Destination Latest Travel

Palitana: गुजरात की इस पहाड़ी पर बसे हैं सैकड़ों जैन मंदिर

  • 0 Comments

गुजरात घूमने की बात होती है तो हमारे दिमाग में अक्सर अहमदाबाद की पुरानी गलियां, कच्छ का रण, सोमनाथ या द्वारका जैसे नाम आते हैं। लेकिन गुजरात में एक ऐसी जगह भी है जहां पहुंचते ही आपका ध्यान किसी बाजार या बड़े शहर की तरफ नहीं, बल्कि सामने दिखाई देने वाली एक विशाल पहाड़ी की तरफ चला जाता है। इस पहाड़ी पर दूर-दूर तक सफेद संगमरमर के मंदिर दिखाई देते हैं और जैसे-जैसे आप ऊपर चढ़ते हैं, मंदिरों की संख्या और उनकी बारीक नक्काशी आपको हैरान करती जाती है। यह जगह है गुजरात का Palitana, जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक। यहां शत्रुंजय पहाड़ी पर सैकड़ों जैन मंदिर बने हुए हैं। इन मंदिरों को देखने के लिए हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, लेकिन ऊपर पहुंचने के बाद जो नजारा मिलता है, वह इस पूरी चढ़ाई को खास बना देता है। Palitana की एक और खास पहचान है इसका शाकाहारी जीवन। साल 2014 में यहां मांस, मछली और अंडे की बिक्री और पशु वध पर कानूनी रोक लगाए जाने की खबरों ने इस शहर को दुनियाभर में चर्चा में ला दिया था। यही वजह है कि Palitana सिर्फ धार्मिक यात्रा के लिए नहीं, बल्कि अहिंसा और स्थानीय संस्कृति को समझने के लिए भी खास जगह है। अगर आप Palitana जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इस यात्रा में सिर्फ मंदिरों की संख्या देखने के बजाय यहां के इतिहास, मान्यताओं, वास्तुकला, चढ़ाई और स्थानीय जीवन को समझना ज्यादा दिलचस्प रहेगा। शत्रुंजय पहाड़ी पर बसा है मंदिरों का पूरा संसार Palitana शहर के दक्षिण में शत्रुंजय पहाड़ी स्थित है। जैन परंपरा में इस पहाड़ी को बेहद पवित्र माना जाता है और इसका नाम शत्रुंजय यानी ‘शत्रुओं पर विजय’ से जोड़ा जाता है। यहां के मंदिर पहाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में समूहों के रूप में बने हुए हैं। दूर से देखने पर सफेद संगमरमर के ये मंदिर पहाड़ी की चोटी पर किसी छोटे शहर की तरह दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे आप ऊपर पहुंचते हैं, अलग-अलग आकार के मंदिर, गुंबद, शिखर और नक्काशीदार संरचनाएं सामने आती रहती हैं। मंदिरों की संख्या को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग आंकड़े मिलते हैं, लेकिन यह बात तय है कि शत्रुंजय पहाड़ी पर सैकड़ों जैन मंदिरों का विशाल समूह मौजूद है। इसी वजह से Palitana को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। पालीताना की चढ़ाई आसान नहीं है Palitana घूमने का सबसे अलग अनुभव है शत्रुंजय पहाड़ी की चढ़ाई। तलहटी से मंदिरों तक पहुंचने के लिए हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। अलग-अलग विवरणों में सीढ़ियों की संख्या करीब 3,500 से 3,800 तक बताई जाती है। चढ़ाई की दूरी और समय आपकी गति पर निर्भर करता है। किसी को दो घंटे लग सकते हैं तो किसी को इससे ज्यादा समय भी लग सकता है। इसलिए इसे जल्दी खत्म करने की कोशिश करने के बजाय आराम से चढ़ना बेहतर है। अगर आप पहली बार Palitana जा रहे हैं, तो सुबह जल्दी शुरुआत करना समझदारी होगी। गर्मी बढ़ने से पहले काफी हिस्सा पूरा किया जा सकता है और रास्ते में रुककर