवे पर सिकती रोटियों की सुगंध से महकने लगता है। बाहर कोहरा हो या धूप की पतली सी सुनहरी चादर, दिल को सुकून तभी मिलता है जब हाथ में धुआं छोड़ता कटोरा हो और सामने गरमा-गरम सर्दियों के मौसम का कोई लज़ीज़ व्यंजन। भारत में मौसम बदलते ही खानपान बदल जाता है, और जब बात आती है विंटर फूड, तो हर शहर, हर घर, हर रसोई का एक अलग जलवा होता है। यह मौसम सिर्फ खाने का नहीं, बल्कि यादों, मिल बैठने और दिल को तसल्ली देने का मौसम है। सरसों का साग और मक्के की रोटी सर्दियों की रसोई का राजा अगर किसी को कहा जाए, तो वह है सरसों का साग। ताजा सरसों, पालक, बथुआ, अदरक, मिर्च और सफेद मक्खन की खुशबू मिलकर जब तैयार होती है, तो पूरा मोहल्ला महक उठता है। मक्के की रोटी पर सफेदमक्खन की टिकिया रखी जाए, ऊपर से गुड़ और एक कटोरी छाछ तो फिर क्या कहने! पंजाब की सरज़मीं से पूरे देश में दिल जीतने वाला यह कॉम्बिनेशन सर्दियों की शान है। शायद ही कोई ऐसा हो जिसने कड़कड़ाती ठंड में यह डिश खाई हो और आंखें बंद कर वाह क्या स्वाद है! न कहा हो।(यह मौसम सिर्फ खाने का नहीं, बल्कि यादों, मिल बैठने और दिल को तसल्ली देने का मौसम है।) गाजर का हलवा अगर सर्दियां बिना किसी चीज़ के अधूरी लगती हैं, तो वह है गाजर का हलवा। ताज़ी लाल गाजर, देसी घी, दूध और सूखे मेवे की बरसात, बस इतना ही काफी है किसी भी दिन को त्यौहार बना देने के लिए। बड़े-बुज़ुर्गों से लेकर छोटे बच्चे तक, हर किसी का चेहरा चमक जाता है जब कड़ाही में चम्मच घुमते हुए घी की खुशबू उठती है। यह सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि सर्दियों के मौसम का जश्न है जो हर घर में महसूस होता है। Instagram और YouTube पर Winter Special Gajar Ka Halwa Recipe का ट्रेंड चलना कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं, यह प्यार की भाषा है। बाजरे की रोटी और लहसुनी चटनी राजस्थान, हरियाणा और उत्तर भारत में बाजरे की रोटी का अलग ही रुतबा है। सर्दियों में यह शरीर को अनोखी ताकत देती है। जब इसे ताज़े सफेद मक्खन, गुड़ और आग पर भूनी हुई लहसुनी लाल चटनी के साथ खाया जाए, तो भोजन किसी दावत में बदल जाता है। देसी चूल्हे पर बनी बाजरे की खुशबू और हाथ से तोड़ी रोटी का स्वाद, यह आधुनिक किचन कभी भी नहीं दे सकते। गांवों में कहा जाता है, बाजरे की रोटी और सर्दी की रात दिल और पेट दोनों को राहत देती है। गुजराती उंधियू गुजरात की सर्दियों की पहचान उंधियू। यह वह डिश है जिसे बनाने में जितना समय और मेहनत लगती है, उतना ही प्यार उसमें घुल जाता है। ताज़ी सब्जियां, मेथी के मुठिया, तिल, नारियल और मसालों का कमाल। यह ऐसा स्वाद पैदा करता है जो सिर्फ खाने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए होता है। चाहे Kite Festival हो या रविवार का पारिवारिक खाना, उंधियू के बिना सर्दियां अधूरी हैं। सिनी, राबड़ी और दाल बाटी चूरमा राजस्थान की सर्दियों की थाली का यह