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पटना शहर की अनकही दास्तान, पाटलिपुत्र से पटना तक की सम्पूर्ण यात्रा! जो उधेड़ती है इतिहास की कई परतें!

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भारत की धरती पर बसे कई शहरों में से एक ऐसा शहर भी है, जो इतिहास, संस्कृति और आधुनिकता का अद्भुत नजारा पेश करता है। यह शहर है पटना बिहार की राजधानी और गंगा के दक्षिणी तट पर बसा एक प्राचीन नगर। पटना सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि यह भारत के इतिहास का वह अध्याय है जो समय के कई कालखंडों की कहानियां सुनाता है। कभी पाटलिपुत्र के नाम से प्रसिद्ध यह नगर आज आधुनिक भारत की पहचान बन चुका है। यहां अतीत की गूंज भी है और भविष्य की धड़कन भी। पटना का जिक्र आते ही गंगा की लहरें, बुद्ध की शांति, अशोक का शासन और आधुनिक सड़कों की रौनक मन में एक साथ उतर आते हैं। कहा भी गया है जहां इतिहास सांस लेता है, वहां भविष्य जन्म लेता है।और वास्तव में यह माना जा सकता है की यह बात पटना के लिए ही कही गई है। पाटलिपुत्र से पटना तक का सफर, क्या खूब राज छिपे हैं इसमें पटना का इतिहास 2500 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यह वही पवित्र भूमि है जहां  मौर्य वंश ने भारत की एकता की नींव रखी थी। सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक महान ने यहीं से अपने शासन का विस्तार किया था। उस समय यह शहर पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था, जो शिक्षा, कला, व्यापार और राजनीति का केंद्र था। चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग ने भी अपनी यात्राओं में इस नगर की समृद्धि का वर्णन किया था। पाटलिपुत्र की मिट्टी में इतिहास की खुशबू अब भी घुली हुई महसूस की जा सकती है। हर पुरानी दीवार, हर मंदिर और हर घाट उस गौरवशाली अतीत की कहानी कहता है। आज से चार सौ साल पहले अंग्रेज़ों के शासनकाल में यह शहर प्रशासनिक केंद्र बना और धीरे-धीरे इसका नाम पटना पड़ गया। आज पटना उस विरासत का आधुनिक रूप है, जो भारत की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक की गवाही देता है। प्रकृति और संस्कृति के अद्भुत मेल के रूप में पटना   पटना की सबसे बड़ी पहचान है गंगा नदी। यह सिर्फ एक जलधारा नहीं, बल्कि शहर की आत्मा है। गंगा के बिना पटना की कल्पना अधूरी कही जा सकती है। सुबह की आरती, दीपों से जगमगाते घाट, और गंगा स्नान के दृश्य मन को शांति से भर देते हैं। गंगा पटना को जीवन देती है खेती के लिए पानी, व्यापार के लिए मार्ग और लोगों के लिए श्रद्धा। यहां के घाटों पर जब सूरज उगता है, तो गंगा के जल पर उसकी सुनहरी किरणें झिलमिलाती हैं। ऐसा लगता है जैसे पूरा शहर रोशनी की चादर ओढ़े खड़ा हो। यहां की हवा में इतिहास की सोंधी महक है और संस्कृति की मिठास। कहा भी जाता है गंगा जहां बहती है, वहां जीवन खिल उठता है। पटना के गंगा तट पर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पर्यटन का आकर्षण भी बन चुका है। हजारों की संख्या में पर्यटक यहां गंगा आरती, नौका विहार और घाटों के दृश्य देखने आते हैं।(पटना का इतिहास 2500 वर्षों से भी अधिक पुराना है।) पर्यटकों के लिए खजाने के पिटारे जैसा है पटना पटना का पर्यटन बिहार की पहचान का प्रतीक बन चुका है। “Patna tourism” आज गूगल पर सबसे अधिक खोजे जाने वाले कीवर्ड्स में से एक है। इसका कारण है यहां की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता। गोलघर, पटन देवी मंदिर, गांधी मैदान, बिहार म्यूजियम, संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क, कुम्हरार पार्क और गंगा घाट ये सभी स्थान शहर को खास बनाते हैं। गोलघर का इतिहास अंग्रेज़ों के दौर से जुड़ा है। इसका विशाल गुंबद आज भी शहर की पहचान है। बिहार म्यूजियम में प्राचीन मूर्तियां, सिक्के और कलाकृतियां रखी गई हैं, जो पटना की गौरवशाली विरासत को दर्शाती हैं। पटन देवी मंदिर आस्था का केंद्र है जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां का हर कोना किसी न किसी कहानी से जुड़ा है। पटना का पर्यटन सिर्फ घूमने-फिरने का अनुभव नहीं है, बल्कि अतीत को छूने का अवसर है। पटना में हवा सी तेज विकास और प्रगति की रफ्तार पटना आज सिर्फ अतीत में जीने वाला शहर नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के साथ कदम मिलाकर चल रहा है। यह मानिए “Modern Patna” अब विकास की नई पहचान बन चुका है। यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, मेट्रो रेल, फ्लाईओवर, शॉपिंग मॉल, शिक्षा संस्थान और टेक्नोलॉजी हब लगातार बढ़ रहे हैं। आईटी पार्क, मेडिकल हब और बिजनेस सेंटर की योजनाएं पटना को आधुनिक शहरी जीवन की नई दिशा दे रही हैं। शहर के युवाओं में जोश है और सरकार के प्रयासों से शहर की रफ्तार तेज़ हो रही है। जैसे कहा भी गया है जो समय के साथ नहीं बदलता, वो समय के पीछे रह जाता है।पटना ने इस कहावत को सच साबित किया है। यह शहर अब न केवल बिहार का गर्व है बल्कि उत्तर भारत के तेजी से उभरते शहरी केंद्रों में से एक बन चुका है। अक्सर पूछे जाने वाले सवाल- पटना बिहार की राजधानी कब बना? पटना का क्षेत्रफल कितना है? पटना में कितने जिले हैं? पटना कहां है? पटना के फैमस मार्केट्स? जीवनशैली और खानपान में अव्वल पटना पटना की सड़कें सिर्फ व्यस्त नहीं हैं, उनमें जीवन है। यहां की चाय की दुकानों में बहसें होती हैं, गलियों में हंसी गूंजती है और स्वाद हर मोड़ पर मिलता है। पटना का खाना उसकी आत्मा है। लिट्टी-चोखा तो आपने सुना ही होगा और शायद चखा भी हो! मशहूर भी तो इतना है। खैर इसके अलावा ठेकुआ, खजूर का पुआ, खिचड़ी, सत्तू और मिठाइयां जैसे खाजा, अनरसा और पेडा इस शहर की पहचान हैं। Patna food शब्द अपने आप में स्वाद की पहचान बन चुका है। यहां का खाना सिर्फ भूख नहीं मिटाता, यह दिल को सुकून देता है। यहां की संस्कृति में सादगी और अपनापन है। त्यौहारों के समय पटना रंगों से भर जाता है चाहे छठ पूजा हो, मकर संक्रांति, या दिवाली। हर उत्सव यहां पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जाता है। क्यों आज दोराहे पर खड़ा पटना? पटना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। ट्रैफिक की समस्या, प्रदूषण, जल-भराव और स्वच्छता जैसे मुद्दे शहर की गति को धीमा करते हैं। लेकिन इसके बावजूद यह शहर रुकता नहीं। यहां के

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भारतीय इतिहास की महानता के गवाह हैं बिहार के ये पाँच शहर

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बिहार के प्रमुख शहर (Famous cities of Bihar) बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जिसका भारत के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रहा है। अगर आप भारत के इतिहास को समझना चाहते हैं तो बिना बिहार घूमे इसे समझना संभव नहीं है। अगर आप भी ऐतिहासिक स्थलों पर घूमने जाना और इतिहास को कुरेदना पसंद करते हैं तो बिहार आपके लिए एक पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन हो सकता है। चाहे वह नालंदा विश्वविद्यालय हो या फिर पटना स्थित सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अगम कुआं। यहां के हर एक धरोहर आपको भारत के इतिहास की झलक दिखाएंगे। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं बिहार के प्रमुख पांच शहरों के बारे में जहां घूमने जाना मस्ट विजिट है। 1. नालंदा (Nalanda) अगर आप भी ऐतिहासिक धरोहरों (Historical monuments) को देखने और नके इतिहास के बारे में समझने की चाहत रखते हैं तो, आपको बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय को देखना और समझना भी काफी पसंद आएगा। यह विश्वविद्यालय ना सिर्फ भारत बल्कि संपूर्ण संसार के प्राचीनतम विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय का निर्माण गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त ने पांचवी सदी में करवाया गया था। बाद में कुमारगुप्त के उत्तराधिकारियों (successors) ने इसे सहेज कर रखा। गुप्त वंश के पतन (Downfall) के बाद आने वाले दूसरे शासकों ने भी इसके विकास में सहयोग दिया। इसे महान सम्राट हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण (Protection) मिला। 