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Tatkal Ticket Booking के नए नियम

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भारत में हर दिन लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं। किसी को नौकरी के इंटरव्यू के लिए जाना होता है, किसी को घर में अचानक हुए किसी जरूरी काम के लिए निकलना पड़ता है, तो कोई मेडिकल इमरजेंसी में यात्रा करता है। ऐसे समय में सबसे ज्यादा सहारा Tatkal Ticket Booking का होता है। लेकिन कई लोगों की शिकायत रहती थी कि टिकट खुलते ही कुछ सेकंड में खत्म हो जाते हैं। कई बार वेबसाइट हैंग हो जाती थी और टिकट दलालों के पास पहुंच जाते थे। आम यात्री सिर्फ स्क्रीन देखते रह जाते थे। इन्हीं परेशानियों को देखते हुए भारतीय रेलवे और IRCTC ने Tatkal Ticket Booking के नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद यही है कि टिकट सही व्यक्ति तक पहुंचे और बुकिंग पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी बने। अगर आप भी अक्सर तत्काल टिकट बुक करते हैं, तो ये नए नियम आपके लिए जानना बहुत जरूरी है।  2026 में Tatkal Ticket Booking के नियम क्यों बदले गए? पिछले कुछ सालों से रेलवे को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि टिकट खुलते ही कुछ सेकंड में सारी सीटें खत्म हो जाती हैं। कई लोग बार-बार कोशिश करने के बाद भी टिकट नहीं ले पाते थे। इसकी सबसे बड़ी वजह ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर, फर्जी आईडी और कुछ एजेंट माने जा रहे थे। अब रेलवे चाहता है कि Tatkal Ticket Booking का फायदा सबसे पहले आम यात्रियों को मिले। इसी वजह से नई व्यवस्था लागू की गई है। अब बुकिंग के दौरान पहचान की जांच पहले से ज्यादा मजबूत होगी और फर्जी अकाउंट के जरिए टिकट लेना आसान नहीं रहेगा। रेलवे का मानना है कि इन बदलावों के बाद टिकट सही लोगों तक पहुंचेंगे और सिस्टम पर अनावश्यक दबाव भी कम होगा। अब आधार वेरिफिकेशन के बिना नहीं होगी Tatkal Ticket Booking सबसे बड़ा बदलाव आधार वेरिफिकेशन को लेकर किया गया है। अब अगर आप ऑनलाइन Tatkal Ticket Booking करना चाहते हैं, तो आपका IRCTC अकाउंट आधार से लिंक होना चाहिए। इसके अलावा जिस मोबाइल नंबर से आधार जुड़ा है, उसी पर आने वाला OTP भी दर्ज करना होगा। OTP पूरा होने के बाद ही बुकिंग आगे बढ़ेगी। इस नियम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि एक व्यक्ति कई फर्जी अकाउंट बनाकर टिकट बुक नहीं कर पाएगा। इससे सिस्टम ज्यादा सुरक्षित होगा और टिकट पाने के मौके बढ़ेंगे। अगर आपने अभी तक अपना IRCTC अकाउंट आधार से लिंक नहीं किया है, तो यात्रा से पहले यह काम जरूर पूरा कर लें। आखिरी समय पर ऐसा करने से परेशानी हो सकती है।  दलालों पर कैसे लगेगी रोक? रेलवे ने इस बार एजेंटों के लिए भी नए नियम लागू किए हैं। अब Tatkal Ticket Booking शुरू होने के बाद शुरुआती 30 मिनट तक अधिकृत एजेंट टिकट बुक नहीं कर सकेंगे। इसका मतलब है कि— AC क्लास की बुकिंग सुबह 10 बजे शुरू होती है, इसलिए एजेंट 10:30 बजे के बाद ही टिकट बुक कर पाएंगे।  Sleeper और Non-AC क्लास में भी यही नियम लागू रहेगा। वहां एजेंट आधे घंटे बाद ही बुकिंग कर सकेंगे। इस फैसले का फायदा सीधे आम यात्रियों को मिलेगा क्योंकि शुरुआत के सबसे महत्वपूर्ण 30 मिनट सिर्फ आम लोगों के लिए होंगे। अगर पहले आप टिकट खुलते ही सीट खत्म होने से परेशान रहते थे, तो अब आपके पास टिकट लेने का बेहतर मौका रहेगा।  नई वेबसाइट और ऐप में क्या बदला? IRCTC ने अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप में भी कई बदलाव किए हैं ताकि Tatkal Ticket Booking पहले से ज्यादा तेज हो सके। अब सीट उपलब्धता देखने के लिए बार-बार अलग-अलग पेज खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। एक ही स्क्रीन पर कई क्लास की जानकारी दिखाई देती है। बुकिंग का इंटरफेस भी पहले से ज्यादा आसान बनाया गया है। पुराने समय की तरह हर स्टेप पर बार-बार कैप्चा आने की परेशानी काफी कम कर दी गई है। अगर इंटरनेट स्पीड ठीक है, तो अब पूरी Tatkal Ticket Booking पहले की तुलना में कम समय में पूरी हो सकती है।  