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भारत के 10 Hidden Village जहाँ समय जैसे थम सा गया है

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शहरों की भागदौड़, लगातार बजते notifications और रोज़ की hectic life के बीच कभी-कभी बस ऐसी जगह जाने का मन करता है जहाँ कुछ पल के लिए सब कुछ ठहर जाए। भारत में आज भी ऐसे कई Hidden Villages हैं, जहाँ पहुँचते ही ऐसा महसूस होता है कि वक्त ने अपनी रफ़्तार धीमी कर दी है। यहाँ न भीड़ का शोर सुनाई देता है और न ही ऊँची-ऊँची इमारतें नज़र आती हैं। इसके बजाय चारों तरफ़ हरियाली, पहाड़, पुराने घर, लोक संस्कृति और सुकून से भरी फ़िज़ा आपका इस्तक़बाल करती है। इन Villages की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहाँ की ज़िंदगी आज भी अपनी असली रफ़्तार में चलती है। लोग प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहते हैं और सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी संभाले हुए हैं। अगर आपको offbeat destinations explore करना पसंद है और भीड़ से दूर कुछ यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो ये Hidden Villages आपकी travel bucket list का हिस्सा ज़रूर होने चाहिए। 1. मावलिन्नोंग (Mawlynnong), मेघालय मेघालय के East Khasi Hills में बसा मावलिन्नोंग एक छोटा-सा लेकिन बेहद खूबसूरत Village है। इसे Asia के सबसे साफ-सुथरे Villages में गिना जाता है। यहाँ पहुँचते ही ऐसा लगता है कि ज़िंदगी की सारी भागदौड़ कहीं पीछे छूट गई है। साफ़ गलियाँ, bamboo से बने घर और हर तरफ़ फैली हरियाली इस Village को किसी postcard जैसा बना देती है। अगर आप nature और peace दोनों का perfect combination चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए बिल्कुल सही है। विशेषता मावलिन्नोंग की सबसे बड़ी पहचान इसकी cleanliness और eco-friendly lifestyle है। यहाँ के लोग सफाई को अपनी ज़िम्मेदारी नहीं बल्कि अपनी पहचान मानते हैं। Village में bamboo dustbin हर जगह दिखाई देते हैं और Plastic का इस्तेमाल बेहद कम होता है। यहाँ की सादगी, लोगों की मेहमाननवाज़ी और शांत माहौल इस Village को भारत की सबसे अलग destinations में शामिल करते हैं। यहाँ क्या देखें? मावलिन्नोंग में Living Root Bridge सबसे बड़ा attraction है, जिसे पेड़ों की जड़ों से तैयार किया गया है। इसके अलावा Sky View Point से Bangladesh के मैदानों का शानदार नज़ारा दिखाई देता है। Village की छोटी-छोटी गलियाँ, bamboo walkways, रंग-बिरंगे फूल और आसपास के waterfalls photography lovers के लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय October से April तक का समय मावलिन्नोंग घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और खुशनुमा रहता है। सुबह के समय Village की फ़िज़ा सबसे ज़्यादा दिलकश लगती है और हर तरफ़ ताज़गी महसूस होती है। कैसे पहुँचें? मावलिन्नोंग पहुँचने के लिए पहले Shillong पहुँचना होगा। Shillong से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी taxi या private cab के ज़रिए आसानी से तय की जा सकती है। रास्ते में दिखाई देने वाले पहाड़ और हरियाली सफर को भी यादगार बना देते हैं। 2. कल्पा (Kalpa), हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के किन्नौर ज़िले में बसा कल्पा एक ऐसा Village है जहाँ हर सुबह बर्फ़ से ढकी चोटियाँ आपका स्वागत करती हैं। समुद्र तल से लगभग 2,960 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह Village अपनी शांत वादियों, देवदार के जंगलों और सेब के बागों के लिए जाना जाता है। यहाँ की धीमी ज़िंदगी आपको कुछ समय के लिए दुनिया की हर टेंशन भुला देती है। विशेषता कल्पा की सबसे खास बात यह है कि यहाँ से दिखाई देने वाली Kinnaur Kailash Range हर मौसम में अलग रंग बिखेरती है। Village में आज भी पारंपरिक Himachali architecture वाले लकड़ी के घर मौजूद हैं। यहाँ की सादगी, ठंडी हवा और शांत माहौल किसी भी traveller को लंबे समय तक याद रहता है। यहाँ क्या देखें? कल्पा में Kinnaur Kailash View Point सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है। इसके अलावा Roghi Village, Suicide Point, Narayan Nagini Temple और Apple Orchards भी देखने लायक हैं। Sunrise और Sunset के दौरान पहाड़ों पर पड़ती सूरज की किरणें बेहद खूबसूरत मंज़र पेश करती हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय April से June और September से November तक का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे बढ़िया माना जाता है। इस दौरान मौसम साफ़ रहता है और पहाड़ों का नज़ारा खुलकर दिखाई देता है। अगर आपको snowfall पसंद है, तो Winter season भी अच्छा विकल्प हो सकता है। कैसे पहुँचें? Shimla से कल्पा लगभग 230 किलोमीटर दूर है। Shimla से बस और taxi दोनों की सुविधा उपलब्ध रहती है। Road trip के दौरान सतलुज नदी और पहाड़ी रास्तों के शानदार नज़ारे सफर को और भी यादगार बना देते हैं। 3. ज़ीरो (Ziro), अरुणाचल प्रदेश अरुणाचल प्रदेश की मशहूर Ziro Valley में स्थित यह Village प्रकृति और Tribal Culture का अनोखा संगम है। चारों तरफ़ फैले धान के खेत, हरे-भरे जंगल और शांत वातावरण इसे भारत के सबसे खूबसूरत Hidden Villages में शामिल करते हैं। यहाँ का हर नज़ारा ऐसा लगता है जैसे किसी painting से निकलकर सामने आ गया हो। विशेषता ज़ीरो की सबसे बड़ी पहचान यहाँ रहने वाली Apatani Tribe है। यह समुदाय आज भी अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और जीवनशैली को संजोए हुए है। Modern life से दूर यहाँ का सुकून और cultural richness travellers को एक अलग ही experience देती है। यही वजह है कि यह Village nature lovers और culture enthusiasts दोनों के बीच काफी popular है। यहाँ क्या देखें? Ziro Valley, Talley Valley Wildlife Sanctuary, Pine Forest और Apatani Villages यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। अगर आप September में यहाँ आते हैं, तो मशहूर Ziro Music Festival का हिस्सा भी बन सकते हैं। Local markets और traditional houses भी घूमने लायक हैं। घूमने का सबसे अच्छा समय March से October तक का समय Ziro घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहाना रहता है और पूरी Valley हरियाली से भर जाती है। बारिश के बाद यहाँ की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। कैसे पहुँचें? Naharlagun Railway Station यहाँ का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है। वहाँ से taxi लेकर लगभग 100 किलोमीटर की दूरी तय करके Ziro पहुँचा जा सकता है। सबसे नज़दीकी Airport Itanagar के पास स्थित है। 4. लाचेन (Lachen), सिक्किम North Sikkim में स्थित लाचेन एक छोटा लेकिन बेहद मनमोहक Village है। बर्फ़ से ढके पहाड़, बहती नदियाँ और बादलों से घिरी

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Eco Tourism क्या है इको-टूरिज़्म? होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन!

