Kashmir: घूमने से पहले जानें रास्ते, खर्च और जरूरी बातें
कश्मीर जाने का प्लान बनाते ही दिमाग में सबसे पहले बर्फ से ढके पहाड़, डल झील में चलती शिकारा, हरे-भरे मैदान और दूर तक फैली घाटियां आने लगती हैं। लेकिन असल में Kashmir घूमने का मजा तभी आता है जब आपको पहले से पता हो कि कहां रुकना है, किस जगह के लिए कितना समय रखना है और किस रास्ते से जाना आसान रहेगा। 2026 में Kashmir घूमने वालों के लिए एक और खास बात है। जम्मू से श्रीनगर की रेल कनेक्टिविटी पहले से बेहतर हुई है और दूसरी तरफ सोनमर्ग की ओर जाने वाले रास्ते में नई सुरंगों की वजह से यात्रा का अनुभव भी बदल रहा है। जम्मू तवी से श्रीनगर तक वंदे भारत की नियमित सेवा 2 मई 2026 से शुरू हुई, जबकि सोनमर्ग सुरंग 2025 में शुरू हो चुकी है। जून 2026 में ज़ोजिला सुरंग के मुख्य हिस्से की खुदाई पूरी होने से Kashmir से Ladakh तक सड़क संपर्क को लेकर भी बड़ी प्रगति हुई है। इसलिए अगर आप 2026 में Kashmir घूमने का सोच रहे हैं और आपको श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम के साथ आगे Ladakh का रोड ट्रिप भी करना है, तो यह गाइड आपके काम की है। इसमें कोशिश की गई है कि जरूरी जानकारी सीधी और आसान भाषा में मिले, ताकि घूमने से पहले आपको हर छोटी-बड़ी चीज के लिए अलग-अलग जगह भटकना न पड़े। 2026 में Kashmir घूमना पहले से कैसे अलग है? पिछले कुछ समय में Kashmir की यात्रा से जुड़ी कनेक्टिविटी में काफी बदलाव हुए हैं। सबसे बड़ा बदलाव रेल मार्ग को लेकर है। जम्मू तवी से श्रीनगर तक वंदे भारत की दो जोड़ी सेवाएं 2 मई 2026 से नियमित रूप से चल रही हैं। लगभग 266 किलोमीटर की यात्रा में एक सेवा करीब चार घंटे पचास मिनट लेती है और दोनों जोड़ी सेवाएं सप्ताह में छह दिन चलती हैं। इसका मतलब यह है कि अब Kashmir पहुंचने के लिए सिर्फ सड़क या हवाई यात्रा पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। खासकर जिन लोगों को ट्रेन से सफर करना पसंद है, उनके लिए जम्मू से श्रीनगर की रेल यात्रा खुद एक अनुभव बन सकती है। रास्ते में चिनाब रेल पुल और पहाड़ों के बीच से गुजरती रेल इस यात्रा को बाकी सामान्य ट्रेन यात्राओं से काफी अलग बना देती है। चिनाब पुल को दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च पुल बताया गया है। दूसरी तरफ सोनमर्ग सुरंग के शुरू होने से श्रीनगर से सोनमर्ग और आगे Ladakh की तरफ जाने वाले रास्ते को ज्यादा सुरक्षित और हर मौसम में इस्तेमाल करने लायक बनाने की दिशा में बड़ा कदम हुआ है। यह सुरंग 13 जनवरी 2025 को शुरू हुई थी और इसमें करीब 6.4 किलोमीटर की मुख्य सुरंग शामिल है। Kashmir जाने का सबसे आसान तरीका क्या है? अगर आप Delhi, मुंबई, बेंगलुरु या देश के किसी दूसरे बड़े शहर से Kashmir जा रहे हैं, तो आपके पास मुख्य रूप से हवाई जहाज, ट्रेन और सड़क के विकल्प हैं। अगर समय कम है तो श्रीनगर हवाई अड्डा सबसे आसान विकल्प रहता है। वहीं अगर आप यात्रा को ही अनुभव