Safdarjung Tomb Delhi Travel

Safdarjung Tomb की 8 Magical चीजें जो इसे बनाती हैं Special!

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दिल्ली में घूमने के लिए बहुत सारी ऐतिहासिक जगहें हैं, लेकिन उनमें से कुछ ऐसी भी हैं जो ज्यादा चर्चा में नहीं आतीं, फिर भी अपने अंदर एक अलग ही आकर्षण और शांति लिए होती हैं। Safdarjung Tomb उन्हीं जगहों में से एक है, जहाँ आपको भीड़-भाड़ से दूर एक सुकून भरा अनुभव मिलता है। अक्सर लोग Humayun’s Tomb जैसी मशहूर जगहों पर जाते हैं, लेकिन अगर आप थोड़ा अलग और शांत माहौल में इतिहास को महसूस करना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है। यहाँ पहुँचते ही आपको ऐसा महसूस होता है जैसे शहर की भागदौड़ पीछे छूट गई हो और आप किसी पुराने दौर की शांति में आ गए हों, जहाँ हर चीज़ धीमी और सुकून भरी लगती है। Safdarjung Tomb का इतिहास: आखिरी मुगल दौर की झलक Safdarjung Tomb का निर्माण 18वीं सदी में किया गया था और यह मकबरा Safdarjung की याद में बनवाया गया था, जो उस समय मुगल साम्राज्य के एक महत्वपूर्ण वजीर थे। यह वह समय था जब मुगल सत्ता धीरे-धीरे कमजोर हो रही थी और उसका प्रभाव पहले जैसा मजबूत नहीं रहा था। यही वजह है कि इस मकबरे की वास्तुकला में भी आपको पुराने मुगल स्मारकों की तुलना में थोड़ा बदलाव और सादगी देखने को मिलती है। फिर भी, इस जगह का ऐतिहासिक महत्व बहुत ज्यादा है क्योंकि यह उस दौर की आखिरी बड़ी स्थापत्य कृतियों में से एक माना जाता है। जब आप यहाँ घूमते हैं, तो आपको एहसास होता है कि यह सिर्फ एक मकबरा नहीं, बल्कि एक पूरे युग के अंत की कहानी भी अपने अंदर समेटे हुए है। वास्तुकला: क्यों Safdarjung Tomb अलग लगता है Safdarjung Tomb की वास्तुकला पहली नजर में ही आपको आकर्षित करती है, क्योंकि इसमें मुगल शैली की झलक तो है, लेकिन उसमें एक सादगी और अलगपन भी देखने को मिलता है। यह मकबरा लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना हुआ है, जो इसे एक क्लासिक और पारंपरिक लुक देता है। इसके चारों तरफ बना चारबाग शैली का गार्डन इसे और भी संतुलित और खूबसूरत बनाता है, जहाँ रास्ते, पानी के चैनल और हरियाली एक साथ मिलकर एक शानदार दृश्य तैयार करते हैं। बीच में बना मुख्य गुंबद इसकी पहचान है, जो दूर से ही नजर आता है और पूरे परिसर को एक भव्य रूप देता है। यहाँ की डिजाइन ऐसी है कि हर चीज़ एक symmetry में नजर आती है, जिससे देखने में बहुत सुकून और संतुलन महसूस होता है। यहाँ क्या देखें? हर कोना खास है सफदरजंग टॉम्ब के अंदर और आसपास घूमते समय आपको कई ऐसी चीजें देखने को मिलती हैं, जो इस जगह को खास बनाती हैं। सबसे पहले मुख्य मकबरा है, जो ऊँचाई पर बना हुआ है और अपनी बनावट के कारण दूर से ही ध्यान खींच लेता है। जब आप इसके पास जाते हैं, तो इसकी बारीक नक्काशी और डिजाइन को करीब से देखकर समझ में आता है कि इसे कितनी मेहनत और ध्यान से बनाया गया है। इसके अलावा चारों तरफ फैला