19वीं शताब्दी में एक अंग्रेज (Englishman) को नालंदा में पढ़ रहे एक चीनी यात्री की डायरी मिली। जब वह उस डायरी (diary) में लिखे पते पर पहुंचा तो वह चारों ओर वीरान खंडहर (deserted ruins) थे। वहाँ टहलते हुए अंग्रेज ने देखा कि वहां कुछ चौथी शताब्दी के बने ईट के अवशेष हैं। फिर उसने हल्के हाथों से उस जगह को कुरेद (scrape) कर देखा तो उसे एक के बाद एक सजी हुई ईटों की श्रंखला (series) दिखाई दिया। उसके बाद उसने हीं वहां की खुदाई (digging) प्रारंभ करवाई और इस प्रकार खोज हुआ विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय की। नालंदा विश्वविद्यालय में 1500 से अधिक शिक्षक थे और 10,000 से अधिक छात्र पढाई किया करते थे। यहां विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। यहां छात्रों के रहने के लिए 300 से अधिक कमरे बने हुए थे। सभी कमरे में रोशनी की व्यवस्था थी। विद्यालय के परिसर में जगह जगह पढ़ने का स्थान, प्रार्थना का प्रांगण (prayer hall) और स्टडी हॉल (study hall) बने हुए थे। एक कमरे में एक या एक से अधिक छात्रों के रहने की व्यवस्था थी। कैसे पहुंचे नालंदा (How to reach Nalanda)? अगर आप नालंदा आना चाहते हैं तो नालंदा का सबसे करीबी हवाई अड्डा पटना में स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Jaiprakash Narayan International Airport) है। जहां से नालंदा शहर की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। आपको बता दें कि पटना का जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, देहरादून, जयपुर, अहमदाबाद और कोयंबटूर के साथ-साथ देश के काफी सारे अन्य हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। जिसकी वजह से आपको फ्लाइट (Flight) से पटना पहुंचने में कोई भी तकलीफ नहीं होगी।नालंदा का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन नालंदा जिला में ही स्थित है। लेकिन नालंदा रेलवे स्टेशन के लिए आपको सिर्फ नालंदा के नजदीकी रेलवे स्टेशन पटना, दानापुर, गया, बिहार शरीफ और राजगीर से ही ट्रेन की सुविधा मिल पाएगी। अगर आप इन शहरों से जुड़े हुए हैं, तो आप आसानी से अपने शहर से ट्रेन पकड़ कर नालंदा पहुंच सकते हैं और नालंदा शहर को विजिट कर सकते हैं। लेकिन अगर आपके शहर से नालंदा के लिए डायरेक्ट (Direct) ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने शहर से गया या पटना जंक्शन के लिए ट्रेन पकड़नी होगी। 2. पटना (Patna) जब बात भारत के इतिहास की हो तो इस शहर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं पटना शहर की। यह शहर गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। अगर बात किया जाए इस शहर के वर्तमान की तो यह काफी विकसित हो चुका है। शहर के बड़े-बड़े बिल्डिंग्स, बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और यहां की सड़कें यह बताने के लिए काफी हैं कि यह शहर भी किसी अन्य शहर से पीछे नहीं है। पटना पर्यटन के लिए भी काफी मशहूर है। जिन लोगों को इतिहास में रुचि है, यह शहर उनका बाहें फैलाकर स्वागत करता है। इस शहर के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल, जो इस शहर की शान माने जाते है निम्नलिखित है- गोलघर (Golghar), श्री कृष्ण साइंस सेंटर पटना (Shri Krishna Science Center Patna), बिस्कोमान भवन (Biscomaun Bhawan), गांधी मैदान (Gandhi maidan), बुद्धा स्मृति पार्क (Buddha smriti park), महावीर मंदिर (Mahaveer mandir), तारामंडल (Patna Planetarium – Taramandal), बिहार म्यूजियम (Bihar museum), गांधी म्यूजियम (Gandhi museum), पटना म्यूजियम (Patna museum), संजय गांधी जैविक उद्यान पटना (Sanjay