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Mangaluru रेलवे का बड़ा बदलाव

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दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रेलवे बोर्ड ने Mangaluru रेलवे क्षेत्र को दक्षिणी रेलवे के पालक्काड मंडल से हटाकर दक्षिण पश्चिमी रेलवे के मैसूरु मंडल में शामिल करने का फैसला किया है। यह बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। फैसले के बाद Karnataka में खुशी है, जबकि Kerala में इसका विरोध शुरू हो गया है। पहली नजर में यह सिर्फ रेलवे के दो मंडलों की सीमा बदलने जैसा फैसला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे कहानी काफी बड़ी है। Mangaluru देश के महत्वपूर्ण तटीय शहरों में से एक है। यहां का रेल नेटवर्क सिर्फ यात्रियों के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि न्यू मंगलुरु पोर्ट और माल ढुलाई के कारण रेलवे की कमाई में भी इसकी बड़ी भूमिका है। यही वजह है कि इस फैसले को लेकर Karnataka और Kerala, दोनों राज्यों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। Karnataka को उम्मीद है कि अब Mangaluru के रेल विकास पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जबकि Kerala को चिंता है कि पालक्काड मंडल की कमाई और उसका महत्व काफी कम हो सकता है। Mangaluru को लेकर क्या बदला है? अभी तक Mangaluru का एक बड़ा रेल क्षेत्र दक्षिणी रेलवे के पालक्काड मंडल के अधीन था। यानी शहर Karnataka में होने के बावजूद यहां के रेल प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा Kerala स्थित पालक्काड मंडल से चलता था। अब रेलवे बोर्ड ने इस व्यवस्था को बदलने का फैसला किया है। नए आदेश के अनुसार Mangaluru Central, Mangaluru Junction और Ullal तक का पूरा रेल क्षेत्र दक्षिण पश्चिमी रेलवे के मैसूरु मंडल में शामिल हो जाएगा। दोनों रेल मंडलों के बीच का सीमा बिंदु भी बदल जाएगा। पहले यह सीमा पाडिल में थी, लेकिन अब इसे उल्लल स्टेशन तक कर दिया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि उल्लल और उसके उत्तर की रेलवे संपत्तियां तथा रेल पटरी अब मैसूरु मंडल के अधिकार क्षेत्र में आएंगी। पनाम्बुर, जोकट्टे, कुलशेखर, पाडिल, Mangaluru Junction, Mangaluru Central, बंदर, नेत्रवती और उल्लल जैसे प्रमुख इलाके इस बदलाव से सीधे जुड़े हैं। हालांकि थोकुर स्टेशन को इस बदलाव से अलग रखा गया है। यह पहले की तरह कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन के अधीन रहेगा और कोंकण रेलवे तथा दक्षिण पश्चिमी रेलवे के बीच संपर्क बिंदु की भूमिका निभाता रहेगा। Karnataka में क्यों है इतनी खुशी? Karnataka के तटीय इलाकों में लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि Mangaluru के रेल प्रशासन को Karnataka के किसी मंडल के अधीन किया जाए। स्थानीय रेल यात्री संगठनों और लोगों का कहना था कि Karnataka के इस महत्वपूर्ण शहर को पालक्काड मंडल के अधीन रहने की वजह से उतना फायदा नहीं मिल पाया, जितना मिलना चाहिए था। स्थानीय लोगों का आरोप रहा है कि Mangaluru Central की सीमित टर्मिनल क्षमता का इस्तेमाल कई बार Kerala की तरफ जाने वाली ट्रेनों के लिए ज्यादा किया जाता रहा। उनका मानना था कि अगर शहर का रेल प्रशासन मैसूरु मंडल के पास आता है, तो बेंगलुरु और मैसूरु के साथ रेल संपर्क को और मजबूत किया जा सकता है। इस मांग को आगे बढ़ाने में सांसद कैप्टन बृजेश चौटा की भूमिका भी बताई गई है। उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और रेल मंत्रालय के सामने Mangaluru को दक्षिण पश्चिमी रेलवे के अधीन लाने की मांग रखी। अब जब फैसला लागू होने जा रहा है, Karnataka में उम्मीद है कि तटीय क्षेत्र में नई रेल परियोजनाओं को गति मिलेगी और बेंगलुरु तथा मैसूरु के साथ सीधा संपर्क बेहतर हो सकेगा। हालांकि केवल मंडल बदल जाने से नई ट्रेनें या नई परियोजनाएं अपने आप शुरू नहीं होंगी। इसके लिए बजट, ट्रैक क्षमता, रखरखाव और रेलवे की मंजूरी भी जरूरी रहेगी। सबसे बड़ा मुद्दा है रेलवे की कमाई इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात रेलवे की कमाई है। Mangaluru सिर्फ यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां न्यू मंगलुरु पोर्ट भी है। पनाम्बुर क्षेत्र से होने वाली माल ढुलाई रेलवे के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। Mangaluru क्षेत्र से माल ढुलाई, बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियां और व्यावसायिक आय पालक्काड मंडल के लिए महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र के मैसूरु मंडल में जाने से पालक्काड की आय पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है। मैसूरु मंडल के लिए यह बदलाव आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Mangaluru क्षेत्र और बंदरगाह से मिलने वाली माल ढुलाई की आय अब दक्षिणी रेलवे के बजाय दक्षिण पश्चिमी रेलवे के खाते में जाएगी। इसका यह मतलब नहीं है कि भारतीय रेलवे की कुल कमाई कम हो जाएगी। बदलाव केवल इतना है कि यह कमाई अब एक रेल जोन और मंडल के बजाय दूसरे रेल जोन और मंडल के प्रशासनिक खाते में दर्ज होगी। पालक्काड मंडल को क्यों हो रही है चिंता? Kerala के लिए यह फैसला इसलिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि पालक्काड मंडल पहले ही अपने पुराने क्षेत्र का एक हिस्सा खो चुका है। साल 2006 में तमिलनाडु के हिस्से को अलग करके सेलम मंडल बनाया गया था। उसके बाद अब Mangaluru क्षेत्र भी पालक्काड मंडल से बाहर जा रहा है। इसका मतलब है कि पालक्काड मंडल का क्षेत्र और कम हो जाएगा। Kerala के रेल विशेषज्ञों और यात्रियों को चिंता है कि Mangaluru के जाने के बाद पालक्काड मंडल के पास बड़ी माल ढुलाई और आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत नहीं रहेगा। केरल के नेताओं ने आशंका जताई है कि इस बदलाव से पालक्काड मंडल की आय पर बड़ा असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि आय और संसाधन घटने की स्थिति में मालाबार क्षेत्र के रेल विकास से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं। एक और चिंता पिटलाइन सुविधा को लेकर है। अगर बड़े स्तर की पिटलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं रहती है, तो नई ट्रेनें शुरू करने या त्योहारों के समय विशेष ट्रेनें चलाने में परेशानी आ सकती है। इसी वजह से Kerala में यह सवाल भी उठ रहा है कि आने वाले समय में पालक्काड मंडल का आकार, बजट और रेल विकास की क्षमता कितनी रह जाएगी। Kerala में शुरू हुआ विरोध रेलवे बोर्ड के फैसले के बाद Kerala में राजनीतिक विरोध भी तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने