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Vande Bharat Sleeper: 3AC की परेशानी होगी कम?

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ट्रेन में रात का सफर हो और टिकट भी 3AC का कन्फर्म मिल जाए, तो इससे अच्छी बात क्या होगी! अपनी बर्थ पर सामान रखा, चादर बिछाई और सोने की तैयारी शुरू। लेकिन अगर आपकी बर्थ कोच के दरवाजे के ठीक पास हो, तो कई बार पूरी रात चैन से सोना मुश्किल हो जाता है। कोई दरवाजा खोलकर अंदर आता है, कोई बाहर जाता है, किसी के सामान की आवाज आती है, तो कभी दरवाजा खुलने पर ठंडी हवा अंदर आ जाती है। ऐसे में नींद बार-बार टूटती रहती है। यह परेशानी सिर्फ किसी एक ट्रेन की नहीं है। पुरानी डिजाइन वाले कई AC कोचों में दरवाजे और बर्थ के आसपास यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है। राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को भी कभी-कभी इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इसी बीच Vande Bharat Sleeper Train का एक नया डिजाइन चर्चा में है। हाल ही में सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में ट्रेन के प्रवेश-द्वार के पास बनी अतिरिक्त जगह और स्लाइडिंग दरवाजे को दिखाया गया। इस डिजाइन को देखकर कई यात्रियों का कहना है कि इससे दरवाजे के पास वाली बर्थ पर सफर करने वालों को पहले के मुकाबले ज्यादा आराम मिल सकता है। लेकिन क्या Vande Bharat Sleeper सच में राजधानी एक्सप्रेस से आगे निकल गई है? इसमें कौन-कौन सी नई सुविधाएं दी गई हैं? क्या इसमें RAC टिकट नहीं मिलता? और क्या इसकी रफ्तार से सफर का समय भी कम हो जाएगा? 3AC की दरवाजे वाली बर्थ से आखिर क्यों होती है परेशानी? अगर आपने कभी रात में 3AC कोच में सफर किया है, तो आपको पता होगा कि दरवाजे के पास वाली बर्थ पर सोना कितना मुश्किल हो सकता है। खासकर तब, जब ट्रेन में यात्रियों की आवाजाही ज्यादा हो। ट्रेन के अंदर शौचालय जाने वाले यात्री, सामान लेकर आने-जाने वाले लोग और दूसरे कोचों से गुजरने वाले यात्री लगातार दरवाजे के आसपास दिखाई देते हैं। कई बार दरवाजा खुलने और बंद होने की आवाज भी सुनाई देती है। रात के समय छोटी-सी आवाज भी नींद में खलल डाल सकती है। इसके अलावा दरवाजे के पास की जगह पर लोगों की आवाजाही ज्यादा रहती है। ऐसे में वहां सो रहे यात्री को अपनी बर्थ के आसपास भीड़ और हलचल महसूस हो सकती है। सर्दियों में दरवाजा खुलने पर बाहर की ठंडी हवा आने से भी परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि कई यात्री टिकट बुक करते समय ऐसी बर्थ से बचना पसंद करते हैं। Vande Bharat Sleeper के नए डिजाइन में इसी तरह की परेशानी को कम करने की कोशिश की गई है। Vande Bharat Sleeper में ऐसा क्या बदला है? Vande Bharat Sleeper को खास तौर पर लंबी दूरी के रात के सफर को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें सिर्फ बाहर का लुक ही नया नहीं है, बल्कि कोच के अंदर भी कई बदलाव किए गए हैं। इस ट्रेन में ऑटोमैटिक स्लाइडिंग प्लग डोर लगाए गए हैं। यानी दरवाजे को सामान्य दरवाजों की तरह धक्का देकर खोलने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा कोच के प्रवेश-द्वार और यात्रियों की बर्थ के बीच अतिरिक्त जगह रखी गई है। इससे दरवाजे के पास होने वाली हलचल का असर सीधे बर्थ तक कम पहुंच सकता है। यही वह बदलाव है जिसकी वजह से यह ट्रेन इन दिनों चर्चा में है। 