Matheran Toy Train की सर्विस क्यों रोकी गई? जानें वजह
कभी पहाड़ों के बीच से गुजरती छोटी-सी ट्रेन में बैठकर सफर करने का मन हुआ है? खिड़की से बाहर घने जंगल, लाल मिट्टी के रास्ते और चारों तरफ हरियाली दिखाई दे, तो सफर अपने आप खास बन जाता है। महाराष्ट्र के माथेरान जाने वाले लोगों के लिए टॉय ट्रेन का सफर भी कुछ ऐसा ही अनुभव है। लेकिन अगर आप आने वाले दिनों में माथेरान घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। नेरल से माथेरान के बीच चलने वाली मशहूर टॉय ट्रेन की सर्विस को इंजनों की तकनीकी खराबी और मरम्मत के चलते अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या अब माथेरान जाना मुश्किल हो जाएगा? क्या वहां पहुंचने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है? और क्या अमन लॉज से माथेरान जाने वाली शटल ट्रेन भी बंद हो गई है? Matheran Toy Train Matheran Toy Train की सर्विस क्यों रोकी गई? महाराष्ट्र के माथेरान की पहचान वहां की छोटी टॉय ट्रेन से भी होती है। यह ट्रेन नेरल से माथेरान तक करीब 21 किलोमीटर का सफर तय करती है। रास्ते में घने जंगल, पहाड़, छोटे स्टेशन और खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। लेकिन फिलहाल इस पूरे रूट पर ट्रेन की नियमित सर्विस बहाल नहीं हो पाई है। 17 अक्टूबर 2026 को आई रिपोर्ट के मुताबिक, इंजनों की मरम्मत के कारण ट्रेन की सर्विस दोबारा शुरू होने में देरी हो रही है। यानी यह सिर्फ मॉनसून में लगने वाला ब्रेक नहीं है, बल्कि इंजन से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें भी इसकी वजह हैं। Matheran Toy Train रेलवे के इस रूट पर कुल आठ इंजन इस्तेमाल किए गए थे। लगातार चलने और पहाड़ी रास्ते पर काम करने के कारण इंजनों की मरम्मत जरूरी हो गई है। जब तक जरूरी जांच और मरम्मत पूरी नहीं होती, तब तक पूरी दूरी पर यात्री ट्रेन चलाने में परेशानी बनी हुई है। इसलिए अगर आप खास तौर पर Matheran Toy Train में बैठकर नेरल से माथेरान तक का पूरा सफर करना चाहते हैं, तो टिकट या यात्रा की तारीख तय करने से पहले ट्रेन की ताजा स्थिति जरूर पता कर लें। रेलवे वर्कशॉप में क्या हो रहा है? जानिए इंजन की मरम्मत का मामला ट्रेन की सर्विस दोबारा शुरू करने के लिए इंजनों को ठीक करना सबसे जरूरी काम है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इंजनों को बड़े मरम्मत कार्य और ओवरहॉलिंग के लिए मुंबई की परेल, माटुंगा और कुर्ला वर्कशॉप भेजा गया है। कुछ इंजन नेरल में भी खड़े हैं। यहां ओवरहॉलिंग का मतलब सिर्फ इंजन के छोटे-मोटे पुर्जे बदलना नहीं है। इसमें इंजन के जरूरी हिस्सों की जांच, खराब पुर्जों की मरम्मत और उसके सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने जैसे काम शामिल होते हैं। Matheran Toy Train फिलहाल अमन लॉज और माथेरान के बीच करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर चलने वाली शटल ट्रेन सेवा अलग से जारी है। इस छोटे रूट पर दो इंजन इस्तेमाल हो रहे हैं, जबकि एक इंजन को जरूरत पड़ने पर बदलने और मालगाड़ी चलाने के लिए रखा गया है। अच्छी बात यह है कि रिपोर्ट के मुताबिक, नेरल से माथेरान तक का मुख्य ट्रैक ट्रेन चलाने के लिए तैयार है। परेशानी मुख्य रूप से इंजनों की मरम्मत और उपलब्धता को लेकर है। हालांकि, रेलवे की ओर से पूरी सर्विस दोबारा शुरू करने की कोई पक्की तारीख सामने नहीं आई है। यही वजह है कि Matheran Toy Train का पूरा सफर करने की उम्मीद लगाए बैठे यात्रियों को अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। क्या मॉनसून और भूस्खलन भी हैं ट्रेन बंद होने की वजह? माथेरान पश्चिमी घाट के पहाड़ी इलाके में बसा है। यहां का रास्ता घने जंगलों, तीखे मोड़ों और पहाड़ी ढलानों से होकर गुजरता है। बारिश के मौसम में इस इलाके में फिसलन, पत्थर गिरने और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। Matheran Toy Train इसी वजह से रेलवे हर साल मॉनसून के दौरान नेरल और अमन लॉज के बीच नियमित यात्री सेवा रोक देता है। साल 2026 में भी यह सेवा 15 जून से 15 अक्टूबर तक मॉनसून के कारण स्थगित रखी गई थी। इस दौरान अमन लॉज और माथेरान के बीच शटल सेवा जारी रखने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन इस बार 15 अक्टूबर बीतने के बाद भी पूरी ट्रेन सेवा बहाल नहीं हो पाई है। इसकी वजह इंजनों की मरम्मत से जुड़ी समस्याएं हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि मॉनसून की वजह से लगने वाला सालाना ब्रेक और इस बार इंजन की खराबी के कारण हो रही देरी, दोनों अलग-अलग बातें हैं। Matheran Toy Train Matheran Toy Train का पूरा रूट पहाड़ी इलाके से गुजरता है, इसलिए इसे दोबारा शुरू करने से पहले रेलवे को यह देखना होता है कि ट्रेन, इंजन और ट्रैक सुरक्षित स्थिति में हैं या नहीं। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही सर्विस शुरू करने का फैसला लिया जाना चाहिए। माथेरान की टॉय ट्रेन का इतिहास 100 साल से भी पुराना है माथेरान की यह छोटी ट्रेन केवल आने-जाने का साधन नहीं है। इसका इतिहास एक सदी से भी ज्यादा पुराना है और यह भारत की ऐतिहासिक पहाड़ी रेल सेवाओं में गिनी जाती है। Matheran Toy Train इस रेलवे लाइन का निर्माण उद्योगपति सर आदमजी पीरभॉय और उनके बेटे अब्दुल हुसैन आदमजी पीरभॉय की पहल पर 1901 से 1907 के बीच कराया गया था। करीब दो फीट चौड़ी नैरो गेज पटरी पर चलने वाली इस ट्रेन ने पहाड़ी इलाके तक पहुंचना आसान बनाया। मार्च 1907 में इस रूट पर ट्रेन सेवा शुरू हुई। शुरुआत में इसमें भाप के इंजन इस्तेमाल होते थे। बाद में 1982 के आसपास डीजल इंजन लगाए गए। समय के साथ सड़क और दूसरे साधनों से यात्रा करना आसान हुआ, लेकिन इस ट्रेन की खासियत बनी रही। इसकी धीमी रफ्तार, छोटे डिब्बे और जंगलों के बीच से गुजरने वाला रास्ता इसे आम रेल यात्रा से अलग बनाते हैं। आज भी Matheran Toy Train उन यात्रियों के लिए खास आकर्षण है, जो सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि रास्ते का मजा भी लेना चाहते हैं। इसी वजह से इसके दोबारा शुरू होने की खबर का इंतजार पर्यटक और स्थानीय लोग दोनों कर रहे