Mumbai AQI Update: बांद्रा में धुंध, हवा की हालत पर चिंता
मुंबई में सुबह-सुबह लोकल ट्रेन पकड़ने की जल्दी, सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही और दूर तक दिखती ऊंची इमारतें यहां की रोजमर्रा की पहचान हैं। लेकिन अक्टूबर के आखिरी दिनों में बांद्रा रेलवे स्टेशन और बांद्रा ईस्ट स्काईवॉक से सामने आई तस्वीरों में शहर का एक अलग ही नज़ारा दिखाई दिया। आसमान पर धुंध की मोटी परत थी और दूर की इमारतें भी ठीक से दिखाई नहीं दे रही थीं। इन तस्वीरों को देखकर लोगों के मन में एक सवाल उठा कि समंदर के किनारे बसा मुंबई शहर आखिर इतनी धुंध में क्यों ढक रहा है? इसकी एक बड़ी वजह हवा में बढ़ते प्रदूषण और मौसम में आए बदलाव को माना जा रहा है। मुंबई की हवा कितनी साफ है, इसे समझने के लिए AQI यानी Air Quality Index देखा जाता है। हाल के दिनों में मुंबई के अलग-अलग इलाकों में AQI के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कहीं हवा की स्थिति मध्यम रही, तो कुछ जगहों पर प्रदूषण का स्तर इससे ज्यादा दर्ज किया गया। बांद्रा स्टेशन की तस्वीरों में आखिर क्या दिखा? 24 अक्टूबर 2026 को बांद्रा रेलवे स्टेशन और बांद्रा ईस्ट स्काईवॉक के आसपास की तस्वीरों में आसमान पर धुंध छाई दिखाई दी। लोकल ट्रेनें अपनी रफ्तार से चल रही थीं, लेकिन पीछे की इमारतें और शहर का नज़ारा धुंध के कारण साफ नहीं दिख रहा था। इन तस्वीरों ने लोगों का ध्यान मुंबई की हवा की ओर खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, उस शनिवार सुबह सरकारी SAMEER ऐप पर मुंबई का औसत AQI करीब 112 दर्ज किया गया था। यह भारत के AQI पैमाने पर मध्यम श्रेणी में आता है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों और समय पर AQI के आंकड़े अलग हो सकते हैं। यहां एक बात समझना जरूरी है। हर बार आसमान में दिखाई देने वाली धुंध सिर्फ प्रदूषण की वजह से नहीं होती। हवा में नमी, समुद्र से उठने वाली भाप और मौसम की दूसरी स्थितियां भी धुंध पैदा कर सकती हैं। लेकिन जब हवा में प्रदूषण के छोटे-छोटे कण बढ़ जाते हैं, तो वे इस धुंध को और गहरा बना सकते हैं। इसलिए बांद्रा की तस्वीरें सिर्फ देखने में अलग नहीं थीं, बल्कि उन्होंने मुंबई के AQI और हवा की हालत पर ध्यान देने की जरूरत भी दिखाई। AQI क्या है और इसके आंकड़े क्या बताते हैं? AQI का पूरा नाम Air Quality Index है। आसान शब्दों में कहें, तो यह बताता है कि किसी जगह की हवा कितनी साफ है या उसमें प्रदूषण कितना बढ़ गया है। भारत में AQI का पैमाना 0 से 500 तक होता है। संख्या जितनी ज्यादा होती है, हवा की स्थिति उतनी ही खराब मानी जाती है। 0 से 50: अच्छी हवा 51 से 100: संतोषजनक हवा 101 से 200: मध्यम प्रदूषण 201 से 300: खराब हवा 301 से 400: बहुत खराब हवा 401 से 500: गंभीर स्थिति अगर किसी जगह का AQI 112 है, तो वह मध्यम श्रेणी में आता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति पर इसका एक जैसा असर होगा। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की परेशानी वाले लोगों को प्रदूषण के प्रति ज्यादा सावधान रहने की जरूरत हो सकती है। मुंबई में AQI हर इलाके में एक जैसा नहीं रहता। किसी जगह ट्रैफिक ज्यादा होने से प्रदूषण बढ़ सकता है, तो किसी दूसरी जगह समुद्री हवा या कम गाड़ियों के कारण स्थिति बेहतर हो सकती है। इसलिए सिर्फ पूरे शहर का AQI देखकर यह तय नहीं करना चाहिए कि हर इलाके की हवा बिल्कुल एक जैसी है। बाहर निकलने से पहले अपने नजदीकी मॉनिटरिंग स्टेशन का AQI देखना ज्यादा उपयोगी रहता है। समंदर के किनारे होने के बाद भी मुंबई की हवा क्यों बिगड़ रही है? मुंबई के पास अरब सागर है और आमतौर पर समुद्र से चलने वाली हवाएं प्रदूषण को फैलाने में मदद कर सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि समंदर के पास होने से शहर हमेशा प्रदूषण से बचा रहेगा। अक्टूबर में मानसून के जाने के बाद मौसम बदलने लगता है। हवा की रफ्तार कम हो, वातावरण में नमी बनी रहे और प्रदूषण फैलाने वाले कण ज्यादा हों, तो ये कण जमीन के करीब जमा हो सकते हैं। ऐसे समय में आसमान धुंधला दिखाई देने लगता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, कम हवा चलने से प्रदूषण के कण आसानी से दूर नहीं जा पाते। गाड़ियों का धुआं, निर्माण स्थलों की धूल और दूसरी जगहों से निकलने वाला धुआं आसपास की हवा में बना रह सकता है। इसी वजह से मुंबई जैसे समुद्र के किनारे बसे शहर में भी AQI बिगड़ सकता है। हालांकि, किसी एक दिन प्रदूषण बढ़ने के लिए सिर्फ एक मौसम संबंधी वजह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए मौसम, प्रदूषण के स्रोत और अलग-अलग जगहों के आंकड़ों को साथ में देखना पड़ता है। गाड़ियों और निर्माण कार्य से बढ़ रहा है प्रदूषण मुंबई में बड़ी संख्या में लोग रोजाना लोकल ट्रेन, बस, टैक्सी और निजी गाड़ियों से सफर करते हैं। सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही से निकलने वाला धुआं हवा में प्रदूषण बढ़ा सकता है। इसके अलावा शहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य भी एक बड़ी चिंता हैं। इमारतें बनाते समय, पुराने ढांचे तोड़ते समय और मलबा उठाते समय धूल हवा में फैल सकती है। अगर निर्माण स्थल को ठीक से ढका न जाए या वहां पानी का छिड़काव न हो, तो आसपास के इलाकों में धूल बढ़ सकती है। मुंबई में AQI बिगड़ने के पीछे इन वजहों के साथ-साथ खुले में कचरा जलाना, उद्योगों से निकलने वाला धुआं और दूसरे स्थानीय स्रोत भी भूमिका निभा सकते हैं। BMC ने निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए नियम लागू किए हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, करीब 3,166 निर्माण स्थलों पर AQI मॉनिटरिंग डिस्प्ले लगाए गए हैं और नियमों का पालन कराने के लिए जांच भी की जा रही है। निर्माण कार्य शहर के विकास के लिए जरूरी हो सकते हैं, लेकिन उनके दौरान धूल और धुएं को नियंत्रित करना भी उतना ही जरूरी है। अगर इन नियमों का ठीक से पालन हो, तो आसपास के इलाकों की हवा को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। समुद्री नमक, कचरा और पटाखे भी डाल सकते