तिकड़ी दिल जीत लेती है। दाल बाटी चूरमा का नाम सुनते ही देसी घी की खुशबू महसूस होने लगती है। सर्दियों में चल रही तेज़ हवाओं को मात देने का इससे बेहतर तरीका क्या होगा? बाटी को घी में डुबोकर खाना और ऊपर से मीठे चूरमे का एक कौर, यह स्वाद लत बन जाता है। साथ में सिनी और गरम रबड़ी यह भोज नहीं, उत्सव है। पाय़ा सूप जबड़ों से लेकर हड्डियों तक में ठंड उतर जाए, तब सबसे बड़ा राहत देने वाला है पाय़ा सूप। यह बेहद ताक़त देने वाला भोजन है, जिसे धीमी आंच पर घंटों पकाया जाता है। इसमें अदरक, काली मिर्च और मसालों का कमाल ऐसा जादू करता है कि शरीर पूरी तरह गर्माहट से भर जाता है। करोड़ों लोग इसे सर्दियों में एडिक्शन की तरह पीते हैं। कश्मीरी हाक और नादरू कश्मीर की रसोई का अनमोल तोहफ़ा हाक साग और नादरू (कमल ककड़ी), जिनका सादापन ही इनकी खूबसूरती है। जैसे बर्फ़ीली वादियां दिल को शांत करती हैं, वैसे ही यह व्यंजन शरीर को तसल्ली देता है। सर्दियों में यह आम लोगों से लेकर शाही रसोई तक की पहचान है। इसमें मौजूद प्राकृतिक ताकत उत्तर भारत की ठंड में कवच की तरह काम करती है। मूंगफली, रेवड़ी और तिल के लड्डू सर्दियों का मौसम और तिल-गुड़ का जादू, यह परंपरा सदियों से जारी है। Makar Sankranti, Lohri, Pongal जैसे त्यौहार का यह मुख्य हिस्सा हैं। गुड़ और तिल शरीर को गर्म रखते हैं और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत हैं। चूल्हे के पास बैठकर मूंगफली तोड़ने और गर्म रेवड़ी खाने का जो मज़ा है, वह किसी 5-star bakery में भी नहीं मिलता। मूली का परांठा उत्तर भारत की सुबहें अधूरी हैं अगर तवे पर सिकता मूली पराठा न मिले। खासकर जब वह भराई में हरी मिर्च, धनिया, मसाला और ऊपर से सफ़ेद मक्खन लिए हो। इसे गर्मागर्म दही, चाय या मिर्ची का अचार के साथ खाने का आनंद, यह हर घर की परंपरा है। Murthal के परांठों का जो क्रेज़ है, वह इसी स्वाद का विस्तार है। लिट्टी-चोखा बिहार की शान लिट्टी-चोखा। सर्दियों में गर्म तंदूर से निकली लिट्टी, घी से चमकती हुई प्लेट पर आती है, और सर्द महीनों में यह स्ट्रीट फूड का चैंपियन बन जाती है। बैंगन, टमाटर और आलू का धुआंधार फ्लेवर वाला चोखा, यह स्वाद एक बार याद हो जाए तो ज़िंदगी भर पीछा नहीं छोड़ता। दिल्ली से पटना तक, यह व्यंजन विंटर फ़ूड ट्रेंड में हमेशा टॉप पर रहता है। सर्दियों और भोजन का रिश्ता सर्दियां सिर्फ मौसम नहीं, यह एक अनुभव है। यह वो महीना है जब खाना सिर्फ शरीर को गर्म नहीं करता, यह रिश्तों को जोड़ता है, यादों को वापस लाता है और मन को सुकून देता है। सागर से पहाड़ तक, शहर से गांव तक, भारत की रसोई सर्दियों में रंगों, खुशबुओं और स्वादों का अद्भुत संगीत बन जाती है। यह मौसम हमें बताता है कि गर्माहट ही असली सुख है। चाहे वह रजाई की हो, आग की हो,

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क्यों सबकी डिमांड है Rolex घड़ी? आखिर क्या है वजह?

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दुनिया में अगर किसी घड़ी का नाम सबसे ज़्यादा इज़्ज़त और शोहरत के साथ लिया जाता है, तो वह है Rolex घड़ी। आज हालात ऐसे हैं कि लोग सिर्फ टाइम देखने के लिए घड़ी नहीं पहनते, बल्कि एक पहचान और स्टेटस सिंबल दिखाने के लिए Rolex खरीदते हैं। जहां फोन में डिजिटल समय मिल जाता है, वहीं Rolex Watch अपनी क्लास, क्राफ्ट्समैनशिप और रॉयल एटिट्यूड के लिए पहनी जाती है। आज बॉलीवुड स्टार, करोड़ों के बिजनेसमैन, क्रिकेटर, और हाई-प्रोफाइल लोग Rolex को सिर्फ एक एक्सेसरी नहीं, बल्कि Luxury Lifestyle का हिस्सा मानते हैं। यही वजह है कि बाजार में Rolex Watch Price in India लेकर कई लोग चर्चा और खोज करते रहते हैं। Rolex इतनी महंगी क्यों होती है? Rolex सिर्फ एक ब्रांड नहीं, इंजीनियरिंग की एक इज़्ज़तदार मिसाल है। Rolex की हर घड़ी Pure Swiss Handcrafted Technology से बनती है और इसमें 904L Oystersteel, 18K Gold, Ceramic Bezel, Sapphire Crystal Glass जैसे महंगे मटेरियल इस्तेमाल किए जाते हैं। हर पीस को बनाने में महीनों लग जाते हैं और हर घड़ी कई टेस्ट से गुजरकर निकलती है। वाटरप्रूफ, डस्टप्रूफ, प्रेसर टेस्ट, वाइब्रेशन टेस्ट और प्रिसिशन टेस्ट। इसलिए Why Rolex is so expensive का जवाब बहुत सीधा है। टॉप क्वालिटी, लिमिटेड प्रोडक्शन और कभी भी कम्प्रोमाइज न करने की फिलोसफी। यही कारण है कि इसे घड़ी नहीं, Engineering Masterpiece कहा जाता है।(वजह है कि बाजार में Rolex Watch Price in India लेकर कई लोग चर्चा और खोज करते रहते हैं।) Rolex: शोहरत और रुतबा Rolex पहनने का मतलब सिर्फ एक घड़ी पहनना नहीं—यह एक मैसेज देना है कि आपने अपनी जिंदगी में मुकाम पाया है। यही वजह है कि लोग Rolex को Status Symbol Watch कहते हैं। कई लोगों के लिए यह फर्स्ट अचीवमेंट गिफ्ट होता है, किसी के लिए Success Trophy। खास बात यह है कि Rolex का रिसेल वैल्यू भी बहुत तगड़ा होता है, यानी समय के साथ उसकी कीमत बढ़ भी सकती है। लोग Rolex Investment Value के नाम पर भी इसे खरीदते हैं। कई मॉडल जैसे Rolex Submariner, Rolex Daytona, Rolex GMT Master II दुनिया भर में कलेक्टर्स की पहली पसंद हैं और कई बार इनके लिए लंबी वेटिंग लिस्ट लगती है। Rolex की बढ़ती डिमांड की असली वजह आज की पीढ़ी दिखावे से ज़्यादा क्लास और ब्रांड वैल्यू को समझने लगी है। सोशल मीडिया पर इनफ्लुएंसर, क्रिकेट स्टार, बिजनेस आइकॉन, और फिल्म स्टार Rolex को अपने स्टाइल का हिस्सा बनाकर और भी वायरल कर देते हैं। साथ ही, मार्केट में Rolex Original vs Fake का ट्रेंड भी चलता है, क्योंकि हर कोई असली खरीदने की हैसियत नहीं रखता। फिर भी, असली Rolex की पहचान दूर से चमक जाती है—क्वालिटी, फिनिश और डिज़ाइन खुद अपने आप में एक पुख्ता सबूत है। यही वजह है कि आज के समय में Rolex Watch Demand दुनिया भर में सबसे ज्यादा है। Rolex सिर्फ घड़ी नहीं, समय, सक्सेज और रिस्पेक्ट का प्रतीक है। अगर आप इसे पहनते हैं, तो दुनिया समझ जाती है कि आप मेहनत और सफलता की मिसाल हैं। इसी शान की वजह से इसकी चाहत हर किसी के दिल में बसती है चाहे खरीद पाएं या सिर्फ सपना देख लें।

