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Best Places to Visit in Jaisalmer

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Jaisalmer: जैसलमेर – रेगिस्तान, शानदार किलों, पुरानी हवेलियों और राजसी ठाठ-बाट का शहर by Pardeep Kumar पिछले काफी अरसे से मैं राजस्थान घूमने का प्लान कर रहा था। क्योंकि राजस्थान शब्द सुनते ही ज़ेहन में खूबसूरत महलों, शानदार किलों और वीरों के इतिहास की झांकी तैरने लगती है। पूरा राजस्थान ऐतिहासिक सांस्कृतिक और प्राकृतिक सौंदर्य से जगमग है। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज यह “रजवाड़ों की धरती” भारत के सबसे बड़े पर्यटक स्थलों में से एक है। मीलों तक फैली सुनहरी रेत पर अनेक विजय गाथाओं के साक्षी रहे यहाँ के दुर्ग, पिंक सिटी, झीलों का शहर, गोल्डन सिटी, बीकानेरी भुजिया, गजब वास्तुकला, मुँह में पानी लाने वाले व्यंजन, आदिवासी गाँव, तीर्थ स्थल और रंगीन त्यौहार जैसी अनोखी चीज़ें न केवल राजस्थान को दूसरों से अलग करती है बल्कि नायाब भी बनाती हैं।(Jaisalmer) और अगर आपको सोने जैसी रेत वाला रेगिस्तान, शानदार किलें, पुरानी हवेलियां और राजसी ठाठ-बाट की झलक देखनी हो तो हो देश के पश्चिमी कोने में स्थित जैसलमेर से बेहतरीन दूसरा कोई डेस्टिनेशन नहीं। हम दिल्ली से सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रैन से जैसलमेर के लिए रवाना हुए । लगभग 15 घंटे के सफर के बाद हम जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। शायद उस समय रात के एक बजे थे। होटल बुक था और उन्होंने टैक्सी पहले ही भेज दी थी इसलिए किसी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। जब भी आप ट्रैन से ऐसे किसी भी डेस्टिनेशन पर जाएँ तो होटल और टैक्सी का इंतज़ाम पहले ही कर लें। आजकल सब ऑनलाइन है इसलिए बहुत ज्यादा चिंता की बात है नहीं। मेरे लिए यात्रा का मतलब सिर्फ घूमना कभी नहीं रहा। यात्रा मेरे लिए हमेशा से अपना सर्वोत्तम समय व्यतीत करना रहा है। चाहे जिस भी डेस्टिनेशन की यात्रा का प्रोग्राम बने, वहां के परिवेश को समझना और किस तरह ये रहन-सहन हमारे परिवेश से अलग है, ये भी जानना मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता रहा है। बचपन में परिवार के साथ घूमने का कार्यक्रम बनता था, पर वक़्त के साथ जैसे बड़े हुए, कमाने लगे या यूँ कह लीजिये आर्थिक रुप से मजबूत हुए तो यात्रायें करना थोड़ा आसान हो जाता है , फिर तो जब भी मन किया निकल पड़े किसी नई जगह। क्योंकि अगर आप आर्थिक रूप से थोड़े सक्षम हैं तो फिर किसी तरह की कोई टेंशन नहीं रहती आपका जहाँ मन करें उड़ जाइये। खूब घूमिये और खान-पान का आनंद लीजिये। किस समय यहाँ आना सबसे बेहतर वैसे तो साल भर यहाँ पर्यटकों और खरीददारों का आना लगा रहता है लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहाँ आने के लिए बेस्ट रहता है। क्योंकि देखा जाए तो राजस्थान में साल भर गर्मी ही रहती है। आप जब भी कहीं घूमने जाएँ, किस दिन कहाँ जाना है? क्या देखना है? सब का शेड्यूल पहले ही बना लें। इसका फायदा ये होता है आप बिना किसी फालतू की आपाधापी के इत्मीनान से उस जगह को विजिट कर लेते हैं। इसलिए हमने अगले तीन दिन का पूरा शेड्यूल बना लिया था।(Jaisalmer) गोल्डन फोर्ट (सोनार किला) सुबह हमने नाश्ते में स्वादिष्ट पोहा और कड़क चाय को प्राथमिकता दी। एक प्याला कड़क चाय आपके सफर को ऊर्जामयी बना देता है। अच्छे से नाश्ता किया और निकल पड़े जैसलमेर के किले की तरफ। यहां जाएं तो सबसे पहले दिन के समय में जैसलमेर किला विजिट कर लें। क्योंकि एक तो ये काफी बड़ा है दूसरा बेहद खूबसूरत भी। इसे सोनार किला कहते हैं और यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रेगिस्तानी किलों में से एक माना जाता है। सुबह-सुबह के समय जब सूरज की चमकीली किरणें इस किले पर पड़ती हैं तो यह पीले रंग से दमक उठता है। यह सोनार किला पीले सेन्ड स्टोन पत्थरों को जोड़कर बनाया गया है। ये किला जितना खूबसूरत है उतने ही रोचक तरीके से इसका निर्माण भी हुआ है। इस किले को राजपूत राजा रावल जैसल ने बनवाया था। इस किले के चारों ओर बनाये गए गढ़ों से आप इसकी विशालता और भव्यता का आंकलन कर सकते हैं। हम जैसे ही किले के मुख्य द्वार पर पहुंचे शानदार नक्काशी और वास्तुकला का नमूना देखने को मिला। यहाँ आने वाले पर्यटकों को लुभाने के लिए जैसे ये मुख्य द्वार ही काफी है। मुख्य द्वार के पास से ही परम्परागत वस्तुओं की खरीददारी के लिए बाजार शुरू हो जाता है। जहाँ से आप ट्रेडिशनल चीजों की शॉपिंग कर सकते हैं। वैसे इस किले में अखे पोल, सूरज पोल, गणेश पोल और हवा पोल नामक चार दरवाजे हैं। किले में अंदर आपको मोती महल, रंग महल और राज विलास जैसे स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने दिखाई देंगे। किले के अंदर ही खूबसूरत जैन मंदिर भी है। यह किला शहर के बीचों-बीच बना हुआ है। दिन के समय सूरज की रोशनी में इस किले की दीवारे हल्के सुनहरे रंग की दिखती है. इसी कारण इस किलें को सोनार किला या गोल्डन फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। देश भर में अनेक किले ऐसे हैं जिनको आलीशान होटलों में बदल दिया गया है लेकिन जैसलमेर के किले की यही सबसे बड़ी खासियत है कि आज भी यह अपने पुराने स्वरुप में मौज़ूद है। इसलिए शायद इसे लाइव फोर्ट भी कहा जाता है। फिलहाल इस किले के अंदर पांच हजार के लगभग लोग रहते हैं जो यहाँ आने-जाने वाले ट्यूरिस्ट के जरिये ही अपना गुजर बसर कर रहे हैं। अंदर एक चाट पापड़ी वाले ने हमें बताया कि किले में एक हजार से भी अधिक लोग फ्री में रहते हैं वो यहाँ रहने के लिए किसी भी तरह का रेंट नहीं चुकाते। हम ने जब इस बात की तस्दीक की तो हमें यह जानकार हैरानी हुई कि यह बात बिलकुल सही है। कहते हैं राजा रावल जैसल सेवादारों की सेवा से बहुत खुश हुए थे। इसलिये उन्होंने उन सेवादारों को किलें में रहने देने का फैसला किया। तब से आज तक सेवादारों के वंशज इस किले में बिना किराया दिए मुफ्त में रहते हैं। इस किले में रहने वालों की आबादी के हिसाब से यह दुनिया भर के किलों में अलग स्थान रखता है। हम अनेक छोटी-छोटी रिहायशी गलियों से होकर इस किले के ऊपरी हिस्से में पहुंचे जहाँ एक विशाल तोप