गार्डन, पानी के रास्ते और लंबे-चौड़े पथ इस जगह को और भी आकर्षक बनाते हैं। यहाँ घूमते हुए हर एंगल से अलग दृश्य देखने को मिलता है, जिससे आपको बार-बार रुककर देखने का मन करता है। Safdarjung Tomb का माहौल: शांति और सुकून का अनुभव इस जगह की सबसे बड़ी खासियत इसका शांत और सुकून भरा माहौल है, जो दिल्ली जैसे व्यस्त शहर में मिलना काफी मुश्किल होता है। यहाँ गाड़ियों का शोर बहुत कम सुनाई देता है और भीड़ भी ज्यादा नहीं होती, जिससे आप आराम से बैठकर इस जगह को महसूस कर सकते हैं। पेड़ों की हरियाली और खुले मैदान इस जगह को और भी ज्यादा शांत बनाते हैं, जहाँ बैठकर समय बिताना अपने आप में एक अलग अनुभव होता है। कई लोग यहाँ सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि कुछ देर सुकून से बैठने और खुद के साथ समय बिताने के लिए आते हैं। सुबह और शाम का अनुभव सुबह के समय Safdarjung Tomb का माहौल बहुत ताज़गी भरा होता है, जब हवा ठंडी होती है और चारों तरफ शांति रहती है। यह समय वॉक और फोटोग्राफी के लिए बहुत अच्छा होता है क्योंकि रोशनी भी सॉफ्ट होती है। वहीं शाम के समय यहाँ का दृश्य और भी खूबसूरत हो जाता है, जब सूरज की हल्की रोशनी मकबरे और गार्डन पर पड़ती है और पूरा माहौल एक सुनहरी चमक में बदल जाता है। इस समय बैठकर इस जगह को देखना एक बहुत ही सुकून देने वाला अनुभव होता है। फोटोग्राफी के लिए क्यों खास है? Safdarjung Tomb फोटोग्राफी के लिए एक बेहतरीन जगह है क्योंकि यहाँ आपको symmetry, open space और historical background तीनों एक साथ मिलते हैं। हर एंगल से फोटो अलग और खूबसूरत आती है, खासकर जब आप मुख्य मकबरे को सामने से कैप्चर करते हैं। यहाँ का खुला वातावरण और साफ-सुथरा लेआउट फोटो को एक क्लीन और एस्थेटिक लुक देता है, जो सोशल मीडिया के लिए भी काफी अच्छा रहता है। Safdarjung Tomb कैसे पहुंचे? Safdarjung Tomb तक पहुँचना बहुत आसान है क्योंकि यह दिल्ली के बीच में स्थित है और अच्छी तरह कनेक्टेड है। आप मेट्रो से आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं और स्टेशन से बाहर निकलकर ऑटो या ई-रिक्शा लेकर कुछ ही मिनटों में इस जगह तक पहुँच सकते हैं। इसके अलावा अगर आप अपनी गाड़ी से आते हैं, तो यहाँ पार्किंग की सुविधा भी मिल जाती है, जिससे आपको कोई परेशानी नहीं होती। Safdarjung Tomb टिकट और टाइमिंग Safdarjung Tomb घूमने के लिए एंट्री फीस बहुत ज्यादा नहीं है, जिससे यह जगह हर तरह के ट्रैवलर के लिए आसानी से एक्सेसिबल बन जाती है। आमतौर पर यहाँ का टिकट किफायती होता है और आप बिना ज्यादा खर्च किए इस ऐतिहासिक जगह का पूरा अनुभव ले सकते हैं। टाइमिंग की बात करें तो यह स्मारक सुबह से शाम तक खुला रहता है, जिससे आपको अपनी सुविधा के अनुसार आने का अच्छा समय मिल जाता है। सुबह के समय यहाँ कम भीड़ होती है और माहौल शांत रहता है, जबकि शाम को हल्की रोशनी में यह जगह और भी खूबसूरत लगने लगती है। टिकट लेने के बाद आप आराम से पूरे परिसर में