बनाना चाहते हैं, तो जम्मू से श्रीनगर की वंदे भारत एक अच्छा विकल्प हो सकती है। हवाई यात्रा में एक बात जरूर ध्यान रखें। वापसी के समय श्रीनगर हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के लिए अतिरिक्त समय लेकर चलना बेहतर है। खासकर व्यस्त पर्यटन मौसम में आखिरी समय पर पहुंचने से परेशानी हो सकती है। इसलिए फ्लाइट से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचना समझदारी है। ट्रेन से आने वालों के लिए पहले जम्मू या कटरा पहुंचना और वहां से श्रीनगर की ट्रेन लेना आसान हो सकता है। 2026 में जम्मू तवी से श्रीनगर के बीच वंदे भारत की नियमित सेवा चल रही है और यात्रा करीब 266 किलोमीटर की है। सड़क से आने पर जम्मू से श्रीनगर का रास्ता भी खूबसूरत है, लेकिन पहाड़ी रास्ते में मौसम और ट्रैफिक के कारण समय बदल सकता है। इसलिए अगर आपका Kashmir प्लान सड़क यात्रा पर आधारित है, तो पूरे दिन को सिर्फ दूरी के हिसाब से तय करने के बजाय थोड़ा अतिरिक्त समय रखना बेहतर रहेगा। कितने दिन चाहिए? पांच दिन या सात दिन? अगर पहली बार Kashmir जा रहे हैं तो पांच दिन में श्रीनगर, गुलमर्ग और पहलगाम को देखा जा सकता है, लेकिन कार्यक्रम थोड़ा भागदौड़ वाला रहेगा। हर जगह आराम से घूमने और मौसम का मजा लेने के लिए कम से कम छह रात और सात दिन का समय ज्यादा सुविधाजनक रहेगा। पहले दिन श्रीनगर पहुंचकर होटल में सामान रखने के बाद शाम को डल झील में शिकारा राइड रख सकते हैं। दूसरे दिन श्रीनगर के मुगल गार्डन, हजरतबल, पुराने शहर और आसपास की जगहें देखी जा सकती हैं। तीसरे दिन गुलमर्ग का पूरा दिन रखा जा सकता है। चौथे दिन पहलगाम के लिए निकलें और रास्ते में आराम से रुकते हुए वहां पहुंचें। पांचवें दिन अरू वैली, बेताब वैली और चंदनवाड़ी जैसे इलाकों को देखा जा सकता है। छठे दिन श्रीनगर वापस आकर आराम या हाउसबोट में रुकने का अनुभव लिया जा सकता है। सातवां दिन खरीदारी और वापसी के लिए रखें। अगर आप आगे Ladakh भी जाना चाहते हैं तो इस सात दिन के Kashmir प्लान को अलग मानें। Ladakh के लिए कम से कम चार-पांच अतिरिक्त दिन रखना ज्यादा व्यावहारिक रहेगा, क्योंकि पहाड़ी रास्तों में सिर्फ दूरी देखकर समय तय करना सही नहीं होता। श्रीनगर में सिर्फ डल झील नहीं, शहर को भी समय दें Kashmir की पहली पहचान बहुत से लोगों के लिए डल झील है। लेकिन श्रीनगर को सिर्फ शिकारा राइड तक सीमित कर देना सही नहीं होगा। शहर में मुगल दौर के बाग, पुराने बाजार, धार्मिक स्थल और स्थानीय खान-पान भी इस यात्रा का जरूरी हिस्सा हैं। डल झील में सुबह का समय खास तौर पर अच्छा लगता है। पानी पर धीरे-धीरे चलती शिकारा, आसपास के पहाड़ और झील में होने वाली रोजमर्रा की गतिविधियां आपको Kashmir की अलग तस्वीर दिखाती हैं। अगर आपको ज्यादा शांति चाहिए तो निगीन झील भी देख सकते हैं। डल झील की तुलना में यहां माहौल थोड़ा शांत महसूस हो सकता है। दोनों जगहों का अनुभव अलग है, इसलिए अगर आपके पास समय है तो सिर्फ एक झील देखकर