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Jal Mahal घूमने का पूरा Guide, Budget में करें Trip

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अगर आप जयपुर घूमने गए हैं और आमेर किले की तरफ गए हैं, तो रास्ते में मान सागर झील के बीचों-बीच खड़ा एक खूबसूरत महल जरूर देखा होगा। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे कोई महल पानी के ऊपर तैर रहा हो। यही है Jal Mahal, जिसे लोग Water Palace के नाम से भी जानते हैं। पहली नजर में Jal Mahal को देखकर सबसे पहले यही सवाल मन में आता है कि आखिर यह महल पानी के बीच कैसे खड़ा है। अगर यह पांच मंजिला इमारत है, तो इसकी बाकी मंजिलें दिखाई क्यों नहीं देतीं? असल में इसकी सबसे खास बात यही है। जब मान सागर झील पानी से भर जाती है, तो महल की नीचे वाली चार मंजिलें पानी के अंदर छिप जाती हैं और केवल ऊपर की मंजिल दिखाई देती है। इसी वजह से दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पूरी इमारत पानी पर तैर रही हो। लेकिन Jal Mahal पानी पर तैरता नहीं है। यह एक मजबूत नींव पर खड़ा पांच मंजिला महल है, जिसे पानी के बीच लंबे समय तक सुरक्षित रहने के लिए बनाया गया था। पानी में आखिर कैसे खड़ा है Jal Mahal? यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है, जो पहली बार इस महल को देखता है। Jal Mahal की पांच मंजिलों में से चार मंजिलें झील का पानी बढ़ने पर पानी के अंदर चली जाती हैं। बाहर से केवल ऊपरी मंजिल दिखाई देती है। इसी वजह से झील या सड़क के किनारे से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पानी के बीच केवल एक मंजिल खड़ी हो। लेकिन पानी के नीचे महल का बड़ा हिस्सा मौजूद है। आज के समय में अगर किसी इमारत को लगातार पानी के संपर्क में रखना हो, तो उसके लिए आधुनिक Waterproofing Technology और कई तरह की मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन Jal Mahal उस समय बनाया गया था, जब ऐसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद यह महल इतने लंबे समय से झील के बीच मजबूती से खड़ा है। यही बात इसकी पुरानी इंजीनियरिंग को खास बनाती है। महल की संरचना, नींव, निर्माण सामग्री और पानी के स्तर को ध्यान में रखकर किया गया डिजाइन इसकी मजबूती का बड़ा कारण माना जाता है। क्या सच में चार मंजिलें पानी के अंदर रहती हैं? Jal Mahal की सबसे लोकप्रिय पहचान यही है कि इसकी चार मंजिलें पानी के अंदर रहती हैं और केवल ऊपर की मंजिल दिखाई देती है। हालांकि झील का पानी हर मौसम और जलस्तर के अनुसार बदल सकता है। इसलिए पानी में डूबे हिस्से की स्थिति भी समय के साथ अलग हो सकती है। जब मान सागर झील का जलस्तर अधिक होता है, तो महल की निचली मंजिलें पानी से ढक जाती हैं। दूर से देखने पर केवल छत और ऊपरी मंजिल का हिस्सा नजर आता है। यही दृश्य इसे बाकी महलों से अलग बनाता है। इस महल की खासियत केवल यह नहीं है कि इसका कुछ हिस्सा पानी में है। असली बात यह है कि इसे पानी और प्राकृतिक वातावरण के साथ तालमेल बैठाकर बनाया गया था। Jal Mahal का इतिहास कितना पुराना है? Jal Mahal का इतिहास भी इसकी बनावट जितना ही दिलचस्प है। माना जाता है कि इसकी नींव करीब 1699 के आसपास रखी गई थी। बाद में 18वीं शताब्दी में आमेर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने इसकी मरम्मत करवाई और इसे भव्य रूप दिया। कुछ ऐतिहासिक विवरणों में इसके निर्माण और विस्तार का संबंध आमेर के शाही परिवार से जोड़ा जाता है। यह महल आम लोगों के रहने के लिए नहीं बनाया गया था। इसका इस्तेमाल शाही