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Winter Travel Tips: ठंड के मौसम में घूमने के सबसे काम के ट्रैवल टिप्स

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Winter Travel Tips: सर्दियां अपने साथ एक अलग ही रोमांच लेकर आती हैं। धुंध से ढकी पहाड़ियां, आग के पास बैठकर चाय की चुस्कियां, बर्फ़ीले नज़ारे और दूर-दूर तक फैलती ठंड की ताज़गी। लेकिन इस मौसम में ट्रैवल करते वक्त कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है, ताकि सफ़र आरामदायक, सुरक्षित और मजेदार बने। गर्म कपड़ों की जरूरत सर्दियों में सबसे पहली जरूरत होती है सही और गर्म कपड़ों की। पहाड़ी इलाकों में तापमान अचानक गिर जाता है, इसलिए लेयरिंग का तरीका सबसे बेहतर रहता है एक टी-शर्ट, उसके ऊपर स्वेटर, और फिर जैकेट। इससे तापमान बढ़े या घटे, आप अपने कपड़ों को एडजस्ट कर सकते हैं। साथ ही ग्लव्स, मफलर, टोपी और थर्मल वियर ज़रूर रखें। ठंडी हवा का सबसे तेज़ असर इसी पर होता है, इसलिए शरीर का तापमान संतुलित रखना बेहद जरूरी है। जूते भी मजबूत और वॉटर-रेसिस्टेंट होने चाहिए, क्योंकि कई जगह बर्फ जमने से पैरों में नमी और ठंड दोनों बढ़ जाती हैं। हाइड्रेटेड रहना ज़रूरी है सर्दियों के मौसम में ट्रैवल करते समय पानी पीना लोग अक्सर भूल जाते हैं, और यही गलती शरीर में डिहाइड्रेशन का कारण बनती है। ठंडी हवा में शरीर को पानी की जरूरत कम महसूस होती है, लेकिन वास्तव में उतनी ही ज़रूरत रहती है जितनी गर्मियों में होती है। हमेशा अपने साथ एक पानी की बोतल रखें और थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ घूंट पीते रहें। साथ ही, अगर आप पहाड़ी इलाकों में हैं, तो गर्म पेय जैसे ग्रीन टी, सूप या हर्बल चाय शरीर को गर्म रखने में काफी मदद करते हैं। शराब ठंड में शरीर को गर्म महसूस कराती है, लेकिन असल में तापमान कम कर देती है, इसलिए इसे सीमित रखें।(क्योंकि कई जगह बर्फ जमने से पैरों में नमी और ठंड दोनों बढ़ जाती हैं।) मौसम जरूर चेक करें सर्दियों में सफ़र के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए मौसम की जानकारी पर। कई जगह बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हो जाते हैं या ट्रैफिक रुक जाता है। इसलिए निकलने से पहले मौसम की रिपोर्ट जरूर चेक करें। अगर आप ट्रेन या फ्लाइट से यात्रा कर रहे हैं, तो समय पर अपडेट लेते रहें, क्योंकि विंटर सीजन में देरी आम बात है। ठंड के दिनों में जल्दी सुबह या देर रात की यात्रा से बचें, क्योंकि इस दौरान धुंध सबसे ज्यादा होती है और विज़िबिलिटी काफी कम हो जाती है। गाड़ी से सफर करते वक्त फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करें और स्पीड कम रखें। खाने-पीने का ठीक से ध्यान रखें सर्दियों में खाने-पीने का भी खास ख्याल रखना चाहिए। यात्रा के दौरान हल्का, गर्म और आसानी से पचने वाला खाना ही खाएं। स्ट्रीट फूड का मजा तो बहुत होता है, लेकिन ठंड में कई बार यह पेट पर भारी पड़ जाता है। अपने साथ ड्राई फ्रूट्स, खजूर, गुड़ और एनर्जी बार जरूर रखें, ताकि ठंड में शरीर को तुरंत ऊर्जा मिल सके। इससे थकान भी कम होती है और शरीर गर्म भी रहता है। अगर आप पहाड़ों में हैं, तो वहां के स्थानीय गर्म व्यंजन जैसे सूप, थुक्पा या बांस के सूप जैसी चीजें बहुत मददगार होती हैं। पॉवर बेंक साथ रखें सर्दियों की ट्रिप की असली मज़ा तभी है जब आपकी तस्वीरें शानदार आएं। लेकिन मोबाइल की बैटरी ठंड में जल्दी खत्म होती है। इसलिए हमेशा पावर बैंक साथ रखें और फोन को जेब के अंदर गर्म जगह पर रखें। कैमरा इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसकी बैटरी भी दो रखें। साथ ही, स्किन केयर का भी ध्यान रखें। ठंडी हवा में त्वचा जल्दी सूख जाती है। मॉइश्चराइज़र, लिप बाम और सनस्क्रीन जरूर रखें, क्योंकि पहाड़ों पर सूरज की किरणें ज्यादा असर करती हैं। सर्दियों का सफर एक रोमांचक अनुभव हो सकता है बशर्ते उसकी तैयारी पूरी हो। सही कपड़े, सही खाना, मौसम की जानकारी, और सुरक्षा। ये चार बातें ध्यान में रखेंगे तो आपकी हर विंटर ट्रिप शानदार बन जाएगी। ठंड का मौसम खूबसूरती से भरा होता है। चाहे शिमला की बर्फ हो, मनाली की पहाड़ियां, कश्मीर की वादियां या उत्तराखंड के शांत गांव। बस थोड़ी समझदारी और थोड़ी तैयारी, और आपकी सर्दियों की यात्रा बन जाएगी एक यादगार कहानी।

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Taste of Karnataka: देसी ज़ायके का मिलन, कर्नाटक की परंपरा के पांच बेजोड़ स्वाद!

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Taste of Karnataka: बिसी बेले भात Taste of Karnataka: का नाम आते ही जो पहला खाना दिल में उतरता है, वो है बिसी बेले भात एक ऐसा फूड है जो चावल, दाल, सब्ज़ियां और देसी मसालों का परफेक्ट मेल है। इसका मतलब ही होता है गरम दाल-चावल, लेकिन इसका स्वाद इतना गहरा होता है कि इसे सिर्फ़ चावल-दाल कहना इसकी तौहीन होगी। इस पकवान की सबसे बड़ी खूबी है होममेड मसाला पाउडर, जिसमें दालचीनी, लौंघ, सूखी मिर्च, धनिया और कर्नाटक का फेमस कूटा हुआ नारियल शामिल होता है। यह डिश साउथ इंडिया का Best Comfort Food भी मानी जाती है। तड़के में देसी घी, करी पत्ता और मूंगफली का क्रंच इसे Royal Touch दे देते हैं। कर्नाटक के घरों में यह सिर्फ़ खाना नहीं, बल्कि एक इमोशन है त्यौहारों से लेकर रोज़मर्रा की थाली तक इसका जलवा कायम है। बेंगलुरु की सड़कों से लेकर मैसूर के फूड कोर्ट तक, बिसी बेले बाथ आज भी सबसे ज़्यादा बिकने वाला Local Favourite है। लोग इसे दुनिया भर में Healthy One Pot Meal कहकर आज़मा रहे हैं। रागी मुड्डे कर्नाटक का असली देसी स्वाद अगर किसी में छुपा है, तो वह है रागी मुड्डे जो फिंगर मिलेट के आटे से बनाया जाता है। इसे पकाकर गोल, मुलायम लेकिन सॉलिड बॉल की तरह बनाया जाता है और खाने में इसे काटा नहीं जाता, बल्कि उंगलियों से तोड़कर सीधे सूप, सांभर या मटन खलसा में डुबोकर खाया जाता है। यह खाना जितना सिंपल दिखता है, उतना ही पौष्टिक होता है। रागी को Superfood of India और High Fiber Diet जैसे गुणों की वजह से दुनिया भर में पहचान मिली है। ग्रामीण कर्नाटक की लाइफ स्टाइल में रागी मुड्डे की अहमियत उतनी ही है जितनी उत्तर भारत में रोटी की।(बेंगलुरु की सड़कों से लेकर मैसूर के फूड कोर्ट तक, बिसी बेले बाथ आज भी सबसे ज़्यादा बिकने वाला Local Favourite है।) वैसे माना जाता है कि रागी ताकत देती है और दिनभर खेत में जोश बनाए रखती है। इसमें में कैल्शियम, आयरन और मिनरल्स इतने भरपूर होते हैं कि यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक के लिए परफेक्ट खाना माना जाता है। सरकारी डाइट प्रोग्राम्स में भी इसे शामिल किया जाता है। आज बेंगलुरु और मैसूर के कई मॉडर्न रेस्टोरेंट भी अपने मेन्यू में Ragi Mudde Thali शामिल कर रहे हैं, क्योंकि यह अब Healthy Diet Trend, Vegan Food Choice, और Gluten-Free Meal की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रहा है। सच में बात यही है की यदि आपने इसका स्वाद नहीं लिया तो फिर क्या ही खाया! मैसूर मसाला डोसा अगर कर्नाटक की किसी डिश ने दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ी है, तो वह है मैसूर मसाला डोसा। बाहर से कुरकुरा, अंदर से सॉफ्ट, ऊपर से लगा स्पेशल लाल चटनी पेस्ट और साथ में मसालेदार आलू ये डोसा किसी व्यक्ति की ड्रीम डिश से कम नहीं है। मैसूर शहर की पहचान समझे जाने वाले इस डोसे का मज़ा तब दोगुना हो जाता है जब इसे नारियल चटनी और हल्के मीठे उडुपी सांभर के साथ परोसा जाता है। इस डोसे का खास लाल चटनी पेस्ट सुखी लाल मिर्च, लहसुन, प्याज़ और थोड़ा गुड़ मिलाकर बनाया जाता है जो इसे दूसरे डोसों से बिल्कुल अलग बनाता है। यही खासियत है की इसे खाने वाले खूब पसंद करते हैं।   मैंगलोर बन्स मैंगलोर और उडुपी क्षेत्र से आने वाला मैंगलोर बन्स अपने नाम जितना प्यारा, स्वाद में उससे भी ज़्यादा कमाल का होता है। यह साधारण पूरी जैसा दिखता है, लेकिन असल में यह पका हुआ केला, दही, चीनी और मैदा मिलाकर बनाया गया मीठा, मुलायम और स्पंजी ब्रेड-स्टाइल बन होता है। इसे आमतौर पर गरम गरम परोसा जाता है, और साथ में नारियल चटनी इसकी जोड़ी को Perfect बनाती है। आज बेंगलुरु के मॉडर्न कैफ़े भी इसे Coffee के साथ इसे सर्व करते हैं। इसकी सबसे मजेदार बात यह है कि यह कम सामग्री में, जल्दी बनने वाला और बहुत लंबे समय तक Soft रहने वाला स्नैक है। इसलिए इसे घरों में भी खूब बनाया जाता है। बाहर से हल्का कुरकुरा, अंदर से रुई जैसा मुलायम मैंगलोर बन्स खाने के बाद कोई भी इसे सिर्फ़ एक बार नहीं खा पाता। उडुपी सांभर और चटनी उडुपी की रसोई का नाम लेते ही सबसे पहले जिस स्वाद की याद आती है, वह है इसका मशहूर उडुपी सांभर और चटनी। यह सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि कर्नाटक की परंपरा, श्रद्धा और देसी स्वाद का ऐसा संगम है, जो हर खाने वाले के दिल में बस जाता है। उडुपी सांभर की खासियत है इसके मसालों का बैलेंस न ज़्यादा तीखा, न ज़्यादा मीठा, बस एकदम नफ़ीस और हल्का-सा कोकोनट फ्लेवर वाला स्वाद। इसमें इस्तेमाल होने वाले ताज़े मसाले, इमली की खटास और सब्ज़ियों की खुशबू इसे रोज़मर्रा के खाने का सितारा बना देती है। उडुपी की चटनी भी उतनी ही खास है। नारियल, हरी मिर्च, भुनी दाल, करी पत्ता और हल्की-सी हिरवाई इसकी पहचान है। इसे खाते ही एक ताज़गी और मिट्टी की खुशबू का एहसास होता है, जो उडुपी की पहचान बन चुका है। चाहे डोसा हो, इडली हो या वड़ा उडुपी की ये चटनी हर डिश का स्वाद दुगुना कर देती है। जो लोग सादगी में स्वाद तलाशते हैं, उनके लिए उडुपी सांभर और चटनी एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन है।