Ladakh में इस साल क्यों बढ़ी पर्यटकों की संख्या?
अगर पहाड़ों के बीच लंबी सड़क, चारों तरफ बदलता हुआ रंग, दूर तक फैली सूखी पहाड़ियां, बर्फ से ढके दर्रे और नीले पानी वाली झील आपको अपनी तरफ खींचती हैं, तो Ladakh का नाम आपकी यात्रा सूची में जरूर होगा। पिछले कुछ वर्षों में Ladakh घूमने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है और 2026 में तो यहां आने वाले पर्यटकों के आंकड़े खास तौर पर चर्चा में हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच Ladakh में 4 लाख 5 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। यह संख्या पूरे 2025 में यहां पहुंचे पर्यटकों की संख्या से भी ज्यादा है। पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले भी इस साल पर्यटकों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन सवाल यह है कि आखिर Ladakh में ऐसा क्या बदल रहा है कि लोग बार-बार यहां आने की योजना बना रहे हैं? इसकी एक वजह यहां की खूबसूरती जरूर है, लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं है। अब लोग केवल Leh और Pangong Lake देखने के लिए Ladakh नहीं जा रहे। Kargil, Lamayuru, Suru Valley, Zanskar और छोटे-छोटे गांवों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर रहे हैं। यानी आज Ladakh सिर्फ एक घूमने की जगह नहीं, बल्कि अलग-अलग तरह के अनुभवों वाली पूरी यात्रा बन चुका है। 2026 में Ladakh में इतनी भीड़ क्यों बढ़ रही है? Ladakh की लोकप्रियता पहले से ही काफी ज्यादा रही है, लेकिन 2026 के आंकड़े बताते हैं कि इस जगह को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ी है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच यहां 4,05,085 पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। अगस्त 2026 में ही 74 हजार से ज्यादा पर्यटक यहां पहुंचे। इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सड़क से यात्रा का बढ़ता चलन भी एक वजह है। पहले Ladakh को बहुत दूर और मुश्किल यात्रा माना जाता था। अब सड़क संपर्क बेहतर होने से लोग कार, बाइक, साझा टैक्सी और बस के जरिए यहां पहुंचने की योजना बनाने लगे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर Ladakh के पहाड़ों, झीलों और सड़कों की तस्वीरें और वीडियो भी लोगों को आकर्षित करते हैं। लेकिन अगर आप सच में Ladakh घूमने की योजना बना रहे हैं तो सिर्फ तस्वीरें देखकर यात्रा तय न करें। यहां ऊंचाई और मौसम दोनों को समझना बहुत जरूरी है। Srinagar से Ladakh जाने का रास्ता क्यों खास है? अगर आप पहली बार Ladakh जा रहे हैं और सड़क के रास्ते जाना चाहते हैं, तो Srinagar से Leh वाला रास्ता एक अलग अनुभव देता है। इस रास्ते की खासियत यह है कि ऊंचाई धीरे-धीरे बढ़ती है। अचानक बहुत ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचने के बजाय रास्ते में Sonamarg, Drass और Kargil जैसे पड़ाव आते हैं। यात्रा के दौरान आपको कश्मीर की हरियाली से निकलकर धीरे-धीरे सूखे और ऊंचे पहाड़ी इलाके दिखाई देने लगते हैं। यही बदलाव इस रास्ते को खास बनाता है। Srinagar से आगे Sonamarg आता है। इसके बाद Zoji La को पार करके Drass की तरफ रास्ता बढ़ता है। Drass के बाद Kargil और फिर Lamayuru होते हुए Leh पहुंचा जाता है। अगर आपके पास समय है तो Ladakh पहुंचने के लिए इस पूरे रास्ते को ही अपनी यात्रा का हिस्सा बनाना चाहिए। पहला दिन: Srinagar से Kargil सुबह जल्दी Srinagar से निकलना बेहतर रहेगा। सबसे पहले Sonamarg आएगा। यहां कुछ देर रुककर आसपास के पहाड़ी नजारों को देखा जा सकता है। मौसम और सड़क की स्थिति ठीक होने पर इसके बाद Zoji La की तरफ बढ़ा जा सकता है। Zoji La पार करते ही आपको आसपास का पूरा वातावरण बदला हुआ दिखाई देगा। जहां कश्मीर की तरफ हरियाली और घने पहाड़ दिखाई देते हैं, वहीं आगे बढ़ने पर पहाड़ ज्यादा सूखे और भूरे नजर आने लगते हैं। यही वह बदलाव है जहां से आपको महसूस होना शुरू होता है कि अब आप Ladakh की तरफ बढ़ रहे हैं। इसके बाद Drass आता है। Drass अपनी ऊंचाई और ठंडे मौसम के लिए जाना जाता है। यह जगह 1999 के कारगिल युद्ध से जुड़े इतिहास के कारण भी महत्वपूर्ण है। यहां Drass War Memorial देखा जा सकता है। अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं तो यहां कुछ समय जरूर बिताएं। इसके बाद Kargil की तरफ बढ़ें और रात Kargil में रुकें। Srinagar से Leh तक एक ही दिन में जाने की कोशिश करने के बजाय Kargil में रुकना ज्यादा आरामदायक रहेगा। इससे अगले दिन की यात्रा भी आसान हो जाती है। दूसरा दिन: Kargil से Leh दूसरे दिन सुबह Kargil से Leh के लिए निकलें। यह रास्ता Ladakh के सबसे खूबसूरत हिस्सों में से एक है। रास्ते में Mulbekh, Namika La और Fotu La जैसे स्थान आते हैं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, पहाड़ों का रंग और आकार लगातार बदलता जाता है। इसके बाद Lamayuru आता है। Lamayuru को क्यों कहा जाता है चांद की धरती? Lamayuru Ladakh की उन जगहों में से है जिसे देखकर आपको लगेगा कि आप किसी दूसरे ग्रह पर आ गए हैं। यहां की पहाड़ियों का रंग और बनावट बाकी पहाड़ी इलाकों से काफी अलग दिखाई देती है। इसी वजह से Lamayuru को अक्सर चांद जैसी धरती वाला इलाका कहा जाता है। यहां Lamayuru मठ भी है, जो इस इलाके का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थान है। अगर आप Ladakh की यात्रा में केवल तस्वीरें लेने के बजाय यहां के इतिहास और संस्कृति को भी समझना चाहते हैं तो Lamayuru में थोड़ा समय जरूर बिताएं। इसके बाद रास्ता Leh की तरफ बढ़ता है। Leh पहुंचते ही सबसे पहले क्या करें? यह बात बहुत जरूरी है। Ladakh पहुंचते ही घूमना शुरू मत कर दीजिए। Leh समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर है और शरीर को इस ऊंचाई के अनुसार ढलने में समय लगता है। इसलिए Leh पहुंचने के बाद आराम करना बेहद जरूरी है। Ladakh पर्यटन विभाग की सलाह के अनुसार Leh पहुंचने के बाद कम से कम 48 घंटे शरीर को ऊंचाई के अनुसार ढलने का समय देना चाहिए। इस दौरान पर्याप्त पानी पीना, आराम करना और ज्यादा मेहनत वाले काम से बचना जरूरी है। यानी अगर आप सुबह Leh पहुंच गए हैं तो उसी दिन