Gandhi Biological Park), पटना साहिब (Patna sahib), इको पार्क (Eco park), गंगा घाट (Ganga Ghat), अगम कुआं (Agam Kuan) तथा कुम्हरार (Kumhrar)। कैसे पहुंचे पटना (How to reach Patna)? यदि आप पटना आना चाह रहे है तो आप तीनों मार्गों से यहाँ आसानी से आ सकते हैं। पटना सड़क मार्ग द्वारा भारत के सभी शहरों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता तथा सिलीगुड़ी से यहाँ के लिए बस सर्विस उपलब्ध है। भारत के किसी भी प्रमुख शहर से पटना के डायरेक्ट ट्रेन है। पटना के जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भारत के किसी प्रमुख शहर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट उपलब्ध है। 3. वाल्मीकि नगर (Valmiki nagar) वाल्मीकि नेशनल पार्क जो बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है, पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (Valmiki Tiger Reserve) का हिस्सा है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व लगभग 900 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 हुई थी। यह टाइगर रिजर्व भारत का अठारहवाँ टाइगर रिजर्व है। 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में 54 बाघ है। 1950 से पहले यह संरक्षित क्षेत्र, बेतिया महाराज के राज में आता था। सर्वप्रथम, 1978 में इस संरक्षित क्षेत्र को वन्य जीव अभ्यारण घोषित कर दिया गया। इसके पश्चात, 1990 में वाल्मीकि वन्य जीव अभ्यारण्य को नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया।

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ये हैं बिहार की राजधानी पटना के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल

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आज हम आपको लेकर चलेंगे एक ऐसे शहर के सफर पर, जिसका भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। जब बात भारत के इतिहास की हो तो इस शहर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं पटना शहर की। यह शहर गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। अगर बात किया जाए इस शहर के वर्तमान की तो यह काफी विकसित हो चुका है। शहर के बड़े-बड़े बिल्डिंग्स, बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल और यहां की सड़कें यह बताने के लिए काफी हैं कि यह शहर भी किसी अन्य शहर से पीछे नहीं है। पटना पर्यटन के लिए भी काफी मशहूर है। जिन लोगों को इतिहास में रुचि है, यह शहर उनका बाहें फैलाकर स्वागत करता है। आइए जानते हैं इस शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में जो इस शहर की शान माने जाते हैं।(visiting places of Patna) 1. गोलघर (Golghar)पटना शहर के बीच में स्थित है गोलघर! जिसे अंग्रेजों द्वारा अनाज के संग्रह के लिए 1786 में बनवाया गया था। एक समय था, जब गोलघर के ऊपर से पूरे पटना शहर के दर्शन किया जा सकता था। लेकिन समय के साथ-साथ इस शहर ने भी तरक्की की और यहां भी बड़े बड़े बिल्डिंग्स बन गए। जिसके कारण अब पूरे पटना शहर का तो दर्शन नहीं किया जा सकता है, लेकिन अब भी गोलघर के शीर्ष से तरक्की की राह पर बढ़ते हुए इस शहर को देखना काफी रमणीय दृश्य होता है। 2. श्री कृष्ण साइंस सेंटर पटना (Shri Krishna Science Center Patna) पटना साइंस सेंटर विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों और बच्चों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। यहां जाकर आप अचंभित कर देने वाली वैज्ञानिक घटनाओं को देख और समझ सकते हैं। यहां बहुत से गाइड मौजूद होते हैं। जो वैज्ञानिक प्रयोगों और उनके कारणों के बारे में पर्यटकों को समझाते हैं। यहां लेजर शो की भी व्यवस्था की गई है।पटना साइंस सेंटर की स्थापना 1978 में की गई थी और इसका नामकरण बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह के नाम पर किया गया है। आपको जानकारियां हैरानी होगी कि यह देश का पहला क्षेत्रीय स्तर का विज्ञान केंद्र है। पटना साइंस सेंटर के खुलने का समय सुबह 9:30 बजे से शाम के 6:00 बजे तक का होता है। लेकिन यहां टिकट का काउंटर हर रोज शाम 5:15 बजे हीं बंद हो जाता है। 