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Jaggery: मुजफ्फरनगर की मशहूर गुड़ मंडी और इसकी खास पहचान

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सर्दियों की सुबह हो और चाय के साथ गुड़ का एक छोटा-सा टुकड़ा मिल जाए, तो दिन की शुरुआत ही अलग लगती है। कहीं गुड़ की चाय बनती है, तो कहीं इससे गजक, रेवड़ी, चिक्की और लड्डू तैयार किए जाते हैं। गांवों में तो आज भी गन्ने की पेराई के बाद ताजा बना गुड़ लोगों के बीच बांटने की परंपरा देखने को मिल जाती है। Jaggery लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर तक पहुंचने वाला यह गुड़ बनता कहां है? उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का नाम इस मामले में सबसे पहले लिया जाता है। यहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है और गुड़ बनाने का काम कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। शहर की पहचान यहां की बड़ी गुड़ मंडी और आसपास के गांवों में चलने वाली गुड़ बनाने की इकाइयों से जुड़ी है। Jaggery मुजफ्फरनगर को अक्सर भारत की ‘गुड़ राजधानी’ कहा जाता है। यहां का गुड़ देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है और इसे साल 2023 में GI Tag भी मिला। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर मुजफ्फरनगर की पहचान गुड़ से कैसे जुड़ी, खेतों से आया गन्ना किस तरह गुड़ बनता है, यहां की मंडी क्यों खास है और इस शहर की यात्रा पर जाने पर आप क्या-क्या देख सकते हैं। आखिर मुजफ्फरनगर को क्यों कहा जाता है भारत की गुड़ राजधानी? उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बसा मुजफ्फरनगर खेती और कृषि से जुड़े कारोबार के लिए जाना जाता है। यह गंगा और यमुना नदियों के बीच बसे उपजाऊ दोआब क्षेत्र का हिस्सा है। यहां की जमीन पर गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। जिले के कई गांवों में खेतों के आसपास गन्ने की फसल और उसे खरीदने वाले केंद्र आसानी से देखने को मिल जाते हैं। मुजफ्फरनगर की अर्थव्यवस्था में गन्ने की खेती और उससे जुड़े कारोबार की बड़ी भूमिका है। यहां चीनी मिलें भी हैं और छोटे-बड़े स्तर पर गुड़ बनाने का काम भी होता है। यही वजह है कि इस जिले में गन्ने से जुड़े कई तरह के रोजगार मिलते हैं। किसान गन्ना उगाते हैं, कोल्हू और गुड़ बनाने वाली इकाइयां उसका रस निकालती हैं और व्यापारी तैयार गुड़ को अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाते हैं। मुजफ्फरनगर की पहचान सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। यहां की गुड़ मंडी भी काफी प्रसिद्ध है। जिले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मुजफ्फरनगर का गुड़ बाजार दुनिया के सबसे बड़े गुड़ बाजार के रूप में जाना जाता है। यही बाजार इस शहर को देश के प्रमुख Jaggery व्यापार केंद्रों में शामिल करता है। मुजफ्फरनगर की गुड़ मंडी: जहां दूर-दूर से पहुंचता है माल मुजफ्फरनगर की गुड़ मंडी यहां आने वाले लोगों के लिए एक अलग ही अनुभव है। खासकर गन्ने की पेराई के मौसम में मंडी में काफी हलचल देखने को मिलती है। आसपास के गांवों और दूसरे इलाकों से तैयार गुड़ यहां पहुंचता है। व्यापारी इसकी खरीद-बिक्री करते हैं और फिर इसे देश के अलग-अलग बाजारों में भेजा जाता है। Jaggery मंडी में आपको गुड़ के कई रूप देखने को मिल सकते हैं। कहीं बड़े-बड़े ठोस ढेले रखे होते हैं, तो कहीं छोटे आकार की भेलियां और गुड़ का पाउडर मिलता है। रंग और बनावट में भी अंतर दिखाई देता है। कुछ गुड़ हल्के सुनहरे रंग का होता है, तो कुछ गहरे भूरे रंग का। यहां का कारोबार केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है। दूसरे राज्यों के व्यापारी भी मुजफ्फरनगर से गुड़ खरीदते हैं। उत्तर प्रदेश के ODOP पोर्टल पर भी जिले के प्रमुख उत्पाद के रूप में गुड़ को जगह दी गई है। इससे पता चलता है कि यह कारोबार जिले की पहचान और स्थानीय रोजगार, दोनों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। अगर आप बाजार और स्थानीय कारोबार को करीब से देखना पसंद करते हैं, तो मुजफ्फरनगर की गुड़ मंडी आपकी यात्रा में शामिल हो सकती है। हालांकि, मंडी में जाने से पहले उसके कामकाज के समय और प्रवेश से जुड़े नियमों की जानकारी ले लेना बेहतर रहेगा। Jaggery खेत से कड़ाही तक: आखिर कैसे तैयार होता है मुजफ्फरनगर का गुड़? गुड़ बनाने की प्रक्रिया देखने में जितनी आसान लगती है, असल में उसमें काफी मेहनत और अनुभव लगता है। इसकी शुरुआत गन्ने के खेत से होती है। जब गन्ना तैयार हो जाता है, तो किसान उसकी कटाई करके उसे पेराई वाली इकाई तक पहुंचाते हैं। वहां से शुरू होता है गुड़ बनाने का काम। सबसे पहले गन्ने को मशीन या कोल्हू में डालकर उसका रस निकाला जाता है। इस रस को छानकर बड़े-बड़े कड़ाहों में डाला जाता है। इसके बाद उसे गर्म किया जाता है, ताकि पानी कम हो और रस धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगे। उबालने के दौरान ऊपर आने वाली अशुद्धियों को हटाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में तापमान और रस की गाढ़ापन पर लगातार ध्यान रखना पड़ता है। जब रस सही गाढ़ेपन तक पहुंच जाता है, तो उसे कड़ाही से निकालकर ठंडा करने के लिए अलग बर्तन में डाला जाता है। फिर उसे लगातार चलाया जाता है, ताकि वह जमने के लिए तैयार हो जाए। इसके बाद कारीगर उसे सांचों में डालकर अलग-अलग आकार देते हैं। कुछ जगहों पर गोल भेलियां बनाई जाती हैं, तो कहीं चौकोर टुकड़े तैयार किए जाते हैं। Jaggery मुजफ्फरनगर के आसपास आज भी पारंपरिक तरीके से गुड़ बनाने वाली इकाइयां मिलती हैं। कुछ जगहों पर आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल भी होने लगा है। इस तरह पारंपरिक अनुभव और नई तकनीक, दोनों मिलकर यहां के Jaggery कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं। गुड़ की एक नहीं, कई किस्में मिलती हैं यहां अगर आपको लगता है कि गुड़ बस एक ही तरह का होता है, तो मुजफ्फरनगर की मंडी में जाकर आपकी यह सोच बदल सकती है। यहां गुड़ अलग-अलग रंग, आकार और बनावट में मिलता है। इसे बनाने के तरीके और इस्तेमाल के हिसाब से भी कई रूपों में तैयार किया जाता है। सबसे आम रूप ठोस गुड़ का है, जिसे गोल या चौकोर आकार में जमाया जाता है। इसे घरों में चाय, दूध और कई तरह की मिठाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा गुड़ का पाउडर भी मिलता है, जिसे दूध, हलवे और दूसरी चीजों में आसानी से मिलाया जा सकता