परिवार के लिए एक तरह के विश्राम स्थल और पिकनिक स्पॉट के रूप में किया जाता था। राजा और उनका परिवार गर्मियों के दिनों में यहां समय बिताने आते थे। जयपुर की गर्मी से दूर झील के बीच शांत वातावरण में कुछ समय बिताना उस दौर में शाही परिवार के लिए एक अलग अनुभव रहा होगा। इसका इस्तेमाल बत्तखों के शिकार के लिए भी किया जाता था। यानी Jal Mahal केवल आराम करने की जगह नहीं था, बल्कि शाही परिवार के मनोरंजन का भी हिस्सा था। महल की छत पर था खूबसूरत बगीचा आज जब हम Jal Mahal को दूर से देखते हैं, तो शायद ही अंदाजा लगा पाते हैं कि कभी इसकी छत पर भी एक खूबसूरत बगीचा हुआ करता था। इस बगीचे को चमेली बाग कहा जाता था। कल्पना कीजिए, नीचे चारों तरफ झील का पानी और ऊपर महल की छत पर हरियाली। उस समय यह जगह शाही परिवार के लिए कितनी खास रही होगी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। महल की छत पर बने गुंबद और छतरियां इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। आज भले ही पर्यटक महल के अंदर नहीं जा सकते, लेकिन बाहर से देखने पर भी इसकी बनावट लोगों को काफी आकर्षित करती है। Jal Mahal की दीवारों में क्या खास है? अब बात आती है उस चीज की, जिसकी वजह से Jal Mahal की इंजीनियरिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है। सवाल यह है कि अगर महल की चार मंजिलें पानी के अंदर रहती हैं, तो पानी लगातार इसकी दीवारों को नुकसान क्यों नहीं पहुंचाता? इसका जवाब उस दौर में इस्तेमाल किए गए खास निर्माण मसाले में छिपा हुआ है। महल को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया था। इन पत्थरों को जोड़ने के लिए चूना, रेत और सुर्खी यानी ईंट के चूरे से तैयार खास मसाले का इस्तेमाल किया गया था। इस मिश्रण को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए कुछ प्राकृतिक चीजों का भी इस्तेमाल किया जाता था। बताया जाता है कि इसमें गुड़, गुग्गल और मेथी के पाउडर जैसी चीजें मिलाई जाती थीं। इन चीजों को चूना, रेत और सुर्खी के साथ मिलाकर एक मजबूत निर्माण सामग्री तैयार की जाती थी। आज हमें यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है कि किसी महल की मजबूती में गुड़ या मेथी जैसी चीजों का भी इस्तेमाल हो सकता है। लेकिन पुराने समय में कारीगर उपलब्ध प्राकृतिक चीजों और अपने अनुभव के आधार पर निर्माण सामग्री तैयार करते थे। Jal Mahal इसी पुराने निर्माण ज्ञान का एक उदाहरण माना जाता

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राजस्थान के राजसी ठाठ बाट का जीता जागता उदाहरण है जयपुर

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“कुछ शहर खूबसूरत होते हैं और कुछ सुन्दर बनने की चाहत रखते हैं। लेकिन राजस्थान का जयपुर शहर तो शायद सुंदरता के लिए बनाया गया है जिसका नाम जेहन में आते ही मन गुलाबी हो उठता है। चाहे दिन का समय हो या रात का, इस शहर की चमक और बनावट मन से उतरती ही नहीं। चारों और अरावली की पहाडयों से घिरा, चौड़ी और साफ़ सुथरी सड़कों और अपने चमकीले और सैकड़ों साल पुराने बाज़ारों के कारण यह शहर किसी भी पर्यटक के मन को खुश करने में पूरी तरह सक्षम हैं।” इस शहर में बने बेहतरीन ऐतिहासिक इमारतें (Historical sites in Jaipur) जयपुर के कल्चरल हेरीटेज (Cultural heritage of Jaipur) को खुद में समेटे हुए हैं। शायद इसीलिए तो यूनेस्को ने इस पुरे शहर को ही वर्ल्ड हेरिटेज साइट (word heritage site) के सूची में शामिल कर लिया। 1. आमेर का किला (Amer fort): कहा जाता है कि इस शहर को वेल्स के राजकुमार (prince of wales) के स्वागत की खुशी में गुलाबी रंग से रंगा गया था और तभी से इसे गुलाबी शहर (pink city) के नाम से जाना जाता है। जयपुर शहर का नाम आते ही यहाँ के बड़े-बड़े और भव्य किले दिलोदिमाग में तैरने लगते हैं। और इन्हीं किलों में निसंदेह सबसे पहले जिस किले की छवि उभरती है वो है खूबसूरत आमेर का किला। राजस्थान के जयपुर शहर को और ज्यादा खूबसूरत बना देने वाला ये आमेर का किला, अम्बर किला के नाम से भी जाना जाता है। ये किला ना केवल जयपुर शहर बल्कि पूरे राजस्थान के शानदार पर्यटन (jaipur tourist attraction) स्थलों में से एक है। आमेर का किला इतना प्रसिद्ध है कि यहाँ पर हर रोज छह हजार से भी अधिक लोग घूमने के लिए आते हैं। यह किला राज्य की राजधानी जयपुर से 11 किलोमीटर की दूरी पर है। आमेर कैसे पहुंचे? (How to reach Amer): इस किले तक पहुंचने के लिए जयपुर से बस, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी या कैब ली जा सकती है। आप अजमेरी गेट और एमआई रोड से आमेर शहर के लिए रोडवेज या प्राइवेट बसों से भी जा सकते हैं। आमेर का किला एक पहाड़ी पर है, इसलिए किले का दीदार करने के लिए आपको किले के थोड़ी दूर पहले से ही या तो पैदल चलना होगा या फिर आप टैक्सी या जीप से भी किले के मुख्य द्वार तक पहुँच सकते हैं। या फिर आप अपनी पर्सनल गाड़ी से भी यहां जा सकते हैं। किले के मुख्य द्वार के पास थोड़ी सपाट चढ़ाई है, इसलिए अगर आप एक्सपर्ट ड्राइवर हैं तो ही अपनी पर्सनल गाड़ी से किले तक जाने का रिस्क लें। अगर आप सीजन के दौरान यहां जा रहे हैं, तो खुद की गाड़ी से जाने से बचना ही बेहतर होगा, क्योंकि ट्रैफिक जाम आपके लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। हालांकि ऐसा सीजनल टाइम में ही ज्यादा होता है। 2. जल महल (Jal mahal) : जयपुर स्थित जलमहल एक पाँच मंज़िला इमारत है, जिसकी 4 मंज़िल पानी के भीतर बनी हैं और एक पानी के ऊपर नज़र आती है। उस समय के राजा इस महल का उपयोग अपने मनोरंजन के लिए करते थे। जलमहल का इतिहास (History of Jal mahal) : पिंक सिटी जयपुर की ‘मानसागर’ झील के बीचों बीच बना ‘जलमहल’ अनोखे सौन्दर्य और अद्भुत स्थापत्यकला का बेजोड़ उदाहरण है। इस महल का निर्माण आज से लगभग 300 साल पहले आमेर के महाराज सवाई मानसिंह ने सन् 1799 में करवाया था। आपको बता दें यह पाँच मंज़िला इमारत और इस झील की सुंदरता उस समय के राजाओं के आकर्षण का केंद्र (centre of attraction) हुआ करती थी और राजा अक्सर नाव में बैठकर इस महल की सैर किया करते थे। कैसे पहुंचे जलमहल (How to reach Jal mahal?) झील के बीचोंबीच बना ये जलमहल राजस्थान के जयपुर जिले के आमेर मार्ग पर स्थित है, दिल्ली से लगभग 260 किलो मीटर और अजमेर से 146 किलो मीटर की दूरी पर बना ये महल पर्यटकों के आकर्षण (jaipur tourist attraction) का विशेष केंद्र है। 3. मसला चौक जयपुर (Masala Chauk Jaipur) : जयपुर शहर सिर्फ अपने राजसी ठाठ-बाट (jaipur traditional culture) के लिए नहीं बल्कि खाने के लिए भी काफी मशहूर है। क्योंकि यहां के प्रसिद्ध व्यंजन(Famous Foods), तरह-तरह की स्टाइल और तरह-तरह की चीजों से बने हुए होते हैं। इस रॉयल सिटी के लोग खाने के बहुत ही शौकीन माने जाते हैं और यह शहर फूड लवर्स (Food Lovers) के लिए खास मायने रखता है। अगर बात खाने से संबंधित हो तो जयपुर की खूबसूरत जगहों में से एक जगह है मसाला चौक! जो कि खाने को लेकर अपनी वैरायटी के लिए और अपनी क्वालिटी के लिए बहुत ही नामी जगह है।