Category Destination Travel

भारत के 7 सबसे खूबसूरत Fort जिन्हें हर Traveller को देखना चाहिए

  • 0 Comments

अगर आपको History, Royal Architecture और Epic Views का कॉम्बो पसंद है, तो भारत के Fort आपकी Travel Bucket List में ज़रूर होने चाहिए। हर Fort सिर्फ पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि सदियों की बहादुरी, सल्तनत, जंग और तहज़ीब की दास्तान अपने अंदर समेटे हुए है। कहीं ऊंची पहाड़ियों पर बसे किले आपको बादलों के करीब ले जाते हैं, तो कहीं समंदर के किनारे खड़े Fort आज भी अपनी शान बयां करते हैं। अगर आप ऐसे Places तलाश रहे हैं जहां History भी मिले, शानदार Photos भी आएं और Travel Experience भी यादगार बन जाए, तो ये ब्लॉग आपके लिए है। 1. मेहरानगढ़ Fort, जोधपुर (राजस्थान) एक शाही Fort जो आज भी Blue City पर राज करता है मेहरानगढ़ Fort भारत के सबसे शानदार और सबसे अच्छी तरह सुरक्षित Fort में गिना जाता है। लगभग 400 फीट ऊंची चट्टान पर बना यह Fort पूरे जोधपुर का सबसे आइकॉनिक Landmark है। इसकी विशाल दीवारें, नक्काशीदार महल और राजपूताना शान हर Traveller को Impress कर देती हैं। इस Fort की खास बात Blue City का शानदार Panorama। शीश महल, फूल महल और मोती महल। Royal Museum और पुराने हथियारों का संग्रह। यहां क्या देखें? Cannon Point। Chamunda Mata Temple। Fort Museum। Sunset View Point। घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च। सुबह जल्दी या शाम के वक्त। कैसे पहुंचें? जोधपुर Airport और Railway Station दोनों से Fort लगभग 6 किलोमीटर दूर है। Taxi और Auto आसानी से मिल जाते हैं। 2. आमेर Fort, जयपुर (राजस्थान) जहां Royal Rajasthan की असली झलक मिलती है आमेर Fort अपनी शानदार Architecture और शीश महल के लिए दुनिया भर में मशहूर है। पीले पत्थरों से बना यह Fort सूरज की रोशनी में और भी खूबसूरत दिखाई देता है। इस Fort की खास बात UNESCO World Heritage Site। Sheesh Mahal। Rajput और Mughal Architecture का शानदार मेल। यहां क्या देखें? Ganesh Pol। Diwan-e-Aam। Sukh Niwas। Light and Sound Show। घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी। सुबह या Sunset के समय। कैसे पहुंचें? जयपुर City से लगभग 11 किलोमीटर दूर। Cab, Auto और Local Bus उपलब्ध हैं। 3. ग्वालियर Fort, मध्य प्रदेश जिसे भारत का Gibraltar कहा जाता है ऊंची पहाड़ी पर बना ग्वालियर Fort अपनी मजबूत दीवारों और शानदार इतिहास के लिए जाना जाता है। कई राजवंशों ने यहां शासन किया और हर दौर की छाप आज भी दिखाई देती है। इस Fort की खास बात विशाल किलेबंदी। प्राचीन मंदिर। शानदार Palace Complex। यहां क्या देखें? Man Singh Palace। Sas Bahu Temple। Teli Ka Mandir। Gujari Mahal Museum। घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी। कैसे पहुंचें? ग्वालियर Railway Station और Airport से Taxi द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं। 4. चित्तौड़गढ़ Fort, राजस्थान राजपूताना शौर्य की सबसे बड़ी मिसाल चित्तौड़गढ़ Fort भारत का सबसे बड़ा Fort माना जाता है। यह Fort रानी पद्मिनी, महाराणा प्रताप और वीरता की अनगिनत कहानियों से जुड़ा हुआ है। इस Fort की खास बात UNESCO World Heritage Site। विजय स्तंभ। कीर्ति स्तंभ। विशाल परिसर। यहां क्या देखें? Padmini Palace। Rana Kumbha Palace। Vijay Stambh। Gaumukh Reservoir। घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च। कैसे पहुंचें? चित्तौड़गढ़ Railway Station से Fort लगभग 5 किलोमीटर दूर है। 