बुकिंग के समय कौन-सी बातों का ध्यान रखें? अगर आप चाहते हैं कि टिकट जल्दी मिल जाए, तो बुकिंग शुरू होने से पहले ही सारी तैयारी कर लें। IRCTC अकाउंट में पहले से लॉगिन करके रखें। यात्रियों की जानकारी Master List में सेव कर लें ताकि नाम, उम्र और बाकी जानकारी दोबारा टाइप न करनी पड़े। पेमेंट का तरीका पहले से तय रखें और मोबाइल नेटवर्क भी चेक कर लें। इन छोटी-छोटी बातों से Tatkal Ticket Booking के दौरान काफी समय बच जाता है और टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाती है।  क्या अब टिकट मिलने के चांस पहले से ज्यादा हैं? इस सवाल का जवाब पूरी तरह “हाँ” या “नहीं” में नहीं दिया जा सकता। अगर किसी रूट पर यात्रियों की संख्या बहुत ज्यादा है, तो सीटें आज भी जल्दी खत्म हो सकती हैं। लेकिन नए नियमों के बाद फर्जी बुकिंग और बॉट्स की संख्या कम होने की उम्मीद है। यानी अब Tatkal Ticket Booking पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी होगी और आम यात्रियों को पहले से बेहतर मौका मिलेगा। Token System से काउंटर पर भीड़ होगी कम अगर आप स्टेशन जाकर Tatkal Ticket Booking करवाते हैं, तो आपके लिए भी अच्छी खबर है। रेलवे ने कई स्टेशनों पर नया Token System शुरू किया है। पहले लोगों को सुबह-सुबह लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता था। कई बार घंटों इंतजार करने के बाद भी टिकट नहीं मिल पाता था। अब पहले टोकन मिलेगा और फिर उसी नंबर के हिसाब से आपकी बारी आएगी। इससे धक्का-मुक्की कम होगी और बुकिंग का पूरा सिस्टम पहले से ज्यादा व्यवस्थित रहेगा। अगर आपके शहर के स्टेशन पर यह सुविधा शुरू हो चुकी है, तो लाइन में लगने के बजाय पहले टोकन लेना ज्यादा आसान रहेगा।  Waiting Ticket वालों के लिए क्या बदला है? बहुत से लोग सोचते हैं कि Waiting Ticket लेकर किसी भी कोच में सफर किया जा सकता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अगर आपकी Tatkal Ticket Booking Waiting में रह जाती है और टिकट Confirm नहीं होता, तो आपको नियमों का पालन करना होगा। ई-टिकट Confirm नहीं होने पर वह अपने आप Cancel हो जाता है और

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Verification जरूरी! तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव

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अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं, तो तत्काल टिकट बुक करने की परेशानी से जरूर गुजरे होंगे। सुबह टिकट बुकिंग शुरू होते ही लाखों लोग एक साथ वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर लॉगिन करने की कोशिश करते हैं। कुछ ही मिनटों में सीटें भर जाती हैं और बहुत से यात्रियों को कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। कई बार तो यात्री अपनी सारी जानकारी भरने के बाद भुगतान तक पहुंच जाते हैं, लेकिन तब तक टिकट खत्म हो चुका होता है। इसके पीछे एक बड़ी वजह टिकटों की कालाबाजारी और बॉट्स यानी अपने आप काम करने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम भी माने जाते हैं। इसी समस्या को रोकने के लिए रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग में Verification की प्रक्रिया को जरूरी बनाया है। हाल ही में केरल हाई कोर्ट ने ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग में आधार आधारित Verification को सही माना है। अदालत के सामने यह सवाल था कि क्या ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार से जुड़ी पहचान की प्रक्रिया जरूरी की जा सकती है। अदालत ने इस व्यवस्था को सही मानते हुए कहा कि अगर इसका उद्देश्य टिकटों की कालाबाजारी रोकना और असली यात्रियों को टिकट दिलाना है, तो ऐसी Verification प्रक्रिया सार्वजनिक हित में हो सकती है। समस्या की शुरुआत कहां से हुई? इस पूरे मामले की शुरुआत उस समस्या से होती है जिससे आम यात्री लंबे समय से परेशान हैं। तत्काल टिकट की बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में बड़ी संख्या में टिकट बुक हो जाते हैं। कई यात्रियों का आरोप रहा है कि दलाल और कुछ विशेष कंप्यूटर प्रोग्राम बहुत तेजी से टिकट बुक कर लेते हैं। इसके बाद वही टिकट अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश की जाती है। ऐसे में जो व्यक्ति वास्तव में यात्रा करना चाहता है, वह टिकट के लिए परेशान होता रहता है। रेलवे का कहना है कि नई Verification व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य इसी तरह की गड़बड़ियों को कम करना है। रेलवे ने ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार आधारित Verification को अनिवार्य किया है। इसका मतलब है कि जो यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से तत्काल टिकट बुक करना चाहते हैं, उन्हें अपने खाते की पहचान की पुष्टि करनी होगी। इस प्रक्रिया में यात्री की पहचान आधार से जुड़ी जानकारी और मोबाइल पर आने वाले एक बार इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड के जरिए जांची जाती है। इस Verification के बाद रेलवे को यह समझने में मदद मिलती है कि टिकट बुक करने वाला व्यक्ति वास्तविक यात्री है या किसी तरह का स्वचालित कार्यक्रम। Verification का मतलब क्या है? यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है कि Verification का मतलब यह नहीं है कि हर बार टिकट बुक करते समय आपको पूरी प्रक्रिया दोहरानी होगी। आमतौर पर खाता सत्यापित होने के बाद यह प्रक्रिया एक बार पूरी करनी होती है। इसके बाद यात्री को तत्काल टिकट बुक करते समय पहले से तैयार खाते के साथ आगे बढ़ने में आसानी होती है। इसलिए अगर आप नियमित रूप से तत्काल टिकट बुक करते हैं, तो पहले से अपनी पहचान Verification पूरी कर लेना आपके लिए काफी उपयोगी हो सकता है। रेलवे ने टिकट बुकिंग में बॉट्स और स्वचालित कार्यक्रमों को रोकने के लिए कई स्तरों पर Verification व्यवस्था मजबूत की है। पहले कई बार ऐसा होता था कि टिकट बुकिंग शुरू होते ही कुछ खाते असामान्य तेजी से बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे। ऐसे खातों की पहचान करना रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती थी। अब पहचान Verification, मोबाइल नंबर की पुष्टि और कंप्यूटर प्रणाली की निगरानी के जरिए संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। केरल हाई कोर्ट के फैसले में निजता का मुद्दा केरल हाई कोर्ट के फैसले में निजता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। याचिका में यह सवाल उठाया गया था कि क्या किसी व्यक्ति को तत्काल टिकट बुक करने के लिए आधार Verification से गुजरना जरूरी किया जा सकता है। अदालत ने इस मामले में माना कि रेलवे का उद्देश्य टिकटों की धोखाधड़ी और कालाबाजारी को रोकना है। अगर Verification का इस्तेमाल सीमित उद्देश्य के लिए किया जाता है और यात्रियों की जानकारी को सुरक्षित रखा जाता है, तो यह व्यवस्था असली यात्रियों के हित में हो सकती है। रेलवे की ओर से यह भी बताया गया है कि आधार नंबर को सीधे अपने पास रखने के बजाय पहचान की पुष्टि के लिए सीमित जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि यात्री की पहचान सही है या नहीं। इस तरह की Verification व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि टिकट बुकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाना बताया गया है। क्या बिना आधार Verification के तत्काल टिकट नहीं मिलेगा? अब सवाल यह है कि क्या आधार Verification के बिना तत्काल टिकट बुक नहीं किया जा सकता? ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के मामले में आधार आधारित Verification जरूरी है। हालांकि रेलवे काउंटर से टिकट लेने की प्रक्रिया अलग हो सकती है। अगर कोई यात्री ऑनलाइन बुकिंग नहीं करना चाहता, तो वह रेलवे के टिकट काउंटर से उपलब्ध नियमों के अनुसार टिकट लेने का विकल्प चुन सकता है। इसलिए यात्रियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट बुकिंग के नियमों के बीच अंतर समझना चाहिए। तत्काल टिकट बुकिंग में अधिकृत एजेंटों के लिए भी रेलवे ने अलग नियम बनाए हैं। एजेंटों को तत्काल टिकट खुलते ही शुरुआती समय में बुकिंग करने की अनुमति नहीं होती। इसका उद्देश्य यह है कि आम यात्री को टिकट बुक करने का पहला मौका मिले। पहले कई यात्रियों की शिकायत थी कि टिकट खुलते ही बड़ी संख्या में सीटें बुक हो जाती हैं और आम लोगों के लिए बहुत कम विकल्प बचते हैं। एजेंटों पर समय सीमा और Verification नियम लागू करने से इस समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है। IRCTC खाता Verification कैसे करें? अगर आप अपना आईआरसीटीसी खाता Verification करना चाहते हैं, तो यह प्रक्रिया बहुत मुश्किल नहीं है। आपको अपने खाते में जाकर पहचान Verification से जुड़े विकल्प को चुनना होता है। इसके बाद मांगी गई जानकारी भरनी होती है और मोबाइल पर आए पासवर्ड के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यह काम टिकट बुकिंग

Tatkal Ticket टिकट बुकिंग में बदलाव: शुरू हुआ टोकन सिस्टम! Travel Travel News & Information

Tatkal Ticket टिकट बुकिंग में बदलाव: शुरू हुआ टोकन सिस्टम!

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भारत में Indian Railways दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क माना जाता है। हर दिन करोड़ों लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा, इलाज और पारिवारिक कारणों से ट्रेन के जरिए यात्रा करते हैं। ऐसे में अचानक यात्रा की जरूरत पड़ने पर अधिकांश यात्री Tatkal Ticket प्रणाली पर निर्भर रहते हैं। Tatkal Ticket बुकिंग भारतीय रेलवे की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली सेवाओं में से एक है। लेकिन वर्षों से इस व्यवस्था को लेकर यात्रियों की कई शिकायतें सामने आती रही हैं। स्टेशन काउंटरों पर लंबी लाइनें लगना, घंटों इंतजार करना, धक्का-मुक्की होना और टिकट खत्म हो जाना जैसी समस्याएं आम बात बन चुकी थीं। त्योहारों, छुट्टियों और परीक्षा सीजन के दौरान यह स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती थी। कई यात्री रात से स्टेशन पहुंचकर लाइन में लग जाते थे, लेकिन फिर भी उन्हें टिकट नहीं मिल पाता था। यही वजह है कि रेलवे लंबे समय से इस व्यवस्था को सुधारने के लिए नए उपाय तलाश रहा था। इसी दिशा में अब कोटा मंडल के सभी स्टेशनों पर टोकन प्रणाली लागू की गई है, जिसे रेलवे एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देख रहा है। आखिर क्या है यह नया टोकन सिस्टम? नई टोकन प्रणाली का उद्देश्य Tatkal Ticket बुकिंग को अधिक अनुशासित और व्यवस्थित बनाना है। इस व्यवस्था के तहत अब यात्रियों को सीधे लाइन में खड़े होने के बजाय पहले टोकन लेना होगा। टोकन पर एक क्रम संख्या और समय दिया जाएगा। इसके बाद यात्रियों को उसी क्रम के अनुसार टिकट काउंटर पर बुलाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि अब यात्रियों को घंटों लाइन में खड़े रहने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें केवल अपने नंबर का इंतजार करना होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और टिकट वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई है। कोटा मंडल में इस सिस्टम की जरूरत क्यों महसूस हुई? कोटा मंडल भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्त रेल मंडलों में से एक माना जाता है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री Tatkal Ticket बुक कराने के लिए स्टेशनों पर पहुंचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन टिकट काउंटरों की व्यवस्था पर दबाव भी उसी अनुपात में बढ़ा। कई स्टेशनों पर Tatkal Ticket खुलते ही भारी भीड़ जमा हो जाती थी। (Tatkal Ticket) यात्रियों की शिकायत थी कि कई बार लाइन में अनुशासन नहीं रहता और कुछ लोग अव्यवस्था का फायदा उठाकर आगे निकल जाते हैं। इसके अलावा दलालों की सक्रियता