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ट्रेकर्स को लुभाता है उत्तराखंड का नंदा देवी नेशनल पार्क

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उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सूची में गिना जाता है। इस नेशनल पार्क को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में भी शामिल किया गया है। नंदा देवी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 630 वर्ग किलोमीटर है और इस नेशनल पार्क को वर्ष 1982ई में स्थापित किया गया था। वर्ष 1988ई में यूनेस्को ने इसे अपने वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया। 2005ई में नंदा देवी नेशनल पार्क का नाम बदलकर नंदा देवी एंड वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क कर दिया गया तथा इसका क्षेत्रफल वैली ऑफ फ्लावर तक बढ़ा दिया गया। नंदा देवी नेशनल पार्क को नंदा देवी बायोस्फियर रिज़र्व भी घोषित किया जा चुका है। इस नेशनल पार्क के क्षेत्र में बहुत सारी ऐसी पर्वत श्रृंखलाएं हैं जो 6000 मीटर से भी ऊंची है। जिनमें सबसे ऊंची पहाड़ी नंदा देवी है, जो कि 7816 मीटर ऊंची है। इसके अलावा यहां सुनंदा देवी (7435m), त्रिशूली 1 (7120m), त्रिशूली 2 (6690m), त्रिशूल 3 (6008m), बेथरटोली हिमल (6352m), देवी स्थान (6529m), ऋषि प्रहर (6992m), ऋषिकोट (6236m), हनुमान (6075m), दूनागिरी (7066m), चंगा बांग (6866m), कलंक (6931m), लाटु धुरा (6392m), सकरम (6254m), देव दमला (6620m), मंगराओं (6568m), देवटोली (6788m), मैकटोली (6803m) आदि जैसी प्रमुख पर्वत चोटियां भी शामिल हैं जो 6000 मीटर से भी ज्यादा ऊंची हैं। हालांकि आपको बता दे कि यहां के सबसे ऊंचे पर्वत की चोटी यानि नंदा देवी पर आप चढ़ाई नहीं कर सकते हैं। क्योंकि धार्मिक कारणों तथा विषम परिस्थितियों के कारण नेशनल पार्क प्रशासन द्वारा यहां चढ़ाई को बंद करवा दिया गया है। फॉउना और फ्लोरा (Fauna and Flora in Nanda Devi National Park) नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमें पक्षियों की लगभग 130, मकड़ियों की लगभग 40 और तितलियों की 40 प्रजातियाँ पायी जाती है। यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में हिमालयी ताहर (Himalayan Tahr), कस्तूरी मृग (Musk Deer), भरल (Bharal), गोरल (Goral), लंगूर (Langur), तेंदुए (Leopard), हिमालयी भालू (Himalayan Bear), रेड फॉक्स (Red Fox) आदि शामिल है। नंदा देवी नेशनल पार्क में तरह-तरह के जंगली जानवरों के साथ-साथ फूलों की भी अतरंगी प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां आपको फूलों की 500 से भी अधिक प्रजातियां देखने को मिलेंगी। जो पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अगर आप भी वाइल्डलाइफ में इंटरेस्ट रखते हैं तो यहां जाकर आपको बहुत कुछ जानने और सीखने को मिलेगा। बेस्ट टाइम टू विजिट नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Nanda Devi National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान साल के छह महीने (1 मई से 31 अक्टूबर तक) खुला रहता है। आप यहाँ इस छह महीने की अवधि में कभी भी आ सकते है। लेकिन अगर आप यहाँ आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nanda Devi National Park)?

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देव भूमि उत्तराखंड में है दुनिया का सबसे खूबसूरत नेशनल पार्क जानिए इसके बारे में

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Valley of Flowers “क्या आपने कभी किसी ऐसे जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितना खूबसूरत होगा वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी? ….और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे?” क्या है वैली ऑफ़ फ्लावर?( what is valley of flower)? वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क पहले नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान का भाग था लेकिन बाद में इन दोनों नेशनल पार्कों को अलग कर दिया गया। इस फ्लॉवर वैली में खास क्या है? (What’s special in this valley of flower?) फ्लोरा (Floras in Valley of Flowers National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनीमोन (Anemone), जर्मेनियम (Germanium), मार्श (Marsh), गेंदा (Marigold), प्रिभुला (Pribula), पोटेन्टिला (Potentilla), जिउम (Geum), तारक (Aster), लिलियम (Lilium), हिमालयी नीला पोस्त (Himalayan Blue Poppy), बछनाग (Bacchanal), डेलफिनियम (Delphinium), रानुनकुलस (Ranunculus), कोरिडालिस (Corydalis), इन्डुला (Indula), सौसुरिया (Saussurea) और कम्पानुला (Campanula)। बेस्ट टाइम टू विजिट वैली ऑफ़ फ्लावर नेशनल पार्क (Best time to visit Valley of Flowers National Park) वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है। कैसे पहुंचे फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valley of Flowers National Park)? वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचना होगा। पुलना गांव से आपकी ट्रैकिंग की शुरुआत होगी। जब आप पुलना गांव से अपनी ट्रैकिंग की शुरुआत करेंगे तो रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम के एक बाजार से गुजरना होगा। जंगल चट्टी से गुजरते हुए आप भ्युवदार गांव पहुंचेंगे। भ्युवदार गांव इस ट्रक का सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट होगा। जहां से आप घांगरिया के लिए निकलेंगे। पुलना से घांगरिया तक का ट्रैक लगभग 10 किलोमीटर का होता है। घांगरिया पहुंचकर आपको एक दिन रुकना पड़ेगा, क्योंकि दिन के 12:00 के बाद घांगरिया से आगे की ट्रैकिंग रोक दी जाती है। अगले दिन आप वैली ऑफ फ्लावर के लिए ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। घांगरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और आप बहुत ही आसानी से इस ट्रैक को पूरा कर लेंगे।