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Safdarjung Tomb – History, Facts & Architecture

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Safdarjung Tomb: दिल्ली के किसी बादशाह के नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के नाम पर बना है यह मकबरा Five Colors of Travel आपने दिल्ली की जानी-मानी जगहें तो बहुत घूमी होंगी पर अब वक्त है एक अनजान और नए सफर पर ले चलने का। हम निकले हैं दिल्ली की कुछ नायाब इमारतों की खोज में, जिनका महत्व तो बहुत है पर प्रचार और इतिहास में जगह न मिल पाने के कारण आज ये स्थान पर्यटकों की नजरों में या तो नहीं हैं या बहुत कम हैं। लम्बे रिसर्च और ढेरों जानकारियां निकालने के बाद फैसला किया सफदरजंग का मकबरा देखने का। गूगल मैप पर अपनी अन्य खोजों के दौरान कई बार मकबरे के नाम पर नजर पड़ी पर अनजान और अनसुने नाम के कारण कभी गौर नहीं किया था। इस बात की भी कोई जानकारी नहीं थी कि मकबरा हुमायूं के मकबरे जैसी ही सुंदरता समेटे हुए है भले ही वह बहुत विशाल और विस्तृत न हो। गूगल पर कुछ तस्वीरें देखीं और मन बनाया सफदरजंग का मकबरा देखने का। सफर का मकसद दुनिया को दिल्ली की अनछुई, अनदेखी लेकिन खूबसूरत जगहों से रु-ब-रु कराना है। Safdarjung Tomb निकटतम मेट्रो स्टेशन सफदरजंग मकबरे के लिए सबसे निकटतम मेट्रो स्टेशन येलो लाइन पर स्थित जोर बाग है। इस स्टेशन से मकबरा लगभग चार सौ मीटर की दूरी पर है। मेट्रो स्टेशन से मकबरे तक जाने के लिए आप या तो बैटरी रिक्शा किराये पर ले सकते हैं या फिर मकबरे तक आराम से पैदल यात्रा भी कर सकते हैं। मकबरे के मुख्य द्वार पर पहुँच कर लगा जैसे हम किसी राजस्थानी महल के सामने विराजमान हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि मक़बरा बेहद सुन्दर लग रहा था। बिलकुल ऐसे कि बाहर से देखकर कोई भी अंदर खिंचा चला जाए। रुख किया टिकटघर की तरफ 25 रुपये के मामूली दाम का टिकट कटाया और चल पड़े दूर से दिख रहे खूबसूरत से मकबरे की तरफ। मुख्य द्वार (जो एक समय पर मदरसा हुआ करता था) से निकल ही रहे थे कि आवाज़ आई- रुकिए! एंट्री तो कर दीजिए। आवाज़ चौकीदार साहब की थी। एंट्री रजिस्टर देखा तो आश्चर्य से आँखें बड़ी हो गई। केवल 20 लोगों की एंट्री। परिसर में ऐसे तो दूर-दूर तक कोई नहीं दिखा पर थोड़ा आगे चलते ही कुछ प्रेमी परिंदे दिखने लगे तब कुछ राहत मिली। सुनसान और एकांत सा देखकर एक पल थोड़ी घबराहट लाज़िमी है लेकिन थोड़ा आगे बढ़ने पर कुछ ही पलों में यह घबराहट उत्साह में बदल जाती है।