Meghalaya Travel Guide: 7 दिन में घूमने की पूरी जानकारी
अगर आपको ऐसी जगह घूमने का मन है जहां सुबह आंख खुलते ही सामने बादल हों, रास्ते के दोनों तरफ हरे-भरे पहाड़ हों और थोड़ी दूर चलने पर कोई झरना अचानक सामने आ जाए, तो इस बार अपनी यात्रा की सूची में Meghalaya को जरूर शामिल करें। पूर्वोत्तर भारत का यह राज्य सिर्फ खूबसूरत पहाड़ों और बारिश के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहां के गांव, स्थानीय बाजार, खाना, संगीत और लोगों की जीवनशैली भी इसे बाकी पहाड़ी जगहों से अलग बनाती है। पिछले कुछ समय में Meghalaya को लेकर यात्रियों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। शिलांग, चेरापूंजी यानी सोहरा, दावकी, नोंग्रियट और वारी चोरा जैसी जगहें अब सोशल मीडिया पर लगातार दिखाई देती हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि यहां अभी भी ऐसी कई जगहें हैं जहां पहुंचकर आपको भीड़ से ज्यादा प्रकृति मिलेगी। अगर आप पहली बार Meghalaya जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कितने दिन रखें, कहां से शुरुआत करें, कितना बजट लगेगा और कौन-सी जगहें सच में देखने लायक हैं। इसलिए इस गाइड में शिलांग से लेकर सोहरा, छुपे झरनों, गांवों, बजट स्टे और सात दिन के रूट तक सब कुछ आसान भाषा में समझते हैं। शिलांग से शुरू करें Meghalaya की पहली मुलाकात Meghalaya की यात्रा करने वाले ज्यादातर लोग अपनी शुरुआत शिलांग से करते हैं। राज्य की राजधानी शिलांग को लंबे समय से ‘स्कॉटलैंड ऑफ द ईस्ट’ कहा जाता है। यहां चीड़ के पेड़ों से घिरी पहाड़ियां, ठंडा मौसम, छोटे कैफे, पुराने बाजार और संगीत से जुड़ी संस्कृति शहर को अलग पहचान देते हैं। अगर आप गुवाहाटी से आ रहे हैं तो शिलांग पहुंचना काफी आसान है। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन या पलटन बाजार से साझा सूमो और दूसरी गाड़ियां मिल जाती हैं। सामान्य तौर पर साझा गाड़ी का किराया करीब ₹400 से ₹500 प्रति सीट के आसपास हो सकता है और यात्रा में लगभग तीन से साढ़े तीन घंटे लग सकते हैं। मौसम और मांग के हिसाब से किराया बदल सकता है, इसलिए निकलने से पहले स्थानीय किराया जरूर पूछ लें। उमियम झील पर रुकना आपकी यात्रा का पहला पड़ाव हो सकता है शिलांग की तरफ जाते समय उमियम झील यानी बारापानी पर रुकना Meghalaya की यात्रा की अच्छी शुरुआत हो सकती है। पहाड़ियों के बीच फैला शांत पानी और आसपास की हरियाली कुछ देर के लिए आपको रास्ते की थकान भुला देती है। यहां मौसम साफ हो तो झील का दृश्य काफी खूबसूरत दिखाई देता है। नौकायन और दूसरी गतिविधियों की सुविधा मौसम और स्थानीय संचालन के हिसाब से उपलब्ध हो सकती है। अगर आप फोटो खींचने के शौकीन हैं तो सुबह या शाम की रोशनी में यहां का नजारा खास लग सकता है। शिलांग में इन जगहों को अपनी सूची में जरूर रखें शिलांग में घूमने के लिए बहुत ज्यादा दिन की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जिन्हें पहली यात्रा में छोड़ना ठीक नहीं होगा। एलिफेंट फॉल्स तीन स्तरों में नीचे गिरता झरना है और यहां सीढ़ियों के जरिए काफी करीब तक जाया जा सकता है। इसके बाद शिलांग पीक से शहर और आसपास की पहाड़ियों का दृश्य