दिल्ली में लगने जा रहा Monsoon Mela, जानिए Full Information
दिल्ली की तेज गर्मी के बाद जब मानसून की बारिश शुरू होती है, तो शहर का मौसम काफी सुहावना हो जाता है। ऐसे समय में लोग ऐसी जगहों पर जाना पसंद करते हैं, जहां बारिश का आनंद लेने के साथ-साथ कुछ अच्छा देखने, स्वादिष्ट खाना खाने और खरीदारी करने का मौका भी मिले। अगर आपको हस्तशिल्प, पारंपरिक कपड़े, handmade products और regional food पसंद है, तो Monsoon Mela 2026 आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर अपने हाथ से बनाए हुए सामान लेकर पहुंचेंगे। यहां कपड़े, साड़ियां, ज्वेलरी, बैग, घर की सजावट का सामान, खाने-पीने की चीजें और कई तरह के traditional products देखने को मिलेंगे। मेले की खास बात यह है कि यहां आपको केवल खरीदारी करने का मौका नहीं मिलता, बल्कि कारीगरों से सीधे मिलने और उनके काम को समझने का अवसर भी मिलता है। अगर आप दिल्ली में मानसून के दौरान घूमने के लिए कोई अलग जगह तलाश रहे हैं, तो Monsoon Mela को अपनी list में शामिल कर सकते हैं। दस्तकार की शुरुआत कब हुई? दस्तकार की शुरुआत साल 1981 में दिल्ली की छह महिलाओं ने की थी। इनमें दस्तकार की वर्तमान अध्यक्ष लैला तैयबजी भी शामिल थीं। शुरुआत में यह संस्था केवल 15 शिल्प समूहों के साथ काम करती थी, लेकिन समय के साथ इसका नेटवर्क काफी बढ़ गया। आज दस्तकार 350 से अधिक शिल्प समूहों के साथ जुड़ा हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने वाले कारीगरों को शहरों के ग्राहकों और बाजार तक पहुंचाना है। कई कारीगर छोटे गांवों और कस्बों में रहकर पारंपरिक तरीके से सामान तैयार करते हैं। उनके लिए बड़े बाजारों और ग्राहकों तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं होता। दस्तकार ऐसे कारीगरों को बाजार से जोड़ने का काम करता है। इसी वजह से दस्तकार के Monsoon Mela में आपको कई ऐसे products देखने को मिलते हैं, जो सामान्य shopping malls या बड़े बाजारों में आसानी से नहीं मिलते। Monsoon Mela 2026 कब और कहां होगा? अगर आप इस साल Monsoon Mela जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इसकी जरूरी जानकारी पहले से नोट कर लें। Monsoon Mela 2026 का आयोजन 6 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक किया जाएगा। मेला सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा। इसका आयोजन Nature Bazaar, Kisan Haat, Andheria Modh, छतरपुर के पास, New Delhi में किया जा रहा है। मेले में प्रवेश के लिए ₹50 प्रति व्यक्ति की फीस रखी गई है। यह मेला pet-friendly भी है। अगर आपके घर में pet है और आप उसे अपने साथ लेकर घूमना चाहते हैं, तो उसे leash पर मेले में ले जाने की सुविधा उपलब्ध है। मानसून के मौसम को देखते हुए मेले में जाने से पहले मौसम और आयोजन से जुड़ी latest information जरूर देख लें। Monsoon Mela तक कैसे पहुंचें? Nature Bazaar, Kisan Haat तक पहुंचने के लिए Delhi Metro सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक है। आप अपनी location के अनुसार छतरपुर, कुतुब मीनार या सुल्तानपुर मेट्रो स्टेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। छतरपुर मेट्रो स्टेशन से आप Nature Bazaar के लिए ऑटो या किसी दूसरे स्थानीय वाहन से जा सकते हैं। यह स्टेशन Yellow Line पर स्थित है और यहां से मेले तक पहुंचना आसान रहता है। अगर आप दिल्ली के किसी दूसरे हिस्से से आ रहे हैं, तो Metro के जरिए छतरपुर पहुंचकर आगे ऑटो लेना एक सरल विकल्प हो सकता है। कुतुब मीनार मेट्रो स्टेशन से Nature Bazaar की दूरी लगभग 1.4 किलोमीटर बताई जाती है। मौसम ठीक होने पर इस दूरी को पैदल भी तय किया जा सकता है और इसमें करीब 18 मिनट लग सकते हैं। अगर बारिश हो रही हो या आपके साथ बच्चे और बुजुर्ग हों, तो ऑटो लेना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। आप सुल्तानपुर मेट्रो स्टेशन से भी Nature Bazaar पहुंच सकते हैं। स्टेशन से मेले की दूरी लगभग 1.6 किलोमीटर है। आप अपनी सुविधा और घर से आने वाले रास्ते के अनुसार इन तीनों Metro stations में से किसी एक को चुन सकते हैं। मेले में कितने exhibitors होंगे? इस साल Monsoon Mela में 90 से अधिक exhibitors के शामिल होने की जानकारी है। ये exhibitors देश के अलग-अलग हिस्सों से अपने handmade products लेकर आएंगे। यहां मिलने वाले कई सामान पूरी तरह हाथ से तैयार किए जाते हैं। इसलिए एक ही तरह के दो products में थोड़ा अंतर भी दिखाई दे सकता है। यही handmade products की खासियत होती है। हर सामान में कारीगर का अपना काम, उसकी मेहनत और उसकी कला दिखाई देती है। अगर आपको machine-made सामान की जगह traditional handicrafts पसंद हैं, तो Monsoon Mela में आपके लिए काफी विकल्प मौजूद होंगे। कपड़ों की shopping में क्या मिलेगा? इस मेले में traditional textiles और कपड़ों की कई varieties देखने को मिल सकती हैं। अलग-अलग राज्यों से आए कारीगर अपने पारंपरिक कपड़े और handwork वाले products यहां प्रदर्शित करेंगे। राजस्थान की लहरिया साड़ियां मानसून के मौसम में राजस्थान की लहरिया साड़ियां खास आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इनके रंग और patterns बारिश के मौसम के साथ काफी अच्छे लगते हैं। राजस्थान की हस्तशिल्पी अरुणा की French Knot वाली सूती कढ़ाई भी मेले की खास चीजों में शामिल है। Cotton होने की वजह से ऐसे कपड़े गर्म और उमस वाले मौसम में भी आरामदायक हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल की Silk Sarees पश्चिम बंगाल से आने वाली Mulberry Silk और Modal Silk की साड़ियां भी यहां मिल सकती हैं। इन पर Batik Art का काम किया गया है, जो इन्हें traditional के साथ-साथ अलग look देता है। अगर आपको भारतीय साड़ियों और handwork में रुचि है, तो पश्चिम बंगाल के इन स्टॉल्स को जरूर देखना चाहिए। Cotton Kurtas और Kaftans महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के लिए cotton kurtas, shirts और kaftans जैसे कपड़े भी मिल सकते हैं। अगर आप रोजाना पहनने के लिए हल्के और आरामदायक कपड़े तलाश रहे हैं, तो यहां आपको कुछ अच्छे विकल्प मिल सकते हैं। Yak Wool और Pashmina लद्दाख से जुड़े products में Yak Wool sweaters और Pashmina shawls भी आकर्षण का हिस्सा हो सकते हैं। अगस्त के मौसम में इनकी जरूरत शायद न हो, लेकिन अगर