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अगर आप शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और शोर से परेशान हो चुके हैं और आपका मन शहर से दूर कहीं शांत, हरी-भरी जगह पर जाने का करता है जहां आपको शहर के अशांत माहौल के मुकाबले थोड़ा सुकून मिल सके। तो इको-टूरिज़्म आपके लिए बिल्कुल सही चीज़ है। इको-टूरिज़्म का मतलब सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि उन जगहों पर जाना है जहाँ आप एनवायरनमेंट को बिना नुकसान पहुँचाए मज़ा लेते हैं और साथ ही गाँव के लोगों की रोज़ी-रोटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। यह ऐसा तरीका है जिससे नेचर भी बची रहती है और गाँव वाले भी कमाई कर लेते हैं जिससे दोनों का फायदा होता है। Eco Tourism गाँव की संस्कृति- Eco Tourism इको-टूरिज़्म का सीधा सा मतलब है नेचर के बीच घूमना, पर इस यात्रा के दौरान कुछ बातों का खास ध्यान रखना होता है जैसे जंगल, पहाड़, झरने या किसी भी गाँव में जाएँ तो वहाँ गंदगी न करें, कचरा इधर-उधर न फेंकें, पानी-बिजली बेवजह खराब न करें और जो भी स्थानीय नियम हों, उन्हें मानें। इसके साथ गाँव वालों की संस्कृति, उनका खाना-पीना, पहनावा और रीति-रिवाज़ को भी सम्मान दें। ऐसी यात्राओं में न केवल आपको शहर के अशांत माहौल से छुटकारा मिलेगा बल्कि गांव वालों को भी रोजगार मिलेगा। साफ हवा, शांति, नेचर का मजा यही तो इन गांवों की खासियत होती है। गांव वालों होमस्टे चला कर, गाइड बनकर, लोकल खाना खिलाकर या अपने हाथ के बनाए सामान को बेचकर ये लोग अपनी कमाई करते है। इसलिए इको-टूरिज़्म नेचर को भी बचाता है और गाँव वालों की जेब भी मजबूत करता है। मतलब मज़ा भी पूरा और भलाई भी पूरी। उत्तराखंड का होमस्टे मॉडल: महिलाएँ बदल रहीं अपनी दुनिया उत्तराखंड का होमस्टे मॉडल सच में एक ऐसी कहानी है जहाँ गाँव की महिलाएँ अपनी ज़िंदगी खुद बदल रही हैं। मुनस्यारी के पास सरमोली गाँव में 2004 में मल्लिका विर्दी ने हिमालयन आर्क होमस्टे कार्यक्रम शुरू किया, और खास बात ये है कि पूरा होमस्टे सिस्टम गाँव की महिलाएँ ही संभालती हैं। यहाँ आने वाले मेहमान मडुआ की रोटी, पहाड़ी राजमा जैसे बिल्कुल देसी और स्वादिष्ट खाने का मज़ा लेते हैं, खेतों में मदद करते हैं और गाँव की असली ज़िंदगी को करीब से महसूस करते हैं। इस मॉडल से सरमोली की महिलाएँ साल में करीब 1.5 लाख रुपये तक कमा लेती हैं, जो उनके लिए बहुत बड़ी बात है और इससे उनकी पहचान और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी ‘दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना’ के ज़रिए पुराने पहाड़ी घरों को लकड़ी और पत्थर से बने सुंदर, पारंपरिक होमस्टे में बदलने में मदद की है। सरकार ट्रेनिंग, लोन और मार्केटिंग का पूरा सपोर्ट देती है, और आज लगभग 5,000 घर इस योजना से जुड़ चुके हैं। इससे गाँव में रोजगार बढ़ा है और लोग शहरों की ओर कम जा रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें अपने ही गाँव में अच्छी कमाई का मौका मिल रहा है। इको-स्टे: नेचर के बीच एक ‘ग्रीन’ ठहराव Eco Tourism इको-स्टे असल में ऐसे ठहरने की जगह होती हैं, जहाँ आप नेचर के बीच आराम से रहते हैं और साथ ही पर्यावरण का ख्याल भी रखते है। यहाँ ज़्यादातर बिजली सोलर से आती है, बारिश का पानी इकट्ठा करके इस्तेमाल किया जाता है, और घर भी मिट्टी, लकड़ी या दूसरे इको-फ्रेंडली तरीक़े से बनाए जाते हैं। कचरा अलग करके कम्पोस्ट बनाया जाता है, पानी दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है मतलब हर काम सोच-समझकर किया जाता है। जैसे जिम कॉर्बेट के पास क्यारी गाँव में बने इको-स्टे बिल्कुल पुराने पहाड़ी घरों की तरह दिखते हैं। यहाँ रहने पर आप शांत माहौल का मज़ा लेते हैं, जंगल सफारी और एडवेंचर एक्टिविटी भी कर सकते हैं। कुल मिलाकर, ऐसा लगता है जैसे आप नेचर की गोद में आराम कर रहे हों। क्यारी गाँव की चुनौती: इको-टूरिज़्म और बाघों का संघर्ष क्यारी गाँव का इलाका अपनी खूबसूरती की वजह से और भी खास बन जाता है। क्योंकि जिम कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व बिलकुल पास में होने से यहाँ का जंगल घना है, हवा बिल्कुल ताज़ा लगती है और वाइल्डलाइफ़ का असली मज़ा मिलता है। यहाँ बाघों की अच्छी-खासी संख्या मिलती है, जो ये दिखाता है कि जंगल कितना हेल्दी और समृद्ध है। इसी वजह से क्यारी और उसके आस-पास का इलाका नेचर और वाइल्डलाइफ़ पसंद करने वालों के लिए एकदम परफेक्ट जगह है। यहाँ कई बढ़िया इको-स्टे और रिसॉर्ट भी बने हुए हैं, जो जिम कॉर्बेट के नेचर वाइब से मैच करते हैं लकड़ी और पत्थर के कमरे, चारों तरफ हरियाली, पंछियों की आवाज़ें और पूरा शांत माहौल सब मिलकर स्टे का अनुभव और भी खास बना देते हैं। गाँव वाले इको-टूरिज़्म को पूरी तरह सपोर्ट करते हैं, क्योंकि इससे उन्हें होमस्टे, लोकल गाइड, खेती और कारीगरी जैसे कामों में अच्छी कमाई मिलती है। लोग चाहते हैं कि इको-टूरिज़्म बढ़े, लेकिन ऐसे कि जंगल भी सुरक्षित रहे और गाँव वालों की खुशी और रोज़गार भी बना रहें। राष्ट्रीय रणनीति: ग्रामीण होमस्टे को बढ़ावा भारत सरकार भी अब ग्रामीण इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने में लगी है। कोशिश ये है कि गाँवों में बने होमस्टे भी पर्यटन का बड़ा हिस्सा बनें और वहाँ के लोगों को अच्छा रोज़गार मिले। सरकार चाहती है कि होमस्टे चलाने वालों को बिजली-पानी की वही दरें मिलें जो सामान्य घरों को मिलती हैं, ताकि उनका खर्च कम हो सके। NIDHI पोर्टल के ज़रिए हर होमस्टे की एक डिजिटल पहचान बनाई जा रही है, जिससे ऑनलाइन बुकिंग भी आसान हो जाएगी। आखिर में बात यही है कि इको-टूरिज़्म तभी सफल है जब तीनों चीज़ें एक साथ खुश रहें प्रकृति सुरक्षित रहे, गाँव वालों की कमाई और रोजगार बढ़े और पर्यटकों को अच्छा अनुभव मिले। क्यारी गाँव जैसी जगहें यही दिखाती हैं कि इको-टूरिज़्म सिर्फ कमाई का ज़रिया नहीं, बल्कि एक संतुलन है जहाँ नेचर, लोग और टूरिज़्म तीनों को बराबर महत्व दिया जाता है। अगर ये बैलेंस बना रहे, तो ग्रामीण भारत में इको-टूरिज़्म सच में कमाल कर सकता है।