Kanyakumari Travel: घूमने की 8 सबसे खास जगहें
भारत के नक्शे को अगर ध्यान से देखें, तो सबसे दक्षिणी छोर पर एक ऐसी जगह दिखाई देती है, जहां पहुंचना अपने आप में एक अलग अनुभव है। यह जगह है Kanyakumari। तमिलनाडु में बसा यह खूबसूरत शहर अपनी समुद्री खूबसूरती, मंदिरों, ऐतिहासिक इमारतों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इसे ‘लैंड्स एंड’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह भारत के आखिरी छोर पर स्थित है। Kanyakumari की खास बात यह है कि यहां एक ही यात्रा में आपको प्रकृति, इतिहास और अध्यात्म तीनों का अनुभव मिल जाता है। कहीं समुद्र की लहरें आपका ध्यान खींचती हैं, तो कहीं पुराने मंदिर और महल आपको इतिहास के करीब ले जाते हैं। वहीं कुछ जगहें ऐसी हैं जहां खड़े होकर आपको आसपास का पूरा नजारा देखने का मौका मिलता है। अगर आप Kanyakumari Travel का प्लान बना रहे हैं और समझ नहीं पा रहे कि इस छोटे से शहर में आखिर कहां-कहां जाना चाहिए, तो यह ब्लॉग आपके काम का है। क्योंकि Kanyakumari में घूमने के लिए सिर्फ एक-दो जगहें नहीं हैं। यहां ऐसी कई जगहें हैं, जिन्हें देखने के बाद ही आपकी यात्रा पूरी महसूस होगी। विवेकानंद रॉक मेमोरियल से लेकर तिरुवल्लुवर मूर्ति तक, भगवती अम्मन मंदिर से लेकर तीन समुद्रों के संगम तक और पद्मनाभपुरम पैलेस से लेकर वट्टाकोट्टई किले तक, Kanyakumari Travel में आपको हर तरह का अनुभव मिल सकता है। तो चलिए जानते हैं Kanyakumari की उन 8 खास जगहों के बारे में, जिन्हें अपनी यात्रा की लिस्ट में जरूर शामिल करना चाहिए। 1. विवेकानंद रॉक मेमोरियल Kanyakumari की पहचान से जुड़ी सबसे खास जगहों में विवेकानंद रॉक मेमोरियल का नाम सबसे ऊपर आता है। मुख्य भूमि से थोड़ी दूरी पर समुद्र के बीच चट्टानों पर बना यह स्मारक स्वामी विवेकानंद को समर्पित है। माना जाता है कि स्वामी विवेकानंद ने 1892 में इसी चट्टान पर बैठकर ध्यान लगाया था। इसी वजह से इस जगह का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है। बाद में वर्ष 1970 में यहां विवेकानंद रॉक मेमोरियल का निर्माण कराया गया। Kanyakumari Travel के दौरान इस जगह पर पहुंचना अपने आप में एक अलग अनुभव है। आपको मुख्य भूमि से बोट या फेरी के जरिए समुद्र के बीच स्थित चट्टान तक जाना होता है। चारों तरफ समुद्र और बीच में खड़ा यह स्मारक काफी खूबसूरत दिखाई देता है। मेमोरियल के अंदर ध्यान मंडपम और सभा मंडपम मौजूद हैं। ध्यान मंडपम में कुछ समय शांत बैठकर आसपास के वातावरण को महसूस किया जा सकता है। यहां स्वामी विवेकानंद की आदमकद कांस्य मूर्ति और एक खुला प्रांगण भी है। इस चट्टान से जुड़ी एक और खास बात देवी कन्याकुमारी का पदचिह्न है, जिसे श्रीपाद पराई कहा जाता है। मान्यता के अनुसार देवी ने भगवान शिव को पाने के लिए इसी स्थान पर एक पैर पर खड़े होकर तपस्या की थी। विवेकानंद रॉक मेमोरियल से तीन समुद्रों का नजारा भी देखने को मिलता है। अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के आसपास का समुद्री दृश्य यहां से काफी खास दिखाई देता है। अगर आप Kanyakumari Travel के दौरान इस जगह को देखने जा रहे हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना अच्छा रहेगा। इससे भीड़ से बचने का मौका मिलेगा और समुद्र की शांत हवाओं के बीच कुछ समय बिताया जा सकता है। मेमोरियल के लिए प्रवेश शुल्क ₹20 प्रति व्यक्ति बताया गया है, जबकि यहां पहुंचने के लिए बोट या फेरी की सेवा उपलब्ध है, जिसका किराया लगभग ₹50 है। मेमोरियल सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहता है। 2. तिरुवल्लुवर मूर्ति विवेकानंद रॉक मेमोरियल के पास ही समुद्र के बीच एक दूसरी चट्टानी जगह पर तिरुवल्लुवर मूर्ति स्थित है। Kanyakumari आने वाले यात्रियों के लिए यह भी देखने लायक जगह है। यह विशाल पत्थर की प्रतिमा महान तमिल संत, कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर को समर्पित है। तिरुवल्लुवर ने ‘तिरुक्कुरल’ नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की थी। वर्ष 2000 में इस प्रतिमा का अनावरण किया गया था। इसे तैयार करने में लगभग 20 साल का समय लगा था। Kanyakumari Travel में इस प्रतिमा को खास बनाने वाली सबसे बड़ी बात इसकी ऊंचाई है। प्रतिमा और उसके आधार की कुल ऊंचाई 133 फीट है। यह ऊंचाई तिरुक्कुरल के 133 अध्यायों को दर्शाती है। इसमें 38 फीट का आधार है, जो तिरुक्कुरल के ‘अराम’ यानी सद्गुण वाले 38 अध्यायों का प्रतीक माना जाता है। इसके ऊपर 95 फीट की मूर्ति धन और प्रेम का प्रतीक है। इस विशाल प्रतिमा का कुल वजन लगभग 7,000 टन बताया गया है। मूर्ति के चरणों तक पहुंचने के लिए मंडपम के अंदर 140 सीढ़ियां बनाई गई हैं। प्रतिमा के आसपास 10 हाथियों की आकृतियां भी बनाई गई हैं। Kanyakumari Travel के दौरान यहां पहुंचने के लिए भी फेरी या बोट की सुविधा मिलती है। यह स्मारक सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। समुद्र के बीच खड़ी यह विशाल प्रतिमा दूर से ही ध्यान खींचती है। विवेकानंद रॉक मेमोरियल के साथ इसे देखने पर Kanyakumari की यात्रा और भी खास हो जाती है। 3. भगवती अम्मन मंदिर अगर Kanyakumari Travel में आप धार्मिक जगहों को भी शामिल करना चाहते हैं, तो भगवती अम्मन मंदिर को बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए। इसे कुमारी अम्मन मंदिर भी कहा जाता है और यह कन्याकुमारी के सबसे पुराने और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। त्रिवेणी संगम से कुछ ही मिनट की दूरी पर स्थित यह मंदिर देवी कन्याकुमारी को समर्पित है। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहास से जुड़ी जानकारी के अनुसार यह मंदिर लगभग 3,000 साल पुराना है। इस मंदिर की सबसे खास चीजों में देवी की मूर्ति पर लगी माणिक्य की नथनी यानी रूबी नोज रिंग शामिल है। इसके चमकने को लेकर एक पुरानी मान्यता भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में समुद्र में जाने वाले जहाजों के कप्तान इस नथनी की चमक को लाइटहाउस की रोशनी समझ लेते थे। इसके कारण जहाज चट्टानों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे। इसी मान्यता के कारण मंदिर का पूर्वी दरवाजा हमेशा बंद रखा जाता है और इसे खास अवसरों पर ही खोला जाता है। Kanyakumari के इस