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Hazrat Nizamuddin Dargah: कैसे जाएं, क्या देखें और क्या खाएं

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दिल्ली को अगर सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतों, बाजारों और भीड़ के लिए जाना जाए तो इसकी असली तस्वीर अधूरी रह जाएगी। इस शहर की अलग पहचान पुरानी गलियों, दरगाहों, खान-पान और सदियों पुरानी मिली-जुली संस्कृति से भी बनती है। इन्हीं जगहों में एक नाम है हज़रत निज़ामुद्दीन Dargah। दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके में मौजूद यह जगह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, रूहानियत, संगीत और खाने का ऐसा अनुभव देती है जिसे एक बार महसूस करने के बाद लंबे समय तक याद रखा जा सकता है। अगर आपने अब तक Dargah की तंग गलियों में घूमते हुए वहां की खुशबू महसूस नहीं की, शाम की कव्वाली नहीं सुनी और निज़ामुद्दीन बस्ती के मशहूर कबाब या निहारी का स्वाद नहीं लिया, तो दिल्ली के इस खास रंग से आपकी मुलाकात अभी बाकी है। Dargah में आने वाले लोगों में हर तरह के लोग दिखाई देते हैं। कोई दुआ मांगने आता है, कोई इतिहास देखने, कोई कव्वाली सुनने और कोई इस पूरे माहौल को करीब से महसूस करने। हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को समर्पित यह Dargah चिश्ती सिलसिले से जुड़ी हुई है और सदियों से लोगों के लिए आस्था और सुकून की जगह बनी हुई है। यहां की पुरानी वास्तुकला, मेहराबें, जालियां और आसपास की गलियां आपको दिल्ली के पुराने दौर की याद दिलाती हैं। Dargah रोज सुबह 5 बजे से रात 10:30 बजे तक खुली रहती है। यहां प्रवेश निःशुल्क है और सभी धर्मों के लोग आ सकते हैं। गुरुवार की शाम को मग़रिब की नमाज के बाद कव्वाली की महफिल सजती है। हज़रत निज़ामुद्दीन Dargah का इतिहास हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध सूफी संतों में से एक माने जाते हैं। उनका जीवन 13वीं और 14वीं शताब्दी के दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1325 ईस्वी में उनके इंतकाल के बाद यहां उनकी याद में Dargah बनाई गई। समय के साथ यह जगह दिल्ली की महत्वपूर्ण सूफी विरासत का हिस्सा बन गई। आज जब आप Dargah परिसर में पहुंचते हैं तो वहां की वास्तुकला अपने आप ध्यान खींचती है। संगमरमर का काम, खूबसूरत मेहराबें और जालीदार नक्काशी इसे एक अलग पहचान देते हैं। लेकिन इस जगह की खासियत सिर्फ इसकी इमारत नहीं है। इसके आसपास मौजूद कई ऐतिहासिक मज़ारें भी इस जगह को खास बनाती हैं। Dargah परिसर में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के सबसे करीबी शिष्यों में से एक अमीर खुसरो की मज़ार भी है। अमीर खुसरो का नाम भारतीय कविता, संगीत और सूफी परंपरा की दुनिया में बेहद खास है। मुगल राजकुमारी जहांआरा बेगम की मज़ार भी Dargah परिसर में स्थित है। मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की मज़ार निज़ामुद्दीन इलाके में पास ही स्थित है, लेकिन वह मुख्य Dargah परिसर के अंदर नहीं है। यही वजह है कि Dargah का माहौल बाकी ऐतिहासिक जगहों से थोड़ा अलग महसूस होता है। यहां इतिहास सिर्फ दीवारों पर दिखाई नहीं देता, बल्कि कव्वाली, दुआ और लोगों की आस्था में भी नजर आता है। अमीर खुसरो और Dargah का रिश्ता अमीर खुसरो का नाम हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के साथ बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है। वह सूफी संत के प्रिय शिष्य माने जाते हैं। उनका जन्म 1253 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के पटियाली में हुआ था। उन्हें तूतिए-हिंद भी कहा जाता है। अमीर खुसरो को कविता, भाषा और संगीत की दुनिया में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। कव्वाली की परंपरा से भी उनका नाम गहराई से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि जब अमीर खुसरो कम उम्र के थे, तब वे अपने पिता के साथ हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की खानकाह पहुंचे थे। यहीं से दोनों के बीच एक गहरा रूहानी रिश्ता जुड़ा। आज भी Dargah में अमीर खुसरो की मज़ार पर आने वाले लोग उस पुराने रिश्ते को महसूस करने की कोशिश करते हैं। गुरुवार की कव्वाली में जब अमीर खुसरो की रचनाएं और सूफी कलाम गूंजते हैं, तो Dargah का माहौल और भी खास हो जाता है। Dargah जाने का सही समय वैसे तो Dargah साल भर जाया जा सकता है, लेकिन अगर आप आराम से घूमना चाहते हैं तो मौसम का ध्यान रखना जरूरी है। दिल्ली की गर्मी काफी तेज होती है और मई-जून में तापमान बहुत अधिक हो सकता है। ऐसे में पुरानी गलियों में घूमना और काफी देर तक बाहर रहना थका सकता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय Dargah घूमने के लिए काफी अच्छा माना जा सकता है। इन महीनों में दिल्ली का मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। जनवरी में तापमान काफी नीचे जा सकता है, इसलिए अगर सर्दियों में जा रहे हैं तो हल्के गर्म कपड़े साथ रखना बेहतर रहेगा। अगर आपका मकसद कव्वाली सुनना है तो गुरुवार की शाम को Dargah जाना एक अलग अनुभव देता है। कव्वाली आमतौर पर मग़रिब की नमाज के बाद शुरू होती है और समय मौसम तथा भीड़ के अनुसार बदल सकता है। गुरुवार की शाम Dargah में भीड़ अधिक रहती है। इसलिए अगर आप कव्वाली के लिए जा रहे हैं तो समय से पहले पहुंचना बेहतर रहेगा। उर्स के दौरान Dargah का माहौल उर्स के दौरान Dargah की रौनक और भी बढ़ जाती है। हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का उर्स इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। सूफी परंपरा में उर्स को संत की आत्मा के खुदा से मिलन के रूप में देखा जाता है। इस मौके पर Dargah में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कव्वाली की महफिलें, लंगर और चादर चढ़ाने की परंपरा इस अवसर को खास बनाती हैं। आसपास की गलियों में भी रौनक बढ़ जाती है। हालांकि उर्स के दिनों में भीड़ काफी ज्यादा हो सकती है। अगर आप शांति से Dargah देखना चाहते हैं तो सामान्य दिन चुनना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। उर्स के समय परिवार के साथ जा रहे हों तो बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। भीड़ में एक-दूसरे से अलग न हों और अपने सामान को संभालकर रखें। Dargah तक कैसे पहुंचें? दिल्ली में होने की वजह से Dargah तक पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं है। मेट्रो, बस, ऑटो और कैब जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। मेट्रो से आने वालों के लिए हज़रत निज़ामुद्दीन मेट्रो स्टेशन प्रमुख विकल्प है। यह पिंक लाइन पर स्थित है। जेएलएन स्टेडियम मेट्रो स्टेशन भी एक विकल्प है, लेकिन वहां से Dargah तक

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Kala Patthar क्यों है Everest देखने की सबसे खास जगह?

