Train: नए कोचों में मिलेगा Toy Train का नया अनुभव
सोचिए, सुबह की ठंडी हवा चल रही है। एक तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़ हैं, दूसरी तरफ घने जंगल और चाय के हरे-भरे बागान। कहीं दूर से भाप के इंजन की सीटी सुनाई देती है और धीरे-धीरे एक छोटी सी ट्रेन पहाड़ पर चढ़ती हुई दिखाई देती है। यही नजारा Nilgiri Mountain Railway को बाकी रेल यात्राओं से बिल्कुल अलग बनाता है। Ooty जाने वाले बहुत से पर्यटकों के लिए Toy Train की सवारी सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का साधन नहीं होती। यह खुद एक अनुभव है। ट्रेन कभी जंगल के बीच से निकलती है, कभी गहरी घाटी के किनारे से गुजरती है और कभी चाय के बागानों के बीच से अपना रास्ता बनाती है। अब इस पुराने और बेहद खास सफर में एक नया बदलाव आने वाला है। Southern Railway ने Nilgiri Mountain Railway के लिए नए डिजाइन किए गए स्टेनलेस स्टील कोचों का ट्रायल शुरू किया है। इन नए कोचों में बड़ी कांच की खिड़कियां, आरामदायक सीटें, LED लाइट्स, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और यात्रियों के लिए कई दूसरी सुविधाएं दी गई हैं। यानी पुरानी विरासत वही रहेगी, लेकिन सफर का अंदाज काफी बदलने वाला है। 120 साल से ज्यादा पुरानी रेल लाइन, जिसकी कहानी आज भी जिंदा है Nilgiri Mountain Railway कोई नई पर्यटन ट्रेन नहीं है। इसकी कहानी 19वीं सदी से शुरू होती है। पहाड़ी इलाके में रेल लाइन बनाने का विचार अंग्रेजों के समय में सामने आया था। 1854 में इसकी शुरुआती योजना बनाई गई, लेकिन पहाड़ों को काटकर रेल लाइन बनाना आसान नहीं था। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इस परियोजना को पूरा होने में कई दशक लग गए। आखिरकार जून 1899 में Mettupalayam से Coonoor तक रेल सेवा शुरू हुई। इसके बाद लाइन को आगे Fernhill और फिर अक्टूबर 1908 में Udhagamandalam यानी Ooty तक बढ़ाया गया। उस समय जिस तकनीक और संसाधनों के साथ यह रेल लाइन बनाई गई थी, उसे आज भी इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण माना जाता है। यही वजह है कि आज भी Toy Train का सफर सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि रेलवे इतिहास को करीब से देखने का मौका भी देता है। पहाड़ों के बीच बनी यह लाइन बताती है कि 100 साल से भी पहले इंजीनियरों ने कितनी मुश्किल परिस्थितियों में रेल को इन ऊंचाइयों तक पहुंचाया था। UNESCO की सूची में शामिल है Nilgiri Mountain Railway Nilgiri Mountain Railway को जुलाई 2005 में UNESCO ने ‘Mountain Railways of India’ के तहत World Heritage Site का हिस्सा बनाया। इससे इसकी पहचान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह एक खास आकर्षण बन गई। Darjeeling Himalayan Railway और Kalka-Shimla Railway के साथ Nilgiri Mountain Railway भारतीय पहाड़ी रेलवे की उस विरासत को दिखाती है, जिसने कठिन पहाड़ी इलाकों में रेल यात्रा को संभव बनाया। यही UNESCO विरासत इस Toy Train को और खास बना देती है। यहां सफर करते समय यात्री सिर्फ पहाड़ नहीं देखते, बल्कि एक ऐसी ऐतिहासिक रेल व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं जो आज भी नियमित रूप से चल रही है। Nilgiri की चढ़ाई इतनी आसान नहीं, इसलिए यहां है खास रैक सिस्टम Nilgiri Mountain Railway की सबसे खास तकनीकी बात इसका रैक एंड पिनियन सिस्टम है। Mettupalayam से Coonoor के बीच पहाड़ काफी तेजी से ऊपर उठते हैं। इस हिस्से में अधिकतम ग्रेडिएंट करीब 1 in 12 तक पहुंचता है। आसान भाषा में समझें तो सामान्य रेल लाइन की तुलना में यहां ट्रेन को बहुत ज्यादा चढ़ाई करनी पड़ती है। इसी वजह से पटरियों के बीच एक खास दांतों वाली रैक लगाई गई है। इंजन के पहियों से जुड़े पिनियन इस रैक के साथ पकड़ बनाते हैं और ट्रेन को ढलान पर ऊपर चढ़ने में मदद मिलती है। भारत में Nilgiri Mountain Railway ही ऐसी प्रमुख रेल लाइन है जहां इस तरह का Abt Rack and Pinion System इस्तेमाल किया जाता है। यही तकनीक इस Toy Train की यात्रा को और खास बनाती है। पुराने कोचों की जगह अब आएंगे नए स्टेनलेस स्टील कोच Nilgiri Mountain Railway के पुराने कोच लंबे समय से यात्रियों को पहाड़ों का सफर करा रहे थे। इनमें पारंपरिक डिजाइन और पुराने जमाने की झलक दिखाई देती थी, लेकिन समय के साथ इनका रखरखाव और यात्रियों की बदलती जरूरतें बड़ी चुनौती बन रही थीं। इसी को देखते हुए Integral Coach Factory, Chennai ने Nilgiri Mountain Railway के लिए नए स्टेनलेस स्टील कोच तैयार किए हैं। इनका डिजाइन ऐसा रखा गया है कि ट्रेन की पुरानी पहचान पूरी तरह खत्म न हो और यात्रियों को आज के समय की जरूरी सुविधाएं भी मिलें। नए कोचों का बाहरी डिजाइन आधुनिक है, लेकिन इन्हें Nilgiri की ऐतिहासिक रेल लाइन के हिसाब से तैयार किया गया है। यानी कोशिश यह है कि Toy Train आधुनिक दिखे, लेकिन उसका पुराना आकर्षण बना रहे। कुल 15 नए कोच तैयार किए जा रहे हैं Nilgiri Mountain Railway के लिए कुल 15 नए स्टेनलेस स्टील कोच तैयार करने की योजना है। इनमें से 12 कोचों को मिलाकर तीन रेक तैयार किए जाएंगे। एक रेक में चार कोच होंगे। इनमें एक First Class कोच होगा, जिसमें 32 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसके अलावा दो Second Class Seater कोच होंगे, जिनमें 44-44 सीटें होंगी। चौथा कोच Luggage-cum-Passenger Car होगा, जिसमें 26 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। बचे हुए तीन कोच स्पेयर के तौर पर रखे जाएंगे। इनका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर रखरखाव या किसी कोच के बदले किया जा सकता है। इस तरह रेलवे धीरे-धीरे पुराने कोचों की जगह ज्यादा आधुनिक और सुरक्षित कोचों का इस्तेमाल बढ़ा सकेगा, जबकि Toy Train की मूल यात्रा और रूट वही रहेगा। सबसे बड़ा बदलाव: अब पहाड़ों का नजारा और साफ दिखेगा नए कोचों की सबसे आकर्षक सुविधा उनकी बड़ी कांच की खिड़कियां हैं। Nilgiri की यात्रा में बाहर का नजारा ही सबसे बड़ा आकर्षण होता है और नई खिड़कियां इसी अनुभव को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई हैं। पुराने छोटे या सीमित खिड़की क्षेत्र की तुलना में बड़ी खिड़कियों से यात्रियों को जंगल, पहाड़, चाय के बागान और घाटियों को ज्यादा आसानी से देखने का मौका मिलेगा। सोचिए, ट्रेन धीरे-धीरे पहाड़ पर चढ़ रही हो और आपके