Meghalaya Caves Destination Latest Travel

Meghalaya Caves: भारत की सबसे रहस्यमयी गुफाएं

  • 0 Comments

जब भी मेघालय का नाम आता है, तो सबसे पहले चेरापूंजी, मौसिनराम, ऊंचे झरने और बादलों से ढके पहाड़ याद आते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन खूबसूरत पहाड़ों के नीचे एक ऐसी दुनिया भी छिपी हुई है, जो आज भी कई रहस्यों से भरी है। यही दुनिया है Meghalaya Caves की। मेघालय में अब तक 1,700 से ज्यादा गुफाओं की खोज हो चुकी है और हर साल नई गुफाएं सामने आ रही हैं। यही वजह है कि Meghalaya Caves को एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के महत्वपूर्ण गुफा क्षेत्रों में गिना जाता है। इन गुफाओं में कुछ ऐसी भी हैं, जिन्होंने लंबाई के मामले में रिकॉर्ड बनाए हैं। वहीं कुछ गुफाओं ने वैज्ञानिकों को करोड़ों साल पुराने इतिहास के बारे में नई जानकारी दी है। अगर आपको लगता है कि गुफाएं सिर्फ अंधेरी सुरंगें होती हैं, तो Meghalaya Caves आपकी सोच पूरी तरह बदल देंगी। यहां आपको बड़े-बड़े हॉल, कई किलोमीटर लंबे रास्ते, जमीन के नीचे बहती नदियां, दुर्लभ जीव और करोड़ों साल पुराने जीवाश्म देखने को मिल सकते हैं।  Krem Puri: भारत की वो गुफा जिसने बनाया विश्व रिकॉर्ड Meghalaya Caves की सबसे बड़ी पहचान Krem Puri है। जब इस गुफा की मैपिंग की गई, तब पता चला कि इसकी लंबाई करीब 24.5 किलोमीटर है। इसके बाद Krem Puri दुनिया की सबसे लंबी बलुआ पत्थर वाली गुफाओं में शामिल हो गई। इससे पहले इस तरह की सबसे लंबी गुफा का रिकॉर्ड दक्षिण अमेरिका की एक गुफा के नाम बताया जाता था। Krem Puri ने अपनी लंबाई की वजह से भारत को गुफाओं की खोज के क्षेत्र में दुनिया के नक्शे पर एक खास पहचान दिलाई। यह उपलब्धि सिर्फ मेघालय ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है। आज दुनिया भर के गुफा खोजकर्ता और भू-विज्ञानी Meghalaya Caves पर लगातार शोध कर रहे हैं। Krem Puri की लंबाई के साथ-साथ इसकी बनावट भी काफी खास है। गुफा के अंदर कई संकरे रास्ते, बड़े कक्ष और प्राकृतिक सुरंगें मौजूद हैं। बारिश के मौसम में इसका काफी हिस्सा पानी से भर सकता है, इसलिए बिना विशेषज्ञों और स्थानीय गाइड के यहां जाना सुरक्षित नहीं माना जाता।  करोड़ों साल पुराने समुद्री जीवों के सबूत Krem Puri सिर्फ अपनी लंबाई की वजह से ही खास नहीं है। इस गुफा के अंदर वैज्ञानिकों को करोड़ों साल पुराने जीवाश्म भी मिले हैं। इनमें समुद्र में रहने वाले विशाल शिकारी जीवों के अवशेष शामिल बताए जाते हैं। इन जीवाश्मों से पता चलता है कि करोड़ों साल पहले जब धरती का नक्शा आज से बिल्कुल अलग था, तब मेघालय का कुछ हिस्सा समुद्र के नीचे रहा होगा। Meghalaya Caves में मिले ये जीवाश्म उस पुराने समय के महत्वपूर्ण सबूत माने जाते हैं। इनकी मदद से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि करोड़ों साल पहले यहां का वातावरण, समुद्र और धरती की संरचना कैसी रही होगी। इसी वजह से दुनिया भर के वैज्ञानिक Meghalaya Caves को एक प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह देखते हैं, जहां पृथ्वी के इतिहास के कई रहस्य आज भी सुरक्षित हैं।  