5. गोलकोंडा Fort, हैदराबाद (तेलंगाना) जहां तालियों की आवाज़ भी History सुनाती है गोलकोंडा Fort अपनी Acoustic Engineering और हीरों के इतिहास के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। कहा जाता है कि कभी यहां दुनिया के सबसे मशहूर Diamonds का व्यापार होता था। इस Fort की खास बात Amazing Sound System। शानदार View Point। पुराने महल और सुरंगें। यहां क्या देखें? Bala Hissar। Ramdas Jail। Light and Sound Show। Fort Walls। घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी। कैसे पहुंचें? हैदराबाद City से लगभग 12 किलोमीटर दूर। Cab और Metro का विकल्प उपलब्ध है। 6. आगरा Fort, उत्तर प्रदेश जहां Mughal सल्तनत की शान आज भी ज़िंदा है लाल बलुआ पत्थर से बना आगरा Fort भारत के सबसे प्रसिद्ध Fort में शामिल है। यहीं से शाहजहां ने अपने आखिरी दिन ताजमहल को देखा था। इस Fort की खास बात UNESCO World Heritage Site। Mughal Architecture। Royal Courtyards। यहां क्या देखें? Jahangiri Mahal। Musamman Burj। Diwan-e-Khas। Diwan-e-Aam। घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च। कैसे पहुंचें? आगरा Cantt Railway Station से Taxi या Auto द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं। 7. सिंधुदुर्ग Fort, महाराष्ट्र समंदर के बीच बसा मराठा शौर्य का प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा बनवाया गया सिंधुदुर्ग Fort अरब सागर के बीच स्थित है। समुद्र से घिरा यह Fort Nature और History का शानदार मेल पेश करता है। इस Fort की खास बात Sea Fort। Shivaji Maharaj से जुड़ा इतिहास। शानदार Coastal Views। यहां क्या देखें? Shivaji Temple। Fort Walls। Hidden Entrance। Arabian Sea View। घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी। कैसे पहुंचें? मालवन से Boat Service के जरिए Fort पहुंचा जा सकता है।  Five कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से कुछ सुझाव Fort घूमने के लिए हमेशा Comfortable Shoes पहनें क्योंकि काफी Walking करनी पड़ सकती है। सुबह जल्दी पहुंचेंगे तो भीड़ कम मिलेगी और Photos भी शानदार आएंगे। पानी की Bottle और Cap साथ रखें, खासकर गर्मियों में। Local Guide लें तो Fort की History और दिलचस्प किस्से जानने का मज़ा दोगुना हो जाएगा। Drone उड़ाने से पहले Local Rules ज़रूर चेक करें। किसी भी Monument पर नाम लिखने या नुकसान पहुंचाने से बचें। Sunset Time पर View Points मिस मत कीजिए, वहां का नज़ारा सच में Next Level होता है। Local Food भी ज़रूर Try करें ताकि आपका Travel Experience और यादगार बन जाए। भारत के Fort सिर्फ पुराने किले नहीं, बल्कि हमारी तहज़ीब, बहादुरी और शानदार विरासत के ज़िंदा निशान हैं। हर Fort की अपनी अलग कहानी, अलग Architecture और अलग माहौल है। चाहे आपको Royal History पसंद हो, शानदार Photography करनी हो या फिर Family और Friends के साथ एक यादगार Trip प्लान करनी हो, ये सभी Fort आपको कभी निराश नहीं करेंगे। तो अगली बार जब भी Travel Plan बनाएं, इन शानदार Fort को अपनी Bucket List में ज़रूर शामिल करें। यक़ीन मानिए, यहां बिताया हर लम्हा आपको ऐसा एहसास देगा जैसे आप किसी Historical Movie का हिस्सा

Jodhpur Rajasthan Destination

Jodhpur: मेहरानगढ़ किला से उम्मेद भवन तक पूरी जानकारी 2026

  • 0 Comments

राजस्थान का दिल कहे जाने वाला Jodhpur देश के उन शहरों में शामिल है, जिनका नाम लेते ही नीले रंग से रंगे घर, विशाल किले, शाही महल और रेगिस्तान की खूबसूरती आँखों के सामने आ जाती है। यही वजह है कि इसे ‘ब्लू सिटी’ और ‘सूर्य नगरी’ के नाम से भी जाना जाता है। साल 1459 में राव जोधा द्वारा बसाया गया यह शहर आज भी अपनी राजपूती विरासत, संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। Jodhpur की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ इतिहास और आधुनिकता एक साथ दिखाई देते हैं। एक तरफ सदियों पुराने किले और महल हैं, तो दूसरी तरफ कैफे, होटल और आधुनिक बाजार। अगर आप राजस्थान की असली शाही संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो Jodhpur आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। आइए जानते हैं इस खूबसूरत शहर की उन जगहों के बारे में जिन्हें देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी। 1. मेहरानगढ़ किला: Jodhpur की असली पहचान Jodhpur का नाम आते ही सबसे पहले जिस जगह का जिक्र होता है, वह है मेहरानगढ़ किला। शहर के बीचों-बीच एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह किला लगभग 400 फीट की ऊँचाई से पूरे Jodhpur पर नजर रखता है। दूर से देखने पर इसकी विशाल दीवारें और भव्य संरचना किसी फिल्मी सेट जैसी लगती हैं, लेकिन असल में यह राजस्थान के गौरवशाली इतिहास की एक जीवंत मिसाल है। इस किले की नींव राव जोधा ने 1459 में रखी थी। हालांकि समय-समय पर अलग-अलग शासकों ने इसमें विस्तार किया, इसलिए आज दिखाई देने वाला अधिकांश हिस्सा 17वीं शताब्दी और उसके बाद का है। किले की दीवारें इतनी मजबूत हैं कि कई जगह इनकी ऊँचाई 36 मीटर और चौड़ाई 21 मीटर तक पहुँच जाती है। किले के भीतर प्रवेश करते ही आपको राजपूती शान का असली अनुभव होता है। यहाँ मौजूद मोती महल, फूल महल, शीश महल, झांकी महल और तख्त विलास जैसी इमारतें अपनी बारीक नक्काशी, रंगीन कांच और शानदार सजावट के लिए प्रसिद्ध हैं। किले का संग्रहालय भी काफी लोकप्रिय है, जहाँ पुराने हथियार, शाही पालकियाँ, हाथियों के हौदे, दुर्लभ पगड़ियाँ और कई ऐतिहासिक वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं। सबसे खास बात यह है कि किले की प्राचीर से पूरा नीला शहर दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ से दिखने वाला दृश्य वास्तव में यादगार होता है। समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक, प्रवेश शुल्क: भारतीय पर्यटकों के लिए लगभग ₹100 2. उम्मेद भवन पैलेस: आधुनिक राजशाही की शानदार मिसाल Jodhpur का उम्मेद भवन पैलेस केवल एक महल नहीं बल्कि आधुनिक भारत के सबसे भव्य राजमहलों में से एक है। चित्तर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण इसे चित्तर पैलेस भी कहा जाता है। इस महल का निर्माण 1929 से 1943 के बीच महाराजा उम्मेद सिंह ने करवाया था। उस समय मारवाड़ क्षेत्र भयंकर अकाल से जूझ रहा था। लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से इस विशाल महल का निर्माण शुरू किया गया था, जिससे हजारों लोगों को काम मिला। आज यह महल तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। एक भाग में आज भी Jodhpur का शाही परिवार रहता है, दूसरा हिस्सा एक शानदार लक्जरी होटल के रूप में संचालित होता है, जबकि तीसरा भाग पर्यटकों के लिए संग्रहालय के रूप में खुला रहता है। संग्रहालय में आपको पुरानी घड़ियाँ, शाही वस्त्र, दुर्लभ तस्वीरें, बर्तन और विंटेज कारों का शानदार संग्रह देखने को मिलता है। महल का बाहरी हिस्सा और उसके विशाल बगीचे भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं। समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक, प्रवेश शुल्क: लगभग ₹30 3. जसवंत थड़ा: मारवाड़ का ताजमहल मेहरानगढ़ किले से कुछ ही दूरी पर स्थित जसवंत थड़ा Jodhpur की सबसे शांत और खूबसूरत जगहों में से एक है। सफेद संगमरमर से बना यह स्मारक 1899 में महाराजा सरदार सिंह ने अपने पिता महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में बनवाया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका संगमरमर है, जो इतना पतला और बारीक तराशा गया है कि धूप पड़ने पर हल्का पारदर्शी दिखाई देता है। यही कारण है कि इसे अक्सर “मारवाड़ का ताजमहल” कहा जाता है। यहाँ के खूबसूरत बगीचे, शांत झील और आसपास का वातावरण फोटोग्राफी के लिए बेहद शानदार माना जाता है। जो लोग भीड़भाड़ से दूर कुछ समय शांति में बिताना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन जगह है। 4. मंडोर गार्डन: जहाँ छिपा है मारवाड़ का पुराना इतिहास Jodhpur शहर से लगभग 9 किलोमीटर दूर स्थित मंडोर गार्डन कभी मारवाड़ की प्राचीन राजधानी हुआ करता था। इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए यह जगह किसी खजाने से कम नहीं है। यहाँ लाल बलुआ पत्थर से बनी विशाल छतरियाँ हैं जो राजाओं की स्मृति में बनाई गई थीं। इनकी बनावट इतनी खूबसूरत है कि पहली नजर में ये मंदिर जैसी दिखाई देती हैं। मंडोर गार्डन में स्थित हॉल ऑफ हीरोज भी काफी प्रसिद्ध है। यहाँ राजस्थान के लोक नायकों और देवताओं की मूर्तियाँ प्रदर्शित की गई हैं। इसके अलावा यहाँ सुंदर बगीचे, फव्वारे और हरियाली भी देखने को मिलती है, जो इसे परिवार और बच्चों के लिए एक अच्छा पिकनिक स्पॉट बनाती है। 5. राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क: रेगिस्तान की अनोखी दुनिया मेहरानगढ़ किले की तलहटी में फैला राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। लगभग 72 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह पार्क रेगिस्तानी वनस्पतियों और प्राकृतिक चट्टानों को संरक्षित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। यहाँ आपको रेगिस्तान में उगने वाले सैकड़ों पौधों की प्रजातियाँ देखने को मिलेंगी। पार्क में कई वॉकिंग ट्रेल्स बनाए गए हैं जहाँ घूमते हुए आप प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। यहाँ से मेहरानगढ़ किले का दृश्य भी बेहद शानदार दिखाई देता है। सुबह और शाम के समय यह जगह फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के बीच खास तौर पर लोकप्रिय रहती है। 6. तूरजी का झालरा: पुराने Jodhpur की खूबसूरत बावड़ी पुराने शहर के बीच स्थित तूरजी का झालरा 18वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक बावड़ी है। इसका निर्माण महाराजा अभय सिंह की रानी ने करवाया था। कभी यह शहर के लोगों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी।

