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भारत के 7 सबसे रंगीन Festivals जो आपकी Travel Bucket List में ज़रूर होने चाहिए

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India सिर्फ़ अलग-अलग Culture, Languages और Food के लिए ही Famous नहीं है, बल्कि यहां के Festivals भी दुनिया भर के Travellers को अपनी तरफ़ खींचते हैं। हर State का अपना एक अलग अंदाज़, अपनी एक अलग रौनक़ और अपनी एक अलग कहानी है। कहीं फूलों की बारिश होती है, कहीं ऊंटों का मेला लगता है, तो कहीं पूरा शहर रंगों में डूब जाता है। अगर आप सिर्फ़ Tourist नहीं बल्कि एक Real Traveller बनना चाहते हैं, तो इन Festivals को अपनी Bucket List में ज़रूर शामिल करें। क्योंकि यहां आपको सिर्फ़ Celebration नहीं, बल्कि Local Culture, Music, Food, Dance और लोगों की मेहमाननवाज़ी भी देखने को मिलेगी। 1. Pushkar Camel Fair, राजस्थान रेगिस्तान की सबसे रंगीन महफ़िल Pushkar Camel Fair दुनिया के सबसे बड़े Camel Festivals में से एक माना जाता है। हर साल राजस्थान के पुष्कर में लगने वाला यह Festival सिर्फ़ ऊंटों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है, बल्कि यह Music, Folk Dance, Competitions, Handicrafts और Local Culture का शानदार संगम बन जाता है। क्या है इसकी खासियत? हजारों सजे-धजे ऊंट और घोड़े देखने का मौका मिलता है। Rajasthani Folk Dance और Live Music का शानदार माहौल होता है। Local Bazaar से Traditional Jewelry, Handicrafts और कपड़ों की Shopping की जा सकती है। क्या देखें? Camel Decoration Competition Hot Air Balloon Ride Pushkar Lake और Brahma Temple Sunset Photography घूमने का सबसे अच्छा समय October से November के बीच, खासकर Fair के दौरान। सुबह और Sunset का समय सबसे खूबसूरत माना जाता है। कैसे पहुंचे? सबसे नज़दीकी Airport – Jaipur Railway Station – Ajmer Ajmer से Taxi और Bus आसानी से मिल जाती है। 2. Hornbill Festival, नागालैंड North East का Cultural Powerhouse अगर आप North East India की असली Culture को करीब से देखना चाहते हैं, तो Hornbill Festival आपके लिए Perfect है। यहां नागालैंड की अलग-अलग Tribes अपनी Traditional Dress, Dance, Food और Music के साथ हिस्सा लेती हैं। क्या है इसकी खासियत? 16 से ज्यादा Tribal Communities एक साथ Celebrate करती हैं। Traditional Sports और Folk Performances देखने को मिलते हैं। Local Cuisine का असली स्वाद चखने का मौका मिलता है। क्या देखें? Tribal Dance Performances Bamboo Craft Market Indigenous Food Stalls Rock Concerts घूमने का सबसे अच्छा समय हर साल 1 से 10 December के बीच। कैसे पहुंचे? Airport – Dimapur Dimapur से Kohima तक Road Journey Kohima से Kisama Heritage Village 3. Onam Festival, केरल फूलों, खुशबू और Tradition का Celebration Onam सिर्फ़ Kerala का Festival नहीं बल्कि वहां की पहचान है। पूरा State रंग-बिरंगे फूलों, Traditional Dresses, Boat Races और शानदार Feast से भर जाता है। क्या है इसकी खासियत? Pookalam यानी Flower Rangoli हर घर के सामने बनाई जाती है। Vallam Kali यानी Snake Boat Race सबसे बड़ा Attraction होता है। Onam Sadya में 20 से ज्यादा Traditional Dishes परोसी जाती हैं। क्या देखें? Boat Race Kathakali Performance Flower Decoration Local Markets घूमने का सबसे अच्छा समय August से September। कैसे पहुंचे? Kochi International Airport Ernakulam Railway Station Kerala के सभी बड़े शहरों से अच्छी Connectivity 4. Hemis Festival, लद्दाख पहाड़ों के बीच Spiritual Vibes अगर आपको Mountains, Monasteries और Buddhist Culture पसंद है, तो Hemis Festival किसी Dream Experience से कम नहीं। क्या है इसकी खासियत? Mask Dance यानी Cham Dance सबसे बड़ा आकर्षण है। Monks Traditional Rituals करते हैं। Rare Buddhist Art और Culture देखने को मिलता है। क्या देखें? Hemis Monastery Traditional Mask Dance Prayer Ceremony Local Handicrafts घूमने का सबसे अच्छा समय June या July। कैसे पहुंचे? Leh Airport Leh से लगभग 45 KM की Road Journey 5. Goa Carnival, गोवा Beach, Music और Non-stop Party Vibes Goa Carnival India का सबसे Fun-filled Festival माना जाता है। यहां Portuguese Culture की झलक देखने को मिलती है। पूरा Goa Music, Dance, Parade और Lights से जगमगा उठता है। क्या है इसकी खासियत? Grand Street Parade Live Bands और DJ Performances Beach Parties Colorful Costumes क्या देखें? Panaji Carnival Parade Float Competition Local Food Festival Night Celebrations घूमने का सबसे अच्छा समय February। कैसे पहुंचे? Manohar International Airport या Dabolim Airport Madgaon Railway Station Taxi और Rental Scooters आसानी से मिल जाते हैं। 6. International Kite Festival, गुजरात जब पूरा आसमान रंगों से भर जाता है Ahmedabad में होने वाला International Kite Festival हर उम्र के लोगों के लिए एक शानदार Experience होता है। यहां India ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों से Kite Flyers हिस्सा लेते हैं। क्या है इसकी खासियत? हजारों रंग-बिरंगी Kites International Participants Local Food Stalls Traditional Music क्या देखें? Giant Designer Kites Night Kite Flying Cultural Performances Riverfront Events घूमने का सबसे अच्छा समय January। कैसे पहुंचे? Ahmedabad Airport Ahmedabad Junction City Transport आसानी से उपलब्ध है। 7. Holi Festival, मथुरा-वृंदावन (उत्तर प्रदेश) रंग, इश्क़ और कृष्ण भक्ति का सबसे खूबसूरत संगम अगर किसी Festival को India की पहचान कहा जाए, तो वो Holi है। लेकिन Mathura-Vrindavan की Holi का अंदाज़ बिल्कुल अलग है। यहां सिर्फ़ Colors नहीं बल्कि सदियों पुरानी परंपराएं, भक्ति और जश्न एक साथ देखने को मिलता है। क्या है इसकी खासियत? Lathmar Holi Phoolon Ki Holi Widow Holi Krishna Temple Celebrations क्या देखें? Banke Bihari Temple Barsana Holi Nandgaon Celebrations Evening Aarti घूमने का सबसे अच्छा समय February के आखिर से March तक। कैसे पहुंचे? सबसे नज़दीकी Airport – Agra और Delhi Railway Station – Mathura Junction वहां से Auto और Taxi आसानी से मिल जाती हैं। Fiveकलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ़ से कुछ सुझाव Festival Dates पहले से Check कर लें क्योंकि कई Festivals Lunar Calendar के हिसाब से होते हैं। Hotels और Flights की Booking Advance में कर लें, वरना Peak Season में Rates काफी बढ़ जाते हैं। Local Culture और Traditions की Respect करें। हर Festival की अपनी अलग अहमियत होती है। Comfortable Shoes और Light Clothing रखें ताकि पूरा दिन आसानी से घूम सकें। Camera या Phone Fully Charged रखें क्योंकि हर कोना Instagram-worthy होगा। Local Food ज़रूर Try करें, लेकिन साफ़-सफाई का ध्यान रखें। Cash और Digital Payment दोनों साथ रखें क्योंकि कई Local Stalls पर UPI हमेशा Available नहीं होता। अगर Photography कर रहे हैं तो पहले लोगों से Permission लेना

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केरल का कश्मीर नहीं देखा? सर्दियों में तो लगता है और भी हसीन!

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केरल के इडुक्की जिले में, मुन्नार से कुछ ही दूरी पर स्थित, एक छिपा हुआ स्वर्ग है, जिसे स्थानीय लोग और पर्यटक अब असली ‘केरल का कश्मीर’ मानने लगे हैं और वह है कंथलूर। मुन्नार के हरे-भरे चाय बागानों के विपरीत, कंथलूर अपने सेब के बागों, संतरे के पेड़ों, स्ट्रॉबेरी के खेतों और लहसुन की खेती के लिए प्रसिद्ध है, जो केरल के बाकी हिस्सों से इसे एकदम अलग पहचान देते हैं। कंथलूर की भौगोलिक स्थिति इसे यह उपनाम दिलाती है। यह पश्चिमी घाटों की एक ठंडी और शुष्क पट्टी पर स्थित है, जिसके कारण यहां का मौसम केरल के नम मौसम से भिन्न होता है। समुद्र तल से लगभग 5,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी चारों ओर से घने जंगलों और पहाड़ों से घिरी हुई है। यहां की जलवायु उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों से काफी मिलती-जुलती है, जिसके कारण सेब और प्लम जैसे शीतोष्ण फल यहां सफलतापूर्वक उगाए जाते हैं। कंथलूर की हरियाली, शांति और खेती के अनोखे तरीके इसे एक अनोखा और आकर्षक गंतव्य बनाते हैं। ठंड में केरल के कंथलूर का मनमोहक नज़ारा.. कंथलूर की यात्रा का सबसे उत्तम समय नवंबर से फरवरी के बीच का है। इस दौरान, यहां का मौसम अत्यंत ठंडा और मनमोहक हो जाता है, जिससे यह अनुभव सचमुच ‘कश्मीर’ जैसा प्रतीत होता है। जब तापमान 5°C से 10°C तक गिर जाता है, तो सुबह-सुबह खेतों और बागानों पर ओस की परत जम जाती है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में, कंथलूर की खासियत सेब के बागान, पतझड़ के रंग बिखेरते हैं, और कई जगहों पर फलों की कटाई का मौसम भी होता है। किसान अपनी ताज़ी फसलें बेचते हैं, जिससे पर्यटक सीधे पेड़ से तोड़कर फलों का आनंद ले सकते हैं। इस ठंडी और शांत जलवायु में, स्ट्रॉबेरी के खेत लाल दानों से लदे होते हैं, जो नज़ारे को और भी हसीन बना देते हैं। ठंडी हवाएं, साफ नीला आसमान और फूलों-फलों से लदी पहाड़ियां, कंथलूर को एक अविस्मरणीय शीतकालीन गंतव्य बना देती हैं। फल और बागान: यह केरल की एकमात्र ऐसी जगह है, जहां सेब की व्यावसायिक खेती होती है। इसके अलावा, संतरे, प्लम, स्ट्रॉबेरी और पैशन फ्रूट के बागान भी यहां की विशेषता हैं। अनानयिरंगल बांधः कंथलूर के पास स्थित, यह बांध शांत वातावरण और आसपास की हरियाली के लिए प्रसिद्ध है। यहां वन्यजीवों को देखने का भी मौका मिलता है। सुगन्धित मसालेः यहां इलायची, दालचीनी और लौंग जैसे कई मसालों की खेती भी होती है, जिसकी सुगंध हवा में घुली रहती है। भीमकाया गुफाएंः माना जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान यहां विश्राम किया था। ये गुफाएं ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। चिन्नार वन्यजीव अभयारण्यः कंथलूर के करीब स्थित, यह अभयारण्य विविध वन्यजीवों और वनस्पतियों का घर है, जिसमें ट्रेकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। रास्ता और अनुमानित किराया कंथलूर की यात्रा की योजना बनाते समय, परिवहन के साधनों और उनसे जुड़े अनुमानित किराए को जानना बहुत ज़रूरी है। मुन्नार से इसकी निकटता के कारण, कोच्चि शहर यहां पहुंचने का मुख्य केंद्र है। कंथलूर तक पहुंचने का रास्ताः यहाँ तक सीधे हवाई मार्ग या रेल मार्ग से नहीं पहुंचा जा सकता। निकटतम हवाई अड्डा कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो कंथलूर से लगभग 160 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से मुन्नार होते हुए कंथलूर के लिए टैक्सी या बस सेवा उपलब्ध है। निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन एर्नाकुलम या अलुवा है। इन स्टेशनों से आप मुन्नार तक बस या टैक्सी ले सकते हैं और फिर मुन्नार से कंथलूर के लिए स्थानीय परिवहन का उपयोग कर सकते हैं। मुन्नार से कंथलूर की सड़क यात्रा अत्यंत सुंदर घाटों और प्राकृतिक दृश्यों से गुज़रती है। हावाई यात्रा का औसत किराया ₹4,000 से ₹8,000 प्रति व्यक्ति (मौसम और अग्रिम बुकिंग के आधार पर) रहेगा। परिवहन का अनुमानित किरायाः परिवहन का किराया आपके प्रारंभिक शहर और यात्रा के तरीके पर निर्भर करता है। ट्रेन यात्रा का औसत किराया ₹800 (स्लीपर क्लास) से ₹3,000 (एसी क्लास) प्रति व्यक्ति तक रहेगा। कोच्चि या एर्नाकुलम से कंथलूर तक (सड़क मार्ग) का टैक्सी (निजी कार) का किराया लगभग ₹4,500 से ₹6,000 (एक तरफ़ा) रहेगा। यह आरामदायक और तेज़ विकल्प है, जिसमें मुन्नार भी शामिल हो सकता है। बस में एर्नाकुलम या अलुवा से मुन्नार तक का लगभग ₹180 से ₹300 प्रति व्यक्ति किराया रहेगा। मुन्नार से कंथलूर के लिए स्थानीय बस या जीप का किराया ₹50 से ₹100 अतिरिक्त होगा। कंथलूर प्रकृति प्रेमियों और शांत वातावरण की तलाश करने वालों के लिए एक अद्भुत और कम भीड़-भाड़ वाला गंतव्य है। अपनी अनोखी कृषि, ठंडी जलवायु और शानदार दृश्यों के कारण, यह वास्तव में ‘केरल का कश्मीर’ होने का हकदार है। ठंड के मौसम में जब फलों की कटाई होती है, तो यहां का नज़ारा और भी मनमोहक हो जाता है। अगर आप जाना चाहते हैं तो आप को शुभकामनाएं।

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नीलगिरी तहर का आशियाना है तो एराविकुलम नेशनल पार्क

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एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (Eravikulam National Park) जिसे राजमलाई नेशनल पार्क भी कहा जाता है, केरल के इडुक्की और एर्नाकुलम जिले में स्थित है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान केरल का सबसे पुराना और बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। यह नेशनल पार्क पश्चिमी घाट के पहाड़ियों में अवस्थित है। एराविकुलम नेशनल पार्क लगभग 97 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1978 में हुई थी। एराविकुलम नेशनल पार्क की स्थापना नीलगिरी तहर के संरक्षण के लिए की गयी थी जो इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत अधिक संख्या में निवास करती है। अनामुडी (2695 मीटर) जो दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी है, एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में ही है। यह राष्ट्रीय उद्यान पूयमकुट्टी और इदमलयार जंगलों से घिरा हुआ है। इस राष्ट्रीय उद्यान में दो नदियां बहती है जो चिन्नार और पम्बर है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास (History of Eravikulam National Park) सर्वप्रथम, 1971 से पहले तक इस राष्ट्रीय का संरक्षण ‘कानन देवन हिल्स प्रोड्यूस कंपनी’ (Kanan Devan Hills Produce Company) करती थी। 1971 के पश्चात इस कंपनी से संरक्षण का अधिकार केरल सरकार ने ले लिया। 1975 में केरल सरकार द्वारा इस उद्यान को एराविकुलम-राजमाला वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद 1978 में इसे नेशनल पार्क बना दिया गया। एराविकुलम नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Eravikulam National Park) एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं जिनमें मैमल्स की 26 प्रजातियाँ, एम्फीबियन की 19 प्रजातियाँ, तितलियों की 101 प्रजातियाँ और बर्ड्स की 132 प्रजातियाँ शामिल है। एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक रूप से नीलगिरि तहर निवास करते है जिनकी संख्या इस उद्यान में 750 के करीब है। नीलगिरि तहर के अलावा यहाँ पाए जाने वाले जीवों में ब्लैक एंड ऑरेंज फ्लाईकैचर (Black and Orange Flycatcher), नीलगिरि पिपिट (Nilgiri Pipit), नीलगिरि वुड पिजन (Nilgiri Wood Pigeon), सफेद बेलदार शॉर्टविंग (White-bellied Shortwing), केरल लाफिंगथ्रश (Kerala Laughingthrush) आदि शामिल है। वही यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में बाघ (Tiger), हाथी (Elephant), तेंदुआ (Leopard), लायन-टेल्ड मकाक (Lion-tailed Macaque), सांभर (Sambhar), गौर (Gaur), भारतीय मंटजेक (Indian Muntjac), सुनहरा सियार (Golden Jackal), वाइल्ड कैट (Wild Cat), वाइल्ड डॉग (Wild Dog), ढोल (Dhole), नीलगिरि लंगूर (Nilgiri Langur), धारीदार गर्दन वाला नेवला (Striped-necked Mongoose), भारतीय साही (Indian Porcupine), नीलगिरि मार्टन (Nilgiri Marten), नीलगिरि फ्लाईकैचर (Nilgiri Flycatcher), छोटे पंजे वाला ऊदबिलाव (Short-toed Beaver), सुर्ख नेवला (Ruddy Mongoose), डस्की पाम गिलहरी (Dusky Palm Squirrel), पालनी फोररिंग (Palani Four-ringed), रेड डिस्क बुशब्राउन (Red Disc Bushbrown) आदि है। एराविकुलम नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Eravikulam National Park) अगर बात की जाए एराविकुलम नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ पाए जाने वाले वनस्पतियों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में एक्टिनोडाफेन बॉर्डिलोनी (Actinodaphne Bordiloni), माइक्रोट्रोपिस रामिफ्लोरा (Microtropis Ramiflora), पिटोस्पोरम टेट्रास्पर्मियम (Pittosporum Tetraspermium), सिसिजियम अरोनोटियानम (Syzygium Auronotianum), क्राइसोपोगोन ज़ेलानियस (Chrysopogon Zelanius), यूपेटोरियम एडेनोफोरम (Uupatorium Adenoforam), स्ट्रोबिलेंथस कुंथियानस (Strobilanthus Kunthianus), यूलिया फियोथ्रिक्स (Eulea Phaeothrix), ट्रिपोजेन ब्रोमोड्स (Trypogena Bromodes) और अरुंडिनेला फस्काटा (Arundinella Fuscata) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट एराविकुलम नेशनल पार्क (Best time to visit Eravikulam National Park) अगर आप एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से फरवरी) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। फरवरी से लेकर मार्च महीने तक यह राष्ट्रीय उद्यान बंद रहता है। कैसे पहुंचे एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Eravikulam National Park)?

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अपने हाथियों के लिए मशहूर है केरल का पेरियार नेशनल पार्क

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केरल राज्य अपने रिच कल्चर और बेहतरीन नेचुरल टूरिस्ट स्पॉट्स के कारण पूरे भारत में फेमस है और यहां दुनिया के कोने कोने से लोग घूमने के लिए आते हैं। ऐसे में यहां के लोगों को यहां का कल्चर जितना पसंद आता है, उससे कहीं ज्यादा यहां के लोगों की सोच और उनका व्यवहार पसंद आता है। इसके पीछे का कारण है यहां रहने वाले मेहनती और पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग। अधिकतर केरल को समुद्री तटों से जोड़कर देखा जाता है लेकिन, केरल में इन बीचों के अलावा बहुत से केले के बागान, नारियल के पेड़ और हाथी भी मौजूद हैं। जो यहां की संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। अगर केरल की बात हो और गजराज का जिक्र ना हो तो केरल का किस्सा अधूरा माना जाएगा। ऐसे में अगर आप केरल घूमने के लिए जा रहे हैं तो आप किसी ऐसी जगह घूमने जरूर जाएं जहां पर आप हाथियों को देख सके और फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं केरल के एक ऐसे नेशनल पार्क के बारे में जहां जाकर आप केरल के हाथियों को देख पाएंगे और उनकी सवारी भी कर पाएंगे। क्यों प्रसिद्ध है पेरियार नेशनल पार्क (Why is Periyar National Park famous)? पेरियार नेशनल पार्क 350 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ एक ऐसा नेशनल पार्क है जो हाथियों और बाघों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार नेशनल पार्क को दो नदियों का पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से पहली नदी का नाम है पेरियार और दूसरी नदी का नाम है पांबा। यह नेशनल पार्क 1934 में नीली कक्कांपेट्टी गेम सेंचुरी के नाम से स्थापित किया गया था। इस नेशनल पार्क का नाम 1950 में बदलकर पेरियार वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रखा गया। इस पार्क के देखरेख का काम डिपार्मेंट आफ फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ केरल और साथ ही गवर्नमेंट आफ इंडिया द्वारा संभाला जाता है।अगर बात करें यहां मिलने वाले पेड़ों के बारे में तो यहां आपको आम, जामुन, इमली, अंजीर, किनो, बाँस, चंदन और लाल चंदन जैसे पेड़ देखने को मिलेंगे।इस पार्क में स्तनधारियों की 35 प्रजातियां, पक्षियों की 265 प्रजातियां, सरीसृपों की 45 प्रजातियां, मछलियों की 40 प्रजातियां और कीड़े तितलियों की 160 प्रजातियां पाई जाती हैं। कैसे पहुंचे पेरियार नेशनल पार्क (How to reach Periyar National Park)? पेरियार नेशनल पार्क आना बहुत हीं आसान है, क्योंकि यहां तक बाय रोड बहुत अच्छी कनेक्टिविटी मिल जाती है। अगर आप आसपास के शहरों से आ रहे हैं तो आप बहुत ही आसानी से बस के जरिए पेरियार नेशनल पार्क तक पहुंच सकते हैं। वहीं अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो मदुरै एयरपोर्ट आ सकते हैं। जहाँ से इस पार्क की दुरी लगभग 140 किलोमीटर है। पार्क से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन कोट्टायम है जो 110 किमी दूर है। पेरियार सभी प्रमुख शहरों से रोड मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा है। पेरियार नेशनल पार्क आने का सबसे सही समय (Best time to visit Periyar National Park): अगर आप पेरियार नेशनल पार्क आ रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि कहीं भी जाने से पहले वहां के मौसम का पता जरूर लगा ले। क्योंकि मौसम अगर अनुकूल न हो तो आपके ट्रिप का मजा किरकिरा हो सकता है। ऐसे में अगर आप पेरियार नेशनल पार्क आ रहे हैं तो आप यह सुनिश्चित करें कि आप अक्टूबर से मार्च तक के समय में जा रहे हैं। क्योंकि उसे समय यहां का टेंपरेचर सबसे ज्यादा सूटेबल होता है। आप बहुत हीं आराम से नेशनल पार्क में घूम पाएंगे। इस समय ना तो आपको बहुत ज्यादा गर्मी सताएगी ना ही बारिश के कारण आपकी जीप रास्ते में फंसेगी। आप बहुत ही अच्छे से इस समय वाइल्डलाइफ को इंजॉय कर सकते हैं।