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नेपाल का नाम आते ही अगर आपके दिमाग में ऊंचे पहाड़, बर्फ से ढकी चोटियां और रोमांच से भरी ट्रेकिंग आती है, तो इसमें कोई हैरानी नहीं है। हिमालय की खूबसूरती देखने के लिए हर साल दुनिया भर से लोग नेपाल पहुंचते हैं। इनमें से बहुत से लोगों का सपना माउंट एवरेस्ट को करीब से देखने का होता है। इसी वजह से एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक दुनिया के सबसे मशहूर ट्रेक में गिना जाता है। लेकिन यहां एक ऐसी बात है जो बहुत से लोगों को पहली बार वहां पहुंचने के बाद पता चलती है। एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने के बाद भी माउंट एवरेस्ट की मुख्य चोटी साफ दिखाई नहीं देती। सामने नुप्त्से की विशाल पश्चिमी दीवार और ल्होत्से का दक्षिणी हिस्सा खड़ा रहता है, जिसकी वजह से एवरेस्ट का असली शिखर नजरों से छिप जाता है। यही वजह है कि एवरेस्ट का पूरा और शानदार नजारा देखने के लिए ट्रेकर्स Kala Patthar की तरफ जाते हैं। यह जगह कोई अलग पर्वत नहीं है, बल्कि पुमोरी पर्वत के दक्षिणी हिस्से में बनी एक ऊंची पथरीली कगार है। अपनी खास जगह और ऊंचाई की वजह से Kala Patthar खुम्बु घाटी के सबसे बेहतरीन नजारा दिखाने वाले स्थानों में शामिल है। यहां से माउंट एवरेस्ट के साथ नुप्त्से, ल्होत्से और पुमोरी जैसी विशाल चोटियां भी दिखाई देती हैं। खासकर जब सूरज की रोशनी एवरेस्ट की चोटी पर पड़ती है, तब यहां खड़े होकर पहाड़ों को देखना ऐसा अनुभव बन जाता है जिसे लंबे समय तक भुलाना मुश्किल होता है। अगर आप भी नेपाल में एवरेस्ट क्षेत्र की ट्रेकिंग का सपना देख रहे हैं, तो Kala Patthar को अपनी यात्रा में शामिल करने से पहले इसके रास्ते, ऊंचाई, मौसम और जरूरी सावधानियों को समझना बहुत जरूरी है। Kala Patthar की ऊंचाई कितनी है? Kala Patthar की ऊंचाई को लेकर अक्सर थोड़ा भ्रम देखने को मिलता है। इसके निचले हिस्से की ऊंचाई करीब 5,545 मीटर यानी लगभग 18,192 फीट मानी जाती है। यही वह हिस्सा है जहां बहुत से ट्रेकर्स रुककर तस्वीरें और वीडियो बनाते हैं। वहीं इसकी ऊपरी रिज का सबसे ऊंचा हिस्सा करीब 5,644 मीटर यानी लगभग 18,519 फीट तक जाता है। यानी नीचे वाले हिस्से की तुलना में करीब 100 मीटर और ऊंचाई। अगर इसकी तुलना एवरेस्ट बेस कैंप से करें, तो बेस कैंप करीब 5,364 मीटर की ऊंचाई पर है। इस हिसाब से Kala Patthar का लोकप्रिय व्यू पॉइंट बेस कैंप से करीब 180 मीटर ज्यादा ऊंचाई पर है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं है। यहां हवा का दबाव समुद्र तल की तुलना में काफी कम हो जाता है। इसका सीधा असर सांस लेने पर पड़ता है। मैदानों में जिस तरह आसानी से सांस आती है, यहां वैसा महसूस नहीं होता। इसी वजह से Kala Patthar की छोटी दूरी भी ट्रेकर्स को काफी मुश्किल लग सकती है। यह इलाका सागरमाथा नेशनल पार्क के अंदर खुम्बु क्षेत्र में स्थित है। आसपास काले रंग की चट्टानें और बड़े-बड़े पत्थर दिखाई देते हैं। इसी वजह से इस जगह का नाम Kala Patthar पड़ा। गोरक शेप से शुरू होती है असली चढ़ाई Kala Patthar की चढ़ाई का मुख्य रास्ता गोरक शेप से शुरू होता है। गोरक शेप करीब 5,164 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह खुम्बु घाटी का आखिरी ऐसा पड़ाव है, जहां यात्रियों को ठहरने के लिए लॉज और चायघर मिलते हैं। गोरक शेप से Kala Patthar के शिखर तक एक तरफ की दूरी करीब 1.5 किलोमीटर है। मैदानी इलाके में 1.5 किलोमीटर की दूरी कोई बड़ी बात नहीं लगती। लेकिन यहां कहानी बिल्कुल अलग है। इतनी ऊंचाई पर शरीर बहुत धीरे काम करता है और सांस जल्दी फूलती है। इसी वजह से इस छोटी सी दूरी को पूरा करने में करीब 2 से 3 घंटे तक लग सकते हैं। नीचे लौटने में करीब 45 मिनट से एक घंटे तक का समय लग सकता है। रास्ते को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में समझा जा सकता है। पहला हिस्सा गोरक शेप से निकलने के बाद पुराने सूखे तालाब के तल से होकर जाता है। यहां जमीन अपेक्षाकृत समतल है और पास में एक छोटा हेलिपैड भी है। इसके बाद चढ़ाई का मुश्किल हिस्सा शुरू होता है। मिट्टी और बजरी वाले रास्ते पर टेढ़े-मेढ़े मोड़ों से ऊपर जाना पड़ता है। यह हिस्सा काफी खड़ी ढलान वाला है और यहीं ज्यादातर ट्रेकर्स की सांस सबसे ज्यादा फूलती है। आखिरी हिस्से में बड़े-बड़े काले पत्थर और चट्टानें मिलती हैं। यहां सामान्य रास्ते की जगह पत्थरों के बीच से आगे बढ़ना पड़ता है। कई जगह संतुलन बनाने के लिए हाथों का सहारा भी लेना पड़ सकता है। आखिर में प्रार्थना झंडों से सजा ऊपरी हिस्सा दिखाई देता है और वहीं पहुंचकर Kala Patthar का शानदार नजारा सामने आता है। Kala Patthar पर सुबह जाएं या शाम को? यह सवाल लगभग हर ट्रेकर के मन में रहता है कि Kala Patthar पर सूर्योदय देखना बेहतर है या सूर्यास्त। सुबह का समय सबसे लोकप्रिय है। सूर्योदय देखने के लिए आमतौर पर तड़के करीब 3:30 से 4 बजे के बीच गोरक शेप से निकलना पड़ता है। उस वक्त अंधेरा होता है और तापमान काफी नीचे जा सकता है। ठंड इतनी ज्यादा हो सकती है कि मोबाइल और कैमरे की बैटरी भी तेजी से खत्म होने लगती है। लेकिन सुबह जाने का एक बड़ा फायदा मौसम है। दोपहर के बाद पहाड़ों पर बादल आने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि सुबह आसमान ज्यादा साफ मिलने की उम्मीद रहती है। नीचे लौटते समय दिन का उजाला भी मिल जाता है, इसलिए रास्ता देखना आसान रहता है। दूसरी तरफ शाम का समय फोटोग्राफी के लिए बेहद खास हो सकता है। सूर्यास्त के वक्त सूरज की आखिरी किरणें एवरेस्ट की चोटी पर पड़ती हैं। सफेद बर्फ धीरे-धीरे सुनहरी, नारंगी और गुलाबी रंग में बदलती दिखाई दे सकती है। इसी खूबसूरत रोशनी को अल्पनग्लो कहा जाता है। शाम को भीड़ सुबह की तुलना में कम हो सकती है और माहौल ज्यादा शांत मिल सकता है। लेकिन इसका नुकसान यह है कि दोपहर बाद बादल आ सकते हैं। साथ ही वापसी अंधेरे में करनी पड़ सकती है, इसलिए हेडलैंप जरूरी हो जाता है। इसलिए Kala Patthar के लिए समय चुनते वक्त

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दुनिया के 7 Hidden Mountains, जिनकी पूजा होती है

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दुनिया में ऐसे कई Mountains हैं जिन्हें लोग केवल ऊंची चोटियों या खूबसूरत प्राकृतिक जगहों के रूप में नहीं देखते। कुछ Mountains ऐसे भी हैं, जिनसे लोगों की धार्मिक आस्था, पुरानी कथाएं और सदियों पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इन जगहों पर जाने वाले लोग केवल घूमने नहीं जाते, बल्कि किसी खास धार्मिक विश्वास और आध्यात्मिक भावना के साथ वहां पहुंचते हैं। दुनिया के कुछ पवित्र Mountains ऐसे हैं जिन्हें एक से ज्यादा धर्मों में महत्वपूर्ण माना जाता है। कहीं भगवान शिव से जुड़ी मान्यता है, कहीं भगवान बुद्ध से, तो कहीं पैगंबर मूसा, हजरत आदम और पैगंबर नूह की धार्मिक कथाएं इन Mountains से जुड़ी हुई हैं। इन जगहों की यात्रा सामान्य पर्यटन यात्रा से थोड़ी अलग होती है। कई Mountains पर कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, कुछ जगहों पर मौसम तेजी से बदलता है और कई स्थानों पर स्थानीय धार्मिक नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आज के इस लेख में हम दुनिया के ऐसे ही 7 पवित्र Mountains के बारे में जानेंगे, जिनकी पहचान केवल उनकी ऊंचाई से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी आस्था और इतिहास से भी है। कैलाश Mountain: चार धर्मों के लिए पवित्र स्थान तिब्बत में स्थित कैलाश Mountain दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पवित्र Mountains में गिना जाता है। इसकी ऊंचाई करीब 6,638 मीटर है और यह हिमालय के तिब्बती क्षेत्र में स्थित है। हिंदू धर्म में कैलाश को भगवान शिव का निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव माता पार्वती के साथ इसी Mountain पर निवास करते हैं। इसी वजह से भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु कैलाश की यात्रा करना चाहते हैं। कैलाश का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। बौद्ध धर्म में भी इसे बहुत पवित्र माना जाता है। तिब्बती बौद्ध परंपरा में इसे कांग रिनपोछे यानी कीमती बर्फीला रत्न कहा जाता है। जैन धर्म की मान्यता के अनुसार पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने कैलाश क्षेत्र से जुड़े अष्टापद Mountain पर मोक्ष प्राप्त किया था। वहीं तिब्बत की प्राचीन बोन परंपरा में भी इस क्षेत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कैलाश की सबसे अलग बात यह है कि श्रद्धालु इसकी चढ़ाई करने की बजाय इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा को कोरा कहा जाता है। लगभग 52 किलोमीटर की यह यात्रा पैदल पूरी की जाती है। ऊंचाई, ठंड और कठिन रास्तों की वजह से यह यात्रा आसान नहीं होती। कैलाश क्षेत्र के आसपास मानसरोवर झील भी स्थित है, जिसे हिंदू और बौद्ध परंपराओं में पवित्र माना जाता है। झील, बर्फ से ढकी चोटियां और खुला पहाड़ी इलाका इस पूरी यात्रा को बेहद खास बनाते हैं। कैलाश जाने वाले यात्रियों को परमिट, यात्रा की अनुमति और स्थानीय नियमों की जानकारी पहले से लेनी पड़ती है। यह क्षेत्र तिब्बत में आता है, इसलिए यहां की यात्रा सामान्य घरेलू टूर जैसी नहीं होती। एडम्स पीक: एक Mountain और चार धार्मिक मान्यताएं श्रीलंका में स्थित एडम्स पीक को स्थानीय भाषा में श्री पादा भी कहा जाता है। यह जगह अपने धार्मिक महत्व और Mountain की चोटी पर बने एक खास पदचिह्न के कारण दुनिया भर में जानी जाती है। इस पदचिह्न को लेकर अलग-अलग धर्मों की अलग मान्यताएं हैं। बौद्ध धर्म में इसे भगवान बुद्ध के पदचिह्न से जोड़ा जाता है। हिंदू परंपरा में इसे भगवान शिव के पदचिह्न के रूप में देखा जाता है। इस्लामी मान्यता में कुछ लोग इसे हजरत आदम से जोड़ते हैं। मान्यता है कि धरती पर आने के बाद आदम ने यहां अपना पहला कदम रखा था। कुछ ईसाई परंपराओं में भी इस Mountain को धार्मिक महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि एडम्स पीक अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए खास बन गया है। एडम्स पीक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी चढ़ाई है। यहां तक पहुंचने के लिए हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ज्यादातर श्रद्धालु रात में चढ़ाई शुरू करते हैं, ताकि सुबह सूर्योदय के समय Mountain की चोटी तक पहुंच सकें। सुबह की पहली रोशनी में आसपास के Mountains और घाटियों का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धार्मिक यात्रा के साथ-साथ यह अनुभव प्रकृति को करीब से देखने का मौका भी देता है। यहां की यात्रा के लिए दिसंबर से मई के बीच का समय आमतौर पर बेहतर माना जाता है। अगर आप एडम्स पीक जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आरामदायक जूते, हल्का सामान और पानी जरूर साथ रखें। माउंट सिनाई: मूसा से जुड़ी धार्मिक कहानी मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में स्थित माउंट सिनाई दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक Mountains में से एक है। इसे अरबी में जबल मूसा भी कहा जाता है। यह Mountain यहूदी, ईसाई और इस्लामी परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पैगंबर मूसा ने इसी क्षेत्र में ईश्वर से संवाद किया था और उन्हें दस आज्ञाएं प्राप्त हुई थीं। इसी धार्मिक इतिहास की वजह से हजारों वर्षों से यह इलाका श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। माउंट सिनाई की यात्रा करने वाले कई लोग रात में चढ़ाई शुरू करते हैं, ताकि सुबह सूर्योदय के समय Mountain की चोटी पर पहुंच सकें। इस Mountain की ऊंचाई करीब 2,285 मीटर है। रास्ते में पत्थरों वाली चढ़ाई और सीढ़ियां मिलती हैं। इस क्षेत्र में सेंट कैथरीन मठ भी स्थित है। यह ईसाई धर्म के पुराने और महत्वपूर्ण मठों में से एक माना जाता है। माउंट सिनाई जाने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि यहां दिन और रात के मौसम में काफी अंतर हो सकता है। रात की चढ़ाई के लिए गर्म कपड़े और अच्छी ग्रिप वाले जूते रखना जरूरी है। माउंट सिनाई की खासियत यही है कि यहां यात्रा केवल Mountain के रास्ते पर चलने तक सीमित नहीं रहती। रास्ते में धार्मिक इतिहास, पुराना मठ और आसपास का रेगिस्तानी इलाका इस यात्रा को अलग अनुभव बनाते हैं। ओम Mountain: बर्फ में दिखाई देता है ॐ का आकार भारत-नेपाल सीमा के पास उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र में स्थित ओम Mountain अपनी अनोखी प्राकृतिक आकृति के लिए जाना जाता है। इस Mountain की चट्टानी सतह पर बर्फ इस तरह जमती है कि वहां ॐ जैसा आकार दिखाई देता है। हिंदू धर्म में ॐ को बेहद पवित्र माना जाता है। इसे प्रार्थना, ध्यान और आध्यात्मिक साधना से जोड़ा जाता है।