किसी भी शहर में बहुत सारी पसंदीदा चीजों का एक साथ एक जगह पर मिलना बहुत ही मुश्किल हो जाता हैं। लेकिन जयपुर का मसाला चौक एक ऐसी जगह है जहां आपको सभी लोकप्रिय व्यंजन और स्ट्रीट फूड एक ही जगह पर आसानी से उपलब्ध हो जाएंगे। जयपुर के मसाला चौक की शुरुआत जयपुर के सभी प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड को सिर्फ एक जगह पर लाने के उद्देश्य से हुई। यह एक ओपन-एयर फूड कोर्ट (Open air food court) है जिसमें बैठने की अच्छी व्यवस्था है, जिसने इसे उन सभी लोगों के लिए एक टॉप हैंगआउट डेस्टिनेशन बना दिया है जो स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेना पसंद करते हैं। मसाला चौक तक कैसे पहुंचे? (How to reach masala chauk?) 4. जंतर मंतर (jantar mantar) : राजस्थान की राजधानी जयपुर में सवाई जय सिंह द्वारा बनवाया गया जंतर-मंतर यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage Site) सूची में शामिल है। यहाँ पर मौजूद उपकरण और यंत्र बेहद पुराने होने के बावजूद भी आधुनिकता (Modernity) का प्रमाण देते हैं। इन बेहद पुराने उपकरणों से समय को मापा जाता है। जंतर मंतर में स्थित यहाँ के उपकरण आपको एक पल के लिए बांध देने की क्षमता रखते हैं और जैसे ही आप इनकी बनावट देखोगे, इनकी खूबियां देखते ही रह जाओगे। यहाँ पर बहुत सारे उपकरण हैं जो आपको अलग-अलग ज्यामितीय आकारों (geometrical shapes) के दिखाई देंगे। यही वो उम्दा उपकरण हैं जो जयपुर के जंतर मंतर को दुनिया के बेहतरीन वेधशालाओं में से एक बनाते

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Jal Mahal Jaipur the Water Palace

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Jal Mahal – झील के बीचों-बीच बना अनोखे सौन्दर्य और अद्भुत स्थापत्यकला का बेजोड़ उदाहरण by Pardeep Kumar अपनी यात्रा के अगले पड़ाव पर हम आ पहुंचे हैं राजस्थान के एक ऐसे शहर जो प्रेम, शांति और कला की अपनी एक अलग ही कहानी बयां करता है। कुछ शहर खूबसूरत होते हैं और कुछ सुन्दर बनने की चेष्टा करते हैं। लेकिन राजस्थान का जयपुर शहर तो शायद सुंदरता के लिए बनाया गया है जिसका नाम जेहन में आते ही मन गुलाबी हो उठता है। चाहे दिन का समय हो या रात का, इस शहर की चमक और बनावट मन से उतरती ही नहीं। चारों और अरावली की पहाडयों से घिरा, चौड़ी और साफ़ सुथरी सड़कों और अपने चमकीले और सैकड़ों साल पुराने बाज़ारों के कारण यह शहर किसी भी पर्यटक के मन को खुश करने में पूरी तरह सक्षम है। हमनें  अपने जयपुर ट्रिप में न केवल यहाँ के ऐतिहासिक और भव्य किलों को एक्सप्लोर किया बल्कि यहाँ की जीवन शैली, कल्चर, वास्तुकला, बाजार और खानपान को भी समझने की कोशिश की। इसी कड़ी में आज के इस ब्लॉग में हम आपको बता रहे हैं जयपुर की एक बेहद खूबसूरत जगह जलमहल के बारे में। You can also watch Jal Mahal Vlog on our YouTube Channel Five Colors of Travel, Like Share & Subscribe कैसे पहुंचे जलमहल झील के बीचोंबीच बना ये जलमहल राजस्थान के जयपुर जिले के आमेर मार्ग पर स्थित है, दिल्ली से लगभग 260 किलो मीटर और अजमेर से 146 किलो मीटर की दूरी पर बना ये महल पर्यटकों के आकर्षण का विशेष केंद्र है। किस समय और किस मौसम में यहाँ आना बेस्ट रहता है वैसे तो यह महल 24 घंटे खुला रहता है पर यहां आने का सबसे उपयुक्त समय सुबह दस बजे से रात नौ बजे तक है इस समय अधिकतर लोग यहां पिकनिक करने, क्वालिटी टाइम स्पेंड करने और सुबह शाम यहां के लोकल लोग वॉक करने भी आते हैं। यहां आने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है । दरअसल इन दिनों सर्दियों की खिली-खिली धूप में जल महल का नजारा बहुत ही अद्भुत और खूबसूरत लगता