Travel News: 80 की उम्र में गजब का जज्बा! लद्दाख के 19 हजार फीट ऊंचे उमलिंग ला पास पहुंचीं दादी जी, युवाओं को मिला नया ट्रैवल गोल
Travel News लेह । दुनिया में घूमने-फिरने और कुछ नया एक्सप्लोर करने की कोई तय उम्र नहीं होती। इंसान का अगर हौसला बुलंद हो, तो रास्ते की हर मुश्किल आसान हो जाती है। सोशल मीडिया और ट्रैवलिंग की दुनिया में इस समय 80 साल की एक बुजुर्ग महिला की बहादुरी और जज्बे की खूब चर्चा हो रही है। इस उम्र में जहां लोग आमतौर पर घर में आराम करना पसंद करते हैं और मुश्किल रास्तों पर सफर करने से बचते हैं, वहीं इन दादी जी ने दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल पास (Umling La Pass) पर तिरंगा फहराकर एक नया इतिहास रच दिया है। Leh Ladakh Tour Guide Best Time to Visit, Inspiring Travel Stories India, Ladakh India China Border Tourism सपनों को जीने और उन्हें पूरा करने की चाह रखने वालों के लिए यह खबर किसी बड़े मोटिवेशन से कम नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इस बुजुर्ग महिला का एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड और बेहद कम ऑक्सीजन वाले इलाके में मुस्कुराती हुई नजर आ रही हैं। उनका यह सफर आज की युवा पीढ़ी को घर से बाहर निकलने और दुनिया देखने के लिए प्रेरित कर रहा है। भारत की पहली Hydrogen Train: जानिए कैसे बदलेगी Indian Railways की तस्वीर इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ वीडियो: इंटरनेट पर लोग कर रहे सलाम इंटरनेट पर thetravelist.in नाम के एक पॉपुलर ट्रैवल पेज से इस जांबाज दादी जी का वीडियो शेयर किया गया है। वीडियो के कैप्शन में एक बेहद खूबसूरत बात लिखी गई है कि ‘जब आपका जज्बा जवान हो, तो उम्र सिर्फ एक कागज पर लिखी संख्या बनकर रह जाती है। 80 साल की उम्र में दादी जी ने 19,024 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल पास उमलिंग ला पर पहुंचकर यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई रिटायरमेंट की उम्र नहीं होती है।’ वीडियो सामने आने के बाद से ही देश भर के मुसाफिर और आम लोग दादी जी के इस अदम्य साहस को सलाम कर रहे हैं। इतनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उनके चेहरे की खुशी देखने लायक है। Private Train : 10 Amazing Facts, पूरी ट्रेन कैसे बुक करें? क्यों बेहद खतरनाक माना जाता है उमलिंग ला पास? उमलिंग ला पास कोई आम टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं है, जहाँ कोई भी आसानी से गाड़ी उठाकर चला जाए। खतरनाक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन: लद्दाख में भारत-चीन सीमा के बेहद करीब स्थित यह पास समुद्र तल से 19,024 फीट की ऊंचाई पर है। इस ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से लगभग आधा हो जाता है, जिससे अच्छे-भले नौजवानों को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगती है। हड्डियां गला देने वाली ठंड: यहाँ का मौसम पल भर में बदल जाता है और तेज बर्फीली हवाएं चलती हैं। ऐसे दुर्गम और संवेदनशील इलाके में 80 साल की महिला का सुरक्षित पहुंचना अपने आप में एक अद्भुत रिकॉर्ड और चिकित्सा के नजरिए से भी एक चमत्कार जैसा है। ट्रैवलर गाइड: आप कैसे पहुंच सकते हैं उमलिंग ला पास? Private Train : 10 Amazing Facts, पूरी ट्रेन कैसे बुक करें? अगर आप भी दादी जी के इस सफर से प्रेरित होकर लद्दाख के इस अजेय रास्ते को फतह करना चाहते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें: हवाई मार्ग (Air Travel): उमलिंग ला पास पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा लेह (Leh Airport) है। लेह देश के सभी प्रमुख शहरों से डायरेक्ट फ्लाइट्स के जरिए अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग (Road Trip): अगर आप अपनी बाइक या कार से जाना चाहते हैं, तो पहले आपको लेह पहुंचना होगा। लेह से आगे का सफर तय करने के लिए आप स्थानीय टैक्सी किराए पर ले सकते हैं। इस पूरे रास्ते में आपको प्रकृति के बेहद खूबसूरत, पथरीले और मनमोहक नजारे देखने को मिलेंगे। विजिटिंग टिप्स: किस महीने में जाना रहता है सबसे सुरक्षित? मई से सितंबर (बेस्ट सीजन): लद्दाख के इस ऊंचे दर्रे की यात्रा के लिए मई से सितंबर के बीच का समय सबसे सही और मुफीद माना जाता है। इस दौरान यहाँ बर्फबारी कम होती है, सड़कें पूरी तरह खुली रहती हैं और मौसम यात्रा के अनुकूल रहता है। अक्टूबर से अप्रैल (नो-गो जोन): इन महीनों में यहाँ हाड़ कंपाने वाली भीषण ठंड पड़ती है। भारी बर्फबारी के कारण सड़कें हफ्तों तक बंद हो जाती हैं और आम सैलानियों के लिए सफर करना पूरी तरह नामुमकिन हो जाता है। दादी जी की इस अविश्वसनीय यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की ठान ली जाए, तो उम्र की सीमाएं खुद-ब-खुद छोटी हो जाती हैं। अब देखना यह है कि दादी जी से प्रेरणा लेकर कितने युवा अपने कमरों से बाहर निकलते हैं और लद्दाख की इन हसीन वादियों का रुख करते हैं।