देखा जा सकता है। लाइतलम कैनियंस शिलांग से थोड़ा अलग अनुभव देता है, जहां हरी घाटियां और गहरी चट्टानें आपको शहर की भीड़ से काफी दूर महसूस कराती हैं। वार्ड्स लेक शहर के बीचों-बीच आराम से घूमने के लिए अच्छी जगह है। शाम को पुलिस बाजार और लेवदुह यानी बड़ा बाजार का रुख करें। यहां आपको कपड़ों और रोजमर्रा के सामान से लेकर स्थानीय फल, सब्जियां और खाने-पीने की चीजें तक मिल जाएंगी। अगर आप Meghalaya को सिर्फ पहाड़ों से नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी समझना चाहते हैं, तो इन बाजारों में थोड़ा समय जरूर बिताएं। शिलांग में स्थानीय खाना भी यात्रा का हिस्सा है Meghalaya घूमते समय सिर्फ होटल के सामान्य खाने तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। शिलांग में आपको स्थानीय खासी स्वाद चखने के कई मौके मिलेंगे। जादोह, दोह खलीह और तुंगरिम्बई जैसे स्थानीय व्यंजन यहां की खानपान संस्कृति का हिस्सा हैं। अगर आप स्थानीय मांसाहारी खाना खाते हैं तो जादोह और दोह खलीह ट्राई कर सकते हैं। वहीं हल्का खाना पसंद करने वालों के लिए मोमोज, चाय और दूसरे स्थानीय नाश्ते आसानी से मिल जाते हैं। खासी पान यानी क्वाइ भी यहां की रोजमर्रा की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। किसी स्थानीय चीज को पहली बार खाते समय सामग्री और अपने स्वाद के हिसाब से चुनाव करें। सोहरा यानी चेरापूंजी में बदल जाता है पूरा माहौल शिलांग से आगे बढ़ते ही Meghalaya का वह हिस्सा शुरू होता है जिसके लिए यह राज्य पूरी दुनिया में जाना जाता है। सोहरा, जिसे आम तौर पर चेरापूंजी भी कहा जाता है, बारिश, बादलों और झरनों के लिए मशहूर है। यहां पहुंचते ही आपको पहाड़ियों के बीच फैले बादल और बारिश से बनी हरियाली दिखाई देने लगती है। मानसून और उसके आसपास का समय खासतौर पर झरनों के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण रास्ते फिसलन भरे भी हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ मौसम देखकर नहीं, बल्कि उस दिन की स्थानीय स्थिति देखकर ही ट्रेक और झरनों की योजना बनाएं। नोहाकालिकाई से लेकर सेवन सिस्टर्स तक झरनों की दुनिया सोहरा में नोहाकालिकाई फॉल्स सबसे प्रसिद्ध जगहों में से एक है। ऊंची चट्टान से नीचे गिरता पानी और सामने दिखाई देने वाली गहरी हरी घाटी इसे बेहद खूबसूरत बनाती है। इसके अलावा सेवन सिस्टर्स फॉल्स का दृश्य भी बारिश के मौसम में खास दिखाई देता है। मौसमाई गुफा और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र भी सोहरा यात्रा का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। हालांकि गुफाओं में जाते समय फिसलन और अंधेरे का ध्यान रखना जरूरी है। अच्छी पकड़ वाले जूते यहां सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि काफी काम की चीज हैं। वेई सावडोंग और छुपे झरनों के लिए थोड़ा समय अलग रखें अगर आपको सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली आम जगहों से थोड़ा अलग घूमना है, तो Meghalaya के छोटे और कम चर्चित झरनों को अपनी योजना में जगह दें। वेई सावडोंग ऐसा ही एक झरना है, जहां कई स्तरों में गिरता पानी और चारों तरफ की हरियाली इसे खास बनाती है। लेकिन