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भारत के 7 सबसे रंगीन Festivals जो आपकी Travel Bucket List में ज़रूर होने चाहिए

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India सिर्फ़ अलग-अलग Culture, Languages और Food के लिए ही Famous नहीं है, बल्कि यहां के Festivals भी दुनिया भर के Travellers को अपनी तरफ़ खींचते हैं। हर State का अपना एक अलग अंदाज़, अपनी एक अलग रौनक़ और अपनी एक अलग कहानी है। कहीं फूलों की बारिश होती है, कहीं ऊंटों का मेला लगता है, तो कहीं पूरा शहर रंगों में डूब जाता है। अगर आप सिर्फ़ Tourist नहीं बल्कि एक Real Traveller बनना चाहते हैं, तो इन Festivals को अपनी Bucket List में ज़रूर शामिल करें। क्योंकि यहां आपको सिर्फ़ Celebration नहीं, बल्कि Local Culture, Music, Food, Dance और लोगों की मेहमाननवाज़ी भी देखने को मिलेगी। 1. Pushkar Camel Fair, राजस्थान रेगिस्तान की सबसे रंगीन महफ़िल Pushkar Camel Fair दुनिया के सबसे बड़े Camel Festivals में से एक माना जाता है। हर साल राजस्थान के पुष्कर में लगने वाला यह Festival सिर्फ़ ऊंटों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Music, Folk Dance, Competitions, Handicrafts और Local Culture का शानदार संगम बन जाता है। क्या है इसकी खासियत? हजारों सजे-धजे ऊंट और घोड़े देखने का मौका मिलता है। Rajasthani Folk Dance और Live Music का शानदार माहौल होता है। Local Bazaar से Traditional Jewelry, Handicrafts और कपड़ों की Shopping की जा सकती है। क्या देखें? Camel Decoration Competition Hot Air Balloon Ride Pushkar Lake और Brahma Temple Sunset Photography घूमने का सबसे अच्छा समय October से November के बीच, खासकर Fair के दौरान। सुबह और Sunset का समय सबसे खूबसूरत माना जाता है। कैसे पहुंचे? सबसे नज़दीकी Airport – Jaipur Railway Station – Ajmer Ajmer से Taxi और Bus आसानी से मिल जाती है। 2. Hornbill Festival, नागालैंड North East का Cultural Powerhouse अगर आप North East India की असली Culture को करीब से देखना चाहते हैं, तो Hornbill Festival आपके लिए Perfect है। यहां नागालैंड की अलग-अलग Tribes अपनी Traditional Dress, Dance, Food और Music के साथ हिस्सा लेती हैं। क्या है इसकी खासियत? 16 से ज्यादा Tribal Communities एक साथ Celebrate करती हैं। Traditional Sports और Folk Performances देखने को मिलते हैं। Local Cuisine का असली स्वाद चखने का मौका मिलता है। क्या देखें? Tribal Dance Performances Bamboo Craft Market Indigenous Food Stalls Rock Concerts घूमने का सबसे अच्छा समय हर साल 1 से 10 December के बीच। कैसे पहुंचे? Airport – Dimapur Dimapur से Kohima तक Road Journey Kohima से Kisama Heritage Village 3. Onam Festival, केरल फूलों, खुशबू और Tradition का Celebration Onam सिर्फ़ Kerala का Festival नहीं बल्कि वहां की पहचान है। पूरा State रंग-बिरंगे फूलों, Traditional Dresses, Boat Races और शानदार Feast से भर जाता है। क्या है इसकी खासियत? Pookalam यानी Flower Rangoli हर घर के सामने बनाई जाती है। Vallam Kali यानी Snake Boat Race सबसे बड़ा Attraction होता है। Onam Sadya में 20 से ज्यादा Traditional Dishes परोसी जाती हैं। क्या देखें? Boat Race Kathakali Performance Flower Decoration Local Markets घूमने का सबसे अच्छा समय August से September। कैसे पहुंचे? Kochi International Airport Ernakulam Railway Station Kerala के सभी बड़े शहरों से अच्छी Connectivity 4. Hemis Festival, लद्दाख पहाड़ों के बीच Spiritual Vibes अगर आपको Mountains, Monasteries और Buddhist Culture पसंद है, तो Hemis Festival किसी Dream Experience से कम नहीं। क्या है इसकी खासियत? Mask Dance यानी Cham Dance सबसे बड़ा आकर्षण है। Monks Traditional Rituals करते हैं। Rare Buddhist Art और Culture देखने को मिलता है। क्या देखें? Hemis Monastery Traditional Mask Dance Prayer Ceremony Local Handicrafts घूमने का सबसे अच्छा समय June या July। कैसे पहुंचे? Leh Airport Leh से लगभग 45 KM की Road Journey 5. Goa Carnival, गोवा Beach, Music और Non-stop Party Vibes Goa Carnival India का सबसे Fun-filled Festival माना जाता है। यहां Portuguese Culture की झलक देखने को मिलती है। पूरा Goa Music, Dance, Parade और Lights से जगमगा उठता है। क्या है इसकी खासियत? Grand Street Parade Live Bands और DJ Performances Beach Parties Colorful Costumes क्या देखें? Panaji Carnival Parade Float Competition Local Food Festival Night Celebrations घूमने का सबसे अच्छा समय February। कैसे पहुंचे? Manohar International Airport या Dabolim Airport Madgaon Railway Station Taxi और Rental Scooters आसानी से मिल जाते हैं। 6. International Kite Festival, गुजरात जब पूरा आसमान रंगों से भर जाता है Ahmedabad में होने वाला International Kite Festival हर उम्र के लोगों के लिए एक शानदार Experience होता है। यहां India ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों से Kite Flyers हिस्सा लेते हैं। क्या है इसकी खासियत? हजारों रंग-बिरंगी Kites International Participants Local Food Stalls Traditional Music क्या देखें? Giant Designer Kites Night Kite Flying Cultural Performances Riverfront Events घूमने का सबसे अच्छा समय January। कैसे पहुंचे? Ahmedabad Airport Ahmedabad Junction City Transport आसानी से उपलब्ध है। 7. Holi Festival, मथुरा-वृंदावन (उत्तर प्रदेश) रंग, इश्क़ और कृष्ण भक्ति का सबसे खूबसूरत संगम अगर किसी Festival को India की पहचान कहा जाए, तो वो Holi है। लेकिन Mathura-Vrindavan की Holi का अंदाज़ बिल्कुल अलग है। यहां सिर्फ़ Colors नहीं बल्कि सदियों पुरानी परंपराएं, भक्ति और जश्न एक साथ देखने को मिलता है। क्या है इसकी खासियत? Lathmar Holi Phoolon Ki Holi Widow Holi Krishna Temple Celebrations क्या देखें? Banke Bihari Temple Barsana Holi Nandgaon Celebrations Evening Aarti घूमने का सबसे अच्छा समय February के आखिर से March तक। कैसे पहुंचे? सबसे नज़दीकी Airport – Agra और Delhi Railway Station – Mathura Junction वहां से Auto और Taxi आसानी से मिल जाती हैं। Fiveकलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ़ से कुछ सुझाव Festival Dates पहले से Check कर लें क्योंकि कई Festivals Lunar Calendar के हिसाब से होते हैं। Hotels और Flights की Booking Advance में कर लें, वरना Peak Season में Rates काफी बढ़ जाते हैं। Local Culture और Traditions की Respect करें। हर Festival की अपनी अलग अहमियत होती है। Comfortable Shoes और Light Clothing रखें ताकि पूरा दिन आसानी से घूम सकें। Camera या Phone Fully Charged रखें क्योंकि हर कोना Instagram-worthy होगा। Local Food ज़रूर Try करें, लेकिन साफ़-सफाई का ध्यान रखें। Cash और Digital Payment दोनों साथ रखें क्योंकि कई Local Stalls पर UPI हमेशा Available नहीं होता। अगर Photography कर रहे हैं तो पहले लोगों से Permission लेना

