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Bharat Gaurav Train: पूरी-गंगासागर-वैद्यनाथ धाम यात्रा

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अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर एक ऐसी यात्रा करना चाहते हैं, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ ट्रेन से घूमने का मजा भी मिले, तो यह यात्रा आपके लिए काफी खास हो सकती है। भारतीय रेलवे और IRCTC की ओर से चलाई जा रही Bharat Gaurav Train के जरिए पूरी, गंगासागर और वैद्यनाथ धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा एक ही पैकेज में करने का मौका मिलता है। खास बात यह है कि इस यात्रा में आपको हर जगह पहुंचकर अलग से होटल, बस या खाने की व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती। Bharat Gaurav Tourist Train के पैकेज में ट्रेन यात्रा के साथ होटल में ठहरने, स्थानीय घूमने के लिए बस, भोजन और सुरक्षा जैसी कई सुविधाएं शामिल रहती हैं। यानी एक जगह से दूसरी जगह जाने की पूरी प्लानिंग पहले से तय रहती है। अगर आप परिवार के साथ या बुजुर्ग माता-पिता के साथ धार्मिक यात्रा करने का सोच रहे हैं, तो Bharat Gaurav Train का यह सफर काफी सुविधाजनक हो सकता है। इस यात्रा में धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ ट्रेन के अंदर रहने और खाने का अनुभव भी मिलता है। तो चलिए जानते हैं कि Bharat Gaurav Tourist Train से होने वाली इस पूरी-गंगासागर-वैद्यनाथ धाम यात्रा में आपको कौन-कौन सी जगहें देखने को मिलेंगी, ट्रेन के अंदर क्या सुविधाएं हैं, खाने में क्या मिलता है, किराया कितना है और किन स्टेशनों से आप इस ट्रेन में चढ़ सकते हैं। क्या है Bharat Gaurav Tourist Train? भारत सरकार के ‘देखो अपना देश’ अभियान के तहत रेल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Bharat Gaurav Tourist Train चलाई जा रही है। इस योजना के जरिए यात्रियों को देश के अलग-अलग धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक एक तय पैकेज के तहत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। Bharat Gaurav Train कोई सामान्य एक्सप्रेस ट्रेन जैसी नहीं है, क्योंकि इसमें सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने की सुविधा नहीं होती। इसके साथ होटल, भोजन, स्थानीय परिवहन और दर्शन जैसी कई चीजें भी पैकेज में जोड़ी जाती हैं। इसी वजह से Bharat Gaurav Tourist Train को एक तरह का ‘चलता-फिरता होटल’ या ‘चलती-फिरती हवेली’ कहा जा सकता है। यात्री ट्रेन में सफर करते हैं और यात्रा के तय कार्यक्रम के हिसाब से अलग-अलग धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। इस योजना के तहत भारतीय रेलवे की ओर से करीब 33 प्रतिशत की विशेष छूट भी दी जाती है। यानी पैकेज का किराया तय करते समय यह छूट पहले से शामिल रहती है। Bharat Gaurav Train में यात्रियों के लिए अलग-अलग श्रेणियां भी उपलब्ध हैं। इसमें Economy यानी Sleeper, Standard यानी 3AC और Comfort यानी 2AC की सुविधा मिलती है। इससे यात्री अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से श्रेणी चुन सकते हैं। इस यात्रा में कौन-कौन सी जगहें शामिल हैं? Bharat Gaurav Tourist Train से होने वाली इस यात्रा में कई प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों को जोड़ा गया है। इस सफर में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कई खास स्थान देखने का मौका मिलता है। यात्रा के प्रमुख पड़ावों में पूरी शामिल है। यहां भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन किए जाते हैं। इसके साथ ही पूरी के Golden Beach का आनंद लेने और स्थानीय बाजार में घूमने का मौका भी मिलता है। पूरी के बाद यात्रा कोणार्क की तरफ बढ़ती है। यहां प्रसिद्ध सूर्य मंदिर देखा जाता है, जो अपनी शानदार स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इसके बाद भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर के दर्शन किए जाते हैं। Bharat Gaurav Train की इस यात्रा में कोलकाता और गंगासागर भी प्रमुख पड़ाव हैं। कोलकाता में कालीघाट काली माता मंदिर के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद गंगासागर की यात्रा होती है, जहां गंगा नदी बंगाल की खाड़ी से मिलती है। यहां कपिल मुनि आश्रम भी स्थित है। इसके बाद Bharat Gaurav Tourist Train यात्रियों को जसीडीह और देवघर की तरफ लेकर जाती है। देवघर में बाबा वैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए जाते हैं। कुछ विस्तारित यात्राओं में गया, बोधगया, वाराणसी और अयोध्या धाम जैसे स्थान भी शामिल रहते हैं। ऐसे पैकेज में विष्णुपद मंदिर, बोधगया, काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट, भव्य आरती और श्री राम जन्मभूमि मंदिर जैसे स्थानों के दर्शन का मौका मिल सकता है। 9 दिनों का पूरा यात्रा कार्यक्रम सोलापुर और पुणे रूट से चलने वाला 8 रात और 9 दिन का WZBG77 पैकेज इस यात्रा का एक विकल्प है। Bharat Gaurav Train की इस यात्रा की शुरुआत 30 सितंबर को सोलापुर, पुणे और आसपास के बोर्डिंग स्टेशनों से होती है। पहले दिन यात्री अपने निर्धारित बोर्डिंग स्टेशन से ट्रेन में सवार होते हैं। ट्रेन सोलापुर और पुणे क्षेत्र से यात्रियों को लेकर नागपुर की तरफ बढ़ती है। दूसरे दिन यानी 1 अक्टूबर को नागपुर से यात्रियों को बोर्ड कराया जाता है। इसके बाद Bharat Gaurav Tourist Train पूरी की तरफ अपनी यात्रा जारी रखती है। तीसरे दिन यानी 2 अक्टूबर को ट्रेन पूरी के मालतीपाटपुर रेलवे स्टेशन पहुंचती है। यहां से यात्रियों को होटल ले जाया जाता है। होटल में चेक-इन करने के बाद भगवान जगन्नाथ मंदिर के दर्शन कराए जाते हैं। इसके बाद स्थानीय बाजार में घूमने का समय मिलता है और रात पूरी में रुकने की व्यवस्था रहती है। चौथे दिन यानी 3 अक्टूबर को सुबह नाश्ते के बाद कोणार्क सूर्य मंदिर का भ्रमण कराया जाता है। इसके बाद भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर के दर्शन होते हैं। शाम के बाद ट्रेन कोलकाता के लिए रवाना होती है। पांचवें दिन यानी 4 अक्टूबर को Bharat Gaurav Train कोलकाता या हावड़ा पहुंचती है। यहां से सड़क मार्ग से गंगासागर के लिए यात्रा शुरू होती है। यात्रियों को होटल में चेक-इन कराया जाता है और गंगासागर में रात रुकने की व्यवस्था रहती है। छठे दिन यानी 5 अक्टूबर की सुबह गंगासागर संगम में स्नान और पूजा-अर्चना का समय रहता है। नाश्ते के बाद यात्री कोलकाता लौटते हैं। यहां काली माता मंदिर के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद शाम को जसीडीह के लिए ट्रेन यात्रा शुरू होती है। सातवें दिन यानी 6 अक्टूबर को जसीडीह पहुंचने के बाद बस से देवघर ले जाया जाता है। यहां बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद