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Purana Qila Delhi: 10 Amazing Facts, जरूर जानें

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दिल्ली में घूमने की बात हो और Purana Qila का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यमुना के किनारे बना यह किला सिर्फ पुरानी इमारत नहीं है—यह दिल्ली के लंबे इतिहास की एक जिंदा कड़ी है। हर साल हजारों लोग यहां की ऊंची दीवारें, पुराने दरवाजे और इतिहास से जुड़ी कहानियाँ देखने आते हैं। अगर आप भी इस वीकेंड परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ Purana Qila घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले यह ब्लॉग ज़रूर पढ़ लें। नीचे दी गई 10 बातें आपकी यात्रा को और आसान, मजेदार और यादगार बना देंगी। क्या सच में यहाँ था पांडवों का इंद्रप्रस्थ? ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर दिल्ली के Purana Qila को पांडवों की प्राचीन राजधानी इंद्रप्रस्थ का स्थल माना जाता है, क्योंकि यहाँ खुदाई के दौरान ‘पेंटेड ग्रे वेयर’ (PGW) या चित्रित धूसर मृदभांड के अवशेष मिले हैं जो महाभारत काल (लगभग 1100–1200 ईसा पूर्व) से जोड़े जाते हैं। प्रसिद्ध पुरातत्वविद् बी.बी. लाल के नेतृत्व में शुरू हुई खुदाइयों से यह भी पता चला कि इस इलाके में मौर्य, गुप्त, राजपूत और मुगल काल जैसी कई संस्कृतियों की लगातार बसावट रही है। 19वीं सदी के अंत तक किले के भीतर ‘इंद्रपत’ नामक एक गाँव का मौजूद होना भी इस दावे को मजबूती देता है। हालाँकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के विशेषज्ञों का कहना है कि इसे पुख्ता तौर पर ‘इंद्रप्रस्थ की राजधानी’ घोषित करने के लिए और अधिक विस्तृत खुदाई और ठोस साक्ष्यों की ज़रूरत है। यह काम अभी भी जारी है ताकि पौराणिक कथाओं और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बीच का संपर्क पूरी तरह से स्पष्ट हो सके और यह संबंध वैज्ञानिक रूप से पुष्टि योग्य बन सके। इस किले को दो बड़े शासकों ने बनाया कहानी सिर्फ एक शासक तक सीमित नहीं है। Purana Qila की शुरुआत हुमायूं ने अपनी नई राजधानी दीनपनाह के रूप में 1533 के आस-पास की थी। थोड़े समय बाद शेरशाह सूरी ने इस पर कब्जा कर किले का विस्तार कराया। इसलिए आपको यहां मुगल और अफगान दोनों तरह की वास्तुकला के संकेत मिलेंगे। यही वजह है कि Purana Qila दिल्ली के बाकी किलों से कुछ अलग दिखता है। हुमायूं की मौत से जुड़ी दुखद घटना किले के अंदर शेर मंडल एक खास इमारत है। यह अष्टकोणीय भवन शेरशाह सूरी ने बनवाया था और बाद में हुमायूं ने इसे लाइब्रेरी और अध्ययन स्थल के रूप में इस्तेमाल किया। कहानी के मुताबिक हुमायूं एक बार शेर मंडल की सीढ़ियों से उतर रहे थे, अजान सुनकर रुकने की वजह से उनका पैर फिसला और वे गिर गए। गंभीर चोट के कारण कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई। शेर मंडल देखते ही यह दुखद घटना याद आ जाती है, इसलिए इसे देखना न भूलें। यहाँ की वास्तुकला खींचती है ध्यान अगर आपको पुरानी इमारतों और डिज़ाइन का शौक है तो Purana Qila आपको निराश नहीं करेगा। किले के तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं—बड़ा दरवाजा, हुमायूं दरवाजा और तलाकी दरवाजा। ये सभी लाल बलुआ पत्थर से बने हैं और नक्काशी अब भी कमाल की दिखती है। अंदर किला-ए-कुहना मस्जिद की मेहराबें, पत्थरों की नक्काशी और संगमरमर का काम देखने लायक है। फोटोग्राफी के लिए सुबह और शाम की सुनहरी रोशनी बेहतरीन रहती है। करीब 10 साल बाद फिर शुरू हुई बोटिंग Purana Qila सिर्फ इतिहास नहीं, यहाँ की झील में अब बोटिंग का मज़ा भी मिलता है। करीब दस साल पहले यह सुविधा बंद थी, लेकिन अब नए पैडल बोट्स के साथ फिर शुरू हो चुकी है। शाम के वक्त झील पर बोटिंग करने का अनुभव बहुत ही शांतिपूर्ण और खूबसूरत रहता है—हरियाली, पानी की हवा और सामने किले का नज़ारा खास लगता है। परिवार या पार्टनर के साथ आएँ तो बोटिंग ज़रूर आज़माइए। शाम का लाइट एंड साउंड शो मिस मत कीजिए यदि आप शाम को आ रहे हैं तो लाइट एंड साउंड शो जरूर देखें। यह शो रोशनी, संगीत और आवाज़ के ज़रिये किले का इतिहास बड़ी दिलचस्पी से बताता है—प्राचीन समय से लेकर मुगल काल और आधुनिक दिल्ली तक। शो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में होता है (समय प्रशासन के अनुसार बदल सकता है), इसलिए जाने से पहले शो का समय चेक कर लें। बच्चों को भी यह शोज़ खूब पसंद आते हैं क्योंकि इतिहास कहानी के रूप में पेश किया जाता है। किले के अंदर बना म्यूज़ियम भी देखें कई लोग सिर्फ दीवारें देखकर निकल जाते हैं, पर अंदर का म्यूज़ियम देखने लायक है। छोटा जरूर है, पर म्यूज़ियम में खुदाई से मिले सिक्के, मिट्टी के बर्तन, मूर्तियाँ और अन्य अवशेष रखे गए हैं। अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी है तो 20–30 मिनट यहाँ गुज़ारने से किले की समझ बदल जाएगी और चीज़ें और भी जीवंत लगेंगी। सुविधाएँ लगातार बेहतर हो रही हैं पिछले कुछ सालों में यहाँ पर्यटकों के लिए सुविधाओं में सुधार हुआ है। परिसर साफ-सुथरा रखा जा रहा है, बैठने की व्यवस्था बेहतर हुई है और कैफ़ेटेरिया जैसी सुविधाएँ भी बढ़ रही हैं। परिवारों के लिए आरामदायक जगहें और बच्चों के खेलने की व्यवस्था पर भी काम चल रहा है। साथ ही इमारतों की मरम्मत भी नियमित हो रही है ताकि ऐतिहासिक पहचान बनी रहे। यदि आपने कुछ साल पहले आए थे तो इस बार सकारात्मक बदलाव नजर आएँगे। जाने से पहले टिकट, टाइमिंग और पहुंचने का तरीका जान लें बुनियादी जानकारी पहले से लेकर चलें तो ट्रिप बेहतरीन रहेगी। दिल्ली की सबसे अच्छी विजिटिंग सिजन अक्टूबर से मार्च मानी जाती है—इस समय मौसम सुहावना रहता है। गर्मियों में सुबह जल्दी या शाम को जाएँ। नज़दीकी मेट्रो स्टेशन प्रगति मैदान (ब्लू लाइन) है; वहां से ऑटो या ई-रिक्शा लेकर कुछ मिनटों में पहुँच जाता है। भारतीय और विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट अलग होते हैं और दरें बदलती रहती हैं—ऑनलाइन या ASI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाने से सही जानकारी मिल जाएगी। आसपास और भी देखने लायक जगहें हैं अगर पूरा दिन है तो सिर्फ Purana Qila तक सीमित मत रहें। पास ही राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) है, साथ में इंडिया गेट, नेशनल साइंस सेंटर और हुमायूं का मकबरा भी नज़दीक हैं। कई लोग सुबह किला घूमते हैं, दोपहर में आसपास की जगहें देखते हैं और शाम को वापस आकर बोटिंग या लाइट