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Rajasthan की 10 ऐसी जगहें जो हर Traveller की Bucket List में होनी चाहिए

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जब भी Royal Heritage, विशाल Forts, सुनहरे Desert, रंग-बिरंगी Culture और शानदार Hospitality की बात होती है, तो सबसे पहले Rajasthan का नाम ज़हन में आता है। ये State सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सदियों पुरानी दास्तानों, लाजवाब Architecture और दिलकश माहौल के लिए भी मशहूर है। यहां हर शहर की अपनी अलग पहचान है। कहीं झीलों का सुकून है, कहीं रेगिस्तान का रोमांच, तो कहीं ऐसे Palace हैं जिन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी Royal Movie के Set पर आ गए हों। अगर आप History Lover हैं, Adventure पसंद करते हैं, Photography का शौक रखते हैं या सिर्फ Family के साथ यादगार Vacation बिताना चाहते हैं, तो Rajasthan हर तरह के Traveller को निराश नहीं करता। आइए जानते हैं Rajasthan की 10 ऐसी शानदार जगहों के बारे में जिन्हें आपको अपनी Travel Bucket List में ज़रूर शामिल करना चाहिए। 1. Jaipur – The Pink City Royal Rajasthan का दिल Rajasthan की राजधानी Jaipur अपनी गुलाबी इमारतों, शानदार Forts और Royal Heritage के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह शहर पुराने ज़माने की शान और आज की Modern Lifestyle का शानदार मेल है। UNESCO World Heritage City का दर्जा पाने वाला Jaipur हर Traveller को पहली नज़र में अपना दीवाना बना देता है। पूरा Old City गुलाबी रंग की इमारतों से सजा हुआ है। Heritage, Shopping और Street Food का शानदार Combination मिलता है। Photography और Culture Lovers के लिए Perfect Destination है। यहां क्या देखें? Amber Fort Hawa Mahal City Palace Jantar Mantar Nahargarh Fort Johari Bazaar घूमने का सबसे अच्छा समय October से March तक का मौसम सबसे बेहतरीन रहता है। Sunrise और Sunset दोनों समय शहर बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। कैसे पहुंचे? Jaipur International Airport, Railway Station और National Highway से आसानी से पहुंचा जा सकता है। 2. Udaipur – City of Lakes झीलों के बीच बसा Royal City अगर Rajasthan का सबसे Romantic शहर चुनना हो तो Udaipur का नाम सबसे पहले आएगा। यहां की खूबसूरत Lakes, Palace और Sunset Views हर किसी का दिल जीत लेते हैं। Destination Wedding के लिए भी यह शहर दुनिया भर में मशहूर है। इसे East का Venice भी कहा जाता है। यहां की शामें बेहद सुकूनभरी होती हैं। Boat Ride यहां का सबसे खास Experience है। यहां क्या देखें? City Palace Lake Pichola Jag Mandir Fateh Sagar Lake Sajjangarh Palace घूमने का सबसे अच्छा समय October से February तक का मौसम सबसे अच्छा रहता है। कैसे पहुंचे? Maharana Pratap Airport और Udaipur Railway Station शहर को अच्छी तरह जोड़ते हैं। 3. Jaisalmer – The Golden City Golden Desert का जादू Rajasthan का Jaisalmer अपनी Golden Sandstone Buildings और Thar Desert के लिए जाना जाता है। यहां Sunset के समय पूरा शहर सोने जैसा चमकता दिखाई देता है। Desert Safari यहां की सबसे लोकप्रिय Activity है। रात में Desert Camp का Experience यादगार रहता है। Folk Music और Cultural Program सफर को और खास बना देते हैं। यहां क्या देखें? Jaisalmer Fort Sam Sand Dunes Patwon Ki Haveli Gadisar Lake Desert Camp घूमने का सबसे अच्छा समय November से February सबसे बेहतर मौसम माना जाता है। कैसे पहुंचे? Jaisalmer Railway Station और Jodhpur Airport के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। 4. Jodhpur – The Blue City नीले घरों वाला शानदार शहर Jodhpur अपने Blue Houses और विशाल Mehrangarh Fort की वजह से दुनियाभर में मशहूर है। यहां की गलियां, पुराने बाजार और Heritage Buildings एक अलग ही एहसास कराते हैं। Blue City View बेहद Iconic है। History और Culture का शानदार मेल देखने को मिलता है। Street Photography के लिए Best Place है। यहां क्या देखें? Mehrangarh Fort Jaswant Thada Umaid Bhawan Palace Clock Tower Market घूमने का सबसे अच्छा समय October से March तक। कैसे पहुंचे? Jodhpur Airport और Railway Station दोनों उपलब्ध हैं। 5. Mount Abu – Rajasthan का Hill Station Desert State का Cool Surprise बहुत कम लोग जानते हैं कि Rajasthan का इकलौता Hill Station Mount Abu है। यहां की हरियाली, ठंडी हवा और शांत माहौल आपको रेगिस्तान से बिल्कुल अलग दुनिया में ले जाते हैं। Summer Vacation के लिए शानदार जगह। Couples और Families दोनों के लिए Perfect। Nature Lovers को यहां खूब मज़ा आता है। यहां क्या देखें? Nakki Lake Guru Shikhar Dilwara Temples Sunset Point घूमने का सबसे अच्छा समय March से June और September से February। कैसे पहुंचे? Abu Road Railway Station सबसे नज़दीक है। 6. Pushkar Spiritual Vibes और Peaceful माहौल Pushkar अपनी Holy Lake और Brahma Temple के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां Spirituality और Modern Cafe Culture दोनों साथ देखने को मिलते हैं। Pushkar Camel Fair दुनियाभर में प्रसिद्ध है। Foreign Travellers की Favourite Destination है। Sunset के समय Lake का नज़ारा बेहद दिलकश लगता है। यहां क्या देखें? Pushkar Lake Brahma Temple Savitri Temple Pushkar Market घूमने का सबसे अच्छा समय October से March। कैसे पहुंचे? Ajmer Railway Station से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। 7. Bikaner Culture और स्वाद का शानदार संगम Bikaner अपनी Heritage Buildings, Camel Festival और मशहूर Snacks के लिए जाना जाता है। यहां का Local Food हर Food Lover को पसंद आता है। Junagarh Fort यहां का मुख्य आकर्षण है। Camel Safari का अलग ही मज़ा है। Local Bazaar Shopping के लिए बेहतरीन हैं। यहां क्या देखें? Junagarh Fort Karni Mata Temple Lalgarh Palace National Camel Research Centre घूमने का सबसे अच्छा समय November से February। कैसे पहुंचे? Bikaner Railway Station और Airport उपलब्ध हैं। 8. Chittorgarh शौर्य और इतिहास की मिसाल Chittorgarh भारत के सबसे बड़े Fort Complex में से एक है। यहां की दीवारें वीरता, त्याग और सम्मान की अनगिनत कहानियां सुनाती हैं। Maharana Pratap और Rani Padmini से जुड़ा इतिहास। UNESCO World Heritage Site का हिस्सा। History Lovers के लिए Dream Destination। यहां क्या देखें? Chittorgarh Fort Vijay Stambh Kirti Stambh Padmini Palace घूमने का सबसे अच्छा समय October से March। कैसे पहुंचे? Railway Station और Road दोनों से अच्छी Connectivity है। 9. Ranthambore National Park Wildlife Adventure का असली मज़ा अगर आप Rajasthan में Wildlife Experience लेना चाहते हैं तो Ranthambore National Park ज़रूर जाएं। यहां Tiger