आराम करने का भी समय मिलता है। सुबह की चढ़ाई का अनुभव अलग होता है सुबह-सुबह Palitana की पहाड़ी की तरफ बढ़ते हुए माहौल काफी शांत रहता है। रास्ते में दूसरे श्रद्धालु दिखाई देते हैं और कई लोग जैन मंत्रों का जाप करते हुए चढ़ाई करते हैं। ऊपर जाते समय जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, नीचे का शहर छोटा दिखाई देने लगता है। मौसम साफ हो तो आसपास की पहाड़ियां और शेतरुंजी नदी का क्षेत्र भी दिखाई दे सकता है। यह चढ़ाई सिर्फ शारीरिक मेहनत नहीं है। जैन श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक यात्रा का अहम हिस्सा है। इसलिए Palitana में चढ़ाई करते समय शोर-शराबे के बजाय शांत माहौल बनाए रखना बेहतर रहता है। पहाड़ी पर खाने-पीने को लेकर नियम क्यों हैं? शत्रुंजय पहाड़ी के मंदिर क्षेत्र में खान-पान को लेकर कड़े धार्मिक नियम हैं। दिए गए विवरण के अनुसार मंदिरों की ओर जाते समय भोजन ले जाने और खाने पर रोक रहती है। इसका संबंध जैन धर्म की अहिंसा और धार्मिक मर्यादाओं से है। इसलिए Palitana जाने वालों को इस नियम को पहले से समझ लेना चाहिए। चढ़ाई शुरू करने से पहले पर्याप्त पानी पी लें और रास्ते में उपलब्ध प्याऊ का इस्तेमाल करें। यात्रा से पहले मौजूदा नियमों की पुष्टि कर लेना भी अच्छा रहेगा, क्योंकि व्यवस्थाएं समय के साथ बदल सकती हैं। पालीताना का इतिहास आखिर कितना पुराना है? Palitana का धार्मिक इतिहास बहुत पुराना माना जाता है। जैन परंपरा के अनुसार प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ यानी ऋषभदेव का इस क्षेत्र से विशेष संबंध है। जैन मान्यताओं में शत्रुंजय पहाड़ी को मोक्ष से जुड़ी पवित्र भूमि माना जाता है। पुंडरीक स्वामी से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के कारण इस पर्वत को पुंडरीकगिरि नाम से भी जोड़ा जाता है। इसके अलावा कई दूसरे धार्मिक प्रसंग भी शत्रुंजय से जुड़े हुए हैं। इन कथाओं का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है, हालांकि इन्हें धार्मिक परंपरा और मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। पहाड़ी पर मंदिर कब बनने शुरू हुए? ऐतिहासिक रूप से शत्रुंजय पहाड़ी पर मंदिर निर्माण और पुनर्निर्माण अलग-अलग काल में होता रहा है। यहां मौजूद कई मंदिरों का निर्माण मध्यकाल से लेकर बाद के समय तक अलग-अलग संरक्षकों और जैन व्यापारियों के सहयोग से हुआ। समय के साथ इन मंदिरों को कई बार नुकसान भी पहुंचा और फिर उनका पुनर्निर्माण किया गया। यही वजह है कि आज दिखाई देने वाला Palitana मंदिर परिसर एक ही समय में बनाया गया परिसर नहीं है, बल्कि कई सदियों के निर्माण और संरक्षण का परिणाम है। इस जगह की खासियत सिर्फ पुराना होना नहीं है। असली बात यह है कि इतने लंबे समय तक इस धार्मिक और स्थापत्य परंपरा को संभालकर रखा गया। संगमरमर के मंदिरों की खूबसूरती क्यों अलग है? Palitana की सबसे पहली दृश्य पहचान सफेद संगमरमर है। पहाड़ी पर बने मंदिरों के शिखर और गुंबद धूप पड़ने पर काफी चमकदार दिखाई देते हैं। मंदिरों के अंदर और बाहर पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी देखने लायक है। खंभों, छतों, दरवाजों और जालियों पर बेहद महीन काम दिखाई देता है। इन मंदिरों में मारू-गुर्जर या सोलंकी शैली का प्रभाव देखने को