Best of My Blogs Culture Destination Rajasthan Travel

मेहरानगढ़ फोर्ट

  • 1 Comment

आप सभी जानते हैं भारत को मंदिरों का देश माना जाता है, लेकिन अगर भारत को ऐतिहासिक किलों का देश कहा जाये तो बिलकुल भी गलत नहीं होगा, क्योंकि देश का चाहे कोई भी हिस्सा हो उत्तर से लेकर दक्षिण तक आपको देश भर में 500 से भी ज्यादा किले देखने को मिल जाएंगे, जो देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। इनमें से कई किले सैकड़ों साल पुराने हैं, बहुत से किले तो ऐसे भी हैं, जो कब बने और इन्हें किसने बनाया, के बारे में कोई नहीं जानता। Mehrangarh Fort of Jodhpur आज हम आपको इस ब्लॉग में एक ऐसे ही किले के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह किला भारत के सबसे पुराने और विशाल किलों में से एक है, जिससे भारत के समृद्धशाली अतीत की झलक मिलती है।(Mehrangarh Fort, Jodhpur) किले का ऐतिहासिक दृष्टिकोण इस किले को मेहरानगढ़ दुर्ग या मेहरानगढ़ फोर्ट के नाम से जाना जाता है। राजस्थान के जोधपुर शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित यह किला करीब 125 मीटर की ऊंचाई पर बना है। अगर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो 15वीं शताब्दी में इस किले की नींव राव जोधा ने रखी थी, लेकिन इसके निर्माण का कार्य बाद में महाराज जसवंत सिंह ने पूरा किया। मेहरानगढ़ किले के बनने की कहानी कुछ इस तरह है कि राव जोधा जब जोधपुर के 15वें शासक बने, उसंके एक साल बाद ही उन्हें लगने लगा कि मंडोर का किला उनके लिए सुरक्षित नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने तत्कालीन किले से एक किलोमीटर दूर पहाड़ी पर एक किला बनवाने की सोची। उस पहाड़ी को ‘भोर चिड़ियाटूंक‘ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वहां काफी संख्या में पक्षी रहते थे। आठ दरवाजों और अनगिनत बुर्जों से युक्त यह किला ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है। दूर से देखने पर ही आपको इस किले की विशालता का पता चल जायेगा। जोधपुर शहर के किसी भी हिस्से से आप इस किले को देख सकते हैं।  वैसे तो इस किले के सात ही द्वार(पोल) हैं, लेकिन कहते हैं कि इसका आठवां द्वार भी हैं जो रहस्यमयी है। और ऐसे रहस्यों के पीछे बहुत सी कहानियां जुड़ी होती हैं जिनको समझना आसान नहीं। किले के मुख्य द्वार  पर हाथियों के हमले से बचाव के लिए नुकीली कीलें लगवाई गई थीं। सुरक्षा के लिहाज़ से इस तरह की कारीगरी आपको कुछ दूसरे किलों में दिखाई देगी। चामुंडा माता का मंदिर किले में चामुंडा माता का मंदिर भी है, जिसे राव जोधा ने 1460 ईस्वी में बनवाया था। नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। बताते हैं जब राव जोधा ने अपनी राजधानी को मंडोर से जोधपुर शिफ्ट किया था तब वह अपने साथ दुर्गा माता की मूर्ति को भी ले गए थे। इस मूर्ति को मेहरानगढ़ किले में स्थापित किया गया था जिसे आज चामुंडा माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहीं इसी जगह हर साल माता का प्रसिद्ध मेला भी लगता है जिसमे दूर दराज से हज़ारों श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं। किले की इमारतों की बनावट जब आप इस किले की इमारतों की बनावट देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे। महाराजा अजीत सिंह के शासन के समय इस किले की कई इमारतों का निर्माण मुगल डिजाइन में किया गया है। इस किले में पर्यटकों को आकर्षित करने वाले सात विशाल दरवाज़ों के अलावा मोती महल (पर्ल पैलेस), फूल महल (फूल महल), दौलत खाना, शीश महल (दर्पण पैलेस) जैसे कई शानदार शैली में बने कमरें हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें मोती महल का निर्माण राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था। शीश महल, या हॉल ऑफ मिरर्स बेहद आकर्षक ढंग से बनाया गया है जो अपनी दर्पण के टुकड़ों पर जटिल डिजाइन की कारीगरी की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहता है। फेमस म्यूजियम मेहरानगढ़ फोर्ट भारत के सबसे पुराने किलों में से एक है, जो भारत के मजबूत और गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे है. मेहरानगढ़ किले का म्यूजियम राजस्थान  के बेहतरीन और फेमस म्यूजियम में से एक है., जिसमें राजा-महाराजाओं की पोशाकें और उनके हथियार रखे गए हैं. साथ ही, उनके रहन-सहन, दैनिक जीवन  और कल्चर से जुड़ी चीजें आज भी यहां मौजूद हैं जो यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपनी और आकर्षित जरूर करती है। मेहरानगढ़ किले के परकोटों से पूरे जोधपुर शहर का बेहतरीन नजारा आप देख सकते हैं. इस फोर्ट की दीवार 10 किलोमीटर तक फैली है और दीवार की ऊंचाई 20 फीट से 120 फीट तक है. वहीं, दीवार की चौड़ाई 12 फीट से 70 फीट तक है. ट्रेडिशनल बाजार  इस किले में पर्यटकों के लिए एक छोटा सा बाजार भी बनाया गया है जहाँ से आप राजस्थानी  पारम्परिक परिधानों और जूतियो के अलावा विभिन्न प्रकार के अन्य डेकोरेटिव आइटम्स की खरीदारी भी  कर सकते हैं। इसके अलावा इस किले के अंदर एक शाही रेस्टोरेंट भी मौजूद है, जहां पर आप अपने पार्टनर के साथ कैंडल लाइट डिनर का आनंद भी ले सकते हैं। इस किले की एंट्री टिकट पर व्यक्ति 200 रुपए है। क्योंकि यह किला आज भी जोधपुर के राज घराने के संरक्षण में है न की भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन, इसलिए यहाँ के रख रखाव के लिए टिकट की कीमत ज्यादा रखी गई है। लेकिन किला इतना शानदार है कि आपको लगेगा की टिकट के पैसे वसूल हो गए। कितना समय काफी रहेगा इस किले को देखने के लिएक्योंकि मेहरानगढ़ फोर्ट देश के सबसे पुराने और बड़े किलो में से एक है इसलिए इस पूरे किले को देखने के लिए आप तीन से चार घंटे मान कर चलिए। अगर आप ऐतिहासिक इमारतों और चीजों को पसंद करते हैं तब थोड़ा एक्स्ट्रा समय इसमें और जोड़ लीजिये। किले की बनावट, महल और विशेषकर यहाँ का म्यूजियम आपको जल्दी से यहाँ से रुख़्सत नहीं होने देगा। कैसे पहुंचें मेहरानगढ़ का किला मेहरानगढ़ किला पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जोधपुर में स्थित है। वहीं, यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोधपुर जंक्शन है। । क्योंकि जोधपुर राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है इसलिए  यहां पर सड़क मार्ग से भी बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है। ———————————————— Some glimpses