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हर साल भगवान जगन्नाथ की Rath Yatra में देशभर से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। इतनी भीड़ के कारण टिकट मिलना और यात्रा की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत है। भारतीय रेलवे ने Rath Yatra 2026 को देखते हुए 300 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान किया है। ये अतिरिक्त ट्रेनें पहले से चल रही 800+ नियमित ट्रेनों के साथ होंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आराम से पुरी पहुँच सकें। अगर आप शालीमार, राउरकेला, टाटानगर, संबलपुर या आसपास के इलाकों से जा रहे हैं, तो यह जानकारी आपके काम आएगी। नीचे आसान भाषा में बताया गया है कि कौन-कौन सी स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं, किन रूट्स पर सुविधा बढ़ाई गई है और यात्रा से पहले किन बातों का ध्यान रखें। रेलवे ने क्यों बढ़ाईं स्पेशल ट्रेनें? भगवान जगन्नाथ की Rath Yatra दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु पुरी जाते हैं। इतनी भारी भीड़ को संभालने के लिए रेलवे हर साल अतिरिक्त ट्रेनें चलाता है, पर इस बार व्यवस्थाएँ और भी बड़े पैमाने पर की गई हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि Rath Yatra 2026 के दौरान 300+ स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी—मकसद साफ है: श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा देना। किन राज्यों के यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा? इस बार स्पेशल ट्रेनों का सबसे बड़ा लाभ ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के यात्रियों को मिलेगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और दूसरे पड़ोसी राज्यों से भी कई विशेष ट्रेनें चलायी जा रही हैं। रेलवे ने उन रूट्स को चुना है जहाँ साल-दर-साल सबसे ज्यादा श्रद्धालु पुरी आते हैं। इसलिए राउरकेला, टाटानगर, बड़बिल, शालीमार, संतरागाछी, विशाखापट्टनम जैसे स्टेशनों से अतिरिक्त ट्रेनें और कोच उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राउरकेला से पुरी जाने वालों के लिए खास व्यवस्था राउरकेला व आसपास के लोगों के लिए अच्छी खबर है — इस बार राउरकेला–पुरी–राउरकेला Rath Yatra Special चलाई जा रही है। यह ट्रेन रास्ते में झारसुगुड़ा, संबलपुर, अंगुल, ढेंकानाल, कटक, भुवनेश्वर और खुर्दा रोड जैसे प्रमुख स्टेशनों से होकर पुरी पहुंचेगी। इसमें एसी, स्लीपर और जनरल कोच होंगे, ताकि हर बजट के यात्री आराम से सफर कर सकें। टाटानगर और कोल्हान के यात्रियों के लिए क्या है? झारखंड के टाटानगर, गम्हरिया, सिनी और कोल्हान क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए भी रेलवे ने विशेष तैयारी की है। कुछ स्पेशल MEMU और एक्सप्रेस सेवाएँ इस तरह बनाई गई हैं कि छोटे स्टेशनों के लोग बार-बार ट्रेन बदलने की झंझट से बच सकें। इससे कई इलाकों के लोगों को पहली बार सीधे और आसान रेल कनेक्शन मिलेगा, जो पहले मुश्किल हुआ करता था। शालीमार से यात्रा करने वालों के लिए राहत कोलकाता/हावड़ा क्षेत्र से आने वालों के लिए भी सुविधाएँ बढ़ायी गई हैं। नई स्पेशल ट्रेनों के साथ-साथ कई नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त स्लीपर और एसी कोच जोड़े जा रहे हैं। खासकर शालीमार–संबलपुर एक्सप्रेस में जुलाई के दौरान अतिरिक्त स्लीपर कोच लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक यात्री कन्फर्म सीट पा सकें। संतरागाछी और पश्चिम बंगाल के अन्य रूटों को भी इस साल प्राथमिकता दी गई है। किस-किस रूट पर अतिरिक्त सुविधाएँ बढ़ायी गई हैं? रेलवे ने केवल स्पेशल ट्रेनें ही नहीं चलाईं, बल्कि कई लोकप्रिय ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी जोड़े हैं। इनमें प्रमुख रूप से ओडिशा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, प्रशांति एक्सप्रेस, हिराखंड एक्सप्रेस, तिरुपति एक्सप्रेस, पुरी–गुनुपुर एक्सप्रेस और शालीमार–संबलपुर एक्सप्रेस शामिल हैं। इससे अधिक यात्रियों को सीट मिल सकेगी और ट्रेनों में भीड़ कम होगी। बड़बिल और दूर-दराज के इलाकों के लिए भी व्यवस्था बड़बिल से भी पुरी के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है, जो नोआमुंडी, बंसपानी, जखपुरा, कटक और भुवनेश्वर से होकर पहुंचेगी। इसके अलावा विशाखापट्टनम, जगदलपुर, पलासा, रायगढ़ा जैसे शहरों से भी विशेष ट्रेनें चलायी जा रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालु बिना परेशानी के पुरी पहुंच सकें। पुरी रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाली नई सुविधाएँ हर साल Rath Yatra के दौरान पुरी स्टेशन पर भारी भीड़ रहती है। इस बार स्टेशन पर कई नई सुविधाएँ और व्यवस्थाएँ तैयार की गई हैं। रेल मंत्री ने खुद तैयारियों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। 30 हजार लोगों के लिए होल्डिंग एरिया स्टेशन के बाहर एक विशाल होल्डिंग एरिया बनाया गया है जहां लगभग 30,000 श्रद्धालु एक साथ रुक सकते हैं। इससे भीड़ प्लेटफॉर्म पर सीधे नहीं पहुँचेगी और यात्रियों को आराम से अपनी ट्रेन का इंतजार करने की जगह मिल जाएगी। डिजिटल स्क्रीन से मिलेगी हर जानकारी स्टेशन पर कई डिजिटल LED स्क्रीन लगाई गई हैं जिन पर ट्रेन की जानकारी, प्लेटफॉर्म नंबर, भीड़ की स्थिति और जरूरी घोषणाएँ दिखाई जाएंगी। कुछ स्क्रीन पर मंदिर के कार्यक्रमों की जानकारी भी दिखेगी ताकि श्रद्धालुओं को अलग-अलग जगह पूछताछ न करनी पड़े। सुरक्षा व्यवस्था और भी सुदृढ़ इतनी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा को खास प्राथमिकता दी गई है। स्टेशन पर अतिरिक्त RPF और GRP जवान तैनात किए जाएंगे। CCTV कैमरों की संख्या बढ़ाई गयी है और कंट्रोल रूम से पूरे स्टेशन पर नजर रखी जाएगी। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए अलग-अलग एंट्री और एग्जिट गेट बनाए गए हैं। टिकट काउंटर और खाने-पीने की सुविधा टिकट काउंटरों की संख्या बढ़ायी गई है। साथ ही पीने का पानी, मेडिकल हेल्प, फूड स्टॉल और हेल्प डेस्क जैसी सुविधाएं मजबूत की जा रही हैं। रास्ता पूछने या मदद के लिए स्टेशन पर अलग-अलग सहायता केंद्र बनाए गए हैं। IRCTC के धार्मिक टूर पैकेज अगर आप ट्रेन और होटल अलग से बुक नहीं करना चाहते, तो IRCTC के धार्मिक टूर पैकेज अच्छे विकल्प हैं। इन पैकेजों में सामान्यतः ट्रेन टिकट, होटल में ठहराव, लोकल ट्रांसपोर्ट, कुछ दर्शनों के पैकेज और भोजन शामिल होते हैं। कई पैकेज पुरी के साथ कोणार्क और भुवनेश्वर का भी भ्रमण कराते हैं। यात्रा से पहले किन बातों का ध्यान रखें टिकट पहले से बुक कर लें—रथ यात्रा के समय टिकट कब का मिलना मुश्किल हो सकता है। रिजर्व टिकट होने पर भी स्टेशन समय से पहले पहुँचना बेहतर रहेगा। जुलाई में मौसम गर्म और उमस भरा रहता है—हल्के सूती कपड़े और पानी की बोतल साथ रखें। मोबाइल, पर्स और जरूरी दस्तावेज हमेशा अपने पास रखें। क्यों

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Private Train : 10 Amazing Facts, पूरी ट्रेन कैसे बुक करें?

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अगर कोई आपसे कहे कि भारत में आम लोग भी अपनी पूरी ट्रेन बुक कर सकते हैं, तो शायद यकीन न हो। लेकिन यह सच है। भारतीय रेलवे एक खास सुविधा देता है, जिसके जरिए आप अपनी जरूरत के हिसाब से पूरी ट्रेन या ट्रेन के कुछ कोच बुक कर सकते हैं। इसे Full Tariff Rate (FTR) या Private Train चार्टर कहा जाता है। शादी हो, धार्मिक यात्रा हो, ऑफिस का बड़ा टूर हो या दोस्तों के साथ लंबी ट्रिप—Private Train एक अच्छा विकल्प बन सकता है। इस सुविधा का फायदा सिर्फ बड़े उद्योगपतियों तक सीमित नहीं है; आम लोग, संस्थाएँ और स्कूल-कॉलेज भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। नीचे आसान भाषा में पूरा प्रोसेस, खर्च और जरूरी बातें दी गई हैं। क्या है Full Tariff Rate (FTR) सर्विस? Full Tariff Rate यानी FTR, भारतीय रेलवे की चार्टर्ड ट्रेन सेवा है। इसके जरिए कोई भी व्यक्ति, संस्था, स्कूल, कॉलेज या कंपनी जरूरत के मुताबिक ट्रेन या कुछ कोच बुक कर सकती है। यह सुविधा बड़े ग्रुप को एक साथ यात्रा कराने के लिए बनाई गई है। इससे वेटिंग लिस्ट, कई टिकट बुक करने की झंझट और अलग-अलग कोचों में बिखरने की समस्या नहीं रहती—पूरा समूह साथ रहता है। Private Train में क्या-क्या बुक किया जा सकता है? रेलवे तीन प्रमुख विकल्प देती है: कोच चार्टर: पूरी ट्रेन नहीं चाहिए तो 1 से 10 कोच तक बुक कर सकते हैं। छोटे ग्रुप, स्कूल टूर या धार्मिक पयर्टनों के लिए बढ़िया है. पूरी ट्रेन चार्टर: बड़ा ग्रुप हो तो पूरी ट्रेन बुक की जा सकती है (आम तौर पर 18 से 24 कोच तक)। बड़े आयोजनों या यात्राओं के लिए उपयुक्त है। सैलून चार्टर: ज्यादा लग्जरी और प्राइवसी चाहिए तो सैलून कार बुक कर सकते हैं—जिसमें बेडरूम, डाइनिंग, बाथरूम और किचन जैसी सुविधाएँ रहती हैं; कई बार रेलवे स्टाफ भी मिलता है। Private Train किन कारणों से बुक की जाती है? यह सुविधा सिर्फ अमीरों के लिए नहीं है। अक्सर ये कारण होते हैं: शादी में पूरी बारात का सफर। धार्मिक यात्रा (यात्राएं, तीर्थयात्रा)। स्कूल/कॉलेज के शैक्षिक टूर। कंपनी/कॉर्पोरेट टीम ट्रिप। फिल्म, टीवी या डॉक्यूमेंट्री शूटिंग। स्पोर्ट्स टीम या सांस्कृतिक दल की यात्रा। जब ग्रुप बड़ा होता है तो यह तरीका सुविधाजनक और व्यवस्थित रहता है। बुकिंग कब करनी चाहिए? Private Train के लिए देर न करें। रेलवे नियमों के मुताबिक आवेदन यात्रा से कम से कम 30 दिन पहले करना आवश्यक है, और अधिकतम 6 महीने पहले तक बुकिंग की जा सकती है। बड़े कार्यक्रम (जैसे शादी) हों तो 3–4 महीने पहले अप्लाई कर लेना बेहतर रहता है—ताकि मनचाहे रूट, इंजन और कोच मिल सकें। Private Train बुक करने में कितना खर्च आता है? सबसे पहले सिक्योरिटी डिपॉजिट देना होता है। उदाहरण के तौर पर, एक कोच के लिए लगभग ₹50,000 तक सिक्योरिटी डिपॉजिट रखा जा सकता है (यह 7 दिनों के आधार पर होता है; अधिक दिनों में अलग चार्ज लगेगा)। पूरी ट्रेन में (18 कोच) सिक्योरिटी राशि लाखों तक जा सकती है। लेकिन यह राशि किराया नहीं है—अगर ट्रेन के दौरान कोई नुकसान नहीं होता तो यह वापस कर दी जाती है। सिक्योरिटी के अलावा असल किराया होता है, जो इन बातों पर निर्भर करता है: कितने कोच बुक किए गए हैं; क्लास कैसी है; यात्रा की दूरी और रूट क्या है; कैटरिंग और अन्य सेवाएँ क्या चाहिए। इसलिए बुकिंग से पहले पूरा बजट बनाकर रखें—क्योकि कुल खर्च सिक्योरिटी + किराया + कैटरिंग/सर्विस चार्ज बनकर आता है। Private Train ऑनलाइन कैसे बुक करें? प्रक्रिया अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसके लिए IRCTC की FTR वेबसाइट पर अलग से रजिस्ट्रेशन करना होता है (यह सामान्य IRCTC अकाउंट से अलग हो सकता है)। वहां से फॉर्म भरकर यात्रा की तारीख, रूट, कितने कोच चाहिए आदि जानकारी देनी होती है। फॉर्म जमा होने पर एक रेफरेंस नंबर मिलता है और तय समय पर सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है। रेलवे आपकी जानकारी जाँचकर बुकिंग कन्फर्म कर देता है और FTR नंबर जारी कर देता है। ऑफलाइन बुकिंग कैसे होती है? ऑनलाइन न कर पाने पर ऑफलाइन भी बुक कर सकते हैं। इसके लिए उस रेलवे स्टेशन के Chief Booking Supervisor या स्टेशन मास्टर के पास लिखित आवेदन दें। आवेदन स्वीकार होने पर सिस्टम जनरेटेड स्लिप मिलती है और UTS काउंटर पर सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है। पेमेंट के बाद रसीद और FTR नंबर मिल जाएगा। कभी-कभी अतिरिक्त दस्तावेज़ भी मांगे जा सकते हैं। बुकिंग से पहले जानने योग्य नियम कुछ जरूरी नियम ध्यान रखें: यात्रा से पहले सभी यात्रियों की सूची रेलवे को देनी होती है (नाम, पहचान विवरण)। चार्टर किए गए कोचों को केवल उन्हीं स्टेशनों पर जोड़ा/हटाया जा सकता है जहाँ ट्रेन का ठहराव पर्याप्त हो। कैंसिलेशन और रिफंड नियम अलग होते हैं; कुछ स्थितियों में सिक्योरिटी का हिस्सा कट सकता है। इन नियमों को पहले ध्यान से पढ़ लें ताकि बाद में झंझट न हो। खाने-पीने की व्यवस्था कैसी होती है? IRCTC आमतौर पर कैटरिंग का ध्यान रखता है। पेंट्री कार होने पर खाना वहीं से तैयार हो सकता है; अन्यथा रास्ते के स्टेशनों से वेंडर या ठेकेदार से भोजन उपलब्ध कराया जाता है। मेन्यू पहले से तय कर सकते हैं—बच्चों, बुजुर्गों या किसी विशेष आहार की जरूरत हो तो पहले बता दें। इससे यात्रा के दौरान खाने में दिक्कत नहीं होती। किसके लिए सबसे फायदेमंद है यह सुविधा? Private Train उन लोगों के लिए सबसे उपयोगी है जिनके ग्रुप बड़े हों और सबको एक साथ यात्रा करनी हो: शादी, धार्मिक यात्राएँ, स्कूल/कॉलेज टूर, कॉर्पोरेट आउटिंग, खेल/कल्चर टीम, शूटिंग क्रू आदि। ऐसे मामलों में अलग-अलग टिकट बुक करने से बेहतर और सुगम विकल्प मिलता है। क्या Private Train बुक करना सही विकल्प है? अगर आपका ग्रुप बड़ा है और आप सबको एक साथ व्यवस्थित तरीके से भेजना चाहते हैं, तो Private Train शानदार विकल्प हो सकता है। यह अनुभव यादगार होता है और यात्रियों के लिए सुविधा ज्यादा रहती है। पर यह विकल्प सामान्य टिकट से महंगा होता है—इसलिए पहले पूरा बजट, यात्रा की ज़रूरत और नियम समझकर ही बुकिंग करें। सही प्लानिंग के साथ यह सफर जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बन सकता है। Five Colors of Travel की ओर से कुछ जरूरी सुझाव शादी

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Kolkata Travel:10 Amazing Facts जो हर ट्रैवलर को जानने चाहिए

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अगर भारत के उन शहरों की बात करें जहाँ इतिहास, कला, संस्कृति और स्वाद एक साथ मिलते हैं, तो सबसे पहले नाम Kolkata का आता है। यह शहर सिर्फ पश्चिम बंगाल की राजधानी नहीं है, बल्कि इसे अक्सर भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। यहाँ की पुरानी इमारतें, ट्राम, किताबों भरी गलियां, मशहूर मिठाइयाँ, स्ट्रीट फूड और लोगों की अपनत्व भावना हर किसी का दिल जीत लेती है। अगर आप ऐसी जगह घूमना चाहते हैं जहाँ हर गली कोई कहानी सुनाती हो, तो Kolkata आपके लिए एक बेहतरीन जगह हो सकती है। इस ब्लॉग में हम बताएंगे कि आखिर क्यों Kolkata हर ट्रैवलर की लिस्ट में होना चाहिए और कौन-सी खास बातें इस शहर को बाकी शहरों से अलग बनाती हैं। आखिर Kolkata को सांस्कृतिक राजधानी क्यों कहा जाता है? Kolkata की पहचान सबसे अलग है। पिछले डेढ़ सौ सालों से यह शहर साहित्य, संगीत, कला, थिएटर और शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा है। यहीं से कई लेखक, कलाकार और समाजसुधारक निकले जिन्होंने पूरे देश को नई सोच दी। इसलिए Kolkata को सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। आज भी यहाँ की गलियों में चलते हुए आप पुरानी इमारतें, ऐतिहासिक रास्ते और कला से जुड़ा माहौल आसानी से महसूस कर पाएंगे। अगर आपको इतिहास और संस्कृति पसंद है, तो यह शहर आपको निराश नहीं करेगा। यहाँ की ‘अड्डा’ संस्कृति आज भी जिंदा है Kolkata की सबसे खास बात यहाँ की अड्डा संस्कृति है। ‘अड्डा’ मतलब दोस्तों या जानने वालों के साथ घंटों बैठकर किसी विषय पर खुलकर बात करना—यहाँ सिर्फ बातचीत नहीं बल्कि विचार-विमर्श भी होता है। राजनीति, कला, किताबें, समाज और रोज़मर्रा की ज़िंदगी तक—हर चीज़ पर लोग बेबाकी से चर्चा करते हैं। College Street के Indian Coffee House जैसी जगहों पर आज भी वही पुराना अड्डा माहौल मिलता है, जहाँ छात्र, लेखक और प्रोफेसर घंटों बैठकर बातें करते हैं। अगर आप Kolkata आएँ तो एक कप कॉफी लेकर यहाँ का अड्डा अनुभव ज़रूर लें। पुरानी राजबाड़ियाँ आज भी शहर की पहचान हैं अगर आपको हवेलियाँ और पुरानी इमारतें पसंद हैं तो Kolkata आपको भाएगा। उत्तर Kolkata की गलियों में कई शानदार राजबाड़ियाँ आज भी मौजूद हैं—बड़े आंगन, ऊँचे खंभे और खूबसूरत बालकनियाँ इन्हें खास बनाती हैं। शोभाबाजार राजबाड़ी और चाटू-बाबू वाली राजबाड़ियाँ पुराने ज़माने की याद दिलाती हैं। दुर्गा पूजा के समय इन राजबाड़ियों की सजावट और भी आकर्षक दिखती है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए ये जगहें बेहतरीन बैकग्राउंड देती हैं। दुर्गा पूजा के समय पूरा शहर बदल जाता है Kolkata घूमने का सबसे खास समय है—दुर्गा पूजा। इस दौरान पूरा शहर रोशनी, रंग और जश्न से भर जाता है। हर इलाके में अलग थीम वाले पंडाल बनते हैं, जिन्हें देखने देश-विदेश से लोग आते हैं। दुर्गा पूजा सिर्फ धार्मिक त्यौहार नहीं है; यह कला, संगीत, समृद्ध संस्कृति और लोगों के उत्साह का महोत्सव है। यही वजह है कि UNESCO ने Kolkata की दुर्गा पूजा को अपनी Intangible Cultural Heritage सूची में शामिल किया। अगर आप इस मौके पर आएँ तो शहर का बिल्कुल अलग रूप देख पाएँगे। किताबों का शहर भी है Kolkata Kolkata किताबों के शौकों के लिए किसी खज़ाने से कम नहीं है। College Street एशिया के सबसे बड़े सेकंड हैंड बुक मार्केट्स में से एक माना जाता है। यहाँ हजारों छोटी-बड़ी किताबों की दुकानें हैं—स्कूल की किताबों से लेकर दुर्लभ साहित्य तक सब कुछ मिलता है। छात्रों, शोधकर्ताओं और किताब प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग जैसी है। यहां की किताबों की खुशबू और दुकानों की कतारें अपने आप में एक अलग अनुभव देती हैं। अगर आप किताबों के शौकीन हैं तो यहाँ घंटों गुज़ार देना चाहेंगे। Kolkata का स्ट्रीट फूड हर किसी का दिल जीत लेता है Kolkata सिर्फ संस्कृति ही नहीं, स्वाद के लिए भी मशहूर है। यहाँ का स्ट्रीट फूड बेहद लाजवाब है और कम बजट में बहुत स्वादिष्ट खाना मिल जाता है। सुबह के नाश्ते से लेकर देर रात तक कई ऑप्शन मौजूद हैं। काठी रोल (कथित रूप से यहीं की उपलब्धि), पुचका (बंगाली गोलगप्पा), झालमुड़ी, घुगनी, लुची-आलू दम, फिश फ्राई और मिष्टी दोई — ये सब चखने लायक हैं। मिठाइयों में रसगुल्ला, संदेश और छेने की बनी चीज़ें बेहद लोकप्रिय हैं। शाम को पार्क स्ट्रीट, न्यू मार्केट और डेकर्स लेन पर खाने का अलग ही मज़ा मिलता है। खाना यहाँ सिर्फ स्वाद नहीं दे देता—यह आपको बंगाल की संस्कृति से भी जोड़ देता है। बंगाल पुनर्जागरण की कई कहानियाँ यहीं से शुरू हुईं Kolkata का नाम आते ही बंगाल पुनर्जागरण की याद आती है। 19वीं-20वीं सदी में यह शहर शिक्षा, समाजसुधार और नई सोच का केंद्र बन गया। राजा राममोहन राय, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद जैसे विचारकों ने यही से बदलाव की शुरुआत की। शहर में मौजूद विक्टोरिया मेमोरियल और कई पुरानी इमारतें उस दौर की कहानी आज भी बताती हैं। इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए ये जगहें बेहद दिलचस्प हैं। ट्राम की सवारी आपको पुराने समय में ले जाएगी आज भी Kolkata वह एकमात्र महानगर है जहाँ ट्राम चलती है। ट्राम में सफर करना सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि अतीत के सफर जैसा अनुभव देता है। शहर के कुछ हिस्सों में हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शे भी मिल जाते हैं—हालाँकि उनकी संख्या कम हो चुकी है, पर ये आज भी शहर की पहचान बनाए हुए हैं। अगर आप कुछ अलग ट्रैवल एक्सपीरियंस चाहते हैं तो ट्राम की सवारी ज़रूर करें। Kolkata घूमने का सही समय और कैसे पहुँचें? Kolkata घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी माना जाता है—इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और शहर की सैर आराम से की जा सकती है। दुर्गा पूजा देखने का मन है तो सितंबर के आखिर या अक्टूबर में प्लान करें। हवाई रास्ते से नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी हब है, और देश के कई बड़े शहरों से यहाँ सीधी फ्लाइट उपलब्ध हैं। ट्रेन से आने वालों के लिए हावड़ा और सियालदह जंक्शन अच्छे कनेक्शन देते हैं। शहर के अंदर मेट्रो, बस, टैक्सी, ट्राम और ऐप कैब आसानी से मिल जाते हैं। Kolkata के आसपास भी घूमने लायक कई जगहें हैं यदि आपके पास एक-दो दिन और हैं तो Kolkata के आसपास

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भारत के Hidden Nature Spot जो Instagram Worthy हैं

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अगर आपको भी लगता है कि हर trip सिर्फ famous tourist places तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए, तो अब वक्त है कुछ ऐसे Hidden Nature spots को explore करने का जो अब भी ज़्यादातर लोगों की नज़रों से दूर हैं। यहां ना सिर्फ़ सुकून मिलता है बल्कि ऐसे views भी मिलते हैं जो आपकी Instagram feed को बिल्कुल next level बना देंगे। भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां झरनों की आवाज़, धुंध से ढके पहाड़, crystal clear lakes, colorful valleys और untouched forests मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि कैमरा अपने आप बाहर आ जाता है। अगर आप crowd से दूर, Nature के करीब और aesthetic photos की तलाश में हैं, तो ये list आपके लिए ही है। 1. मावलिन्नोंग, मेघालय एक ऐसा Village जहां Nature और Cleanliness दोनों का Perfect Combo मिलता है मेघालय का मावलिन्नोंग Village भारत के सबसे clean गांवों में गिना जाता है। यहां की हर गली, हर पेड़ और हर कोना ऐसा लगता है जैसे किसी postcard से निकलकर आया हो। अगर आपको greenery, bamboo houses और peaceful vibes पसंद हैं तो ये जगह आपको ज़रूर impress करेगी। यहां की खास बातें Living Root Bridge यहां का सबसे बड़ा attraction है। Bamboo Sky Walk से पूरे जंगल का शानदार view मिलता है। Village की सफाई और eco-friendly lifestyle देखने लायक है। सुबह की धुंध पूरे माहौल को dreamy बना देती है। क्या देखें? Living Root Bridge Bamboo Sky Walk Bangladesh View Point Local Khasi Village घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से अप्रैल। सुबह का वक्त photography के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है। कैसे पहुंचे? Shillong Airport से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर है। Shillong से taxi आसानी से मिल जाती है। 2. याना रॉक्स, कर्नाटक Black Limestone Rocks के बीच छिपा Nature का शानदार Surprise कर्नाटक के जंगलों के बीच मौजूद Yana Rocks किसी fantasy movie की location जैसे लगते हैं। विशाल काले पत्थर, dense forest और शांत माहौल इसे बेहद unique बनाते हैं। यहां की खास बातें Rare black limestone formations। Nature lovers और trekkers के लिए बेहतरीन destination। Monsoon के दौरान पूरी जगह हरियाली से भर जाती है। Instagram reels के लिए cinematic backdrop। क्या देखें? Yana Rocks Forest Trail Bhairaveshwara Temple Surrounding Nature Walk घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से फरवरी। सुबह और शाम दोनों समय मौसम शानदार रहता है। कैसे पहुंचे? Hubli और Goa दोनों तरफ़ से सड़क मार्ग के जरिए पहुंचा जा सकता है। सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन Kumta है। 3. जूको वैली, नागालैंड Clouds के बीच बसी एक Dream Valley अगर आपने कभी फूलों से भरी घाटी और बादलों के बीच trekking का सपना देखा है, तो Dzukou Valley आपकी bucket list में ज़रूर होनी चाहिए। यहां की खूबसूरती किसी wallpaper से कम नहीं लगती। यहां की खास बातें Monsoon के बाद पूरी valley फूलों से भर जाती है। Sunrise और sunset दोनों बेहद शानदार होते हैं। Trekking lovers के लिए perfect destination। कम भीड़ होने की वजह से Nature बिल्कुल untouched महसूस होता है। क्या देखें? Dzukou Valley Rolling Hills Seasonal Flowers Sunrise Point घूमने का सबसे अच्छा समय जून से सितंबर flowers के लिए और अक्टूबर से दिसंबर trekking के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। कैसे पहुंचे? Dimapur Airport से Kohima पहुंचें, वहां से trek शुरू होता है। 4. तवांग के Sangetsar Lake, अरुणाचल प्रदेश Dead Trees और Blue Water का Magical Combination यह lake बाकी झीलों से बिल्कुल अलग नज़र आती है। पानी के बीच खड़े सूखे पेड़ इसे बेहद cinematic look देते हैं। इसे Madhuri Lake के नाम से भी जाना जाता है। यहां की खास बातें Crystal clear पानी। बर्फीले पहाड़ों का शानदार view। कम tourist होने की वजह से काफी peaceful माहौल। Nature photography के लिए बेहतरीन location। क्या देखें? Sangetsar Lake Snow Covered Mountains Yak Grazing Area Local Cafes घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर। कैसे पहुंचे? Tezpur या Guwahati से Tawang सड़क मार्ग के जरिए पहुंचा जा सकता है। 5. गंधिकोटा, आंध्र प्रदेश भारत का Grand Canyon जिसे बहुत कम लोग जानते हैं Pennar River के किनारे बना Gandikota अपने विशाल canyon views के लिए मशहूर है। Sunset के समय यहां का नज़ारा किसी Hollywood movie जैसा महसूस होता है। यहां की खास बातें Deep canyon views। River और cliffs का शानदार combination। Adventure photography के लिए शानदार spot। Camping का अलग ही मज़ा। क्या देखें? Gandikota Fort Pennar River Canyon View Point Camping Area घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी। कैसे पहुंचे? Kadapa Railway Station सबसे नज़दीक है। वहां से taxi मिल जाती है। 6. पाराशर लेक, हिमाचल प्रदेश पहाड़ों के बीच एक शांत और खूबसूरत Lake समुद्र तल से लगभग 2,700 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद Parashar Lake बेहद शांत और खूबसूरत जगह है। झील के बीच तैरता हुआ छोटा-सा island इसे और भी unique बना देता है। यहां की खास बातें Floating Island इसका सबसे बड़ा attraction है। Snow covered mountains का शानदार view। Trekking और camping दोनों का मज़ा। कम भीड़ होने की वजह से पूरा माहौल बेहद सुकूनभरा रहता है। क्या देखें? Parashar Lake Ancient Temple Mountain Views Sunrise Photography घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर। कैसे पहुंचे? Mandi से taxi या trek दोनों options उपलब्ध हैं। 7. चितरकूट फॉल्स, छत्तीसगढ़     भारत का Niagara जिसे अब भी बहुत लोग Miss कर देते हैं अगर आपने Chitrakote Falls नहीं देखा, तो समझिए आपने भारत का सबसे शानदार waterfall experience miss कर दिया। बारिश के मौसम में इसका विशाल रूप देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। यहां की खास बातें भारत का सबसे चौड़ा waterfall। Monsoon में इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। Drone और landscape photography के लिए शानदार जगह। Sunrise और sunset दोनों बेहद खूबसूरत लगते हैं। क्या देखें? Chitrakote Falls Boating Rainbow View Sunset Point घूमने का सबसे अच्छा समय जुलाई से अक्टूबर। कैसे पहुंचे? Jagdalpur सबसे नज़दीकी शहर है। वहां से सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। Five कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से कुछ सुझाव Hidden Nature spots पर हमेशा plastic और कचरा बिल्कुल