है। जानिए जलमहल का इतिहास पिंक सिटी जयपुर की ‘मानसागर’ झील के बीचों बीच बना ‘जलमहल’ अनोखे सौन्दर्य और अद्भुत स्थापत्यकला का बेजोड़ उदाहरण है। इस महल का निर्माण आज से लगभग 300 साल पहले आमेर के महाराज सवाई मानसिंह ने सन् 1799 में करवाया था। आपको बता दें यह पाँच मंज़िला इमारत और इस झील की सुंदरता उस समय के राजाओं के आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी और राजा अक्सर नाव में बैठकर इस महल की सैर किया करते थे । जल महल की वास्तुकला जलमहल एक पाँच मंज़िला इमारत है जिसकी 4 मंज़िल पानी के भीतर बनी हैं और एक पानी के ऊपर नज़र आती है। उस समय के राजा इस महल का उपयोग अपने मनोरंजन के लिए करते थे. धीरे-धीरे यहां राजाओं की आवाजाही कम हो गयी जिसके कारण यह महल लगभग 200 सालों के लिए वीरान हो गया। उसके बाद साल 2000 में इसकी मरम्मत का काम दोबारा शुरू किया गया और इसे दोबारा सैलानियों के लिए खोला गया। बाहरी परिसर से देखने पर आपको यू लगेगा मानो कोई विशाल नाव झील में उतरी हो। जलमहल के किनारे लगने वाला शानदार बाजार सैर सपाटे और घूमने के साथ-साथ यह क्षेत्र अब  लोगों के लिए आय का साधन भी बन गया है. यहां पर आपको राजस्थानी मोजड़ी, राजस्थानी जूती, हैंड बैग, होम डेकोरेटिव आइटम्स, ज्वेलरी और एडिशनल क्लोथ्स, मैग्नेट और भी कई डेली यूज़ के सामान मिलते हैं, इसी के साथ आपको यहां खाने-पीने के बहुत सारे आइटम भी मिल जाएंगे. यहां पर स्पेशली आपको मैग्नेट के आइटम्स बेचते बहुत से पुराने परंपरागत लोग दिख जायेंगे। साथ ही आप यहां पर ऊंट और घोड़े की सवारी का आनंद भी उठा सकते हैं । पिकनिक, नेचर लवर्स और क्वॉलिटी टाइम बिताने के लिए यह जगह एक बेहतरीन प्लेस है। आप यहां आकर पक्षियों और मछलियों को दाना देते हुए पहाड़ों के बीच में बनी इस झील के बेहतरीन नजारो का आनंद ले सकते हैं। बहुत से कपल्स यहां पर आपको राजस्थानी पोशाक में फोटो शूट करते हुए भी नजर आएंगे। पिकनिक स्पॉट वैसे जल महल का निर्माण आवासीय तौर पर ना होकर एक पिकनिक स्पॉट के तौर पर किया गया था. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जल महल के अंदर कोई कमरा नहीं है। और न ही कभी इस महल में राजाओं ने कभी रात्रि विश्राम नहीं किया। एक चीज जो इस महल को बेहद खूबसूरत और थोड़ा हटकर बनाती है वो है इस महल के अंदर बने गलियारे और छत पर बनाया शानदार बगीचा। इसकी खूबसूरत बनावट के कारण ही किसी जमाने में इसे ‘रोमांटिक महल’ के नाम से भी जाना जाता था।  महल की खासियत की बात करें तो तपते रैगिस्तान के बीच बसे इस महल में गरमी नहीं लगती, क्‍योंकि इसके कई तल पानी के अंदर बनाए गए हैं। आप आसानी से इस महल से पहाड़ और झील का ख़ूबसूरत नज़ारा भी देख सकते हैं। चांदनी रात में झील के पानी में इस महल का नजारा बेहद आकर्षक लगता है। पक्षी विहार जलमहल अब पक्षी विहार के रूप में भी विकसित हो रहा है। बताते हैं जल महल की  नर्सरी में तकरीबन एक लाख से ज्‍यादा पेड़ लगे हुए हैं। दिन रात बहुत से माली पेड़-पौधों की देखभाल में लगे रहते हैं। यह नर्सरी राजस्थान की सबसे उंचे पेड़ों वाली नर्सरी भी मानी  जाती  है। रात के समय में ये महल न केवल अद्भुत रूप ले लेता है बल्कि रंग बिरंगी लाइटों से जगमग होकर हर किसी को अपनी खूसूरती का कायल भी बना लेता है। अगर आपकी जरा भी दिलचस्पी फोटोग्राफी में है तो जल महल आपके लिए एक बेहद सुन्दर और लाज़वाब जगह है। इस महल के आसपास के नज़ारे इतने आकर्षक हैं कि यह सिर्फ फोटो खींचने के लिए ही नहीं बल्कि आपको अपने फोटो खिंचवाने पर भी मजबूर कर देंगे। some glimpse of Jal Mahal……..