3. बिस्कोमान भवन (Biscomaun Bhawan) पटना साइंस सेंटर के बगल में स्थित है बिस्कोमान भवन। यह पटना हीं नहीं बल्कि पूरे बिहार का सबसे ऊंचा बिल्डिंग है। बिस्कोमान भवन में बहुत सारे ऑफिस हैं और इसके टॉप फ्लोर पर एक “पाइंड द रिवाल्विंग रेस्टोरेंट” है। जो अपने जगह पर 360 डिग्री तक घूमता रहता है। घूमते रहने की खासियत के कारण यह रेस्टोरेंट पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। आप भी यहां जाकर बेहद ही शांत माहौल में लंच इंजॉय कर सकते हैं। बिस्कोमान भवन सुबह 8:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक खुला रहता है। 4. गांधी मैदान (Gandhi maidan) गांधी मैदान जिसे पटना का हार्ट भी कहा जाता है, 62 एकड़ जमीन में फैला एक खुला मैदान है। जहाँ हर दिन पटना के बच्चे, बूढ़े और जवान आपको व्यायाम करते मिलेंगे।गांधी मैदान का उपयोग मुख्यतः 26 जनवरी या 15 अगस्त के दिन झंडोतोलन, परेड और झांकियों के लिए किया जाता है। इसके अलावा यहां बिहार दिवस के अवसर पर भी कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। इससे इतर इस मैदान का उपयोग चुनाव प्रचार प्रसार के लिए भी किया जाता है। इस मैदान के दीवारों पर आपको मधुबनी पेंटिंग्स की झलक देखने को मिल जाएंगी। गांधी मैदान में हर वीकेंड पर रात को फिल्म चलाई जाती है। जिसके लिए किसी भी तरह का एंट्री फीस नहीं देना होता है। आप आराम से जाकर खुले आसमान के नीचे बैठकर मूवी को इंजॉय कर सकते हैं। अगर आप भी वीकेंड पर पटना में है तो एक बार गांधी मैदान का चक्कर जरुर लगाएं। यकीनन यह आपको काफी पसंद आएगा। 5. बुद्धा स्मृति पार्क (Buddha smriti park) बुद्धा स्मृति पार्क गांधी मैदान से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस पार्क की खासियत यह है कि यहां पर हर समय होने वाले बुद्धम शरणम गच्छामि के मंत्रोच्चारण के कारण यहां आने वाले पर्यटकों का मन शांत हो जाता है। इस पार्क में एक 200 फीट ऊंचा एक स्तूप है। जिसमें भगवान बुद्ध की अस्थियों के अवशेष को रखा गया है। इस पार्क का उद्घाटन 27 मई 2010 को दलाई लामा ने किया था। उन्होंने पार्क के स्तूप का नाम पाटलिपुत्र करुणा स्तूप रखा। यह पार्क दुनिया भर के बौद्ध पर्यटकों की आस्था का केंद्र है।यहाँ पार्क ऑफ मेमोरी म्यूजियम, लेजर शो, बोध वृक्ष, लाइब्रेरी और मेडिटेशन सेंटर भी है।इस पार्क में बांकीपुर जेल के अवशेषों को भी सहेज कर रखा गया है।बुद्धा स्मृति पार्क के एंट्री टिकट का प्राइस ₹20 है। यह पार्क सोमवार के अलावा सप्ताह के अन्य दिनों में खुला रहता है और इस पार्क के खुलने की टाइमिंग सुबह के 9:00 से शाम के 7:00 बजे तक की है। 6. महावीर मंदिर (Mahaveer mandir) बुद्धा स्मृति पार्क से वॉकिंग डिस्टेंस पर हीं स्थित है महावीर मंदिर। जो उत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और यह मंदिर देश के प्राचीनतम हनुमान मंदिरों में से एक है। अगर आप इस मंदिर में घूमना चाहते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि सामान्य दिनों में ही यहां आएं। क्योंकि रामनवमी, शिवरात्रि या फिर दशहरा के दिनों में यह मंदिर बहुत हीं व्यस्त रहता है। ऐसे में यहां बहुत अधिक मात्रा में श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर की एक और खासियत यह है कि इस मंदिर का ट्रस्ट उत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक ट्रस्ट है। जो गरीब लोगों के कैंसर का इलाज करवाने और जरूरतमंदों की सेवा और परोपकार के कार्यों के लिए जाना है। 7. तारामंडल (Patna Planetarium – Taramandal)पटना का तारामंडल उन लोगों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जिन्हें पृथ्वी के बाहर के ब्रह्मांड के बारे में जानने में अत्यंत रुचि होती है। यहां जाकर आप अंतरिक्ष के बारे में काफी कुछ सीख