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भारत के 7 सबसे शानदार Sunset Point, जहां डूबता सूरज छोड़ जाता है यादगार मंज़र

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दिन की शुरुआत जितनी खूबसूरत sunrise से होती है, उतना ही दिलकश उसका अंत एक शानदार sunset से होता है। डूबते सूरज की सुनहरी और नारंगी रोशनी, आसमान में बदलते रंग और ठंडी हवा ऐसा माहौल बना देते हैं कि वक्त जैसे कुछ पल के लिए थम जाता है। अगर आप Travel के दौरान ऐसे नज़ारे तलाशते हैं जो कैमरे से ज़्यादा दिल में बस जाएं, तो भारत में कई ऐसे sunset point हैं जो हर Traveller की Bucket List में होने चाहिए। चाहे समुद्र किनारे बैठकर डूबता सूरज देखना हो, पहाड़ों की चोटियों से शाम की आखिरी रोशनी का दीदार करना हो या रेगिस्तान में सुनहरी शाम का मज़ा लेना हो, भारत का हर sunset अपने अंदाज़ में खास है। आइए जानते हैं भारत के 7 सबसे शानदार sunset point के बारे में। 1. Sunset पॉइंट, माउंट आबू (राजस्थान) राजस्थान का इकलौता Hill Station माउंट आबू अपने शानदार sunset के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां मौजूद Sunset Point पर हर शाम सैकड़ों लोग सिर्फ उस पल का इंतज़ार करते हैं, जब सूरज अरावली की पहाड़ियों के पीछे धीरे-धीरे ओझल होता है। नारंगी, गुलाबी और सुनहरे रंगों से रंगा आसमान ऐसा मंज़र पेश करता है जिसे देखकर हर कोई वाह कह उठता है। इस जगह की खास बातें अरावली पर्वतमाला के पीछे डूबता सूरज। शाम का बेहद सुकूनभरा माहौल। Couples, Family और Photography Lovers के लिए Perfect Spot। यहां क्या देखें? Sunset Point Nakki Lake Guru Shikhar Dilwara Jain Temple Honeymoon Point घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च। Sunset से लगभग 45 मिनट पहले पहुंचना सबसे बेहतर रहता है। कैसे पहुंचें? आबू रोड Railway Station से टैक्सी द्वारा लगभग 30 किलोमीटर। 2. कन्याकुमारी (तमिलनाडु) Sunset point भारत का आखिरी छोर कन्याकुमारी सिर्फ sunrise ही नहीं बल्कि शानदार sunset के लिए भी जाना जाता है। यहां अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का संगम है। समुद्र के बीच डूबते सूरज का नज़ारा ऐसा लगता है जैसे पूरा आसमान रंगों की चादर ओढ़ चुका हो। इस जगह की खास बातें तीन समुद्रों के संगम पर शानदार Sunset। पूरे भारत के सबसे खूबसूरत Coastal Views में से एक। Evening Photography के लिए शानदार Location। यहां क्या देखें? Vivekananda Rock Memorial Thiruvalluvar Statue Gandhi Memorial Kanyakumari Beach घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च। कैसे पहुंचें? कन्याकुमारी Railway Station और तिरुवनंतपुरम Airport सबसे नज़दीक हैं। 3. पालोलेम बीच, गोवा Sunset point अगर Beach और sunset दोनों का कॉम्बिनेशन चाहिए, तो Palolem Beach आपकी Bucket List में होना चाहिए। शाम के वक्त यहां का शांत समुद्र, नारियल के पेड़ और डूबते सूरज की सुनहरी किरणें पूरे बीच को Magical बना देती हैं। इस जगह की खास बातें Goa के सबसे शांत Beaches में से एक। Sunset के समय बेहद खूबसूरत Sky Colors। Kayaking और Beach Walk का शानदार Experience। यहां क्या देखें? Palolem Beach Butterfly Beach Boat Ride Local Beach Cafes घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी। कैसे पहुंचें? डाबोलिम Airport और Canacona Railway Station सबसे नज़दीक हैं। 4. डल झील, श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) डल झील पर डूबते सूरज का नज़ारा किसी ख़्वाब से कम नहीं लगता। शाम के समय जब सूरज की सुनहरी रोशनी झील के पानी पर पड़ती है और शिकारे धीरे-धीरे तैरते हुए दिखाई देते हैं, तो पूरा माहौल बेहद दिलनशीं हो जाता है। इस जगह की खास बातें झील में दिखता Sunset का खूबसूरत Reflection। Shikara Ride का यादगार Experience। चारों तरफ बर्फीले पहाड़ों का शानदार View। यहां क्या देखें? Dal Lake Shikara Ride Mughal Gardens Nishat Bagh घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से अक्टूबर। कैसे पहुंचें? श्रीनगर Airport से लगभग 15 किलोमीटर। 5. राधानगर बीच, हैवलॉक द्वीप (अंडमान) Radhanagar Beach को एशिया के सबसे खूबसूरत Beaches में गिना जाता है। यहां का sunset इतना शानदार होता है कि शाम होते ही पूरा Beach सुनहरी रोशनी से चमक उठता है। साफ नीला पानी और सफेद रेत इस नज़ारे को और भी खास बना देते हैं। इस जगह की खास बातें एशिया के सबसे खूबसूरत Beaches में शामिल। Sunset के दौरान शानदार Golden View। Couples और Honeymoon Travellers की पसंदीदा जगह। यहां क्या देखें? Radhanagar Beach Elephant Beach Snorkeling Scuba Diving घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से अप्रैल। कैसे पहुंचें? पोर्ट ब्लेयर से Ferry द्वारा हैवलॉक द्वीप पहुंचा जा सकता है। 6. अगुम्बे, कर्नाटक Western Ghats में बसा Agumbe “Sunset Capital of South India” के नाम से मशहूर है। यहां का sunset मानसून के बाद और भी शानदार दिखाई देता है। हरियाली, घाटियां और बादलों के बीच डूबता सूरज किसी फिल्मी Scene जैसा लगता है। इस जगह की खास बातें South India का सबसे Famous Sunset Spot। Western Ghats का शानदार View। Monsoon के बाद अद्भुत प्राकृतिक नज़ारे। यहां क्या देखें? Agumbe Sunset View Point Rainforest Waterfalls Trekking Trails घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी। कैसे पहुंचें? मंगलुरु Airport से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 2.5 घंटे। 7. माथेरान सनसेट  Sunset पॉइंट, महाराष्ट्र अगर आप मुंबई या पुणे के आसपास Weekend Trip प्लान कर रहे हैं, तो Matheran का sunset ज़रूर देखिए। यहां गाड़ियों की आवाज़ नहीं, सिर्फ़ ठंडी हवा, हरियाली और शाम की सुनहरी रोशनी आपका इस्तकबाल करती है। Sunset Point से घाटियों के पीछे डूबता सूरज बेहद शानदार दिखाई देता है। इस जगह की खास बातें Vehicle-Free Hill Station का अनोखा Experience। घाटियों के बीच शानदार Sunset View। Family, Friends और Solo Travellers सभी के लिए Perfect। यहां क्या देखें? Sunset Point Panorama Point Charlotte Lake Echo Point Local Market घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च। कैसे पहुंचें? नेरल Railway Station से Toy Train या टैक्सी के जरिए माथेरान पहुंचा जा सकता है।  Five कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से कुछ सुझाव Sunset से कम से कम 30–45 मिनट पहले View Point पर पहुंच जाएं। मौसम का Forecast पहले से चेक करें ताकि बादलों की वजह से नज़ारा मिस न हो। Camera, Tripod और Power Bank साथ रखें। Comfortable Shoes पहनें क्योंकि कई Sunset Point तक थोड़ा पैदल चलना पड़ता है। Local Culture और Nature का एहतराम करें। प्लास्टिक या कूड़ा बिल्कुल न फैलाएं। Sunset के बाद अंधेरा जल्दी हो सकता है, इसलिए वापसी का प्लान