Khari Baoli: पुरानी दिल्ली की मशहूर मसाला मंडी
पुरानी दिल्ली की गलियों में घूमते हुए आपको कहीं पराठों की खुशबू मिलेगी, कहीं चाट की दुकानों पर भीड़ दिखाई देगी, तो कहीं पुरानी हवेलियों के दरवाजे आपका ध्यान खींच लेंगे। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी जगह भी है, जहां पहुंचते ही हवा में मसालों की खुशबू घुली हुई महसूस होती है। लाल मिर्च, हल्दी, इलायची, दालचीनी, काली मिर्च और सूखे मेवों से भरी दुकानें इस जगह को बाकी बाजारों से बिल्कुल अलग बनाती हैं। यह जगह है दिल्ली की मशहूर Khari Baoli। पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में मौजूद Khari Baoli को एशिया की सबसे बड़ी थोक मसाला मंडियों में गिना जाता है। यहां सिर्फ मसाले ही नहीं मिलते, बल्कि सूखे मेवे, चाय, जड़ी-बूटियां, दालें और खाने-पीने से जुड़ी कई दूसरी चीजें भी मिलती हैं। सुबह से ही यहां व्यापारियों, मजदूरों, दुकानदारों और खरीदारी करने आए लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है। Khari Baoli की खास बात यह है कि यहां आपको दिल्ली का एक ऐसा रूप देखने को मिलता है, जो बड़े मॉल और चमकदार बाजारों से बिल्कुल अलग है। यहां दुकानों के बाहर रखी बोरियां, सामान ढोते मजदूर, ग्राहकों से बात करते दुकानदार और गलियों में फैली मसालों की खुशबू मिलकर एक अलग ही माहौल बनाते हैं। Khari Baoli का इतिहास: एक बावली से शुरू हुआ नाम Khari Baoli का नाम सुनकर सबसे पहले मन में सवाल आता है कि आखिर इस बाजार का नाम ऐसा क्यों पड़ा? दरअसल, इस नाम का संबंध यहां कभी मौजूद एक पुरानी बावली से माना जाता है। बावली यानी सीढ़ियों वाला कुआं और खारी का मतलब है ऐसा पानी जिसमें नमक या खारापन हो। इसी वजह से इस जगह को Khari Baoli कहा जाने लगा। दिल्ली सरकार के शाहजहानाबाद से जुड़े ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, मुगल बादशाह शाहजहां के समय इस इलाके में बावली का निर्माण हुआ था। उस दौर में यह जगह शाहजहानाबाद का हिस्सा थी, जिसे आज हम पुरानी दिल्ली के नाम से जानते हैं। बावली के साथ यहां एक दरवाजे का भी जिक्र मिलता है, लेकिन आज उस पुराने जलस्रोत का कोई साफ निशान दिखाई नहीं देता। समय के साथ उसके आसपास बाजार और दुकानें बसती चली गईं और यह इलाका कारोबार का बड़ा केंद्र बन गया। शाहजहां ने जब दिल्ली में अपनी नई राजधानी शाहजहानाबाद बसाई, तब शहर में कई बाजार, सड़कें, सराय और व्यापारिक इलाके विकसित हुए। चांदनी चौक भी इसी दौर में एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभरा। Khari Baoli इसी बड़े व्यापारिक इलाके के पश्चिमी हिस्से में स्थित थी। यहां खाने-पीने का सामान, अनाज और मसालों का कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया। आज Khari Baoli में वह पुरानी बावली मौजूद नहीं है, लेकिन उसका नाम इस बाजार की पहचान बन चुका है। यही बात इस जगह को खास बनाती है। एक पुराने जलस्रोत के नाम से पहचानी जाने वाली यह गली आज दुनिया के बड़े मसाला व्यापार केंद्रों में गिनी जाती है। एशिया की सबसे बड़ी थोक मसाला मंडी Khari Baoli में कदम रखते ही सबसे पहले आपका ध्यान यहां की दुकानों पर जाएगा। कहीं लाल मिर्च की बोरियां रखी हैं, कहीं हल्दी के ढेर दिखाई देते हैं, तो कहीं इलायची और काली मिर्च की खुशबू हवा में फैली रहती है। यहां मसालों की इतनी किस्में मिलती हैं कि पहली बार आने वाला व्यक्ति कुछ देर के लिए दुकानों को देखता ही रह जाता है। यहां हल्दी, धनिया, जीरा, सौंफ, मेथी, अजवाइन, लौंग, दालचीनी, काली मिर्च, बड़ी इलायची, छोटी इलायची, जायफल और केसर जैसे मसाले मिलते हैं। इसके अलावा अलग-अलग तरह की लाल और हरी मिर्च, सूखी जड़ी-बूटियां और कई खास मसाला मिश्रण भी दुकानों पर उपलब्ध रहते हैं। Khari Baoli की ज्यादातर पहचान थोक कारोबार से जुड़ी है। यहां कई व्यापारी बड़ी मात्रा में मसाले खरीदने आते हैं। छोटे दुकानदार, किराना कारोबारी, होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य पदार्थों से जुड़े व्यवसायों के लोग भी अपनी जरूरत के हिसाब से सामान लेते हैं। हालांकि, कुछ दुकानों पर आम ग्राहक भी कम मात्रा में खरीदारी कर सकते हैं। इस बाजार की एक खास बात यह है कि यहां मसाले सिर्फ पैकेट में बंद नहीं मिलते। कई दुकानों पर खुले बोरे और बड़े-बड़े डिब्बे रखे होते हैं। ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार मसाले देख सकते हैं, उनकी खुशबू पहचान सकते हैं और दुकानदार से उनके बारे में जानकारी भी ले सकते हैं। यहां सिर्फ मसाले नहीं, सूखे मेवों की भी भरमार है अगर आपको लगता है कि Khari Baoli में सिर्फ हल्दी, मिर्च और धनिया ही मिलेगा, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह बाजार सूखे मेवों और खाने-पीने की कई दूसरी चीजों के लिए भी जाना जाता है। यहां बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, पिस्ता, अंजीर, खजूर और छुहारे जैसी चीजें अलग-अलग दुकानों पर मिलती हैं। कई दुकानों में चाय की अलग-अलग किस्में भी रखी होती हैं। इसके अलावा मखाना, साबूदाना, बीज, सूखे फल और कई तरह के खाद्य पदार्थ भी यहां मिल जाते हैं। त्योहारों के मौसम में इस बाजार की रौनक और बढ़ जाती है। दिवाली, होली, ईद और शादी-ब्याह के समय लोग मिठाइयों, पकवानों और खास व्यंजनों के लिए मसाले और सूखे मेवे खरीदने आते हैं। घरों में बनने वाले अचार, नमकीन और मसाला मिश्रण के लिए भी यहां कई तरह का सामान मिलता है। Khari Baoli की दुकानों पर घूमते हुए आपको यह समझ आता है कि भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीजों की दुनिया कितनी बड़ी है। एक ही मसाले की कई किस्में हो सकती हैं और हर किस्म का स्वाद, रंग और खुशबू अलग हो सकती है। Gadodia Market: Khari Baoli के अंदर बसा एक खास बाजार Khari Baoli की बात हो और Gadodia Market का जिक्र न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह बाजार Khari Baoli की पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां मसालों की कई दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। Gadodia Market का निर्माण बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में सेठ लक्ष्मी नारायण गडोदिया से जुड़ा माना जाता है। इसकी इमारत की बनावट आसपास की दुकानों से थोड़ी अलग दिखाई देती है। इसमें कई मंजिलें, गलियारे और बीच में खुला हिस्सा है, जो इसे देखने लायक बनाता है। इस बाजार में घूमते हुए आपको पुरानी दिल्ली के व्यापारिक इतिहास की झलक मिलती