को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। रेलवे ने इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की है, ताकि हर यात्री को समान अवसर मिल सके। अब यात्रियों को कैसे मिलेगा Tatkal Ticket? नई व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को सबसे पहले स्टेशन पहुंचकर टोकन लेना होगा। इसके बाद रेलवे कर्मचारी उन्हें क्रम संख्या के अनुसार बुलाएंगे और फिर टिकट बुकिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि टिकट वितरण पूरी तरह क्रमबद्ध तरीके से हो और किसी भी यात्री को अनुचित लाभ न मिले। रेलवे का मानना है कि इससे बुजुर्ग यात्रियों, महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें घंटों लाइन में खड़े होकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। क्या इससे टिकट दलालों पर रोक लगेगी? Tatkal Ticket बुकिंग के दौरान दलालों की सक्रियता लंबे समय से रेलवे के लिए बड़ी चुनौती रही है। कई यात्रियों का आरोप रहा है कि आम लोगों को टिकट नहीं मिल पाता, जबकि दलाल बड़ी संख्या में टिकट हासिल कर लेते हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि टोकन प्रणाली से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। (Tatkal Ticket ) क्योंकि अब हर यात्री को क्रम संख्या के आधार पर ही टिकट मिलेगा, इसलिए पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखना आसान होगा। इससे लाइन तोड़ने और अव्यवस्था फैलाने जैसी घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टोकन प्रणाली से दलाली पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन इससे पारदर्शिता जरूर बढ़ेगी और आम यात्रियों को राहत मिलेगी। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के बावजूद काउंटर सिस्टम क्यों जरूरी है? आज IRCTC के जरिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद देश के लाखों यात्री अब भी स्टेशन काउंटरों पर निर्भर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और तकनीकी जानकारी की कमी वाले यात्रियों के लिए स्टेशन काउंटर सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है। कई लोगों के पास तेज इंटरनेट या डिजिटल भुगतान की सुविधा नहीं होती, इसलिए वे सीधे स्टेशन पहुंचकर टिकट लेना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं। इसी वजह से रेलवे स्टेशन स्तर पर बुकिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने पर लगातार काम कर रहा है। क्या भविष्य में यह व्यवस्था पूरे देश में लागू हो सकती है? रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अगर कोटा मंडल में यह प्रयोग सफल साबित होता है तो आने वाले समय में इसे दूसरे रेल मंडलों में भी लागू किया जा सकता है। भारतीय रेलवे लगातार अपनी सेवाओं को आधुनिक और यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि बड़े शहरों और व्यस्त स्टेशनों पर भी भविष्य में इसी तरह की टोकन प्रणाली लागू हो सकती है। (Tatkal Ticket ) यात्रियों की प्रतिक्रिया कैसी है? नई टोकन प्रणाली को लेकर यात्रियों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई यात्रियों का कहना है कि इससे उन्हें लाइन में लगने और भीड़ का सामना करने से राहत मिलेगी। कुछ यात्रियों ने यह भी कहा कि अगर व्यवस्था सही तरीके से लागू की जाए तो टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा आसान और पारदर्शी हो सकती है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि शुरुआत में नई प्रणाली को समझने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन लंबे समय में यह फायदेमंद साबित हो सकती है। कोटा मंडल के स्टेशनों पर शुरू की गई नई टोकन प्रणाली भारतीय रेलवे की उस सोच को दर्शाती है जिसमें यात्रियों की सुविधा, पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। Tatkal Ticket बुकिंग को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के बीच यह कदम एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा