Munnar Travel Guide: मुन्नार की 10 खूबसूरत जगहें
केरल की पहाड़ियों में बसा एक ऐसा हिल स्टेशन, जहां चाय के बागान, ठंडी हवा, झरने और धुंध से ढकी सड़कें आपका मन मोह लेंगी। जानिए मुन्नार में कहां घूमें, कब जाएं, क्या खाएं और तीन दिन में अपनी यात्रा कैसे पूरी करें। कभी-कभी छुट्टियों में ऐसी जगह जाने का मन करता है, जहां सुबह उठते ही मोबाइल पर मैसेज देखने के बजाय खिड़की से बाहर पहाड़ नजर आएं। जहां सड़क के दोनों तरफ दूर तक चाय के बागान फैले हों और मौसम ऐसा हो कि हाथ में गर्म चाय का कप लेकर घंटों बैठने का मन करे। अगर आप भी ऐसी जगह की तलाश में हैं, तो केरल का मुन्नार आपकी अगली यात्रा के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। मुन्नार की खूबसूरती सिर्फ उसके चाय के बागानों तक सीमित नहीं है। यहां ऊंची पहाड़ियां, छोटे-बड़े झरने, जंगल, झीलें और कई ऐसे रास्ते हैं, जहां सफर के दौरान ही खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं। यही वजह है कि परिवार के साथ छुट्टियां बितानी हों, दोस्तों के साथ घूमना हो या फिर कुछ दिन शांति से बिताने हों, Munnar Travel Guide हर तरह के यात्री के लिए काम आ सकती है। केरल के इडुक्की जिले में स्थित मुन्नार समुद्र तल से करीब 1,600 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। यहां का मौसम, चाय के बागान और पहाड़ी रास्ते इसे दक्षिण भारत के पसंदीदा हिल स्टेशनों में शामिल करते हैं। मुन्नार कहां है और इसका नाम कैसे पड़ा? मुन्नार केरल के इडुक्की जिले में पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के बीच बसा एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। यहां का मौसम मैदानी इलाकों के मुकाबले ठंडा रहता है। चारों तरफ फैले चाय के बागान, घुमावदार सड़कें और पहाड़ियों पर छाई धुंध इस जगह को एक अलग पहचान देते हैं। मुन्नार नाम मलयालम भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है—‘मून्नू’ यानी तीन और ‘आरु’ यानी नदी। इसका नाम यहां की तीन पहाड़ी धाराओं मुथिरापुझा, नल्लाथन्नी और कुंडाला से जुड़ा है। अंग्रेजों के दौर में यह इलाका गर्मियों में आराम करने की पसंदीदा जगहों में शामिल था। आज भी यहां कई पुराने बंगले और चाय के बागान उस दौर की याद दिलाते हैं। Munnar Travel Guide की शुरुआत करते समय यह समझना जरूरी है कि मुन्नार सिर्फ एक छोटा-सा बाजार या कुछ व्यूपॉइंट्स नहीं है। इसके आसपास कई अलग-अलग इलाके और घूमने के रास्ते हैं। इसलिए यहां आने से पहले अपनी यात्रा की योजना बना लेना अच्छा रहता है। चाय के बागानों के पीछे छिपा है मुन्नार का पुराना इतिहास मुन्नार की पहचान आज भले ही चाय के बागानों से होती हो, लेकिन यहां चाय की खेती शुरू होने से पहले यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ था। यहां मुथुवन आदिवासी समुदाय के लोग रहते थे। 19वीं सदी के दूसरे हिस्से में अंग्रेज अधिकारियों और यूरोपीय प्लांटर्स की दिलचस्पी इस इलाके में बढ़ने लगी। साल 1877 में ब्रिटिश अधिकारी जॉन डेनियल मुनरो ने पूंजर राजपरिवार से कन्नन देवन पहाड़ियों की जमीन लीज पर ली। शुरुआत में यहां कॉफी, इलायची और दूसरी फसलों की खेती की कोशिश हुई। बाद में 1880 में ए.एच. शार्प नाम के यूरोपीय प्लांटर ने पार्वती एस्टेट में चाय के पौधे लगाए। यहीं से मुन्नार में चाय की खेती का बड़ा दौर शुरू हुआ। साल 1897 में कन्नन देवन हिल्स प्रोड्यूस कंपनी बनाई गई, जिसने चाय के बागानों का काम संभाला। 1924 में भारी बारिश और बाढ़ ने मुन्नार को काफी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद भी यहां के लोगों और बागान कर्मचारियों ने मिलकर दोबारा काम शुरू किया। साल 1964 में टाटा समूह ने फिनले कंपनी के साथ मिलकर काम शुरू किया। आगे चलकर 2005 में कन्नन देवन हिल्स प्लांटेशंस कंपनी यानी KDHP बनी और टाटा टी ने अपने ज्यादातर बागानों का प्रबंधन इस कंपनी को सौंप दिया। इस कंपनी में कर्मचारियों की भी हिस्सेदारी है। अगर आप Munnar Travel Guide के साथ इस जगह का इतिहास भी जानना चाहते हैं, तो चाय के बागानों को सिर्फ फोटो खींचने की जगह न समझें। इनके पीछे यहां के लोगों की मेहनत और कई पीढ़ियों का काम जुड़ा हुआ है। KDHP Tea Museum: जानिए चाय आपके कप तक कैसे पहुंचती है मुन्नार में चाय के बागान देखने के बाद अगर आप यह जानना चाहते हैं कि चाय की पत्तियों से आपके घर तक पहुंचने वाला पैकेट कैसे तैयार होता है, तो KDHP Tea Museum जरूर जाएं। यह नल्लाथन्नी एस्टेट के इलाके में स्थित है। यहां चाय बनाने में इस्तेमाल होने वाली पुरानी मशीनें, तस्वीरें और बागानों के पुराने दौर से जुड़ी चीजें देखने को मिलती हैं। संग्रहालय में चाय बनाने की प्रक्रिया को समझने का मौका मिलता है। यहां चाय चखने की सुविधा भी है, जहां आप अलग-अलग स्वाद की चाय का अनुभव कर सकते हैं। Munnar Travel Guide में इस जगह को शामिल करने की एक और वजह है। यहां घूमने के बाद आपको समझ आता है कि चाय का एक कप तैयार होने के पीछे कितनी मेहनत और कितने चरण होते हैं। जाने से पहले संग्रहालय के खुलने का समय और टिकट की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट या KDHP से जरूर जांच लें। मुन्नार की सबसे खूबसूरत घूमने वाली जगहें मुन्नार में घूमने के लिए कई जगहें हैं। कुछ जगहें परिवार के साथ घूमने के लिए अच्छी हैं, तो कुछ प्रकृति और पहाड़ों को करीब से देखने वालों को पसंद आएंगी। अपनी Munnar Travel Guide में इन जगहों को जरूर शामिल करें। इरावीकुलम नेशनल पार्क: नीलगिरी ताहर को देखने का मौका मुन्नार से कुछ दूरी पर स्थित इरावीकुलम नेशनल पार्क वन्यजीवों और प्रकृति पसंद करने वालों के लिए खास जगह है। यह पार्क खासतौर पर नीलगिरी ताहर नाम के दुर्लभ पहाड़ी जानवर के लिए जाना जाता है। यहां पहाड़ियों पर घूमते हुए आपको चाय के बागानों और आसपास की घाटियों के खूबसूरत नजारे भी दिखाई देते हैं। पार्क के अंदर निजी गाड़ियों को जाने की अनुमति नहीं होती। यहां तय व्यवस्था के अनुसार बस से राजमलाई इलाके तक पहुंचाया जाता है और आगे कुछ रास्ता पैदल तय करना होता है। अनामुडी चोटी का नजारा भी यहीं के आसपास से दिखाई देता है। यह दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई करीब 2,695 मीटर है। Munnar Travel