1. ऑटोमैटिक स्लाइडिंग दरवाजे पुरानी ट्रेनों में कई जगह सामान्य दरवाजे इस्तेमाल होते हैं, जिन्हें यात्री हाथ से खोलते और बंद करते हैं। Vande Bharat Sleeper में सिंगल लीफ ऑटोमैटिक स्लाइडिंग प्लग डोर दिए गए हैं। इन दरवाजों को केंद्रीय व्यवस्था से नियंत्रित किया जाता है। इससे ट्रेन के अंदर आने-जाने का तरीका पहले से अलग और ज्यादा व्यवस्थित हो जाता है। दरवाजों का यह डिजाइन यात्रियों की सुविधा के साथ सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 2. दरवाजे और बर्थ के बीच अतिरिक्त जगह इस ट्रेन के डिजाइन में प्रवेश-द्वार के पास अतिरिक्त जगह दी गई है। वायरल वीडियो में इसी हिस्से को दिखाया गया था। इसका फायदा यह है कि दरवाजे से अंदर आने वाले यात्रियों की आवाजाही सीधे बर्थ के पास नहीं होती। जो यात्री दरवाजे के पास वाली बर्थ पर सफर करते हैं, उनके लिए यह बदलाव उपयोगी हो सकता है। हालांकि इससे हर तरह की आवाज पूरी तरह खत्म हो जाएगी, ऐसा दावा करना सही नहीं होगा। ट्रेन के अंदर लोगों की आवाजाही तो रहेगी ही, लेकिन डिजाइन से होने वाली परेशानी कम हो सकती है। 3. कोचों के बीच सील्ड गैंगवे Vande Bharat Sleeper में दो कोचों के बीच पूरी तरह सील्ड और लचीला गैंगवे दिया गया है। इसका मतलब है कि यात्री एक कोच से दूसरे कोच में जाते समय बीच के रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं और कोचों के बीच का हिस्सा बेहतर तरीके से बंद रहता है। इससे बाहर की धूल और शोर को अंदर आने से रोकने में मदद मिलती है। साथ ही यात्रियों को एक कोच से दूसरे कोच में जाने के दौरान ज्यादा आरामदायक रास्ता मिलता है। Vande Bharat Sleeper और Rajdhani Express में क्या अंतर है? राजधानी एक्सप्रेस कई सालों से लंबी दूरी के प्रीमियम रेल सफर का एक जाना-पहचाना नाम रही है। वहीं Vande Bharat Sleeper नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार की गई ट्रेन है। दोनों का मकसद यात्रियों को लंबी दूरी का आरामदायक सफर देना है, लेकिन इनकी बनावट और तकनीक अलग है। राजधानी एक्सप्रेस में आमतौर पर अलग इंजन ट्रेन के डिब्बों को खींचता है, जबकि Vande Bharat Sleeper एक ट्रेनसेट है, जिसमें चलने से जुड़ी तकनीक ट्रेन के अपने कोचों में लगी होती है। 1. अलग इंजन बनाम ट्रेनसेट तकनीक राजधानी एक्सप्रेस में आगे अलग लोकोमोटिव लगाया जाता है, जो पूरी ट्रेन को खींचता है। वहीं Vande Bharat Sleeper में अंडरस्लंग प्रोपल्शन सिस्टम दिया गया है। यानी ट्रेन को चलाने वाली तकनीक इसके ट्रेनसेट में ही शामिल है। इसका फायदा यह है कि ट्रेन को तेजी से गति पकड़ने और रुकने के लिए बेहतर व्यवस्था मिलता है। इसमें दोनों सिरों पर ड्राइविंग कैब भी दिए गए हैं। इसलिए सामान्य लोकोमोटिव वाली ट्रेन की तरह इंजन