Krem Liat Prah: दक्षिण एशिया की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफा अगर Meghalaya Caves की बात हो और Krem Liat Prah का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह भारत की सबसे लंबी प्राकृतिक गुफाओं में शामिल है और दक्षिण एशिया की सबसे लंबी गुफा के रूप में भी जानी जाती है। इसकी लंबाई 34 किलोमीटर से ज्यादा मापी जा चुकी है और गुफा के कई हिस्सों की खोज अभी भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसकी लंबाई और बढ़ सकती है, क्योंकि इसके कई हिस्सों तक अभी पूरी तरह पहुंचना संभव नहीं हुआ है। इस गुफा के अंदर एक विशाल हिस्सा है, जिसे Aircraft Hangar कहा जाता है। इसका नाम इसलिए रखा गया क्योंकि इसका आकार इतना बड़ा है कि यह किसी बड़े विमान के हैंगर जैसा दिखाई देता है। जब लोग पहली बार Meghalaya Caves के इस हिस्से को देखते हैं, तो उन्हें अंदाजा ही नहीं होता कि जमीन के नीचे इतनी विशाल प्राकृतिक संरचना भी मौजूद हो सकती है। Krem Liat Prah में कई लंबी सुरंगें, ऊंची चट्टानें, पानी के रास्ते और प्राकृतिक कक्ष हैं। यहां की खोज आसान नहीं है और कई जगहों पर आगे बढ़ने के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत पड़ती है।  Mawmluh Cave ने बदल दिया पृथ्वी के इतिहास का एक अध्याय Meghalaya Caves सिर्फ एडवेंचर के लिए ही मशहूर नहीं हैं। इनमें मौजूद Mawmluh Cave ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इसी गुफा में मौजूद पत्थरों की परतों का अध्ययन करने के बाद वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के इतिहास के एक नए भूवैज्ञानिक काल का नाम Meghalayan Age रखा। यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि दुनिया की Geological Time Scale में किसी भारतीय राज्य के नाम पर किसी कालखंड का नाम रखा जाना बेहद खास सम्मान माना जाता है। Mawmluh Cave के अंदर मौजूद स्टैलेग्माइट्स की परतों में हजारों साल पुराने जलवायु परिवर्तन के संकेत मिले हैं। इन परतों से वैज्ञानिकों को उस समय पड़े भयंकर सूखे के बारे में जानकारी मिली, जिसका असर दुनिया की कई प्राचीन सभ्यताओं पर पड़ा था। इस शोध से यह समझने में मदद मिली कि उस समय मौसम में किस तरह के बदलाव हुए थे और उनका इंसानी सभ्यताओं पर क्या प्रभाव पड़ा। यही कारण है कि Meghalaya Caves सिर्फ घूमने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये धरती के इतिहास को समझने की एक अनमोल प्राकृतिक लाइब्रेरी भी हैं। मौमलुह गुफा और Meghalayan Age की कहानी मेघालय की Mawmluh Cave ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है। यही वह गुफा है जिसकी वजह से पृथ्वी के इतिहास के एक नए भूवैज्ञानिक काल का नाम Meghalayan Age रखा गया। वैज्ञानिकों ने इस गुफा के अंदर बने स्टैलेग्माइट्स की कई साल तक जांच की। इन पत्थरों की परतों में करीब 4,200 साल पहले आए बड़े वैश्विक सूखे के संकेत मिले। इन संकेतों के आधार पर वैज्ञानिकों ने उस समय के मौसम और पर्यावरण में हुए बदलावों का अध्ययन किया। माना जाता है कि इस बड़े सूखे का असर सिंधु घाटी सभ्यता और मेसोपोटामिया जैसी कई प्राचीन