(Safdarjung Tomb) सफदरजंग का मकबरा सामने सफदरजंग का मकबरा था और उसके आगे बड़ा-सा फव्वारा जो मकबरे की सुंदरता में स्वर्ग-सा तेज प्रदान कर रहा था। फव्वारे के जल में मकबरे का अक्स और भी खूबसूरत लग रहा था, भला कोई कैसे इसकी तस्वीर अपने कैमरे में कैद किए बिना रह सकता था। मकबरे की स्थापत्य शैली बहुत सहज पर शोभनीय लगी। चार बाग शैली इसे और भी आकर्षक बनाती है। कुतुब मीनार, लाल किला के अपने सफर में हम आपको चार बाग शैली के बारे में बता ही चुके हैं। मुगल कालीन इमारतों में ये शैली बहुत प्रसिद्ध रही है। परिसर में बीचों-बीच सफदरजंग मकबरा है और मकबरे के तीन तरफ एक जैसे दिखने वाले तीन अलग-अलग महल हैं- जंगली महल, बादशाह पसन्द और मोती महल। तीनों महल उत्तर मुगलकालीन वास्तुशैली में बने हैं। मेहराबयुक्त मण्डप जैसे सफेद महल परिसर की सुंदरता बढ़ाते हैं। अब मकबरे के अंदर पहुंचने की जल्दी थी। एक खास बात ये थी बाहर से देखने पर मकबरा चारों तरफ से एक जैसा ही दिखता था। चारों ओर एक ही शैली में फ़व्वारे बने हैं। एक पल को ये मकबरा हुमायूं के मकबरे जैसा ही दिखता है। मकबरे के अंदर की खूबसूरती का क्या ही बखान करें। इसे देखना भर ही इसका जवाब है। चारों ओर से सूर्य की किरणें छनकर मकबरे को रोशन करती हैं। मकबरे के बीचों-बीच सफदरजंग की मजार सूर्य की किरणों से चमकती नजर आती है। मकबरे की पहली मंजिल से परिसर में बने तीनों महल और परिसर की मस्जिद भी साफ नजर आती है। यहाँ आकर एक बात जो साफ़ नज़र आयी वो ये कि भले ही यह मकबरा ताज या हुमायूँ के मकबरे की तरह भव्य और आलीशान  न हो लेकिन इसकी सादगी और बनावट मन को खूब भाती है, वाकई में ऐसा नजारा देखना जन्नत से कम नहीं। न जाने क्यों दुनिया इतनी हसीन और खूबसूरत जगह से वाकिफ़ नहीं है, ये किसी बदनसीबी से कम नहीं।  एक प्रधानमंत्री के नाम पर बना है यह मकबरा अक्सर नाम को लेकर यह भ्रम हो ही जाता है कि सफरदजंग कोई बादशाह था, क्योंकि देश भर में अधिकतर मकबरें तो राजा या किसी बादशाह के ही बने हुए हैं। लेकिन सफदरजंग मकबरे के बारें में यह सोचना गलत है। दरअसल, वह मुगल बादशाह मुहम्मद शाह का प्रधानमंत्री था। 1753-54 में नवाब शुजाउद्दीला ने अपने पिता मिर्जा मुकीम अबुल मंसूर खान जिनकी उपाधि सफदरजंग थी, की स्मृति में सफदरजंग मकबरे का निर्माण करवाया था। सफदरजंग मुगल बादशाह मुहम्मद शाह के शासन काल में अवध के सूबेदार और प्रधानमंत्री रहे। लाल बलुआ पत्थर से बना भव्य मकबरा वाकई सुंदरता की मिसाल है। मकबरे के गार्ड साहब से बात करने पर इसके अलग-अलग महलों की जानकारी हुई। परिसर की पूरी जानकारी उन्होंने एक गाइड की भांति मुझे दी। ऐसे किसी स्मारक स्थल पर लम्बे समय तक रहते-रहते कोई भी कर्मचारी एक समय के बाद गाइड हो ही जाता है। बातचीत में गार्ड साहब ने ये भी कहा- ‘ये जगह बहुत खूबसूरत है पर लोग कम ही आते हैं। आए दिन लोग इसके ऊपर वीडियो बनाने आते हैं ताकि लोग इस जगह को जान सके। जबसे इसका जीर्णोद्धार हुआ है तबसे पहले से कुछ ज्यादा लोग यहाँ आने भी लगे हैं। बाकी हमारा अनुभव शानदार रहा। और हम वहां से यह सोचकर विदा हुए कि जल्द ही सर्दियों में इस मकबरे का दोबारा दीदार हो। यही सुझाव है कि दिल्ली आए तो एक बार सफदरजंग का मकबरा जरूर घूमें और दिल्ली के ही हैं तो एक बार इस खूबसूरती पर भी अपनी निगाहें अवश्य डालें। क्यों देखें सफदरजंग मकबरा ? Five reasons to visit this place- 1. मेट्रो